PDA

View Full Version : तुम्हारी अंजुमन से उठ के दीवाने कहाँ जाते



anita
11-04-2017, 08:53 PM
तुम्हारी अंजुमन से उठ के दीवाने कहाँ जाते
जो वाबस्ता हुए तुमसे वो अफ़साने कहाँ जाते

निकल कर दैर-ओ-क़ाबा से अगर मिलता न मैख़ाना
तो ठुकराए हुए इन्साँ ख़ुदा जाने कहाँ जाते

तुम्हारी बेरुख़ी ने लाज रख ली बादाख़ाने[१] की
तुम आँखों से पिला देते तो पैमाने कहाँ जाते

चलो अच्छा हुआ काम आ गयी दीवानगी अपनी
वगरना हम ज़माने को ये समझाने कहाँ जाते

‘क़तील’ अपना मुक़द्दर ग़म से बेग़ाना[२] अगर होता
तो फिर अपने-पराए हमसे पहचाने कहाँ जाते

anita
11-04-2017, 08:56 PM
१.शराबख़ाने
२.अपिरिचित अथवा रहित