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Poll: क्या संस्कृत भाषा का भी हिंदी की तरह प्रचार प्रसार करना चाहिए ...?

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Results 71 to 80 of 80

Thread: संस्कृत जाने - भारतीय विज्ञान को जाने

  1. #71
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    Re: संस्कृत भाषा - एक बुझता दिया !

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    (2) एक ही अक्षरों का अद्भूत अर्थ विस्तार।
    माघ कवि ने शिशुपालवधम् महाकाव्य में केवल "भ" और "म " दो ही अक्षरों से एक श्लोक बनाया है।
    भूरिभिर्भारिभिर् ीभीराभूभारैरभिरे िरे।
    भेरीरेभिभिरभ्राभ रूभीरूभिरिभैरिभा: ।।
    अर्थात्- धरा को भी वजन लगे ऐसा वजनदार, वाद्य यंत्र जैसा अवाज निकाल ने वाले और मेघ जैसा काला निडर हाथी ने अपने दुश्मन हाथी पर हमला किया। "
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  2. #72
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    Re: संस्कृत भाषा - एक बुझता दिया !

    किरातार्जुनीयम् काव्य संग्रह में केवल " न " व्यंजन से अद्भूत श्लोक बनाया है और गजब का कौशल्य का प्रयोग करके भारवि नामक महाकवि ने थोडे में बहुत कहा है:-
    न नोननुन्नो नुन्नोनो नाना नाना नना ननु।
    नुन्नोSनुन्नो ननुन्नेनो नानेना नन्नुनन्नुनुत्।।
    अर्थात् :- जो मनुष्य युद्ध में अपने से दुर्बल मनुष्य के हाथों घायल हुआ है वह सच्चा मनुष्य नहीं है। ऐसे ही अपने से दुर्बल को घायल करता है वो भी मनुष्य नहीं है। घायल मनुष्य का स्वामी यदि घायल न हुआ हो तो ऐसे मनुष्य को घायल नहीं कहते और घायल मनुष्य को घायल करें वो भी मनुष्य नहीं है।।
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  3. #73
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    Re: संस्कृत भाषा - एक बुझता दिया !

    संस्कृत की विशेषता।।
    (3) गुजराती में एक वाक्य के " लीमडी गामे गाडी मली " जो दोनों तरफ से एकसमान है।। ऐसे वाक्यों को अंग्रेजी में PALINDROME कहते हैं। संस्कृत में है ऐसे PALINDROME और कहीं नहीं है। शायद दशलक्ष शब्दों वाली अंग्रेजी का तो इस बाबत ने क्लास नहीं है।
    Was it a car or cat I saw?
    Race fast, safe car
    Ma is a madam, as I am.
    Never odd or even.
    ऐसे दृष्टांत अंग्रेजी में बहुत ही कम है इतना ही नहीं जो है वह निरर्थक है, कृत्रिम है। मानो प्रयास करके बलात् बनाया ना गया हो!! जैसे Was it car or cat I saw ( मैने कार को देखी या बिल्ली को देखी) इस वाक्य में बिल्ली और कार में कोई संबंध ही नहीं है। दुसरा
    Race fast, safe car में भी अर्थ है ही नहीं।
    अभिव्यक्ति के बाबत में अद्वितीय संस्कृत में ऐसी मर्यादा नहीं है। दक्षिण से पढो या उत्तर से संस्कृत श्लोक अर्थ पुर्ण होता है। जैसे कि
    वारणगगभीरा सा साराभीगगणारवा।
    कारितारिवधा सेना नासेधावरितारिका।
    अर्थात् :- यह सेना की जिनके पास पर्वत समान हाथी है उनका सामना करना इतना आसान नहीं है। सेना बहुत बड़ी है और घबराए हुए लोग चिल्ला रहे हैं।
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  4. #74
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    Re: संस्कृत भाषा - एक बुझता दिया !

    और भी
    निशितासिरतोSभीको न्येजतेSमरणा रूचा।
    चारूणा रमते जन्ये को भीतो रसिताशिनी।।
    अर्थात् :- है अमर अविनाशिओं। हकीकत में तीक्ष्ण तलवारो को प्रिय और निर्भय योद्धा सुंदर रथों का और नरभक्षी राक्षसों के इस संग्राम में डरे हुए मनुष्य की जैसे कदापि कांपता नहीं।
    यह श्लोकों संस्कृत के अद्भुत सर्जन है। सूर्यकवि नामक महाविद्वानने 16 वी शताब्दी में रामकृष्णकाव्यम् ऐसा काव्यग्रंथ लिखा है। जो श्रीराम और श्रीकृष्ण की वंदना से प्रारंभ होता है।
    तं भूसुतामुक्तिमुदा हासं
    वन्दे यतो भव्यभवं दयाश्री:।
    श्रीयादवं भव्यभतोयदेवं संहारदारदामुक्ति ुतासुभूतम्।।
    इस श्लोक का द्वितीय पद जो प्रथम पद का उलटा है जो पढने से भगवान श्रीकृष्ण के गुणगान वर्णित हुए हैं। आरंभ से अंत तक और अंत से आरंभ तक पुरा श्लोक पलटता है, परन्तु अक्षरों का क्रम नहीं पलटता। मानो या ना मानो, परन्तु सूर्यकवि ने " रामकृष्णकाव्यम् " नामक सम्पूर्ण ग्रंथ ऐसे श्लोक बनाकर ही लिखा है।
    कौन सी दुसरी भाषा है जिनमें ऐसा सौंदर्य हो?
    क्रमशः --
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  5. #75
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    Re: संस्कृत जाने - भारतीय विज्ञान को जाने

    जाने हमारी संस्कृत भाषा की तागत और विदेशीयो की रूची और यदि आपको भी गर्व महसुस हो तो कृपया शेयर जरूर करे।
    भारत में विवादित भाषा संस्कृत’ पर शोध के लिए जर्मन नागरिक को मिला पद्मश्री पुरस्कार
    । संस्कृत भारत की वैदकि भाषा है। इस भाषा को वर्तमान विश्व का सबसे अत्याधुनिक अंतरिक्ष शोध संस्था नासा ने भी माना है यह दैवीय भाषा है, यह खगौलीय भाषा है। हालांकि भारत जहाँ की यह मूल भाषा है। यहाँ की स्कूलों में पढ़ाने पर विवाद हो जाता है और संस्कृत की जगह जर्मन भाषा पढ़ाई जा रही है। लेकिन जर्मनी में संस्कृत पर शोध हो रहे हैं। वहां के विश्वविद्यालयों में संस्कृत भी पढ़ाई जा रही है। इतना ही नहीं, जर्मनी की शोधकर्ता डॉ. एनेटी सच्मीडेसेन को संस्कृत में शोध के लिए भारत के नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।फिर भी भारत के लोग अँग्रेजी भाषा और अन्य भाषा की ओर रुख़ कर रहे है, जोकि हर दृष्टि से हानिकारक है। जाहिर है डॉ. एनेटी अपने शोध के लिए इन दिनों भारत में रहती हैं। उनके पति कोलकाता में जर्मन वाणिज्य दूतावास के काउंसल जनरल हैं। उन्होंने कहा कि वह इस पुरस्कार से खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही हैं। संस्कृत आधारित अध्ययन को भारत के भीतर और बाहर प्रोत्साहित किए जाने की जरूरत है। वहीं, भारत में जर्मनी के राजदूत मिसाइल स्टेनर ने कहा कि डॉ. एनेटी को पद्मश्री सम्मान से दोनों देशों के बीच प्राचीन एवं आधुनिक भाषाओं के विकास में नए आयाम खुलेंगे।
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  6. #76
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    Re: संस्कृत भाषा - एक बुझता दिया !

    गौरतलब है कि देश के केंद्रीय विद्यालयों में पहले संस्कृत की जगह जर्मन भाषा पढ़ाना शुरू किया गया था। मगर, जब इसे हटाया गया तो जर्मनी की तरफ से इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई। जबकि, जर्मनी में संस्कृत पर लंबे समय से शोध हो रहे हैं। संस्कृत को विज्ञान की भाषा माना गया है। संस्कृत के ग्रंथों में प्राचीन वैज्ञानिक पद्धति का ज्ञान समाहित है।
    दुर्भाग्य से भारत में उस पर अपेक्षित शोध नहीं हुआ है, लेकिन जर्मनी उस पर न सिर्फ शोध कर रहा है, बल्कि विज्ञान के क्षेत्र में उससे लाभान्वित भी हुआ है। हाल में मुंबई साइंस कांग्रेस के दौरान भी यह मुद्दा उठा था। वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर व वरिष्ठ विज्ञानी विजय भाटकर ने तब माना था कि जर्मनी ने संस्कृत के ज्ञान से वैज्ञानिक तरक्की हासिल की है।
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  7. #77
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    Re: संस्कृत भाषा - एक बुझता दिया !

    डॉ. एनेटी ने बर्लिन विश्वविद्यालय से प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृत और विचारधारा में डिग्री ली है। इसके बाद उन्होंने हुमबोल्डट यूनिवर्सिटी से उत्तरी भारत में पांचवीं से नौवीं शताब्दी के बीच बने बौद्ध केंद्रों व उसके लिए गांवों, भूमि एवं धन दान दिए जाने के विषय पर पीएचडी की। बाद में उन्हें इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ संस्कृत स्टडीज का फेलो भी नियुक्त किया गया। वह लगातार संस्कृत पर शोध कर रही हैं। 1992 से उनका भारत-आना जाना।
    वंदे मातरम वंदेसंस्कृतम।
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  8. #78
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    वंदे मातरम वंदेसंस्कृतम
    अपने लिए जिए तो क्या जिए जिए तो जिए किसी के लिए ...

  9. #79
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    आदरणीय मानव जी ,
    सादर सप्रेम हरी स्मरण |
    आपके इस अति उत्तम सूत्र को पढकर मन आनंदित हो गया |देवभाषा संस्कृत के बारे में दी गयी आपकी सभी जानकारियां सर्वोत्तम होने के साथ ही साथ मेरे लिए मनभावन है |आपके श्री चरणों में एक निवेदन यह था की कृपया इस शानदार एवं सर्वोत्तम सूत्र पर शिक्षणातमक रूप से आप जो भी प्रस्तुत कर रहे है वह मेरे लिए अनमोल है बन्धु |आप के लेख को पढ़ कर देवभाषा को सीखने की ललक जग गयी है आदरणीय मानव जी | अतएव निरंतरता बनाये रखने की श्री चरणों में प्रार्थना करता हूँ | आशा है की अवश्य ही स्वीकार होगी |

  10. #80
    नवागत
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    b.sc के बाद बी.एड अंतिम वर्ष में हूँ इसके बाद संस्कृत पढ़ने का मानस बनाया ही था कि मानव जी आपका यह लेख पढ़ा और मेने दृढ निश्चय कर लिया है कि अब संस्कृत ही पढ़ना है।

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