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Thread: *** मिस्ट्री थ्रिलर नावेल : नकाब **

  1. #101
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    Re: *** मिस्ट्री थ्रिलर नावेल : नकाब **

    दोस्त कहानी को गति प्रदान कर, हम सब इंतज़ार कर रहे है.
    • Note: All the postings of mine in this whole forum is not my own collection. All are downloaded from internet posted by some one else. I am just saving some time of our forum users to avoid searching everywhere. Am not violating any copy rights law or not any illegal action am not supposed to do.

  2. #102
    वरिष्ठ सदस्य
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    Re: *** मिस्ट्री थ्रिलर नावेल : नकाब **

    " क्यों उस लड़की ने ऐसा कपट किया ? मेरा कहना मान कर यहाँ नहीं आना चाहती थी तो बोल देती ऐसा ! मेरा उस पर कोई ज़ोर तो था नहीं , मेरी बात मानने के लिए मैं उसे मजबूर तो कर नहीं सकता था |"
    " मोतियांवाल्यो , मैंने मुहावरे के तौर पर कहा था कि बीच में डाकू पड़ गए , कहीं सच में तो अपहरण नहीं हो गया उसका ?"

    ***** आगे की कहानी पोस्ट करे दोस्त..... हम सभी इंतज़ार कर रहे है.
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  3. #103
    कांस्य सदस्य Sajid_Gunahgaar-'s Avatar
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    Re: *** मिस्ट्री थ्रिलर नावेल : नकाब **

    आगे की कहानी पोस्ट करे दोस्त

  4. #104
    सदस्य joker007's Avatar
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    Re: *** मिस्ट्री थ्रिलर नावेल : नकाब **

    " कौन करेगा ?"
    " तू बता |"
    " मुझे ऐसा कोई शख्स नहीं सूझता |"
    " सुट्टा लगा , उससे दिमाग की मोम पिघलेगी , फिर कुछ सूझेगा |"
    दोनों ने अपने अपने ब्रांड के सिगरेट सुलगाये |
    " मुझे तो " - सिगरेट का लम्बा कश खींचता सुनील संजीदगी से बोला - " उसकी कागज़ी नकाब वाली कहानी भी गड़बड़ लगती है |"
    " कैसे ?"
    " अगर जवाहर सक्सेना का क़त्ल हुआ है तो कैसे कातिल ऐसी नकाब पहने उसके सर पर पहुँच सकता था ? वो भी हाथ में तह किया हुआ कम्बल ले के और कम्बल के नीचे गन वाला हाथ छुपा के ? ये कैसे मुमकिन है की भरपूर शक उपजाने वाली कागज़ी नकाब पहने कोई सक्सेना के सर पर पहुंचा , उसने तह किया हुआ कम्बल उसकी कनपटी से लगाया , कम्बल पर गन की नाल टिका कर गोली चलाई और सक्सेना उस दौरान बिना हाथ पाँव हिलाए , बिना अपने बचाव की कोई कोशिश किए खामोश बैठा रहा जबकि वो हथियारबंद भी था |"
    " क्या था ?"
    " हथियारबंद था | शोल्डर होलस्टर में गन रखता था |"
    " तौबा ! चाहता तो कातिल का क़त्ल कर देता |"
    " बिलकुल |"
    " एक नहीं , दो नहीं , तीन गन्स की हाजिरी है एक मर्डर में !"
    " हाँ |"
    " असल में क़त्ल किस्से हुआ होगा ?"
    " मुझे तो उसी गन से हुआ जान पड़ता है जो मैंने निखिल की जेब से निकली थी , जिसे बाद में उसकी माँ ने लाश के पास प्लांट कर दिया था |"
    " कम्बल के नीचे वाली गन की तरह उसे शोल्डर होलस्टर वाली गन की भी खबर नहीं थी ?"
    " ऐसा ही जान पड़ता है | बहरहाल बात ये हो रही थी कि सक्सेना अपने क़त्ल के वक़्त बिना हाथ पाँव हिलाए , बिना अपने बचाव की कोई कोशिश किये खामोश क्यों बैठा रहा ?"
    " कातिल दबे पांव पहुंचा होगा ! यूँ दबे पांव सक्सेना के सर पर आन खड़ा हुआ होगा कि सक्सेना को उसकी खबर ही नहीं लगी होगी !"
    " वो ऑफिस यूँ बना हुआ है कि अव्वल तो ऐसा मुमकिन ही नहीं है , फिर लाश की पोजीशन बताती है कि गोली चलते वक़्त कातिल और मकतूल एक दूसरे के आमने सामने थे | आमने सामने होकर कोई दबे पांव सर पर कैसे पहुँच सकता है ! पहुँच सकता है तो फिर नकाब की क्या ज़रूरत थी ! वहां और भी लग मौजूद हो सकते थे , कैसे कोई बाहरी आदमी ये अपेक्षा कर सकता था कि वो नकाब पहन कर गन वाले हाथ को कम्बल के नीचे छुपाकर वहां पहुँचता तो किसी को उस पर कोई शक न होता !"
    " और लोग कौन हो सकते थे ?"
    " बीवी मैथिली हो सकती थी , सौतेला बेटा निखिल हो सकता था , वो मोती हाउसकीपर हो सकती थी , वो लड़की प्राची हो सकती थी | घर में ऑफिस हो तो ऑफिस में घर वालों की आवाजाही का क्या पता लगता है |"
    " इस पर एक बात मेरे को भी सूझी है , प्यारयो |"
    " क्या ?"
    " कोई बाहरी आदमी हाथ में तह किया कम्बल थामे ऑफिस में आए तो ये अजीब और शक पैदा करने वाली बात लग सकती है लेकिन घर के आदमी के साथ तो ऐसा नहीं हो सकता न ! कोई नौकर या कोई घर का आदमी कम्बल लिए विचरता वहां पहुँच जाए तो क्या अजीब बात है ! मसलन , कम्बल की कहीं और ज़रूरत हो लेकिन कम्बल ले जाते शख्स को जवाहर सक्सेना से कुछ पूछना याद आ गया हो और वो कम्बल संभाले संभाले ही उसके पास पहुँच गया हो तो सक्सेना को क्या शक होगा उस पर ?"
    " कोई शक नहीं होगा , क्योंकि सक्सेना उनकी सूरतों से वाकिफ होगा और उनकी कहीं भी कैसी भी आवाजाही स्वाभाविक बात होगी | लेकिन यूँ जब कोई अनजानी सूरत उसे दिखाई देती तो वो तब तो रियेक्ट करता !"
    " तू मेरी बात नहीं समझ रहा माँ सदके | मैं किसी घर वाले के ही कातिल होने की सम्भावना की तरफ इशारा कर रहा हूँ |"
    " फिर नकाब किसलिए ? मुर्दा कैसे किसी को बताने जाएगा उसे किसने शूट किया था ?"
    " ये बात तो है |"
    " नकाब ऑफिस स्टेशनरी के तौर पर इस्तेमाल होने वाले लिफाफे की क्यों बनाई गई ?"
    " ये जवाब तो आसान है | क्योंकि वो ऑफिस था , वहां वो लिफाफा उपलब्ध था |"
    " उपलब्ध था |"
    " वही | उपलब्ध था |"
    " कातिल ने वहीँ कहीं से लिफाफा उठाया , उसे आँखों की जगह से काटा और नकाब बना ली ?"
    " आहो !"
    " क़त्ल से पहले या बाद में ?"
    " पहले तो नहीं , मालको | अगर उसने अपने लिए नकाब की ज़रूरत महसूस की होती तो घर से मुनासिब नकाब ले के आया होता , या सूरत छुपाने का कोई और प्रबंध करके आया होता |"
    " यानी कि बाद में ?"
    " हाँ | उसे क़त्ल के बाद निकासी के वक़्त ये अंदेशा हुआ होगा कि कोई उसकी सूरत देख सकता था इसलिए उसने आननफानन वो नकाब बना ली |"
    " ठीक | लेकिन कम्बल साथ ले के आना क़त्ल के पूर्वनियोजित होने की तरफ इशारा है |"
    " हाँ |"
    " मुझे तुम्हारी बात से इत्तेफाक है | सूरतअवहाल ये है कि उस लड़की प्राची ने किसी आदमी को सक्सेना के ऑफिस में उसके सामने यूँ बैठे देखा था कि उस आदमी की पीठ प्राची की तरफ थी | सक्सेना ने प्राची को इंतज़ार करने को बोला था | प्राची बाहर बैठी इंतज़ार कर रही थी | आगंतुक को , जो सक्सेना के साथ मौजूद था , इस बात की खबर थी |"
    " भई , इसीलिए तो उसने तुरत फुरत नकाब तैयार की ताकि उसके वहां से कूच करते वक़्त प्राची उसकी सूरत न देख ले |"
    " ठीक | लेकिन बेहतर ये न होता कि उस सूरत में वो सामने से , जहाँ से कि उसे सक्सेना के निजी ऑफिस को लांघना पड़ता , रुखसत ही न होता , पिछवाड़े के रस्ते वहां से कूच करता ! वो ऐसा करता , तुम्हारी जुबान में , तुरत फुरत नकाब की उसको ज़रूरत ही न होती | और लाख रुपये का सवाल ये है कि जब उसने लिफाफा काट के वो इमरजेंसी नकाब तैयार की तो एक आँख का छेद इतना बड़ा क्यों काटा कि आँख के साथ साथ उसके गाल का एक हिस्सा भी छेद में से दिखाई देता ? उस हिस्से पर इश्तेहार की तरह मौजूद मटर के दाने के आकार का काला मस्सा भी दिखाई देता ?"
    " छेद इत्तेफाकन बड़ा कट गया होगा |"
    " तो दूसरा लिफाफा उठा कर नया , दुरुस्त छेद बना लेता | उसी लिफाफे को सर पर यूँ एडजस्ट कर लेता कि बड़े छेद में से आँख का नीचे का हिस्सा दिखाई देने की जगह ऊपर का हिस्सा दिखाई देता !"
    " वाकई लक्ख दमडे की बात है , मालको |"
    " वो मस्सा साइज़ में गैरमामूली था | इतना बड़ा मस्सा अमूमन किसी की सूरत पर नहीं होता | अपने गैरमामूली साइज़ की वजह से ही वो उसके मालिक की खास शिनाख्त था , ऐसी जैसे कि चेहरे पर आईडेन्टीटी कार्ड चस्पा हो | कातिल की अपनी ऐसी श्योरशॉट शिनाख्त छुपाने की हरचंद कोशिश होती या उसकी नुमाइश कर के अपनी हालत आ बैल मुझे मार जैसी करने की होती ?"
    " छुपाने की |"
    " एग्ज़ेक्टली ! लेकिन उसने तो नुमाइश की !"
    " क्यों की ?"
    " क्या पता क्यों की !"
    " हद है तेरे वाली भी | खुद ही सस्पेंस खड़ा करता है , खुद ही उसकी टांग तोड़ देता है | मैं समझा तुझे मालूम होगा |"
    " आया नहीं तुम्हारा जवान अभी तक !"
    " आ जाएगा | फासले से आना है उसने | जब उसने बोला है कि आ रहा हूँ तो झूठ तो नहीं बोलेगा !"
    " मुझे नींद आ रही है |"
    " मेरे पास आईज वाइड ओपन करने का इन्तेजाम है पर तू करने तो देता नहीं !"
    " रमाकांत , तुमने मुझे इस जंजाल में फंसाया है जिसमे सुबह से मेरी कुत्ता घसीटी हो रही है , इस लिहाज़ से तुम्हारा फ़र्ज़ नहीं बनता है कि तुम कुछ करो ?"
    " क्या करूँ ? कर तो रहा था | बैठा तो था उस लड़की के इंतज़ार में जो आई नहीं | तू न आता तो अभी तक इंतज़ार ही कर रहा होता |"
    " और कुछ करो | इससे ज्यादा दमदार कुछ करके दिखाओ |"
    " क्या ?"
    " सक्सेना हाउसहोल्ड के हर बाशिंदे की , बमय मकतूल सक्सेना , पड़ताल करवाओ |"
    " चंगा |"
    " वहां विक्रम चटवाल करके एक आदमी है जो कि मकतूल का ड्राईवर और जनरल हैंडीमैन बताया जाता है और जो मेरे साथ मवालियों की तरह पेश आया था |"
    " ओदी माँ दी ! ओदी भेन दी !"
    " तुम बात तो सुनो |"
    " और क्या कर रहा हूँ !"
    " गालियाँ बक रहे हो |"
    " इमोशनल हो गया था | इमोट कर रहा था |"
    " क्या कहने !"
    " तू सुना अपनी बात |"
    " चाल ढाल , डील डौल से वो शख्स फौजी जान पड़ता था | फौजी नहीं तो पुलिसिया जान पड़ता था | जब उसकी पड़ताल की बाबत बोलो तो ये सम्भावना भी ज़ाहिर करना कि वो कोई रिटायर्ड फौजी या एक्स पुलिसिया हो सकता है , पड़ताल में सहूलियत होगी |"
    " ठीक है |"
    " और अपने यार की भी पड़ताल करवाओ |"
    " उसकी भी !"
    " हाँ | वैसे तो यहाँ आकर अपनी जुबान भी वो काफी कुछ उच्रेगा फिर भी उसकी पड़ताल करवाओ , खासतौर से ये पता लगवाओ कि क़त्ल के वक़्त के आसपास , यानि कि आधी रात के आसपास वो कहाँ था |"
    " ठीक है | वैसे काकाबल्ली , किसी आलम फाजिल बेवड़े ने कहा है .... "
    " ये तो मालूम नहीं होगा कि मरने से पहले कहा या मरने के बाद कहा !"
    रमाकांत धूर्त भाव से हंसा |
    " .... कहा है कि " - फिर बोला - " किसी आदमी को ठीक से जानना हो तो मालूम करो वो कौन सी व्हिस्की पीता है | सहगल के साथ प्रॉब्लम ये है कि भूतनीदा व्हिस्की पीता ही नहीं |"
    " पीता होता तो ?"
    " तो कुछ मालूम करने की ज़रूरत ही न पड़ती | तो सब कुछ तेरे वड्डे भापा जी को पहले ही मालूम होता | तो ...."
    तभी क्लब के एक गार्ड ने संजीव सहगल को वहां पहुँचाया |
    " रिकॉर्ड टाइम में पहुंचा हूँ |" - वो हांफते हुए बोला - " बस यूँ समझो कि ...."
    वो ठिठक गया |


  5. #105
    वरिष्ठ सदस्य
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    Re: *** मिस्ट्री थ्रिलर नावेल : नकाब **

    जोकर्जी बहुत बढ़िया और सुन्दर चल रही है नकाब की कहानी...आगे भी पोस्ट करे.....++++++++ रेपो स्वकार करे.
    • Note: All the postings of mine in this whole forum is not my own collection. All are downloaded from internet posted by some one else. I am just saving some time of our forum users to avoid searching everywhere. Am not violating any copy rights law or not any illegal action am not supposed to do.

  6. #106
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    कृपया इस उपन्यास को समाप्त करें। यह अभी तक पूरा नहीं हुआ है। धन्यवाद

    "हर छोटी से छोटी चीज प्रकृति में मायने रखती है"



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