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Thread: बुरा ना मानो...... मजे लो :))

  1. #61
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    Re: बुरा ना मानो...... मजे लो :))

    हार्दिक आभार मित्र।
    Quote Originally Posted by gill1313 View Post
    वाह मित्र छा गये आप तो बहुत बढ़िया है मित्र

  2. #62
    कांस्य सदस्य gill1313's Avatar
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    Re: बुरा ना मानो...... मजे लो :))

    ​ कोई पत्थर से न मारे मेरे दीवाने को .............:pointlol:
    वो कह गये कभी न आएंगे ,
    रात सपनो में आये थे ,झूठे कहीं के ......?

  3. #63
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    Re: बुरा ना मानो...... मजे लो :))

    बहुत दिन से यह गाना याद आ रहा है। इसे किसी फ़िलिम में माननीया लैला जी ने गाया है। गाते हुये अनुरोध किया है- कोई पत्थर से न मारे मेरे दीवाने को। वैसे तो अगर आप पांचवीं पास हैं तो आपको पता होगा फ़िर भी बताते चले कि लैला-मजनू प्रेम के ब्रांड अम्बेसडर थे । जिस जमाने में के ये लोग थे उस जमाने में महिलाओं की स्थिति पुरुषों से निश्चित बेहतर रही होगी क्योंकि लैला का नाम मजनू के पहले आया है। शीरी-फ़रहाद तक यह सिलसिला चला। इसके बाद धर्मेन्दर-हेमामालिनी, सलमान-कैटरीना तक आते-आते मामला उलट गया। प्रेमियों का नाम पहले आने लगा और प्रेमिकायें पीछे से सीन संचालन करने लगीं।
    वो कह गये कभी न आएंगे ,
    रात सपनो में आये थे ,झूठे कहीं के ......?

  4. #64
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    Re: बुरा ना मानो...... मजे लो :))

    लैलाजी मजनू से ’लव’ करती होंगी तो बदले में मजनू को भी करना पड़ता होगा। इससे यह साबित होता है कि उस जमाने में भी लोग बदले की भावना से व्यवहार करने की आदत होती थी। तो जो लोग कहते हैं- हे प्रभो, जमाना बड़ा खराब हो गया है तो उनको समझना चाहिये कि जमाना आज से नहीं लैला-मजनू युग से खराब चल रहा है। लोग तब भी बदले की भावना से प्रेम करते थे अब भी वही आदत बरकरार है। मतलब आदमी में मौलिक सुधार कुछ नहीं हुआ।


    ऐसा लगता है कि उस जमाने में भी पंचायतें प्रेम-श्रेम के खिलाफ़ होती होंगी। जहां किसी को जोड़े को प्रेम करते पकड़ लिया, निपटा दिया। इस केस में भी लगता है कि लैला-मजनू प्रेमालाप करते पकड़े गये होगे और लोगों ने उस समय की सामाजिक परंपरा के अनुसार उनको मारने का निश्चय किया होगा। लैला शायद पावरफ़ुल रही होगी या फ़िर सोचा होगा कि मजनू को निपटा लें पहले इसके बाद लैला को देखें। या फ़िर यह कि जितनी देर मजनू को निपटाने में लगेगी उत्ती देर लैला को देख ही लें। निपटना तो इसको भी है!


    पत्थर से मारने की बात से ऐसा आभास होता है कि उस समय लोगों के पास समय इफ़रात में रहता होगा। वे लैला-मजनू को मारना चाहते होंगे लेकिन हड़बड़ी में नहीं। आजकल की पंचायतों की तरह नहीं कि इधर जोड़े को पकड़ा उधर लटका दिया या सुलगा दिया। चट पकड़ाया, पट निपटाया! ऐसा शायद इसलिये भी होता होगा क्योंकि उस समय इक्के-दुक्के प्रेम के हादसे होते होंगे। इसलिये आराम-आराम से मारने का इन्तजाम करते होगे। आजकल की तरह इफ़रात में अगर लोग प्रेम करते होते उस समय तो निश्चित तौर मजनू को किंचित और आधुनिक विधि से मारने का प्रमाण मिलता।
    वो कह गये कभी न आएंगे ,
    रात सपनो में आये थे ,झूठे कहीं के ......?

  5. #65
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    Re: बुरा ना मानो...... मजे लो :))

    जब लोग पत्थरियाते हुये मजनू का काया-कल्प कर रहे होंगे, उसकी आत्मा का गठबंधन परमात्मा से कराने में जुटे होंगे तब ही लैला के मुंह से बोल फ़ूटे होंगे -कोई पत्थर से न मारे मेरे दीवाने को।
    लोग कहते हैं कि लैला ने यह फ़रियाद बाकायदा गाकर की। आइये विचार करते हैं कि लैला ने ऐसा क्यों कहा और गाकर ही क्यों कहा!
    वो कह गये कभी न आएंगे ,
    रात सपनो में आये थे ,झूठे कहीं के ......?

  6. #66
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    Re: बुरा ना मानो...... मजे लो :))

    बहुत बढ़िया गिल साहेब , आपने अत्यंत सुन्द्सर व्याख्या और पोस्ट मार्टम किया है लैला मजनू का
    सभी मित्रों को नए साल की मंगलमय शुभकामनायें

  7. #67
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    Re: बुरा ना मानो...... मजे लो :))

    (1) असल में जब लैला ने देखा कि लोग मजनू को पत्थर से मार रहे हैं तो उसको लगा कि जैसे ही मजनू निपट गया इसके बाद उसका नम्बर आयेगा। इसलिये वे अपने आशिक को पत्थर से मारने का विरोध कर रही थीं। उन्होंने शिवखेड़ा की किताब पढ़ रखी होगी कि अगर आपका प्रेमी पिट रहा है और आप चुप हैं तो समझ लीजिये अगला नम्बर आपका है। इसलिये देखा जाये तो लैलाजी मजनू को बचाने के लिये नहीं अपने को बचाने के लिये प्रयास कर रहीं थीं।

    (२) लोग शायद यह भी सोचते हों कि एक तरफ़ मजनू पिट रहा था दूसरी तरफ़ लैला को गाना सूझ रहा था। उसे डरकर चिल्लाते हुये -बचाओ, बचाओ! कोई मेरे आशिक को बचाओ!! टाइप गुहार लगानी चाहिये! इसके पीछे कारण की खोज करने पर पता चला कि प्रेम करते हुये पकड़े जाने के बाद लैला डर सी गयी। और जब कोई डर जाता है तो गाना अपने आप फ़ूट पड़ता है। डर लगे तो गाना गा कहावत से भी इसकी पुष्टि होती है। आजकल भी इस बात के अनेको प्रमाण मिलते हैं। बड़े-बड़े कवि भी डरकर गाने लगते हैं। कोई कवि मंच पर खड़ा होता है और सामने श्रोताओं का हुजूम देखता है तो डर जाता है कि ये सब मिलकर हमें हूटेंगे/पीटेगे। आसन्न हूटिंग/पिटाई के डर से कवि गाने लगता है। ज्यादा डरता है तो रोने लगता है। ये जो लोग कहते हैं न कि गीत सुनकर आंसू आ गये। वह दरासल गीत के कारण नहीं डर के कारण होता है। बड़े-बड़े कवियों की देखा-देखी छुटभैये कवि भी गाने लगते हैं। कविगण जब जरा सी हूटिंग के डर से गीत गाने लगते हों तो उस जमाने में लैला का डर के मारे गाना गाने लगना सहज बात है।
    Last edited by gill1313; 07-03-2013 at 08:01 PM.
    वो कह गये कभी न आएंगे ,
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  8. #68
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    Re: बुरा ना मानो...... मजे लो :))

    Quote Originally Posted by AVF000 View Post
    एक अमेरिकन बोला भाई साहब बताइये अगर आपका भारत महान है तो सँसार के इतने आविष्कारों में आपके देश का क्या योगदान है ??

    हिन्दुस्तानी - अरे अमरीकन सुन !!

    १. संसार की पहली फायर प्रूफ लेडी भारत में हुई !! नाम था "होलिका" आगमें जलती नही थी !! इसीलिए उस वक्त फायर ब्रिगेड चलती नही थी!!

    २. संसार की पहली वाटर प्रूफ बिल्डिँग भारत में हुई !! नाम था भगवान विष्णु का"शेषनाग" !! काम तो ऐसे जैसे "विशेषनाग" !!

    ३. दुनिया के पहले पत्रकार भारत में हुए!! "नारद जी" जो किसी राजव्यवस्था से नहीं डरते थे !! तीनों लोक की सनसनी खेज रिपोर्टिँग करते थे !!


    ४. दुनिया के पहले कॉँमेन्टेटर "संजय" हुये, जिन्होंने नया इतिहास बनाया!! महाभारत के युद्ध का आँखो देखा हाल अँधे "ध्रतराष्ट" को उन्ही ने सुनाया !!

    ५. दादागिरी करना भी दुनिया हमने सिखाया क्योंकि वर्षो पहले हमारे "शनिदेव" ने ऐसा आतँक मचाया कि "हफ्ता" वसूली का रिवाज उन्ही के शिष्यो ने चलाया !! आज भी उनके शिष्य हर शनिवार को आते है ! उनका फोटो दिखाकर हफ्ता ले जाते है !!

    अमेरिकन बोला दोस्त फालतू की बातें मत बनाओ ! कोई ढ़ंग का आविष्कार हो तो बताओ!! जैसे हमने इँसान की किडनी बदल दी, बाईपास सर्जरी कर दी आदि !!

    हिन्दुस्तानी बोला रे अमरीकन
    सर्जरी का तो आइडिया ही दुनिया को हमने दिया था !! तू ही बता "गणेशजी"का ऑपरेशन क्या तेरे बाप ने किया था???

    अमरीकन हडबडाया !! गुस्से मेँ बडबडाया!! देखते ही देखते चलता फिरता नजर आया !!

    तब से पूरी
    दुनियाँ को हम पर मान है!!! दुनियाँ में देश कितने ही हो पर सबमें हमारा "भारत" महान है।
    बहुत अच्छे------------
    हकलाते हैं तो संस्कृत सीखें,जो व्यक्ति धाराप्रवाह बोल नहीं पाते, अटकते हैं या फिर हकलाते हैं उन्हें संस्कृत सीखना चाहिए।संस्कृत से हकलाना भी खत्म हो जाता है।

  9. #69
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    Re: बुरा ना मानो...... मजे लो :))

    Quote Originally Posted by ingole View Post
    बहुत बढ़िया गिल साहेब , आपने अत्यंत सुन्द्सर व्याख्या और पोस्त्पार्तम किया है लैला मजनू का
    मित्र अभी आप आगे भी पढ़िए आप को मजा आएगा मित्र अपने विचार रखने शुक्रिया
    वो कह गये कभी न आएंगे ,
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  10. #70
    कांस्य सदस्य gill1313's Avatar
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    Re: बुरा ना मानो...... मजे लो :))

    (३)लोग कहते हैं लैलाजी बहुत खूबसूरत थीं। लेकिन उनका गला बड़ा स्वाभाविक, बेसुरा टाइप का था। जब गातीं तो लोगों के दिल दहल जाते। आवाज से डरकर पत्थर तक पिघल जाते। बड़े-बड़े सूरमाऒं के रास्ते बदल जाते। इसके बावजूद मजनू उससे प्यार करता था इसके पीछे कारण शायद यह रहा हो कि मजनू बहरा रहा हो। लैलाजी की कयामती आवाज को सुन न पाने के कारण बेचारा उनके प्रेम में पगलाया घूमता रहा। लेकिन लैला को अपने गले की ताकत का अन्दाजा रहा होगा। उसने जहां देखा होगा कि पब्लिक मजनू को पीटने आयी है तहां उसने मोर्चा संभाल लिया होगा और गाना गाने लगी होगी।
    (४)यह भी हो सकता है कि लैला मजनू से ऊब गयी हो। मजनू लैला को नये-नये गिफ़्ट न लाकर दे पाता हो। वह बार-बार पीटा जाता होगा। लैलाजी की बदनामी होती होगी कि कैसा फ़टीचर प्रेमी है कोई गिफ़्ट ही नहीं देता। हर बार पिटकर/पत्थर खाकर फ़िर फ़िट होकर प्रेम करने लगता होगा। मजनू की दवा-दारू में लैलाजी का पैसा अलग से लगता होगा क्योंकि मजनू तो कुछ करने से रहा ( आदमी प्रेम तभी करता है जब किसी काम का नहीं रहता) लैला इस तरीके की असफ़लता से निराश हो गयीं होंगी। इसीलिये कहती होंगी कि कोई सटीक तरीका निकालो इसे मारने का पत्थर से क्यॊं मारते जिसमें मरने की कोई गारण्टी भी नहीं। ये मरता तो है नहीं ,खर्चा अलग करवाता है!
    वो कह गये कभी न आएंगे ,
    रात सपनो में आये थे ,झूठे कहीं के ......?

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