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Thread: 11 जून: महाराणा प्रताप और पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती

  1. #1
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    Post 11 जून: महाराणा प्रताप और पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती

    आज 11 जून है, ग्रेगोरियन कैलेंडर के हिसाब से इस वर्ष का 162 वाँ दिन है; साल खत्म होने में अभी भी 203 दिन बाकी है। यूँ तो तारीखें आती जाती रहती है पर कुछ तारीखें खास होती है जैसे कि आज की तारीख........ आज भारतभूमि के दो वीर और देशभक्त पुत्रों का जन्मदिन है; महाराणा प्रताप और पंडित बिस्मिल का।
    दो क्रांतिकारियों का जन्मदिन एक साथ एक ही तारीख को होना, कितना गजब संयोग है? दोनों ही अपने अंत समय तक मातृभूमि के लिए ही समर्पित रहे, प्रताप ने मुगल साम्राज्य को टक्कर दी और पंडित जी ने उस साम्राज्य को जिसका सूरज कभी डूबता नहीं था........
    आज इन दोनों वीर सपूतों का जन्मदिन है, हम सभी की ओर से इन महान आत्माओं को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ........
    - Sherly

  2. #2
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    Re: 11 जून: महाराणा प्रताप और पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती

    सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाजु-ए कातिल में है
    ए शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत, मैं तुझपर निसार
    अब तेरी हिम्मत का चरचा ग़ैर की महफिल में है
    वक्त आने दे, बता देंगे तुझे ए आसमां
    हम अभी से क्या बताएं, क्या हमारे दिल में है....!
    - Sherly

  3. #3
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    Re: 11 जून: महाराणा प्रताप और पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती

    सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
    - By Ram Prasad Bismil

    सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
    देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है ।

    करता नहीं क्यों दुसरा कुछ बातचीत,
    देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफिल मैं है ।

    रहबर राहे मौहब्बत रह न जाना राह में
    लज्जत-ऐ-सेहरा नवर्दी दूरिये-मंजिल में है ।

    यों खड़ा मौकतल में कातिल कह रहा है बार-बार
    क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है ।

    ऐ शहीदे-मुल्को-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार
    अब तेरी हिम्मत का चर्चा ग़ैर की महफिल में है ।

    वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमां,
    हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है ।

    खींच कर लाई है सब को कत्ल होने की उम्मींद,
    आशिकों का जमघट आज कूंचे-ऐ-कातिल में है ।

    सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
    देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है ।
    __

    रहबर - साथी, (पथ प्रदर्शक) Guide
    लज्जत - सुस्वादु tasteful
    नवर्दी - युद्ध Battle
    मौकतल - फाँसी का तख्ता Place Where Executions Take Place, Place of Killing
    मिल्लत - राष्ट्र, देशभक्ति Nation, faith
    मनुष्य मृत्यु पूर्व तक कुछ न कुछ नवीन सीख सकता है यदि उसमे सीखने की ललक बनी रहे
    अपने लिए जिए तो क्या जिए..जिएँ तो जिएँ, किसी के लिए
    चित्रों के पुनर्प्रविष्ट होने पर कृपया शिकायत बटन दबाकर मूल चित्र की कड़ी अवश्य भेजें. सभी चित्र इन्टरनेट से लिए गए हैं और इनपर मेरा कोई अधिकार नहीं है.

  4. #4
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    Re: 11 जून: महाराणा प्रताप और पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती

    है लिये हथियार दुश्मन ताक मे बैठा उधर
    और हम तैय्यार हैं सीना लिये अपना इधर
    खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है
    सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

    हाथ जिनमें हो जुनून कटते नही तलवार से
    सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से
    और भडकेगा जो शोला सा हमारे दिल में है
    सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

    हम तो घर से निकले ही थे बांधकर सर पे कफ़न
    जान हथेली में लिये लो बढ चले हैं ये कदम
    जिंदगी तो अपनी मेहमान मौत की महफ़िल मैं है
    सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

    दिल मे तूफानों की टोली और नसों में इन्कलाब
    होश दुश्मन के उडा देंगे हमे रोको न आज
    दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंजिल मे है
    सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
    मनुष्य मृत्यु पूर्व तक कुछ न कुछ नवीन सीख सकता है यदि उसमे सीखने की ललक बनी रहे
    अपने लिए जिए तो क्या जिए..जिएँ तो जिएँ, किसी के लिए
    चित्रों के पुनर्प्रविष्ट होने पर कृपया शिकायत बटन दबाकर मूल चित्र की कड़ी अवश्य भेजें. सभी चित्र इन्टरनेट से लिए गए हैं और इनपर मेरा कोई अधिकार नहीं है.

  5. #5
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    Re: 11 जून: महाराणा प्रताप और पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती

    सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
    देखना है ज़ोर कितना बाज़ुए कातिल में है

    करता नहीं क्यूँ दूसरा कुछ बातचीत,
    देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है
    ए शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार,
    अब तेरी हिम्मत का चरचा गैर की महफ़िल में है
    सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

    वक्त आने दे बता देंगे तुझे ए आसमान,
    हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है
    खैंच कर लायी है सब को कत्ल होने की उम्मीद,
    आशिकों का आज जमघट कूच-ए-कातिल में है
    सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

    है लिये हथियार दुशमन ताक में बैठा उधर,
    और हम तैय्यार हैं सीना लिये अपना इधर.
    खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है,
    सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

    हाथ जिन में हो जुनून कटते नही तलवार से,
    सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से.
    और भड़केगा जो शोला-सा हमारे दिल में है,
    सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

    हम तो घर से निकले ही थे बाँधकर सर पे कफ़न,
    जान हथेली पर लिये लो बढ चले हैं ये कदम.
    जिन्दगी तो अपनी मेहमान मौत की महफ़िल में है,
    सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

    यूँ खड़ा मौकतल में कातिल कह रहा है बार-बार,
    क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसि के दिल में है.
    दिल में तूफ़ानों कि टोली और नसों में इन्कलाब,
    होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको ना आज.
    दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है,

    वो जिस्म भी क्या जिस्म है जिसमें ना हो खून-ए-जुनून
    तूफ़ानों से क्या लड़े जो कश्ती-ए-साहिल में है,
    सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
    देखना है ज़ोर कितना बाज़ुए कातिल में है
    मनुष्य मृत्यु पूर्व तक कुछ न कुछ नवीन सीख सकता है यदि उसमे सीखने की ललक बनी रहे
    अपने लिए जिए तो क्या जिए..जिएँ तो जिएँ, किसी के लिए
    चित्रों के पुनर्प्रविष्ट होने पर कृपया शिकायत बटन दबाकर मूल चित्र की कड़ी अवश्य भेजें. सभी चित्र इन्टरनेट से लिए गए हैं और इनपर मेरा कोई अधिकार नहीं है.

  6. #6
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    Re: 11 जून: महाराणा प्रताप और पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती

    पंडित जी और अशफाक़ उल्लाह खान साहब में बहुत गहरी मित्रता हुआ करती थी........
    (दो चित्रों में जो हष्ट-पुष्ट शरीर वाले हैं वो है पंडित रामप्रसाद और जो लंबे चेहरे वाले हैं वो हैं अशफाक़)
    संलग्न चित्र संलग्न चित्र    
    - Sherly

  7. #7
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    Re: 11 जून: महाराणा प्रताप और पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती

    चढ़ चेतक पर तलवार उठा,
    रखता था भूतल पानी को।
    राणा प्रताप सिर काट काट,
    करता था सफल जवानी को॥
    संलग्न चित्र संलग्न चित्र   
    - Sherly

  8. #8
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    Re: 11 जून: महाराणा प्रताप और पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती

    भारतभूमि सदैव से ही महापुरुषों और वीरों की भूमि रही है. यहां गांधी जैसे शांति के दूतों ने जन्म लिया है तो साथ ही ताकत और साहस के परिचायक महाराणा प्रताप, झांसी की रानी, भगतसिंह जैसे लोगों ने भी जन्म लिया है. यह धरती हमेशा से ही अपने वीर सपूतों पर गर्व करती रही है. ऐसे ही एक वीर सपूत थे महाराणा प्रताप. महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास में वीरता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के सूचक हैं. इतिहास में वीरता और दृढ प्रण के लिये हमेशा ही महाराणा प्रताप का नाम अमर रहा है.
    Name:  maharana pratap.jpg
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    महाराणा प्रताप उदयपुर, मेवाड में सिसोदिया राजवंश के राजा थे. एक मान्यता के अनुसार महाराणा प्रताप का जन्म – 9 मई, 1540, राजस्थान, कुम्भलगढ़ में हुआ था. राजस्थान के कुम्भलगढ़ में प्रताप का जन्म महाराणा उदयसिंह एवं माता राणी जीवत कंवर के घर हुआ था.

    उन दिनों दिल्ली में सम्राट अकबर का राज्य था जो भारत के सभी राजा-महाराजाओं को अपने अधीन कर मुगल साम्राज्य का ध्वज फहराना चाहता था. मेवाड़ की भूमि को मुगल आधिपत्य से बचाने हेतु महाराणा प्रताप ने प्रतिज्ञा की थी कि जब तक मेवाड़ आजाद नहीं होगा, मैं महलों को छोड़ जंगलों में निवास करूंगा, स्वादिष्ट भोजन को त्याग कंदमूल फलों से ही पेट भरूंगा किन्तु, अकबर का अधिपत्य कभी स्वीकार नहीं करूंगा. 1576 में हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप और अकबर के बीच ऐसा युद्ध हुआ जो पूरे विश्व के लिए आज भी एक मिसाल है. अभूतपूर्व वीरता और मेवाड़ी साहस के चलते मुगल सेना के दांत खट्टे कर दिए और सैकड़ों अकबर के सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया गया.

    बालक प्रताप जितने वीर थे उतने ही पितृ भक्त भी थे. पिता राणा उदयसिंह अपने कनिष्ठ पुत्र जगमल को बहुत प्यार करते थे. इसी कारण वे उसे राज्य का उत्ताराधिकारी घोषित करना चाहते थे. महाराणा प्रताप ने पिता के इस निर्णय का तनिक भी विरोध नहीं किया. महाराणा चित्तौड़ छोड़कर वनवास चले गए. जंगल में घूमते घूमते महाराणा प्रताप ने काफी दुख झेले लेकिन पितृभक्ति की चाह में उन्होंने उफ तक नहीं किया. पैसे के अभाव में सेना के टूटते हुए मनोबल को पुनर्जीवित करने के लिए दानवीर भामाशाह ने अपना पूरा खजाना समर्पित कर दिया. तो भी, महाराणा प्रताप ने कहा कि सैन्य आवश्यकताओं के अलावा मुझे आपके खजाने की एक पाई भी नहीं चाहिए.

    महाराणा प्रताप के पास उनका सबसे प्रिय घोड़ा “चेतक” था. हल्दी घाटी के युद्ध में बिना किसी सहायक के प्रताप अपने पराक्रमी चेतक पर सवार हो पहाड़ की ओर चल पड़ा. उसके पीछे दो मुग़ल सैनिक लगे हुए थे, परन्तु चेतक ने प्रताप को बचा लिया. रास्ते में एक पहाड़ी नाला बह रहा था. घायल चेतक फुर्ती से उसे लांघ गया परन्तु मुग़ल उसे पार न कर पाये. चेतक की बहादुरी की गाथाएं आज भी लोग सुनाते हैं.

    सम्पूर्ण जीवन युद्ध करके और भयानक कठिनाइयों का सामना करके प्रताप ने जिस तरह से अपना जीवन व्यतीत किया उसकी प्रशंसा इस संसार से मिट न सकेगी.
    ...
    मनुष्य मृत्यु पूर्व तक कुछ न कुछ नवीन सीख सकता है यदि उसमे सीखने की ललक बनी रहे
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  9. #9
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    Re: 11 जून: महाराणा प्रताप और पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती

    उदय घर उदयीमान हुयो
    मावड़ रो करज चुकावण ने
    राणा प्रताप ने साथी मिल्गयो
    चेतक सो साथ निभावण ने
    बलशाली ओ जब्बर हुयो
    हाथी सो बल दिखावण ने
    सिंघ शेर ज्याखली दहाड़ करी
    बेरयां न धूल चटावण ने
    लग्यो रह्यो जीवण भर
    मेवाड़ी आन बचावण ने
    'हँसमुख' नमन करै मावड़ ने
    प्रताप सा वीर निपजावण ने
    - Sherly

  10. #10
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    Re: 11 जून: महाराणा प्रताप और पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती

    महाराणा प्रताप पर सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' पुस्तक के कुछ अंश ......

    महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास में वीरता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के पर्याय हैं। वे एक कठिन और उथल-पुथल भरे कालखण्ड में पैदा हुए थे, जब मुगलों की सत्ता समूचे भारत पर छाई हुई थी और मुगल सम्राट अकबर अपनी विशिष्ट कार्य शैली के कारण ‘महान’ कहा जा सकता है। लेकिन महाराणा प्रताप उसकी ‘महानता’ के पीछे छिपी उसकी साम्राज्यवादी आकांक्षा के विरुद्ध थे, इसलिए उन्होंने उसकी अधीनता स्वीकार नहीं की। परिणामस्वरूप अकबर उसके विरुद्ध युद्ध में उतरा। इस प्रक्रिया में महाराणा प्रताप ने जिस वीरता, स्वाभिमान और त्यागमय जीवन को वरण किया, उसी ने उन्हें एक महान लोकनायक और वीर पुरुष के रूप में सदा-सदा के लिए भारतीय इतिहास में प्रतिष्ठित कर दिया है।
    महाकवि निराला ने प्रताप के इसी प्रेरक चरित्र को तथात्मक ढंग से प्रस्तुत किया है।

    मुख्य रूप से यह पुस्तक किशोर पाठकों को ध्यान में रखकर लिखी गयी है, लेकिन इसकी प्रांजल भाषा-शैली और तथ्यपरकता इसे एक महापुरुष की ऐतिहासिक जीवनी का महत्त्व प्रदान कर देती है।
    मनुष्य मृत्यु पूर्व तक कुछ न कुछ नवीन सीख सकता है यदि उसमे सीखने की ललक बनी रहे
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