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Thread: फ़िल्मों के लिए लिखे गीत / इंदीवर

  1. #11
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    दुश्मन न करे दोस्त ने वो काम किया है
    उम्र भर का ग़म हमें ईनाम दिया है

    तूफ़ां में हमको छोड़ के साहिल पे आ गये
    नाख़ुदा का हमने जिन्हें नाम दिया है
    उम्र भर का ग़म ...

    पहले तो होश छीन लिये ज़ुल्म-ओ-सितम से
    दीवानगी का फिर हमें इल्ज़ाम दिया है
    उम्र भर का ग़म ...

    अपने ही गिराते हैं नशेमन पे बिजलियाँ
    ग़ैरों ने आ के फिर भी उसे थाम लिया है
    उम्र भर का ग़म ...

    बन के रक़ीब बैठे हैं वो जो हबीब थे
    यारों ने ख़ूब फ़र्ज़ को अंजाम दिया है
    उम्र भर का ग़म ...
    ''निर्वाण का अर्थ वासनाओ से मुक्ति।'' [Only Registered and Activated Users Can See Links. Click Here To Register...]

  2. #12
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    छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए
    ये मुनासिब नहीं आदमी के लिए
    प्यार से भी ज़रूरी कई काम हैं
    प्यार सब कुछ नहीं ज़िंदगी के लिए

    तन से तन का मिलन हो न पाया तो क्या
    मन से मन का मिलन कोई कम तो नहीं
    खुशबू आती रहे दूर से ही सही
    सामने हो चमन कोई कम तो नहीं
    चाँद मिलता नहीं सबको सँसार में
    है दिया ही बहुत रोशनी के लिए

    कितनी हसरत से तकती हैं कलियाँ तुम्हें
    क्यूँ बहारों को फिर से बुलाते नहीं
    एक दुनिया उजड़ ही गई है तो क्या
    दूसरा तुम जहां क्यूँ बसाते नहीं
    दिल ना चाहे भी तो साथ संसार के
    चलना पड़ता है सब की खुशी के लिए
    ''निर्वाण का अर्थ वासनाओ से मुक्ति।'' [Only Registered and Activated Users Can See Links. Click Here To Register...]

  3. #13
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    दर्पण को देखा तूने
    जब जब किया श्रृंगार
    फूलों को देखा तूने
    जब जब आई बहार
    एक बदनसीब हूँ मैं
    मुझे नहीं देखा एक बार

    सूरज की पहली किरनों को
    देखा तूने अलसाते हुए
    रातों में तारों को देखा
    सपनों में खो जाते हुए
    यूँ किसी न किसी बहाने
    तूने देखा सब संसार

    काजल की क़िस्मत क्या कहिये
    नैनों में तूने बसाया है
    आँचल की क़िस्मत क्या कहिये
    तूने अंग लगाया है
    हसरत ही रही मेरे दिल में
    बनूँ तेरे गले का हार
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  4. #14
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    देख सकते नहीं तुमको जी भर के हम
    दिल में किसके ग़ुमां क्या गुज़र जाएगा
    तुमको अपना कहें तो कहें किस तरह
    सारी महफ़िल का चेहरा उतर जाएगा
    देख सकते नहीं ...

    तुम भी बेताब हो हम भी बेचैन हैं
    दिल में मिलने की हसरत मचलने लगी
    सब्र का अब तो दामन सुलगने लगा
    प्यार की आग सीने में जलने लगी
    तुमको मिलने न पाए अगर आज हम
    लगता है दिल ही ठहर जाएगा
    देख सकते नहीं ...

    हो किसी देश में या किसी भेष में
    शक्लें अपनों की पहचान लेता है दिल
    तुम कहो न कहो हम कहें ना कहें
    बात दिल की तो खुद जान लेता है दिल
    सामने बस युँही मुस्कराते रहो
    ज़िन्दगी का मुक़द्दर सँवर जाएगा
    देख सकते नहीं ...

    जानकर की गई हो या अनजाने में
    दुनियावाले खता माफ करते नहीं
    दुनियावालों का ये ज़ुलम तो देखिए
    देके भी जो सज़ा माफ करते नहीं
    जिँदगी बन गई कैद इंसान की
    कोई इलज़ाम लेकर किधर जाएगा
    देख सकते नहीं ...
    ''निर्वाण का अर्थ वासनाओ से मुक्ति।'' [Only Registered and Activated Users Can See Links. Click Here To Register...]

  5. #15
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    देर लगी आने में तुमको
    शुक्र है फिर भी आए तो
    आस ने दिल का साथ न छोड़ा
    वैसे हम घबराए तो

    तुम जो न आते हम तो मर जाते
    क्या हम अकेले ज़िंदा रहते
    तुमसे कहें क्या जो बीती दिल पे
    दर्द-ए-जुदाई सहते सहते
    आज हमारे प्यासे दिल पे
    बनके बादल तुम छाए तो
    देर लगी आने में तुमको ...

    बेताब दिल था बेचैन आँखें
    खुद से खफ़ा हम रहने लगे थे
    हालत हमारी वो हो गई थी
    पागल हमें लोग कहने लगे थे
    अब इक पल भी बिछड़ें न हम तुम
    वक़्त अगर रुक जाए तो
    देर लगी आने में तुमको ...
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