Page 1 of 2 12 LastLast
Results 1 to 10 of 19

Thread: संजोग का खेल 1st crush

  1. #1
    कांस्य सदस्य garima's Avatar
    Join Date
    Jun 2015
    प्रविष्टियाँ
    6,863
    Rep Power
    11

    संजोग का खेल 1st crush

    मैं अपने से एक कहानी लिखने की कोशिश क्र रही हु। मैंने बहुत अच्छे रचनाकारो की कहानिया पड़ी है मंच पे बहुत अच्छा लिखने वाले लोग भी है।मेरा कोई अनुभव नहीं है कहानी लिखने का।यदि मेरी लिखी कहानी में कुछ कमी हो तो माफि चहुँगी।
    तो शुरू करते है1st क्रश
    मंच तुम आँखों की पलको से हो गए हो,
    के मिले बिना सुकून ही नहीं आता...!!!

  2. #2
    कर्मठ सदस्य sanjaychatu's Avatar
    Join Date
    Aug 2015
    प्रविष्टियाँ
    3,900
    Rep Power
    7
    वाह वाह , शीग्र शुभारम्भ करे

  3. #3
    कांस्य सदस्य garima's Avatar
    Join Date
    Jun 2015
    प्रविष्टियाँ
    6,863
    Rep Power
    11
    ये कहानी अपर्णा और सूरज की है
    अपर्णा और सूरज पहली बार अपर्णा की कजिन सिमर की शादी में मिले थे। शादी का माहोल था ।हसि ठिठोली थी। सिमर की सगाई में अपर्णा और सूरज पहली बार मिले थे। सब अच्छे से चल रहा था।
    सूरज अपर्णा की कजिन सिमर का कजिन देवर था। शादी में ही वह एक दूसरे से मिले थे।शादी के पहले के फंक्शन चल रहे थे। रोका हुआ सगाई का दिन था वह दोनों फिर मिले
    अच्चनक अपर्णा को महसूस होने लगा जैसे कोई बार बार उसे देख रहा है।
    जब सगाई में सूरज ने अपर्णा का हाथ पकड़ के डांस फ्लोर पे खींचा। डांस करते करते अपर्णा की नजर सूरज की नजर से मिली। उसका देखना नजरो में शरारत का ढंग अपर्णा की आँखों में शर्म भर गई और वह डांस फ्लोर से निचे आ गई। फिर जब देखा तो पता चला की कोई उसे देख रहा है जो महसूस किया वह और कोई नहीं सूरज था
    मंच तुम आँखों की पलको से हो गए हो,
    के मिले बिना सुकून ही नहीं आता...!!!

  4. #4
    कांस्य सदस्य garima's Avatar
    Join Date
    Jun 2015
    प्रविष्टियाँ
    6,863
    Rep Power
    11
    अब बार बार अपर्णा की नजर भी सूरज पे जा रही थी।दोनों ही बात करना चाहते थे एक दूसरे से। खाने का टाइम हो गया टेबल सज गई सभी इक्कट्ठे राउंड में बैठ गए। स्नैप्स ली गई वीडियो रिकॉर्डिंग भी चल रही थी। अब बारी आई जीजाजी की। जीजाजी ने दी को और दी ने जीजाजी को बाईट खिलाई।फ़ोटो शूट हुआ दोनों का।
    फिर सभी टेबल पे बैठे खाना खाने लगे।
    मैं माँ और पापा चाचा चाची के साथ अलग टेबल पे बैठ गई ।
    टाइम हो गया था मेरे जाने का। कल मेरा बोर्ड का लास्ट एग्जाम था।और मैं रात को फेरो तक रुक नहीं पाई। चलने से पहले मैं अपनी कजिन सिमर से मिलने गई मैं उसके गले मिली हमारी आँखे थोड़ी नम हो गई थी। जीजा जी को बाय बोला।जीजा जी ने मुझे कहा आपका बोर्ड एग्जाम नअ होता तो आपको जाने नहीं देते साली साहिबा। आपको सभी मिस करेगे। कोई स्पेशल पर्सन भी।
    मुझसे एग्जाम बाद आने का प्रोमिस लिया। मैंने भी हां क्र दी क्योंकि अब मेरा भी मन अंदर से सूरज से मिलने को कर रहा था।
    अपर्णा तब इंटर के एग्जाम दे रही थी और सूरज बीकॉम कर रहा था
    मंच तुम आँखों की पलको से हो गए हो,
    के मिले बिना सुकून ही नहीं आता...!!!

  5. #5
    कांस्य सदस्य garima's Avatar
    Join Date
    Jun 2015
    प्रविष्टियाँ
    6,863
    Rep Power
    11
    अगले दिन एग्जाम दे के अपर्णा घर को आ रही थी पूरे रास्ते मुझे सूरज याद आ रहा था।घर पहुँचते ही मैंने सिमर से फ़ोन पे बात की। और सभी का हाल पूछते हुए जीजा जी से बात कराने को कहा।तभी सिमर मुझसे बोली सिर्फ जीजाजी से ही बात करनी है या????
    मैं कुछ बोली नहीं जुबान पे तो बहुत कुछ था की कैसे मैं मन के सारी बात कहु।पर वो समय ठीक न लगा कहने को सोच के मैं चुप रही।तभी जीजाजी की आवाज फ़ोन पे आई
    हैलो
    इधर मैंने बोला हैलो जीजाजी कैसे है आप?
    जीजाजी ~ मैं तो ठीक हु आप कैसी है साली साहिबा।और कैसा रहा एग्जाम?
    मैंने भी कहा अच्छा हुआ।
    तो कब आ रही है हमारी साली साहिबा
    मैंने कहा आउंगी जब आप कहे।
    जीजाजी ने कहा तो बस तैयार बैठे अभी आते है।
    मैंने मना किया नहीं जीजा जी आप न आये आज सभी मेहमान वहां होंगे अच्छा नहीं लगेगा।
    ठीक है कह के जीजाजी ने फ़ोन सिमर को दे दिया। उधर से ही आवाज आई भाभी.....फ़ोन रखती हु कह के सिमर चली गई और मैं भी चेंज करके अपने काम में लग गई।
    मन ही मन खुद पे अफ़सोस कर रही थी की काश न मना किया होता चली जाती। सब चले जायगे तो सूरज से भी नहीं मिल पाऊँगी ऐसे बाते मन ही मन सोचती जा रही थी। की अचानक डोर बेल बजी ।............
    मैंने गेट खोला और सामने जीजा जी के मामा के बेटे औरमासी की बेटी मुझे लेने आये थे हम सभी हमउम्र थे।मैं हैरानी से देखने लगी कुछ बोली नहीं।तबी जीजाजी की कजिन बहन बोली अपर्णा हम पहले भी मिल चुके है अनजान नहीं है तुम इतनी हैरानी से देखती रहोगी या अंदर भी चले।मेरी नजर तो सूरज को ढूंढ रही थी।
    तभी मोबाइल पे बेल हुई ।
    जीजा जी ~ कैसा लगा सरप्राइज?
    हैरान होने की जरूरत नहीं बस चली आये अपर्णा मैडम। मैंने कहा जीजा जी बता तो दिया होता
    जीजा जी ~ बता देते तो आपको सरप्राइज कैसे करते।
    चलिए जल्दी आइये एक सरप्राइज और है।
    जीजाजी ने माँ से बात की मुझे सबके साथ जाने की परमिशन मिल गई।
    मैं भी जल्दी से तैयार हो गई ।और जाने के लिए बाहर निकले ....
    Last edited by garima; 02-10-2015 at 06:24 PM.
    मंच तुम आँखों की पलको से हो गए हो,
    के मिले बिना सुकून ही नहीं आता...!!!

  6. #6
    कांस्य सदस्य garima's Avatar
    Join Date
    Jun 2015
    प्रविष्टियाँ
    6,863
    Rep Power
    11
    जैसे ही कार का गेट खुला और मै अंदर बैठी देखा सूरज.... मै हैरान और थोडा शरमाई सी बैठ गई ।सूरज ने हेलो बोला मेरे मुह से शब्द नहीं निकल रहा था मैंने सिर्फ हल्का सा स्माइल किया।अच्चनक सूरज को सामने देख के।एक अजीब सा कम्पन हो रहा था मेरे गाल कापने लगे। सभी बैठ गए सूरज आगे बैठा था और मुझे शीशे में पीछे बराबर देखते जा रहा था। मेरी नजर सामने देख नहीं पा रही थी और मुझे अब थोडा सा गुस्सा भी आ रहा था।
    अब हम घर पहुँच चुके थे हम अंदर गए। सभी मेहमान घर पे थे कुछ जाने की तैयारी क्र रहे थे और कुछ उस समय जाने वाले थे।।
    मैंने सिमर को देखा उसे गले मिली कैसी है पूछा तो जवाब में इतनी नम्र मुस्कान और प्यार था।
    सच में बेटी से बहु बन गई थी।बहुत अच्छा लग रहा था सिमर से मिल के। कितनी सुंदर लग रही थी। उसका रूप।चढ़ा हुआ था।
    मैं सबसे मिलने लगी।तभी आंटी जी ने जीजाजी और सिमर को बुलवाया।
    सिमर और जीजाजी सभी के पैर छू उन्हें विदा क्र रहे थे ।
    और घर के बाकी लोग भी बिजी थे। तभी सूरज मेरे पास आया और फॉर्मल आपको कुछ चाहिए कह के पूछने लगा।
    मै मुस्कुराई और कुछ नहीं कहा ।
    2मिनट रुका ही था की उसकी कजिन आ गई ।वो उसे बहाने बनाने लगा वह से भेजने के ।
    पर वो भी समझ रही थी उसने भी जान के खिंचाई के भैया आपको बात करनी है? वो कुछ ख पता इससे पहले वहां आंटी जी (सिमर की सास ) आ गई
    तभी वो मुझसे सभी का हाल चाल पूछने लगी। और मेरे लिए कुछ ठण्ड भेजेंने का कहती हुई चली गई
    सूरज ने फिर कुछ बात करनी चाही और बोला आपका एग्जाम कैसा हुआ
    तो उसकी कजिन ने रिप्लाई किया की बहुत अच्छा हुआ भैया अआपको और कुछ पूछना है
    मै ओ कुछ बोल ही न पाई ।
    पर उसकी आँखों से लगा की वो मुझसे बहुत कुछ कहना चाहता था ।
    तभी सिमर और जीजा जी आ गए।
    और हम बातो में लग गए
    जीजाजी ने मुझे पूछा की कैसा लगा सरप्राइज नैन कहा अच्छा लगा जीजू बहुत अच्छा सरप्राइज किया आपने मुझे।
    और दूसरा सरप्राइज।?
    मैंने हैरानी से कहा दूसरा कोण सा जीजू।
    जीजाजी थोडा मजाक कइ मूड में आ गए
    हैरानगी ओह हो साली साहिबा हैरान, परेशान, और अनजान तो न बने
    हमे क्या अनजान समझ है इतने नादान भी नहीं इतने अनजान भी नहीं।
    मैं कुछ भी नअ बोली।
    मंच तुम आँखों की पलको से हो गए हो,
    के मिले बिना सुकून ही नहीं आता...!!!

  7. #7
    कांस्य सदस्य garima's Avatar
    Join Date
    Jun 2015
    प्रविष्टियाँ
    6,863
    Rep Power
    11
    कुछ रस्मे सुबह को हो गई और कुछ रस्मे होने वाली थी बहुत अच्छा लग रहा था। सभी से बाते और मजाक चल रहा था। एक बार फिर सूरज ने बात करनी चाही।
    सभी अंताक्षरी खेलने लगे।
    सभी अंताक्षरी खेलने लगे।सूरज भी कुछ रोमांटिक गाने लगा मुझे सबके बीच में बार बार
    उसका रोमांटिक होना अच्छा नहीं लगा।
    सूरज इसबार मेरे पास में आके बैठ गया।और धीमे से मुह के अंदर कुछ बुदबुदा गया। मैं समझ नहीं पाई क्योंकि मुझे सुनाई नहीं दिया।
    शाम हो गई । टाइम कैसे बीत गया पता भी नहीं चला। घर वापस जाने का टाइम हो गया
    मंच तुम आँखों की पलको से हो गए हो,
    के मिले बिना सुकून ही नहीं आता...!!!

  8. #8
    कांस्य सदस्य garima's Avatar
    Join Date
    Jun 2015
    प्रविष्टियाँ
    6,863
    Rep Power
    11
    जाने का टाइम आ गया मन तो कहता की थोडा टाइम और होता समय यही रुक जाता पर समय तो जैसे पंख लगाये था। उस दिन मौसम बहुत प्यारा था ।गर्मी में भी ठंडा गुलाबी मौसम हो गया था।
    सभी कजिन रूम डेकोरशन में लगे थे। तभी जीजा जी ने आवाज लगाई की अपर्णा को घर छोड़ने जाना है।
    इतना कहना था सूरज तैयार मैं चला जाता हु ।
    जीजा जी मुस्कुराये और कहा सभी जा रहे है
    सबसे मिल के मैं मैं आगे बढ़ी ।
    तभी सूरज ने कार का गेट खोला मुझे बैठने को बोला मैं बैठी सूरज मेरे साथ पीछे की सीट में बैठ गया ।जितना वो खुश था उतनी ही घबराहट मुझे हो रही थी।
    कार का गेट बन्द हुआ।और मेरे दूसरी तरफ सूरज की ही कजिन बैठी थी।
    ऐसा लग रहा था जैसे मैं कैदी हु।
    धीरे से उसने मेरा हाथ पकड़ा और I LOVE U कहा।
    मुझे बहुत घबराहट होने लगी दिल कई धड़कन तेज हो गई। मेरे गाल कापने लगे हाथ ठंडे हो गए ।
    मेरा हाथ पकड़ने से उसे पता था की मेरे हाथ ठंडे हो रहे है ।
    उसने फिर धीरे से कहा की क्या हुआ ।
    मै कुछ बोल नहीं पाई शब्द ही नहीं निकल रहे थे मुह से।
    मैंने हाथ छुड़ाने की कोशिश की पर उसने मेरा हाथ टाइट पकड़ा था ।और दूसरी तरफ कोई देख न ले ये सोच के भी शर्म आ रही थी।
    घर पास में आ गया था। जैसे ही हम घर के पास पहुंचे उसने फिर मुझे बोला मैं जवाब का इन्तजार करूँगा।मैंने न में सर हिलाते हुए कहा नहीं।
    वो मुस्कुराया और कहा सोचना।
    मैंने कुछ कहा नहीं घर आया पर वो मेरा हाथ पकड़ै था बाहर निकलना था उसने हाथ छोड़ा मैं बाहर आई।
    सभी को मैंने साथ आने को कहा पर देर भी हो रही थी।
    मंच तुम आँखों की पलको से हो गए हो,
    के मिले बिना सुकून ही नहीं आता...!!!

  9. #9
    कांस्य सदस्य garima's Avatar
    Join Date
    Jun 2015
    प्रविष्टियाँ
    6,863
    Rep Power
    11
    मैं घर गई । थोड़ी थकान हो रही थी। मई जाके लेट गई और आँखे बन्द क़र ली
    आँखों के सामने एक ही चेहरा बार बार परेशान करने लगा उसकी बाते उसकी मुस्कान याद आ रही थी क्या कृ कुछ समझ नहीं आ रहा था मन लग नहीं रहा था दिल बेचैन हुआ जा रहा था।
    तभी मम्मी आ गई पूछने लगी क्या हुआ थक गई सिमर का हाल कैसी है क्या क्र रही थी उनकी रस्मे सब मैंने बताया । मम्मी चाय बना के देने को ख के अपने काम में लग गई 5मिनट बात माँ चाय दे के चली गई।
    चाय पि थोड़ी फ्रेशनेस हुई ।
    फिर आँख बन्द करके लेट गई। क्योकि दूसरे दिन कोई एग्जाम नहीं था लास्ट एग्जाम हो चूका था। इसलिए टेंशन फ्री होकर सो गई।
    सुबह को जब उठी तो सब कुछ सूना सूना सा था ।
    क्योंकि आज सिमर भी नहीं थी अपने घर अपने ससुराल में थी।
    तभी चाची ने आवाज लगाई सिमर का फ़ोन है अपर्णा बात क्र ले। सिमर ख रही है चाची से बात कराओ मम्मी से भी बात करा देना
    मंच तुम आँखों की पलको से हो गए हो,
    के मिले बिना सुकून ही नहीं आता...!!!

  10. #10
    कांस्य सदस्य garima's Avatar
    Join Date
    Jun 2015
    प्रविष्टियाँ
    6,863
    Rep Power
    11
    फ़ोन उठाया हेल्लो सिमर गुड मॉर्निंग कैसो हो क्या चल रहा है। रात कैसी रही जीजाजी कैसे है कहा है।
    सिमर गुड़ मॉर्निंग गुड़ मॉर्निंग सब्र तो ले सब एक सास में बोल देगी?
    तू कैसी है मैडम ये बता क्या चल रहा है नया ये तू बता।
    मैं मैं कया बताऊ कल एग्जाम खत्म हुए है अब आगे कॉलेज देखते है कोन से कॉलेज में जाना है।
    मैं ये नया नहीं पूछ रही कुछ और नया ????
    मैं समझ नहीं पाई क्या कहना चाहती हो वो बता
    तू कब आ रही हैं
    अभी आना तो है पगफेरे के लिए वही माँ से बात क्र रही थी की अभी दिन में आउंगी लंच वही करुँगी।
    अरे वाह ये तो अच्छी बात है आजा फिर बाते करते है।
    जीजू से बात करा दे
    नहीं तो जीजा जी कहेगे बहन से बात क्र के फ़ोन रख दिया।
    जीजाजी हेल्लो कैसी है साली साहिबा
    मई ठीक हु जीजाजी आप कैसे है। हम तो ठीक है आप ठीक है या नहीं ये बताय।
    क्या बात है जीजा जी आज बार बार मेरा हाल पूछ रहे है।
    बीवी कहेगी साली का ख्याल ज्यादा आ रहा है ।
    अरे साली साहिबा कल कुछ कह रही थी रिंकी तो सोचा आपसे हाल चाल तो ले ले नींद बढ़िया आई।
    इतना बोलना था की मैं सब समझ गई। क्या हुआ
    जीजजी मम्मी से बात कीजिये कह के मैंने फ़ोन मम्मी को दे दिया और मैं चली गई वहां से
    मंच तुम आँखों की पलको से हो गए हो,
    के मिले बिना सुकून ही नहीं आता...!!!

Page 1 of 2 12 LastLast

Thread Information

Users Browsing this Thread

There are currently 1 users browsing this thread. (0 members and 1 guests)

Bookmarks

Posting Permissions

  • You may not post new threads
  • You may not post replies
  • You may not post attachments
  • You may not edit your posts
  •