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Thread: Mann Ki Baat

  1. #9381
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    Gm buddhe.......Raat bhar chand hi dekhta raha tha kya????



    Gm Kaale Bandar.........................................Haa aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaan (daya ben style)

  2. #9382
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    I know.......Mere se zyada kon janta hoga is baat ko



    Naanch na jane aangan teda...............

  3. #9383
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    Quote Originally Posted by Buddha 1 View Post
    Mai to so gaya tha jaldi......Bahut jaldi
    Sotadu Lal kahin ka..................................

  4. #9384
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    Chal bye.......
    GTH............................................... ...........;)

  5. #9385
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    May 2017
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    अब प्रस्तुत है घटनाक्रम का फ़िल्मीकृत दृष्य-

    महारानी : शाही बावर्ची.. शाही बावर्ची.. शाही बावर्ची..

    (सभी महारानी की ओर देखते हैं।)

    ....भरे दरबार में सबके सामने तुमने हमारा दूध पीकर बहुत बड़ी गुस्ताखी की है!

    महामंत्री : (तलवार निकालते हुए) आप आदेश करिए, महारानी.. इस धृष्ट के सिर के बाल अभी कलम कर देता हूँ!

    महारानी : (क्रोधपूर्वक) महामंत्री.. तुम नाऊ थे, नाऊ हो.. और नाऊ ही रहोगे। तुम्हें महामंत्री बनाना मेरी सबसे बड़ी भूल थी! जब देखो- सिर की जगह सिर के बाल कलम करने की फिराक में लगे रहते हो। मत भूलो- मैंने तुम्हें उस्तरा नहीं, तलवार पकड़ाई है। नाऊ से महामंत्री बनाया है!

    महामंत्री : क्षमा करें, महारानी.. चमड़े की ज़ुबान है, ज़रा फिसल गई थी.. और फिर हम महामंत्री हैं, महासेनापति नहीं जो राजदरबार में तलवारबाजी करें। क्या आप भूल गईं- हमारे पास असली नहीं, नकली तलवार रहती है जो सिर्फ़ महामंत्री का भौकाल बनाने के काम आती है!

    महारानी : पता है- पता है। आपने राजकीय शाही तलवार का दुरुपयोग किया था। इसीलिए आपकी तलवार छीन ली गई थी।

    महामंत्री : मैंने शाही तलवार का दुरुपयोग कहाँ किया था, महारानी? पड़े-पड़े तलवार को कहीं जंग न लग जाए, इसलिए तलवार से लोगों की शेविंग करके चार पैसा कमाना शुरू कर दिया था!

    महारानी : (बिगड़कर) शाही तलवार से शेविंग करके चार पैसा कमाने को ही शाही तलवार का दुरुपयोग करना कहते हैं, महामंत्री!

    महामंत्री : यह कोई बहुत बड़ा अपराध तो नहीं, महारानी!

    शाही बावर्ची : हमने भी कोई बहुत बड़ा अपराध नहीं किया। बावर्चीखाने में तो मैं हर दूसरे-तीसरे दिन आपका दूध पीता रहता हूँ वो भी आपके सामने!

    (शाही बावर्ची की बात सुनकर महारानी कल्पनालोक में डूब जाती हैं।)

    (फ्लैश-बैक)

    (बावर्चीखाने में शाही बावर्ची कपड़े से ढ़ँके हुए गन्ने को बाहर खींचकर देखता है। उसी समय महारानी बावर्चीखाने में आ जाती हैं।)

    महारानी : (पुकारते हुए) शाही बावर्ची.. शाही बावर्ची.. शाही बावर्ची..

    (शाही बावर्ची घबड़ाकर जल्दी से गन्ने को कपड़े से ढँककर छिपा देता है, किन्तु महारानी शाही बावर्ची को कुछ छिपाते हुए देख लेती हैं।)

    महारानी : क्या कर रहे हो, शाही बावर्ची?

    शाही बावर्ची : (घबड़ाकर) कुछ नहीं, महारानी.. कुछ नहीं!

    महारानी : कुछ तो कर रहे थे?

    शाही बावर्ची : खाली बैठा था, सोचा थोड़ा काम कर लूँ। वक़्त गुजरते पता नहीं चलेगा।

    महारानी : अच्छा..

    शाही बावर्ची : और नहीं तो क्या! खाली-खूली बैठने से बड़ी बोरियत महसूस होती है। काम करने से आनन्द से वक़्त कट जाता है!

    महारानी : अच्छा..

    शाही बावर्ची : और नहीं तो क्या! काम करने में जो आनन्द है, वह खाली बैठने में नहीं!

    महारानी : (खुश होकर) राजमहल में पड़े-पड़े मैं बड़ी बोर हो रही थी। मैं भी तुम्हारे साथ काम करूँगी।

    शाही बावर्ची : अरे नहीं, आप महारानी हैं। आप कहाँ मेरे साथ काम-वाम कर पाइएगा। और फिर आपको काम करने की प्रैक्टिस भी नहीं होगी। एक मिनट काम करने में ही थककर बुरी तरह हाँफने लगिएगा।

    महारानी : अरे नहीं.. मैं काम कर चुकी हूँ। मुझे काम करने की आदत है। मुझे पता है- काम करने में बड़ा मजा आता है!

    शाही बावर्ची : अच्छा..

    महारानी : इधर कई सालों से काम नहीं किया तो क्या हुआ? हर हफ्ते रविवार को काम करने का रिहर्सल तो करती रहती हूँ।

    शाही बावर्ची : (भ्रमित होकर) काम करने का रिहर्सल?

    महारानी : और नहीं तो क्या.. रिहर्सल कर के बताऊँ?........

    (महारानी सब्ज़ी के टोकरे से एक बैंगन उठा लेती हैं।)

    ......मैं बैंगन की कलौंजी बहुत बढ़िया बनाती हूँ। हर रविवार को मैं एक बैंगन की कलौंजी बनाकर काम करने का रिहर्सल करती हूँ।

    शाही बावर्ची : तभी तो मैं कहूँ- आपके चेहरे पर हर समय एक अद्भुत चमक क्यों बनी रहती है! आप हर हफ्ते बैंगन जो खाती हैं। बैंगन बड़ा ही पौष्टिक होता है।

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