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Thread: जाना फिर भी अंजाना

  1. #1
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    जाना फिर भी अंजाना

    जय श्री राम
    मैं यहाँ पर कुछ हमारी गुजराती के कुछ मुनि - जनों, महंतो और गुरुओ की पुस्तकों में से कुछ रहस्य और रोमांच वाली अनुभव सिद्ध कथा लिखने का प्रयास कर रहा हूँ | मेरी हिन्दी अच्छी नही है तो आप सदस्यो को निवेदन है कि हिन्दी की गलतियों को अनदेखा करें ।

    और मुझे गुजराती का अनुवाद करना पडेगा तो सूत्र को अपडेट करने में भी समय लग सकता है।
    Last edited by Krishna; 18-07-2016 at 05:24 PM.

  2. #2
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    हरित परदेश हरयाणा
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    करो भाई जल्दी से करो ई ऍम waitiनग
    • लाजमी तो नही है कि तुझे आँखों से ही देखूँ..
      तेरी याद का आना भी तेरे दीदार से कम नही






  3. #3
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    विचारशील वैज्ञानिक अब तो अद्श्य तत्वोका अस्तित्व स्वीकार करने लगे है।

    प्रेतात्मा यानी अशरीर तत्व वो जो पनी पृथ्वी के देशकाल के कायदे मे बंधंनयुक्त नही होते। उससे परे होते है। उसका गठन (बंधारण) हमारे से अलग होता है। उससे हम अगल खास स्थिति में होते है तब भी हम उससे संपर्क स्थापित कर सकते है और व्यवहार कर सकते है।
    Last edited by Krishna; 18-07-2016 at 05:26 PM.

  4. #4
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    निम्न लिखित जो वृतांत में यहाँ पर डे रहा हूँ वह मुझे एक प्रेतात्मा के साथ एक अवसर को दौरान मेरी उससे बातचीत की एक घटना है। मुजे मानस-शरीर-शास्त्रो का ज्ञान नही है, उसलिए मैं उस प्रसंग को अच्छी तरह से स्पष्ट नहीं कर सकूंगा ।
    Last edited by Krishna; 18-07-2016 at 05:31 PM.

  5. #5
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    अथवा जो तत्व मैंने मेरी आँखों से देखा और उससे जो बातचीत हुई उस अलौकीक द्श्य के बारे में यहा पर मन रखकर टीका नही कर सकता।
    Last edited by Krishna; 18-07-2016 at 05:32 PM.

  6. #6
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    जब में महाराष्ट्र के पर्यटन पर था, तब एक समय शोलापुर के पास के एक गाँव में रहने को हुआ था । एक रात को एक खेडुत मुझे आपने खेतर में ले गया। वहा मुझे सम्मान दिया गया और सत्कार किया। पर वहा पर खेत में एक यंत्र जोर जोर से अवाज कर रहा था तो मेने उस खेडुत से कहा और पास वाले खेत में रात को सोने को व्यवस्था कर दो और वह राजी हो गया, और वहां पर मैं सो गया।
    Last edited by Krishna; 18-07-2016 at 05:34 PM.

  7. #7
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    मेरी आदत की हिसाब से मैं प्रात: तीन बजे उठ गया। मेरे नियम का हिसाब से में ध्यान में बैठने की तैयारी कर रहा था तब एक विचित्र तत्व की मौजूदगी मेरे आस-पास मुझे ऐहसास होने लगी। मेरे सामने एक रुपेरी रेखावाली मानवआकृति मैंने देखी। वह मुजसे 10 फुट दुर थी। वह जमीन से आशरे 3 फुट ऊपर थी। उसको कोई टेका या आशरा नही था।
    Last edited by Krishna; 18-07-2016 at 05:36 PM.

  8. #8
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    मेरे विशाल पर्यटन में मैंने अनेक एसे मूर्तीकरणो तत्वो को देखा था, मगर आँखो के सामने देखने का यह पहला प्रसंग था। सच पूंछो तो मुझे ऐसे अनुभव की मैं आशा कर रहा था। आनंद और कौतहूल-भरी मुखमुद्रा के साथ मैएँ त्रांसी नजर से उस आकृति को देखने लगा, और वह क्या प्रतिकार्य करेगा उसकी में राह देख रहा था।
    प्रेतात्माने मुजे कहाँ – मित्र, सुप्रभातम्। मेने भी उसे जवाब दीया सुप्रभातम्।
    उसके बात मेने उसके साथ बातें करनी शरू की। वह अख्लीत अंग्रीजीमें बोल रहा था। उसका स्वर कठोर, मर्दाना जेसा था।
    हमारा वार्तालाप 2 घंटे चला। मेरे वाचको को उसके यह प्रसंगसे कुछ ज्ञान-लाभ होगा यह सोच कर में यहा पर उस प्रसंग को लिख रहा हूँ | और मेरे कुछ चुने हुए सवालो और उस प्रेतात्माका उत्तरो को यहा पर लिख रहा हूँ
    Last edited by Krishna; 18-07-2016 at 05:40 PM.

  9. #9
    कर्मठ सदस्य ramsingh111's Avatar
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    अद्गभूत आरम्भ
    • लाजमी तो नही है कि तुझे आँखों से ही देखूँ..
      तेरी याद का आना भी तेरे दीदार से कम नही






  10. #10
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    में (1) आपने किस उद्देश्य से कृपा करके मेरे सामने प्रगट हुए?
    प्रेतात्मा मनुष्य की सोबतका प्रेम।
    में (2) आप मुजे बतायेगे की आप पूर्वजन्ममें क्या थे, और इस स्थितिमें कहा से आ गये?
    प्रेतात्मा मेरा नाम चिंदबर कुलकर्णी। में यहा पास के शहेरमें एक होटल चला रहा था। जीसको आपने भूतकाल याद रहता हे उस नसीब वाले प्रेतात्माओ में से में एक हु। कुदरतकी योजना के अनुसार मेरा मानव शरीर आठ वर्ष पहेला नाश हुआ था।
    में (3) आप जब चिंदबर कुलकर्णी थे तब आपके पास यह भुतकालका ज्ञान रखनेकी शक्ति आपके पास थी?
    प्रेतात्मा नही, मेरे स्थूल शरीरके नाश होने के बाद मुजे यह शक्ति प्राप्त हुए है।
    Last edited by Krishna; 18-07-2016 at 05:52 PM.

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