Page 12 of 12 प्रथमप्रथम ... 2101112
Results 111 to 115 of 115

Thread: ***** वो भयानक ७२ घंटे *****

  1. #111
    कर्मठ सदस्य pkpasi's Avatar
    Join Date
    Jun 2009
    Location
    Pratapgarh(u.p.)
    आयु
    30
    प्रविष्टियाँ
    1,577
    Rep Power
    11
    नरेन्द्र भाई आप कहा हो
    मौत को लोग यूहि बदनाम करते है तकलीफ तो जिंदगी देती है

  2. #112
    सदस्य narendraK's Avatar
    Join Date
    Aug 2016
    प्रविष्टियाँ
    206
    Rep Power
    3
    “मैं कहां हूं?” चारों तरफ़ स्याह अंधेरे में मैं अकेला था, दूर दूर तक अंधेरे और सन्नाटा पसरा था। “गदाधर! गदाधर! …...…..” कहीं दूर से कोई आवाज़ मेरे कानों में पड़ी, धीरे-धीरे मुझे होश आ रहा था। मेरा सिर चकरा रहा था, तभी वो आवाज़ फिर से गूंजी “गदाधर!!!! ...…...”, मैंने उठने की कोशिश की लेकिन जैसे मेरे पैर सुन्न हो गए थे, सारा बदन पत्थर की तरह अकड़ रहा था। मैंने पूरी शक्ति लगाकर आवाज़ की दिशा में रेंगता हुआ बढ़ने लगा, शरीर का एक-एक इंच जैसे मनों वजनी था, अभी कुछ ही दूर पहुंचा था कि तभी एक हाथ दिखाई दिया, शायद यही व्यक्ति मुझे आवाज़ दे रहा था लेकिन ये मेरा नाम कैसे जानता है? खैर जो भी हो अब सब पता लग जाएगा, “कौन है?...” मैंने आवाज़ लगाई लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। मैंने सरककर उस हाथ को स्पर्श किया तो जैसे मुझे झटका सा लगा, हाथ बर्फ़ सा ठंडा था, कुछ सोचकर मैंने उस हाथ को पकड़कर उठने की कोशिश की लेकिन वो हाथ पूरा का पूरा मेरे हाथ में आ गया, मेरी तो जैसे चीख ही निकाल गई उस कटे हुए हाथ को देखकर। उस हाथ का खून जम चुका था शायद कई दिनों से यहीं पर पड़ा हुआ था, ….. मेरा तो जैसे दिमाग सुन्न पड़ गया था, कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है तभी खून की एक धार बहते हुए मेरे हाथ पर गिरी और मैंने उस हाथ को झटके से फेंक दिया। ना जाने क्यों ऐसा लग रहा था जैसे उस कटे हाथ से मेरा गहरा संबंध था।

    “गदाधर!.....” तभी वो आवाज़ फिर से गूंजी, यह जगह बड़ी ख़तरनाक है मुझे यहां से निकलना ही होगा, मैंने अपनी पूरी शक्ति एकत्रित की और जैसे-तैसे खड़ा हुआ। आवाज़ मेरे बाए तरफ़ से आई थी, में लड़खड़ाता हुआ उस तरफ़ चल पड़ा लेकिन वो मंजर बड़ा ही वीभत्स था, चारों तरफ़ खून ही खून और कटे हुए अंग थे, कहीं पर कटे सिर तो कहीं पर कटे हाथ पैर, एक सिर तो इतना फट गया था कि चेहरा पहचानना भी मुश्किल था, कई धड़ों से सिर गायब थे, एक शव का पेट पूरा फटा हुए था जिससे पसलियां तक दिख रही थी और आंते काफी दूर तक बिखरी हुई थी। यह भयानक मंजर देखकर मुझे तो उबकाई आ गई और में पास ही उल्टी करने लगा। काफी देर बाद मैंने खुद को संभाला और चलने को उठा तभी ठीक मेरे पीछे से आवाज़ आई “गदाधर!!.……” मैं बिजली की गति से मुड़ा, सामने एक गड्ढे में एक बुरी तरह से घायल बूढ़ा व्यक्ति कराह रहा था, वो जगह जगह से घायल था और शायद अपनी अंतिम सांसे ले रहा था।

    मैं उसके पास पहुंचा और कुछ बोलता उससे पहले ही वो बूढ़ा व्यक्ति बोला “तुम! ….. तुम आ गए गदाधर!...”, “जी मैं गदाधर नहीं……..” मेरी बात पूरी हुए बिना वो बोला “बड़ी देर कर दी तुमने आने में, …… देखो! सब खत्म हो गया!” मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि ये बूढ़ा क्या कह रहा है, में बोला “आप कौन हैं बाबा?….… और मैं गदाधर नहीं हुं!”, मेरी बात को अनसुना कर वो बोला “वो ले गए उसे .….. वो ले गए……..” बाबा की आंखों से आंसू बह निकले। “किसको ले गए बाबा? ……. और कौन ले गया?” मैंने सवाल किया तो बूढ़े ने मेरी तरफ देखा, उसकी आंखें जैसे मेरे व्यक्तित्व को भेद रही थी, वो कुछ पलों तक मुझे देखता रहा और फिर उसकी आंखें बंद हो गई। “बाबा!..” मैंने आवाज़ लगाई पर कोई जवाब नहीं, मैंने थोड़ा पास जाकर फिर पुकारा “बाबा!.….. बाबाजी??.....”। “क्या यह मर गए?..” मैंने खुद से ही सवाल किया, मैं उसके एकदम करीब जाकर घुटनों के बल बैठ गया अब मैं बूढ़े के चेहरे को अच्छी तरह देख सकता था, बाबा की सांसे एकदम मंद गति से चल रही थी, थोड़ी देर बाद वो भी बंद हो गई, शायद वो बूढ़ा मर चुका था। मैं कुछ पलों तक उसके निस्तेज चेहरे की ओर देखता रहा, मेरा मस्तिष्क एकदम सुन्न हो रहा था, मैं वहां से चलने के लिए उठा ही था कि अचानक उस बूढ़े ने मेरा हाथ कसकर पकड़ लिया, में तो बुरी तरह घबरा गया और अपना हाथ छुड़ाने का प्रयास करने लगा लेकिन उसकी जकड़ फ़ौलादी थी, ना जाने उसमें इतनी शक्ति कहां से आ गई थी। मैं अपना हाथ छुड़ाने के लिए अपने दोनों हाथों का जोर लगाने लगा तभी वो बूढ़ा बोला “वचन!..... वचन दो!! वचन दो….. गदाधर!!.....” मेरा पूरा ध्यान मेरा हाथ छुड़ाने में था फिर भी मैं पूछ बैठा “छोड़ो मुझे!! …...कैसा वचन?”, “वचन दो कि तुम उसकी रक्षा करोगे, ..…… वचन दो!!! ….….. कि तुम उसको उन शैतानों से बचाओगे??? ...……” उसकी पकड़ से छूटना बहुत ही मुश्किल था और यहां में एक पल भी नहीं रहना चाहता था, “वचन दो!! ….. पुत्र!”, मैंने पीछा छुड़ाने के लिए कहा “मैं वचन देता हूं!..... लेकिन……”, इससे पहले मेरी बात पूरी होती वो बूढ़ा मर चुका था।
    चारों तरफ़ घने अंधेरे का साथ देने घन काले बादल उमड़ उमड़ कर छा रहे थे, तभी एक जोरदार चीख ने पूरा आसमान गुंजा दिया, किसी स्त्री की करुण चीत्कार से मेरा सिर फटा जा रहा था, काला आसमान उसकी दर्दनाक चीख़ों से लाल हो गया था, मैंने अपने कानों पर कस के हाथ रखा लेकिन वो चीखें मेरी आत्मा तक को हिला रही थी, दर्द अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था और मैं चीख पड़ा।

    दर्द अभी भी मेरे दिमाग की नसों को फाड़ने पर तुला हुआ था लेकिन मेरा पूरा बदन पत्थर की तरह सुन्न था, मैं अपने हाथ पैरों को हिला भो नहीं पा रहा था, “ये क्या हो रहा है मुझे!” मैंने झल्लाते हुए ख़ुद से ही कहा कि वो दर्दनाक चीख फिर गूंजी लेकिन इसबार वो चीख कहीं पास से ही आई थीं, “क्या हो रहा है वहां??..” मैंने जोर से आवाज लगाई पर उन दर्दनाक चीखों में मेरी आवाज़ दबकर रह गई।
    “किसी स्त्री पर घोर अत्याचार हो रहा है……” में उठने की कोशिश करने लगा लेकिन मेरी एक एक अंगुली जैसे कई टन वजनी हो गई थी, में पसीने से लथपथ हो गया। मैं किसी छोटे से अंधेरे कमरे में था, उस स्त्री की पुकार मुझे बैचैन कर रही थी, “क्या मेरे होते हुए उस स्त्री पर अत्याचार हो जाएगा??..... क्या मैं इस अधर्म को नहीं रोक सकूंगा???” यह सवाल मेरी आत्मा को झिंझोड़ रहा था, “नहीं!!! ….” मैंने अपनी सम्पूर्ण शक्ति एकत्रित की, मेरे बदन से पसीना फूट रहा था और घाव से खून भी बह रहा था लेकिन मुझे उठना होगा!.... धीरे धीरे मेरे हाथ हिले फिर पैर, एक झटके से मैं खटिया से नीचे गिर पड़ा। मेरा पूरा बदन कांप रहा था, मैं इंच दर इंच दरवाजे की तरफ सरक रहा था, उस स्त्री की आवाज़ मुझे बैचैन कर रही थी, “मुझे कुछ करना होगा उसे बचाने के लिए…” मन ही मन में मैंने सोचा फिर अचानक एक विचार मेरे दिमाग में आया “कहीं….. कहीं ये नंदिनी की आवाज़ तो नहीं?” “नहीं मुझे उठना ही होगा!....”।

    मैंने दरवाजे को खोलने की कोशिश की लेकिन वो बाहर से बंद था, उस लड़की की चीखें मेरे कानों के साथ मेरी आत्मा को भी चीर रही थी। मेरे दो तीन धक्कों से दरवाजा टूट गया, मैं गिरता पड़ता किसी तरह उस कमरे में पहुंचा जहां से उस लड़की के चीखने की आवाज़ आ रही थी, अंदर का मंज़र रौंगटे खड़े कर देने वाला था।

    एक अंग्रेज एक अठारह साल की लड़की के साथ दुष्कर्म कर रहा था, लड़की के कपड़े तार तार हो रहे थे और दो अंग्रेज वहीं बंदूक के साथ खड़े थे ताकि कोई भी रोके तो उसे गोली मार सके। वहीं नीचे बगल में एक बूढ़े की लाश पड़ी हुई थी, गोली उसके सिर में लगी थी जिससे खून अभी भी रिस रहा था। “अब मैं क्या करूं?..” मैंने खुद से सवाल किया, “अगर उसे बचाने गया तो जान जा सकती है लेकिन वो लड़की?..... उसका क्या होगा??…..”। मेरे पास समय बहुत ही कम था, वो लड़की जबर्दस्त विरोध कर रही थी लेकिन शायद उसकी शक्ति भी जवाब दे रही थी, अगर कुछ पलों में निर्णय नहीं लिया तो वो अंग्रेज उस लड़की की इज्जत लूटने में सफल हो जाएगा।

    अचानक मेरी नज़र उस अंग्रेज अफसर की पिस्तौल पर पड़ी जो उसने टेबल के पास अपने बेल्ट के साथ रख दी थी। मैं जमीन पर लेट गया और टेबल की तरफ सरकने लगा, उस कमरे में सिर्फ बीच में ही रोशनी थी और कोने में अंधेरा इसलिए किसी ने मुझे नोटिस नहीं किया, टेबल के पास पहुंचते ही मैंने पिस्तौल उठा लिया लेकिन उसमे सिर्फ एक ही गोली थी, “अब क्या करूं?..”। कुछ सोचकर मैं चुपके से दोनों गार्ड्स के पीछे पहुंचा, उन दोनों गार्ड्स का ध्यान उस बेचारी लड़की के निर्वस्त्र होते अंगों पर था, मैंने पिस्तौल की मूठ से एक गार्ड के सिर पर प्रहार किया, तभी दूसरे गार्ड ने मुझे देख लिया लेकिन इससे पहले वो मुझ पर अपनी भारी बंदूक से गोली दागता, मैंने उस पर गोली चला दी। दोनों गार्ड्स धराशाई हो गए, ये देखकर अंग्रेज अफसर मेरे हाथ में बंदूक देखकर उस लड़की से दूर हट गया। वो लड़की बुरी तरह तो रही थी, उसके तार तार कपड़ों से उसका पूरा बदन झांक रहा था, मैंने पास ही पड़ी चादर उठाई और उसके ऊपर डालने के लिए झुका ही था कि मेरे सिर पर जोरदार प्रहार हुआ।
    “YOU BLACK DOG!!...” उस अंग्रेज अफसर ने बड़ी लकड़ी से मेरे सिर पर मारा था, मेरा चेहरा खून से रंग गया और मैं नीचे गिर पड़ा। “मैं सोच रहा था कि मेरे पास पिस्तौल देखकर वो भाग जाएगा पर में गलत था,...” वो अंग्रेज अफसर मेरे ऊपर चढ़ बैठा और बोला “टूम क्या समझता है, आई एम फूल???... मैं हमेशा एक ही गोली रखता है मेरा गन में…” “YOU INDIAN DOG??!!!...... मैं तुझे कुत्ते की मौत मारूंगा” इतना कहते ही उसके हाथ मेरी गर्दन पर जकड़ गए, मैंने छूटने की कोशिश की लेकिन उसकी पकड़ बहुत ही मजबूत थी। मेरी आंखें उबलकर बाहर आ रही थी, मैं सांस नहीं ले पा रहा था, फेफड़े प्राणवायु के लिए लगातार संघर्ष कर रहे थे। मेरी आंखों के आगे अंधेरा छाने लगा, अगर कुछ पलों में मैं इससे नहीं छूट पाया तो यही मेरा अंत होगा। मेरी सांसे थमने लगी तभी मैंने एक जोरदार चीख सुनी, अचानक अंग्रेज़ की पकड़ ढीली पड़ गई और मैंने अपने फेफड़ों में भरपूर हवा भर ली। थोड़ी देर संयत होने पर देखा तो अंग्रेज अफसर वहीं पर मृत पड़ा हुआ था और उस लड़की के हाथ में वहीं भारी लकड़ी थी जिसे वो अंग्रेज भी मुश्किल से उठा पाया था। उस लड़की ने अपने एहसान का बदला बड़ी ही जल्दी चुका दिया।

    उपदेशोऽहि मूर्खाणां प्रकोपाय न शांतये। पयःपानं भुजंगानां केवलं विषवर्धनम्॥

  3. #113
    सदस्य narendraK's Avatar
    Join Date
    Aug 2016
    प्रविष्टियाँ
    206
    Rep Power
    3
    कृपया मात्राओं में त्रुटियो के लिए क्षमा करें ये फ़ोन के टाइपिंग कीबोर्ड की वजह से है|
    उपदेशोऽहि मूर्खाणां प्रकोपाय न शांतये। पयःपानं भुजंगानां केवलं विषवर्धनम्॥

  4. #114
    वेबमास्टर Loka's Avatar
    Join Date
    Jan 2009
    Location
    भारत
    आयु
    30
    प्रविष्टियाँ
    860
    Rep Power
    300
    Quote Originally Posted by narendraK View Post
    कृपया मात्राओं में त्रुटियो के लिए क्षमा करें ये फ़ोन के टाइपिंग कीबोर्ड की वजह से है|
    बहुत ही बढ़िया अपडेट था, पढ़कर आनंद आ गया |
    धन्यवाद नरेन्द्र जी अपडेट के लिए |
    लोग मुझ पर हँसते है क्यों की मैं सबसे अलग हूँ, मैं उन पर हँसता हूँ क्यों की वो सब एक जैसे है |

  5. #115
    कर्मठ सदस्य pkpasi's Avatar
    Join Date
    Jun 2009
    Location
    Pratapgarh(u.p.)
    आयु
    30
    प्रविष्टियाँ
    1,577
    Rep Power
    11
    भैया जी यू कछुए की तरह अपडेट देगे तो ये सुन्दर कहानी कब पूरी होगी।
    मौत को लोग यूहि बदनाम करते है तकलीफ तो जिंदगी देती है

Page 12 of 12 प्रथमप्रथम ... 2101112

Thread Information

Users Browsing this Thread

There are currently 1 users browsing this thread. (0 members and 1 guests)

Bookmarks

Posting Permissions

  • You may not post new threads
  • You may not post replies
  • You may not post attachments
  • You may not edit your posts
  •