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Thread: किस हाथ में धारण करें रत्न?

  1. #1
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    Cool किस हाथ में धारण करें रत्न?

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    रत्न-धारण के सम्बन्ध में प्रायः यह कहा जाता है कि पुरुष को रत्न दाहिने हाथ में एवं स्त्री को रत्न बायें हाथ में धारण करना चाहिए। इस बारे में यह भी कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति बायें हाथ से कामकाज करता है अथवा कोई स्त्री पुरुषों की भाँति कामकाज करती है तो भी स्त्री को बायें एवं पुरुष को दाएँ हाथ में ही रत्न धारण करना चाहिए।
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  2. #2
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    रत्न-धारण की यह प्रथा निःसन्देह रत्न-धारण नियमों के प्रतिकूल है। कौन सा रत्न किस हाथ की ऊँगली में धारण करना चाहिए इस बारे में विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य हड़बड़ानन्दजी महाराज गड़बड़ानन्द का अनमोल मत नीचे दिया जा रहा है-
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  3. #3
    कर्मठ सदस्य Rajat Vynar's Avatar
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    रत्न-धारण के लिए स्त्री और पुरुषों के अनुरूप हाथ का चयन करने से रत्नों का मनोवांछित फल प्राप्त नहीं होता। अतः हाथ का चयन रत्नों की प्रकृति के अनुसार किया जाना चाहिए। रत्नों की प्रकृति के अनुसार माणिक्य, मूँगा, पुखराज और हीरा गर्म रत्न कहलाते हैं तथा मोती, पन्ना, नीलम, गोमेद और लहसुनिया ठण्डे रत्न कहलाते हैं।
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  4. #4
    कर्मठ सदस्य Rajat Vynar's Avatar
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    चिकित्सा शास्त्र की मान्यता के अनुसार पुरुष का दायाँ हाथ व महिला का बायाँ हाथ गर्म होता है। इसी प्रकार पुरुष का बायाँ हाथ व महिला का दायाँ हाथ ठण्डा होता है।
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  5. #5
    कर्मठ सदस्य Rajat Vynar's Avatar
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    अतः ठण्डे रत्न ठण्डे हाथ में व गर्म रत्न गर्म हाथ में धारण करना चाहिए जिससे रत्न-धारण का सम्पूर्ण फल प्राप्त हो।

    (अभी और है!)
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  6. #6
    कर्मठ सदस्य Rajat Vynar's Avatar
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    रत्न-धारण के लिए ऊँगली का निर्धारण :

    आइए, अब जानते हैं- कौन सा रत्न किस ऊँगली में धारण करना चाहिए।

    सूर्य :

    सूर्य का रत्न माणिक है और इसका उपरत्न सूर्यकान्तमणि और गार्नेट (GARNET) है। माणिक और इसके उपरत्न अनामिका ऊँगली में पहने जाते हैं। वैसे तो अनार के दाने जैसा रंग वाला माणिक अधिक महँगा और उत्तम समझा जाता है, किन्तु आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि यह एक मिथक है और असली माणिक धारण करना साधारण इन्सान के बस से बाहर होता है, क्योंकि अनुशंसित (Recommended) वजन का असली माणिक लगभग 8 से 10 लाख रुपए का आता है। असली माणिक की आभा निराली होती है और उससे सूर्य के रंग का लाल रंग का प्रकाश निकलता है। माणिक की महत्ता में एक चर्चित लोकोक्ति भी है- 'हीरे की दलाली में माणिक चलता है'! असली माणिक तो आपको देखने के लिए भी नहीं मिलेगा, क्योंकि असली माणिक बड़े रत्न-व्यापारी ही रखते हैं और सिर्फ़ साख वाले बड़े ग्राहकों को ही दिखाते हैं। अतः हमारी राय में बर्मा के माणिक के स्थान पर माणिक का उपरत्न गार्नेट धारण करना चाहिए, क्योंकि सस्ता होने के वावजूद यह अपना चमत्कारपूर्ण प्रभाव दिखाता है।
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  7. #7
    कांस्य सदस्य Sumer S. Siswal's Avatar
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    हरित प्रदेश हरियाणा
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    भाई मैं सीधे हाथ की पहली ऊँगली में सुनहला पहनता था, मैंने किसी के कहने अब उसी ऊँगली में सुनहला के स्थान पर पुखराज धारण किया है l
    क्या पुखराज भी सुनहले की भांति असर दिखायेगा ?
    न.1 हरियाणे का न. 1 हरयाणवी

  8. #8
    कर्मठ सदस्य Rajat Vynar's Avatar
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    Quote Originally Posted by Sumer S. Siswal View Post
    भाई मैं सीधे हाथ की पहली ऊँगली में सुनहला पहनता था, मैंने किसी के कहने अब उसी ऊँगली में सुनहला के स्थान पर पुखराज धारण किया है l
    क्या पुखराज भी सुनहले की भांति असर दिखायेगा ?
    पुखराज भी एक तरह से उपरत्न ही है, क्योंकि गुरू का रत्न yellow sapphire होता है, किन्तु पुखराज सुनहला से अधिक लाभकारी होता है। आपको दाएँ हाथ की तर्जनी में ही पुखराज धारण करना चाहिए जैसा कि आप पहने हैं। देर से उत्तर के लिए क्षमा।
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