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Thread: अजीबो गरीब मंदिर

  1. #51
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    कर्ण मंदिर, उत्तराखंड

  2. #52
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    महाभारत के एक बदकिस्मत पात्र और पांडवों के विरोधी, कर्ण की पूजा उत्तरकाशी के देवरा में की जाती है। पांडव भाई-बहनों में सबसे धर्मी और दानवीर, कर्ण, कौरवों की तरफ से लड़े थे। क्योंकि उन्होंने बुराई का साथ दिया इसलिए वह भी खलनायक माने जाते हैं।

    ऐसा माना जाता है कि कर्ण ने सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए इस स्थान पर ध्यान किया था। इसलिए, इस स्थान को कर्णप्रयाग के नाम से भी जाना जाता है। एक अन्य कहानी यह भी है कि भगवान कृष्ण ने अर्जुन के हाथों कर्ण की मृत्यु के बाद उसका अंतिम संस्कार यहीं किया था।

    लकड़ी से निर्मित कर्ण का मंदिर आकार में रेक्टैंगुलर है, जो कि पारंपरिक हिंदू मंदिरों से बिलकुल अलग है। आज, लोग अपनी इच्छा पूरी होने पर श्रद्धांजलि के रूप में इस मंदिर की दीवारों पर सिक्के फेंकते हैं।


  3. #53
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    गांधारी मंदिर, मैसुरु


  4. #54
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    कौरवों की माँ गांधारी को पांडवों के खिलाफ होने के कारण एक नकारात्मक चरित्र के रूप में देखा जाता है। हालांकि, अपने पति और बच्चों के लिए उनके समर्पण की भावना से कम ही लोग असहमत होंगे।

    विवाह के बाद जीवन भर अंध बने रहने का निर्णय उसके मजबूत चरित्र और पति के प्रति वफादारी का द्योतक था। इस भक्ति और निष्ठा से प्रभावित होकर मैसूर के एक समुदाय ने 2.5 करोड़ की अनुमानित लागत से 2008 में एक गांधारी मंदिर का निर्माण किया।

  5. #55
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    भीष्म मंदिर, प्रयागराज

  6. #56
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    भीष्म पितामह एक ऐसा पात्र था जिन्हें अपने व्रत से बंधे होने के कारण अंत समय तक कौरवों के लिए लड़ना पड़ा। प्रयागराज में एक मंदिर उनके लिए समर्पित है जहाँ उन्हें तीरों के बिस्तर पर सोते हुए दिखाया गया है।

    यह मंदिर, प्रसिद्ध नागवासुकी मंदिर के पास दारागंज में स्थित है। जबकि कुरुक्षेत्र में एक और भीष्म मंदिर है लेकिन प्रयागराज मंदिर ज्यादा लोकप्रिय है।

    इन मंदिरों का होना इस बात का प्रमाण है कि हर किसी में एक अच्छाई भी छिपी होती है। किसी ने इन बुरे पात्रों की अच्छाईयों को ध्यान किया और उन पर प्रकाश डाला।


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