Results 1 to 2 of 2

Thread: क्या दुःख है, समंदर को बता भी नहीं सकता

  1. #1
    सदस्य anita's Avatar
    Join Date
    Jun 2009
    प्रविष्टियाँ
    33,949
    Rep Power
    300

    क्या दुःख है, समंदर को बता भी नहीं सकता

    क्या दुःख है, समंदर को बता भी नहीं सकता
    आँसू की तरह आँख तक आ भी नहीं सकता

    तू छोड़ रहा है, तो ख़ता इसमें तेरी क्या
    हर शख़्स मेरा साथ, निभा भी नहीं सकता

    प्यासे रहे जाते हैं जमाने के सवालात
    किसके लिए ज़िन्दा हूँ, बता भी नहीं सकता

    घर ढूँढ रहे हैं मेरा , रातों के पुजारी
    मैं हूँ कि चराग़ों को बुझा भी नहीं सकता

    वैसे तो एक आँसू ही बहा के मुझे ले जाए
    ऐसे कोई तूफ़ान हिला भी नहीं सकता.
    सभी उपस्थित मित्रो से निवेदन है फोरम पे कुछ न कुछ योगदान करे,अपनी रूचि के अनुसार किसी भी सूत्र में अपना योगदान दे सकते है,या फिर आप भी कोई नया सूत्र बना सकते है

  2. #2
    सदस्य anita's Avatar
    Join Date
    Jun 2009
    प्रविष्टियाँ
    33,949
    Rep Power
    300
    हर शख़्स मेरा साथ, निभा भी नहीं सकता
    सभी उपस्थित मित्रो से निवेदन है फोरम पे कुछ न कुछ योगदान करे,अपनी रूचि के अनुसार किसी भी सूत्र में अपना योगदान दे सकते है,या फिर आप भी कोई नया सूत्र बना सकते है

Thread Information

Users Browsing this Thread

There are currently 1 users browsing this thread. (0 members and 1 guests)

Bookmarks

Posting Permissions

  • You may not post new threads
  • You may not post replies
  • You may not post attachments
  • You may not edit your posts
  •