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Results 11 to 14 of 14

Thread: कुछ छंद

  1. #11
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    'चन्द' नसीहत सुनीऐ, करनैहार की
    दीन होइ ख़ुश राखो, खातर यार की
    मारत पाय कुहाड़ा, सख्ती जो करै
    हो नरमायी की बात, सभन तन संचरै।
    सभी उपस्थित मित्रो से निवेदन है फोरम पे कुछ न कुछ योगदान करे,अपनी रूचि के अनुसार किसी भी सूत्र में अपना योगदान दे सकते है,या फिर आप भी कोई नया सूत्र बना सकते है

  2. #12
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    'चन्द' कहत है काम चेष्टा अति बुरी
    शहत दिखायी देत, हलाहल की छुरी
    जिंह नर अंतरि काम चेष्टा अति घनी
    हो हुइ है अंत खुआरु, बडो जो होइ धनी।
    सभी उपस्थित मित्रो से निवेदन है फोरम पे कुछ न कुछ योगदान करे,अपनी रूचि के अनुसार किसी भी सूत्र में अपना योगदान दे सकते है,या फिर आप भी कोई नया सूत्र बना सकते है

  3. #13
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    'चन्द' प्यारे मिलत होत आनन्द जी
    सभ काहूं को मीठो, शर्बत कन्द जी
    सदा प्यारे संगि, विछोड़ा नाहिं जिस
    हो मिले मीत सिउं मीत, एह सुख कहे किस।
    सभी उपस्थित मित्रो से निवेदन है फोरम पे कुछ न कुछ योगदान करे,अपनी रूचि के अनुसार किसी भी सूत्र में अपना योगदान दे सकते है,या फिर आप भी कोई नया सूत्र बना सकते है

  4. #14
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    'चन्द' कहत है ठउर, नहीं है चित जिंह
    निस दिन आठहु जाम, भ्रमत है चित जिंह
    जो कछु साहब भावै, सोई करत है
    हो लाख करोड़ी जत्न, किए नहीं टरत है।
    सभी उपस्थित मित्रो से निवेदन है फोरम पे कुछ न कुछ योगदान करे,अपनी रूचि के अनुसार किसी भी सूत्र में अपना योगदान दे सकते है,या फिर आप भी कोई नया सूत्र बना सकते है

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