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Thread: मनहूस गीत

  1. #71
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    (रेज़ो सेरेस के संगीत पर आधारित László Jávor द्वारा लिखा गया हंगेरियन गीत Szomorú vasárnap)

  2. #72
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    ('ग्लूमी सण्डे' का विश्वप्रसिद्ध बिल्ली हॉलिडे संस्करण)

  3. #73
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    ('ग्लूमी सण्डे' के विश्वप्रसिद्ध बिल्ली हॉलिडे संस्करण पर बना एक अन्य वीडियो)

  4. #74
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    तो ये थे विश्वप्रसिद्ध हंगेरियन सुसाइड साँग 'ग्लूमी सण्डे' के कुछ मुख्य संस्करण। यूट्यूब पर उपलब्ध न होने के कारण Sam M. Lewis और Desmond Carter का गीत यहाँ पर नहीं दिया जा सका। अब पाठकों के एक मुख्य यक्ष-प्रश्न का जवाब भी यहाँ पर देते चलें। वह यह कि 'ग्लूमी सण्डे' के प्रथम भारतीय संस्करण 'ज़िन्दग़ी उदास है' गीत का रेज़ो सेरेस के संगीत के साथ रिकार्ड किया हुआ संस्करण कब आएगा? तो इसका उत्तर यह है कि इस समय हमारे पास हिन्दी भाषा में गाने वाले गायक-गायिका उपलब्ध नहीं हैं जिससे इस गीत को रेज़ो सेरेस के संगीत के साथ रिकार्ड किया जा सके। अतः जैसे ही हमें गायक-गायिका उपलब्ध होंगे, हम इस गीत का दो अलग-अलग संस्करण (मेल और फ़ीमेल वर्ज़न) रेज़ो सेरेस के संगीत के साथ रिकार्ड करके यूट्यूब पर रिलीज़ कर देंगे।

  5. #75
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    आइए, अब कुछ बात करते हैं बाबाई काम-धंधे की। वैसे तो हमें पूरी उम्मीद है कि आपने हमारे बताए गए सुरक्षित फण्डे पर चलते हुए बड़े ही एहतियात के साथ हंगेरियन सुसाइड साँग 'ग्लूमी सण्डे' का पूरा लुत्फ़ लिया होगा, किन्तु यदि आपने हमारा लेख पूरा पढ़े बिना खुद गूगल बाबा की दया-कृपा से यूट्यूब पर जाकर रेज़ो सेरेस का ख़तरनाक जानलेवा संगीत बिना किसी एहतियात के सुन लिया है तो घबराने की कतई ज़रूरत नहीं है, क्योंकि हमारे ऑनलाइन बाबाई संस्थान ने संगीतप्रेमियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए बड़ी ही मेहनत से 'पूजा-अर्चना-तपस्या-यज्ञ' इत्यादि द्वारा 'रेज़ो सेरेस संगीत रक्षा कवच' बनाया है जो देखने में बड़े ताबीज़ की तरह लगता है। 'रेज़ो सेरेस संगीत रक्षा कवच' में हमने सिद्ध किए हुए कई ईंट-पत्थर भरे हैं। इस चमत्कारी रक्षा कवच को गले में पहनकर रेजो सेरेस का संगीत सुनने पर आप पूरी तरह से सुरक्षित रहेंगे और यदि आपने बिना एहतियात बरते रेज़ो सेरेस का संगीत सुन भी लिया है तो भी इस चमत्कारी रक्षा कवच को गले में पहनते ही आप रेज़ो सेरेस संगीत के मनहूस जानलेवा प्रभाव से एकदम मुक्त हो जाएँगे। एक किलो वजन वाले 'रेज़ो सेरेस संगीत रक्षा कवच' का दाम वैसे तो पाँच करोड़ एक रुपया है लेकिन हमारे विशेष 'वालैन्टाइन डे सेल' के तहत १४ फरवरी तक आपको दी जा रही है विशेष छूट जिसमें आपको इस चमत्कारी 'रेज़ो सेरेस संगीत रक्षा कवच' के लिए देने होंगे सिर्फ़ पाँच लाख एक रुपए। पहला दस आर्डर करने वालों को एक रुपए मूल्य का एक माचिस एकदम मुफ्त में मिलेगा। सुनहरा मौका हाथ से न जाने दें और अभी आर्डर करें। हमारा नम्बर है- 420 420 420.

    दोस्तों, देश-विदेश के तमाम लोगों ने हमारा 'रेज़ो सेरेस संगीत रक्षा कवच' खरीदकर फ़ायदा उठाया है। आइए, जानते हैं- हमारे चमत्कारी 'रेज़ो सेरेस संगीत रक्षा कवच' के बारे में हमारे ग्राहकों का क्या कहना है-



    मेरा नाम मोनालिसा है। मैं ऑस्ट्रेलिया में रहती हूँ। मुझे देश-विदेश घूमने का बड़ा शौक़ है। कुछ महीने पहले मैं अमेरिका गई और वहाँ पर एक रेस्टोरेण्ट में मैंने रेज़ो सेरेस का ख़तरनाक और जानलेवा गीत 'ग्लूमी सण्डे' सुन लिया। गीत सुनने के बाद से मेरे मन में बुरे-बुरे विचार आने लगे और सुसाइड करने का मेरा मन करने लगा। मेरी समझ में बिल्कुल नहीं आ रहा था- मेरे साथ आखिर हो क्या रहा है? कुछ लोगों ने मुझे बताया कि 'ग्लूमी सण्डे' बड़ा ही ख़तरनाक हंगेरियन सुसाइड साँग है जिसे सुनकर लोग सुसाइड करने के लिए मज़बूर हो जाते हैं। यह सब सुनकर मैं बहुत डर गई थी। एक दिन मैंने टी०वी० पर 'फ़ोर ट्वेन्टी शॉपी चैनल' में ऑनलाइन फ्रॉड बाबा जी के चमत्कारी 'रेज़ो सेरेस संगीत रक्षा कवच' के बारे में सुना और मैंने फटाफट आर्डर कर दिया। ऑनलाइन फ्रॉड बाबा जी का चमत्कारी 'रेज़ो सेरेस संगीत रक्षा कवच' पहनते ही मेरे मन में आने वाले बुरे-बुरे विचार एकदम गायब हो गए और मेरी जान बच गई। मैं तो आप सभी से यही कहूँगी कि अगर आपने गलती से भी रेज़ो सेरेस का मनहूस संगीत सुन लिया है तो फटाफट आर्डर करके 'रेज़ो सेरेस संगीत रक्षा कवच' मँगवाकर गले में टाँग लें, जैसे मैं टाँगे हुई हूँ!

    तो दोस्तों, देखा आपने- हमारा 'रेज़ो सेरेस संगीत रक्षा कवच' कितना चमत्कारी है। इतना बड़ा भारी-भरकम कवच पहली बार गले में पहनने में आपको शर्म ज़रूर आएगी, मगर जान है तो जहान है। हम आपको बता दें कि दुनिया के छोटे-माेटे नहीं, बड़े-बड़े लोग भी फ़ैशन के नाम पर गले में पता नहीं क्या-क्या अण्ड-बण्ड भारी-भरकम चीज़ें पहनकर बिना किसी शर्म के घूमते रहते हैं। इसलिए गले में भारी-भरकम 'रेज़ो सेरेस संगीत रक्षा कवच' पहनने में बिल्कुल शर्म न करें और अभी फटाफट आर्डर करें। आपको इस चमत्कारी 'रेज़ो सेरेस संगीत रक्षा कवच' के लिए देने होंगे सिर्फ़ पाँच लाख एक रुपए। पहला दस आर्डर करने वालों को एक रुपए मूल्य का एक माचिस एकदम मुफ्त में मिलेगा। सुनहरा मौका हाथ से न जाने दें और अभी आर्डर करें। हमारा नम्बर है- 420 420 420.

  6. #76
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    तो दोस्तों, हँसी-मज़ाक़ में देखा आपने- मौके का फ़ायदा उठाकर ऑनलाइन बाबा लोग चमत्कार के नाम पर किस तरह लोगों को ठगते हैं! इसके पीछे एक कारण है- चमत्कार का कोई ठोस सुबूत नहीं होता। इसीलिए लोग चमत्कार को नमस्कार कहते हैं और चमत्कार पर आँख बन्द करके ठीक उसी प्रकार विश्वास करते हैं जिस प्रकार ईश्वर को मानने वाले ईश्वर पर विश्वास करते हैं। विज्ञान की कसौटी पर प्रमाणिकता सिद्ध न हो पाने के कारण चमत्कारों को कुछ लोग वहम भी कहते हैं। अतः 'ग्लूमी सण्डे' का संगीत सुनने के बाद यदि आपके मन में वहम के कारण उल्टे-सीधे विचार आ रहे हों तो वर्ष 1978 में लोकार्पित हिन्दी फ़ीचर फ़िल्म 'फूल खिले हैं गुलशन-गुलशन' का यह गीत अवश्य सुनें। आपका मन तत्काल चंगा हो जाएगा-



  7. #77
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  8. #78
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    पता है, पता है- लड़कियाँ पूछ रही हैं कि 'भला हम अपना मन कैसे चंगा करें? गीत का फ़ण्डा हमारे ऊपर ज़रा भी लागू नहीं होता। हमारे लिए भी कुछ सरल उपाय बताइए।' तो इस बारे में हम क्या सलाह दें? आज से 150 साल पहले ही उर्दू और फ़ारसी भाषा के एक प्रसिद्ध कवि ग़ालिब एक शेर कह गए थे, जिसका अनुसरण करना ही मन चंगा करने के लिए बहुत होगा-

    दुनिया में आशिक़ हज़ार हैं ग़ालिब..
    बस बीच पे खड़े होने की देर है!


    शायद ग़ालिब को पहले से ही आभास हो गया था कि एक सदी बाद 'मन्नू भाई मोटर चली पम-पम-पम..' गीत लिखा जाएगा। शायद इसीलिए हिन्दी में एक प्रचलित लोकोक्ति बनी है- 'जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि'

    हमें पता है- ग़ालिब का शेर सुनकर कुछ विद्वानों की भृकुटि तन गई होगी और वे मन ही मन में बुरी तरह भुनभुना रहे होंगे कि 'हमें तो ग़ालिब का अदब पूरा रटा हुआ है। आज तक हमने ऐसा शेर न ही कहीं सुना, न पढ़ा!' अरे, कैसे सुनेंगे जी? हो सकता है- गालिब का यह शेर प्रकाश में न आया हो और प्रकाशित होने से रह गया हो। अब यह मत पूछिएगा- 'जो शेर प्रकाशित होने से रह गया उसके बारे में आपको कैसे पता?', क्योंकि सच्चाई पर आप बिल्कुल यकीन नहीं करेंगे। सच्चाई यह है कि ग़ालिब साहब कुछ शेर अपने बहुत ही ख़ास लोगों को ही सुनाते थे और उस शेर के बारे में किसी को कानोंकान कोई ख़बर नहीं होती थी। ग़ालिब साहब के बहुत ख़ास होने के कारण उन्होंने यह शेर हमें सुनाया था- मगर इस जन्म में नहीं, पिछले जन्म में! क्या कहा? 'आप हाँकने में अव्वल हैं। हमें आपकी बात पर ज़रा भी यकीन नहीं।' अरे, जब आप हमारी इस बात पर यकीन कर सकते हैं कि संगीत सुनने के कारण किसी की जान जा सकती है तो हमारी 'पिछले जन्म वाली बात' पर भी अपनी आँख-नाक-कान-मुँह बन्द करके यकीन करिए।

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