Page 2 of 2 प्रथमप्रथम 12
Results 11 to 14 of 14

Thread: ईश्वर नहीं है!

  1. #11
    वरिष्ठ सदस्य
    Join Date
    Jun 2016
    Location
    Ahmedabad, Gujarat.
    प्रविष्टियाँ
    681
    Rep Power
    2
    ईश्वर है यदि यह एक मान्यता, जुठी मान्यता है तो ईश्वर नहिं है यह भी एक मान्यता हुई या फिर जुठी मान्या ही हुई। यह बखेडा सदियों से चला आ रहा है। यह 70-80 साल जिनेवाला इन्सान क्या साबित कर पाईगा की ईश्वर है या नहीं। मेरे खायल से तो ईश्वर है या नही है यह आवश्यकता नही है पर आप किसी के सामने जुकते है यह आवश्यक है। इश्वर का होना आवश्यक नही आपका जुकना, अंहम का कम होना आवश्यक है। ईश्वर को मानने से, उसकी कल्पना करने से आप उसके प्रति नर्म होगे, अंहम कम होता चला चायेगा और एक समय ऐसा आईगा जब आपका अंहम खत्म हो जायेगा तब आपके लिए ईश्वर का होना या नही होना दोनों का कोई मतलब नही होगा।

    इश्वर एक नियम है कर्मका नियम। नियम के अंतर्गत यहा सारी प्रकृति चल रही है। इसमे न गुण है न दोष है। उसका न आकार है न वह निराकार है। सिर्फ नियम है। बस आपको सिर्फ उस नियम के अनुकूल रहना है। जो लोक इन झमेलो में पडते है वह सिर्फ आपना समय ही बरबाद करते है और 70-80 जीवन यापन करके मृत्यु की गोद में चले जाते है और वह साबित नही कर पाते की ईश्वर है या नहि।
    Last edited by AJAY RATILAL KANKRECHA; 06-03-2018 at 05:14 PM.

  2. #12
    कर्मठ सदस्य MahaThug's Avatar
    Join Date
    Aug 2016
    प्रविष्टियाँ
    1,029
    Rep Power
    3
    Quote Originally Posted by AJAY RATILAL KANKRECHA View Post
    ईश्वर है यदि यह एक मान्यता, जुठी मान्यता है तो ईश्वर नहिं है यह भी एक मान्यता हुई या फिर जुठी मान्या ही हुई। यह बखेडा सदियों से चला आ रहा है। यह 70-80 साल जिनेवाला इन्सान क्या साबित कर पाईगा की ईश्वर है या नहीं। मेरे खायल से तो ईश्वर है या नही है यह आवश्यकता नही है पर आप किसी के सामने जुकते है यह आवश्यक है। इश्वर का होना आवश्यक नही आपका जुकना, अंहम का कम होना आवश्यक है। ईश्वर को मानने से, उसकी कल्पना करने से आप उसके प्रति नर्म होगे, अंहम कम होता चला चायेगा और एक समय ऐसा आईगा जब आपका अंहम खत्म हो जायेगा तब आपके लिए ईश्वर का होना या नही होना दोनों का कोई मतलब नही होगा।

    इश्वर एक नियम है कर्मका नियम। नियम के अंतर्गत यहा सारी प्रकृति चल रही है। इसमे न गुण है न दोष है। उसका न आकार है न वह निराकार है। सिर्फ नियम है। बस आपको सिर्फ उस नियम के अनुकूल रहना है। जो लोक इन झमेलो में पडते है वह सिर्फ आपना समय ही बरबाद करते है और 70-80 जीवन यापन करके मृत्यु की गोद में चले जाते है और वह साबित नही कर पाते की ईश्वर है या नहि।
    संवाद के लिए धन्यवाद!

    वैसे १००-१२० साल जीनेवाले भी ईश्वर का होना साबित नहीं कर सकते। जो थोडे क्षण मर के वापस जिंदा हुए है उन्हें कुछ भी एसा दिखा नहीं जैसा अलग-अलग धर्मग्रंथो में लिखा है। अगर ईश्वर के डर से लोग नर्म होते तो आज ईतनी हिंसा-पाप आदि होते ही नहीं।

    क्रोध, काम, घृणा, लालच, ईर्ष्या ईत्यादि मानवस्वभाव है। ईन्हें महदअंश काबु करने से शांति प्राप्त होती ही है। ईसमें ईश्वर का कोई चमत्कार कहां? यह सब तो प्रकृति के नियम है। जप-तप-योग सभी मानवीय आविष्कार ही तो है!

    खैर, अगर ईश्वर के भय से ही अभी तक और आगे शांति बनी रहनेवाली हो तो ईश्वर होने का कोन्सेप्ट काम कर रहा है।
    महाठग आप ठगाईए, ओर न ठगिए कोय । आप ठगें सुख ऊपजे, ओर ठगें दुःख होय ॥

  3. #13
    वरिष्ठ सदस्य
    Join Date
    May 2016
    प्रविष्टियाँ
    900
    Rep Power
    2
    एक अवधारणा के अनुसार ईश्वर एक आलोकिक ऊर्जा है जो पूरे ब्रह्मांड को पोषित करती है न कि किसी एक देवी देवता को ईश्वर की उपाधि दी जा सकती है।
    पुराने संतो ने और योगियों ने इस ऊर्जा से मिलकर एकाकार किया इसे ही ईश्वर का साक्षात्कार कहा ।

  4. #14
    कर्मठ सदस्य MahaThug's Avatar
    Join Date
    Aug 2016
    प्रविष्टियाँ
    1,029
    Rep Power
    3
    एसी अवधारणाओं के चलते पृथ्वी पर कई शक्तिओं को ईश्वर का नाम दे दिया गया। सुरज, चांद, अग्नि, पानी, वायु ईत्यादि। जब की एसा मानने का कोई सही कारण नहीं था। ईनमें से किसी के बिना भी जीवन संभव था ही नहीं। फिर ईसमें अधिक श्रध्धा जागृत करने हेतु सभी को मानवीय स्वरुप में दर्शाया जाने लगा होगा।
    फिर ईन्हीं सुरज, चांद, अग्नि, पानी, वायु ईत्यादि के नकारात्मक प्रभाव अर्थात सूखा, आग, बाढ़, चक्रावात जैसे रुप को मानवी के बुरे कर्मो की शिक्षा के साथ जोड़ दिया गया। लेकिन अब मानव को अगर १% भी ज्ञानी माना जाए तो भी वह ईन सारी कुदरती शक्तियों के बारे में सब कुछ जान चुका है।
    महाठग आप ठगाईए, ओर न ठगिए कोय । आप ठगें सुख ऊपजे, ओर ठगें दुःख होय ॥

Page 2 of 2 प्रथमप्रथम 12

Thread Information

Users Browsing this Thread

There are currently 5 users browsing this thread. (0 members and 5 guests)

Bookmarks

Posting Permissions

  • You may not post new threads
  • You may not post replies
  • You may not post attachments
  • You may not edit your posts
  •