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Thread: ईश्वर नहीं है!

  1. #41
    कर्मठ सदस्य MahaThug's Avatar
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    हाल ही में चल रहे बुराडी केस भी अंधश्रध्धा के सबसे बड़े प्रतीक के रुप में माना जा रहा है। पता नहीं लोग धर्म के प्रति अंधश्रध्धा रख कर ईसका अपमान तो नहीं कर रहें है! माना गुरु ईश्वर तुल्य है परंतु ईश्वर तो नहीं होता! वह भी अभी मनुष्ययोनि में है। वह जीवन मृत्यु की थियरी को जानता हो, लेकिन अनुभव उसका आपके जीतना ही होगा न???
    महाठग आप ठगाईए, ओर न ठगिए कोय । आप ठगें सुख ऊपजे, ओर ठगें दुःख होय ॥

  2. #42
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  3. #43
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    उपरोक्त सूत्र के बारे में अपनी राय रखिये

  4. #44
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    Dilchasp hai

  5. #45
    कर्मठ सदस्य MahaThug's Avatar
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    Quote Originally Posted by vishal View Post
    उपरोक्त सूत्र के बारे में अपनी राय रखिये
    अपने विचार हमने आपके सूत्र में रखें है, कभी पढ लिजीएगा।
    महाठग आप ठगाईए, ओर न ठगिए कोय । आप ठगें सुख ऊपजे, ओर ठगें दुःख होय ॥

  6. #46
    कांस्य सदस्य gill1313's Avatar
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    Quote Originally Posted by MahaThug View Post
    मानव को एक नया धर्म रचने की आवश्यकता है। जहां जीवन और पर्यावरण की सुरक्षा ही सर्वोपरी हो। जहां मानवीय संवेदना के लिए अवकाश हो। जहां उंच-नीच ना हो। देश-्विदेशो के बीच सीमाएं ना हो। मानसिक ईश्वर का कोई भय न हो। हो तो सिर्फ साश्व्त प्रेम ... मनुष्यजाति के लिए।





    मनुष्य की एक बात अनुठी है। वह आशा कभी नहीं छोडता। वह अपनी श्रद्धा कभी मरने नहीं देता चाहे वह एक पथ्थर के टुकडे में हो, पहाडो पर हो, पानी में हो। यही श्रद्धा है जिससे यह संसार चल रहा है। यह विश्वास उसे संबंधो पर है, आनेवाले कल पर है...अपने आप पर है।

    - महाठग (१-३-१८)
    मेरे भाई सीमाएं तब बनी जब कोई देश ये समझने को राजी ही नही हूआ के सब से बड़ा धर्म इंसानियत ही है...........?
    वो कह गये कभी न आएंगे ,
    रात सपनो में आये थे ,झूठे कहीं के ......?

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