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Thread: खमोशिया.....एक प्रेम कथा

  1. #1
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    खमोशिया.....एक प्रेम कथा

    ये कहानी ही तो है जो हमें अपने आपको लोगों से अपनी भावनाएं शेयर करने का जरिया बना सकती हैं हर इंसान की जिंदगी की कहानी होती है किसी की कहानी खुशी से भरपूर होती है तो किसी की कहानी दुख से भरी हुई पर कहानी होती जरूर है खामोशियां एक कहानी है मोहब्बत की, जुनून की,तन्हाई की, तड़प की और एक एहसास अकेलेपन की....
    मौत को लोग यूहि बदनाम करते है तकलीफ तो जिंदगी देती है

  2. #2
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    3 साल हो चुके थे राजेश की शादी हुए पर इन 3 सालों में राजेश और पार्वती ने क्या-क्या दुख नहीं झेले।
    राजेश को नौकरी ना मिलना, पार्वती की गोद अभी तक सुनी थी।
    राजेश के मां-बाप रोज दोनों को इस चीज के लिए ताना दिया करते थे।
    राजेश के पिता किसान थे राजेश ने घर के खिलाफ जाकर इंजीनियरिंग की थी जबकि उसके पिता उसे किसान बनाना चाहते थे।

    रोज के लड़ाई-झगड़ों के चलते राजेश ने घर छोड़ दिया और एक किराने की दुकान मे नौकरी करने लगा।

    ऐसा नहीं था कि पार्वती गर्भवती नहीं हो सकती थी दो बार उसका गर्भपात हो चुका था
    भगवान से वो दोनों रोज इन दोनो ख्वाहिशों की मन्नत मांगते थे।

    कहते हैं भगवान के घर देर है अंधेर नही!
    पहले पार्वती गर्भवती हुई और जब उसका आठवां महीना आया तो राजेश को रेलवे में नौकरी मिल गई।
    ना चाहते हुए भी उस को पार्वती को छोड़कर जाना पड़ा।

    फिर आया इस कहानी का असली किरदार जिसने आकर पार्वती का नारीत्व पूरा किया "यश"।
    पार्वती की तो खुशी का ठिकाना ही नही था काफी दुखों के बाद पाया था उसको।

    कहते हैं जहां गुड वहां मक्खी जो मां बाप राजेश और पार्वती को ताना देते थे वो अब उनके गुण गाते नहीं थकते थे।
    जिंदगी रोशन करने आया था यश....

    राजेश तो काम में व्यस्त होता था पर पार्वती तो यश को ही अपनी जिंदगी मान कर चल रही थी।

    उसके नन्हें कदमों ने उसकी जिंदगी जो पूरी की थी।
    भूरी आंखों वाला यश अपने ननिहाल का भी लाड़ला था।
    उसका ननिहाल भी उसी शहर में था जहां राजेश की पोस्टिंग हुई थी।
    उसके ननिहाल में उसके नाना-नानी और मामा-मामी थे।
    उसकी मामी उसे अपने बेटे की तरह मानती थी पर उसके मामा उससे थोड़ी दूरी बनाकर रखते थे।
    यश के मामा उसकी मां से छोटे थे और यश के होने के 1 साल पहले ही उनकी शादी हुई थी और उनकी कोई संतान नहीं हुई थी।
    वक्त बीतता गया और अब यश बड़ा हो गया था और उसकी मामी ने एक लड़की को जन्म दिया और उसका नाम उन्होंने दृष्टि रखा।
    हॉस्पिटल में दृष्टि को देखकर उसने अपनी मां से पूछा कि ये कौन है तो उसकी मां ने बताया कि ये परी है और तुम्हें इसका ख्याल रखना है।
    यश खामोश खड़ा था पर उसके दिल में ये बात घर कर गई कि उसको दृष्टि का ख्याल रखना है।
    और यहीं से शुरुआत हुई एक प्यार की कहानी की।
    खामोशिया!!!
    मौत को लोग यूहि बदनाम करते है तकलीफ तो जिंदगी देती है

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