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Thread: सम्भोग से समाधि: कितना सच, कितना झूठ?

  1. #1
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    Cool सम्भोग से समाधि: कितना सच, कितना झूठ?


  2. #2
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    'सम्भोग से समाधि की ओर' विश्व चर्चित आध्यात्म एवं धर्म गुरू ओशो की एक अत्यन्त चर्चित व विवादास्पद पुस्तक है। वर्ष १९३१ में जन्मे ओशो या आचार्य रजनीश को कौन नहीं जानता? ओशो मानव कामुकता के प्रति स्वतंत्र दृष्टिकोण रखने के कारण सम्भोग के लिए प्रतिपादित अपने एक नए उन्मुक्त दृष्टिकोण की वकालत करते थे, जिसके कारण वे भारत के साथ-साथ पश्चिमी देशों में भी कड़ी आलोचना के पात्र रहे, किन्तु बाद में उनका नया दृष्टिकोण विश्व में काफी अधिक लोगों द्वारा स्वीकार्य कर लिया गया। सम्भोग के लिए प्रतिपादित अपने नए उन्मुक्त दृष्टिकोण के कारण ओशो को कई भारतीय और विदेशी पत्रिकाओ में 'सेक्स गुरू' के नाम से भी सम्बोधित किया गया।

  3. #3
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    मानव कामुकता के सन्दर्भ में प्रतिपादित अपनी नई उन्मुक्त विचारधारा से आध्यात्मिक जगत में चमत्कारपूर्ण महाक्रांति लाने वाले ओशो का देहावसान हुए आज २८ वर्ष से ऊपर व्यतीत चुके हैं, किन्तु अपनी नई उन्मुक्त विचारधारा से वे अपने पीछे जो प्रश्न-चिह्न छोड़कर गए वह आज भी अनुत्तरित है। आज भी सामान्य लोगों के मन में बार-बार यह प्रश्न उठता है- 'क्या वाकई सम्भोग से समाधि अर्थात् मोक्ष का रास्ता प्रशस्त होता है? ओशो ने 'सम्भोग से समाधि' का जो नया मार्ग बताया है- उसमें कितना सच है, कितना झूठ है? कहीं ऐसा तो नहीं- 'सम्भोग से समाधि' की परिकल्पना एक बकवास के सिवा और कुछ न हो? क्या समाधि के मार्ग पर जाने के लिए स्त्री-पुरुष का आपस में सम्भोग करना ज़रूरी है? यदि समाधि की प्राप्ति के लिए स्त्री-पुरुष का आपस में सम्भोग करना ज़रूरी है तो क्या एल०जी०बी०टी० समुदाय को कभी समाधि अर्थात् मोक्ष प्राप्त नहीं होगा? क्या परम्परागत (Traditional) स्त्री-पुरूष सम्भोग के बिना केवल हस्तमैथुन से समाधि का मार्ग प्राप्त हो सकता है?' इन तमाम गूढ़ प्रश्नों का उत्तर देने के लिए ओशो आज हमारे बीच नहीं हैं। होते भी तो भी कुछ लोगों की प्रवृत्ति ऐसी होती है कि वे एक नए तथ्य या नई विचारधारा को तब तक स्वीकार नहीं करते जब तक कि उस तथ्य को अन्य बुद्धिजीवी लेखकों द्वारा प्रमाण के साथ प्रमाणित न कर दिया गया हो। सम्भोग से समाधि: कितना सच, कितना झूठ?' में इन्हीं तमाम गूढ़ प्रश्नों का उत्तर तर्क और प्रमाण के साथ विस्तारपूर्वक दिया गया है।

  4. #4
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    May 2017
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    पाठकों यह जानकर आश्चर्य होगा कि ओशो की चर्चित और विवादास्पद पुस्तक के शीर्षक 'सम्भोग से समाधि की ओर' का तरह-तरह से प्रयोग करके लोगों ने अपने-अपने ढंग से भुनाने की कोशिश की है। आइए, देखते हैं- यूट्यूब का एक चैनल-


  5. #5
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    May 2017
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    देखा आपने? 'सम्भोग से समाधि की ओर' शीर्षक को किस तरह यूट्यूब पर भुनाने की कोशिश की जा रही है। हमने इससे भी एक कदम आगे बढ़कर 'सम्भोग से समाधि की ओर' शीर्षक को भूनने की जगह तलने की कोशिश की है और इसीलिए पाठकों का भ्रम जड़ से ख़त्म करने वाली अपनी इस नायाब ज्ञान की पुस्तक 'सम्भोग से समाधि: कितना सच, कितना झूठ?' का दाम सिर्फ़ ५ करोड़ रुपया रखा है। दाम थोड़ा अधिक ज़रूर लगता है, लेकिन सभी जानते हैं- भुनी हुई चीज़ से ज़्यादा स्वादिष्ट तली हुई चीज़ होती है। इसीलिए महँगी होती है। हम इस नायाब और दुर्लभ पुस्तक को लंदन ले जाकर माल्या के हाथों बेचेंगे।

  6. #6
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    May 2017
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  7. #7
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    May 2017
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    यक्ष-प्रश्न यह है कि अगर माल्या ने बस थोड़ी सी नाम मात्र को महँगी लगने वाली इस नायाब और दुर्लभ किताब को खरीदने से इन्कार कर दिया तो? तो इसके लिए लंदन में माल्या का ब्रेन वाश किया जाएगा और यह समझाया जाएगा कि जब धनवान नाइक की हज़ार-दो हज़ार रुपए की हवाई चप्पल पहन सकता है, दस-बारह करोड़ की कार से चल सकता है, आठ-दस करोड़ की पेंटिंग खरीद सकता है, पचास-साठ लाख रुपए प्रति घंटे की दर से 'चार्टर प्लेन' से उड़ान भर सकता है तो ५ करोड़ की मामूली रकम लगाकर एक ऐसा इकलौता और दुर्लभ 'चार्टर किताब' क्यों नहीं पढ़ सकता जिसमें इस बात का प्रमाण के साथ खुलासा किया गया हो कि 'संभोग से समाधि की ओर जाना सम्भव है या नहीं?' इस तरह ब्रेन वाश करने के बाद दिमाग़ में यह झूठी बात अच्छी तरह से जमाई जाएगी कि आजकल इंडिया में धनवानों के बीच एक नया भौकाली ट्रेण्ड चल पड़ा है- जिस धनवान के पास सम्भोग से समाधि: कितना सच, कितना झूठ?' किताब नहीं होगी, वह ग़रीब और भिखारी समझा जाएगा! अन्त में एकमुश्त १००० करोड़ देकर किताब की सारी प्रतियाँ खरीदकर बाद में देश-विदेश के धनवानों को बेचकर रकम दोगुनी करने की नायाब सलाह भी दी जाएगी! हो सकता है- माल्या को हमारी बात बहुत जम जाए और वे तत्काल लंदन के बैंक से २००० करोड़ लोन लेकर हमारी सारी किताबें खरीदकर लंदन में ही नया बिज़नेस शुरू कर दें। अब ये न पूछिए- १००० करोड़ की किताब खरीदने के लिए २००० करोड़ का लोन क्यों? यह सब धंधे का गुर है। प्रॉफ़िट का पैसा पहले ही लोन के रूप में बाहर निकाल लिया जाता है। बाद में धंधे में फ़ायदा हुआ तो ठीक, नहीं तो 'इसमें बैंक का घाटा.. मेरा कुछ नहीं जाता..' गाते हुए निकल गए।

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