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Thread: मनहूस जिंदगी - एक मासूम लडका

  1. #11
    कर्मठ सदस्य prem_sagar's Avatar
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    उत्तम एवं मनोरंजक कथानक !
    धन्यवाद पी के पासी जी !
    अपडेट की प्रतीक्षा है !
    ,,,,प्यार बाँटते चलो ,,,,

  2. #12
    कर्मठ सदस्य pkpasi's Avatar
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    Quote Originally Posted by prem_sagar View Post
    उत्तम एवं मनोरंजक कथानक !
    धन्यवाद पी के पासी जी !
    अपडेट की प्रतीक्षा है !
    जल्द ही अपडेट दूगा

  3. #13
    कांस्य सदस्य garima's Avatar
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    अच्छी स्टोरी है जी।
    मंच तुम आँखों की पलको से हो गए हो,
    के मिले बिना सुकून ही नहीं आता...!!!

  4. #14
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    rajputana
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    Quote Originally Posted by prem_sagar View Post
    उत्तम एवं मनोरंजक कथानक !
    धन्यवाद पी के पासी जी !
    अपडेट की प्रतीक्षा है !
    आप कब अपडेट देंगे प्रेम जी
    कुछ ख्वाहिसों का कत्ल करके मुस्कुरा दो ज़िंदगी खुद बा खुद बेहतर हो जाएगी

  5. #15
    कर्मठ सदस्य prem_sagar's Avatar
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    Apr 2016
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    Quote Originally Posted by bapu ji View Post
    आप कब अपडेट देंगे प्रेम जी
    प्रिय मित्र , मेरे सूत्र के तो दोनों वृतांत संपूर्ण हो चुके है !
    आप कृपया फिर से देख ले , कुछ भी अधुरा नहीं है !
    ,,,,प्यार बाँटते चलो ,,,,

  6. #16
    कर्मठ सदस्य pkpasi's Avatar
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    डिनर के बाद हमने कुछ देर बातें की...


    इस बीच मैम ने मुझे दवा भी दे दी....


    फिर मुझे ग्राउंड फ्लोर पर ही गेस्ट रूम में ले जाकर लिटा दिया।
    फिर मैम लाइट बंद करके चली गई....
    बाकी सभी भी उठ के अपने अपने रूम में चले गए।


    मैं रात पता नहीं कितनी देर तक जागता रहा और सोचता रहा कि आखिर मैम और उनका परिवार मुझसे इतना प्यार क्यों करते है।


    पर फिर मैं सारी बातें झटक कर सो गया।


    #####नई सुबह हुई#####


    पता नहीं ये सुबह किसके लिए क्या लाने वाली है।
    प्रीत आज सबसे पहले उठी....
    इस दिन का इंतजार ना जाने उसने कब से किया था.... उसका हर वक्त यही ख्वाब था कि...
    उसका भी कोई भाई हो और वो उसे प्यार से उठाएं...
    और वो सपना भी आज पूरा होने वाला था।


    वो जल्दी से उठी...
    और अपने रूम का दरवाजा खोल के नीचे के फ्लोर की ओर भागी.....
    पर शायद अभी उसका सपना पूरा होने का वक्त नहीं आया था.....
    वो जैसे ही सीढ़ियों के पास पहुंची कि उसका पैर फिसल गया उसके मुंह से चीख निकल गई....


    प्रीत:-मममममममी!


    और वो सीढ़ियों पे गिरने लगी....
    वो लुढकती हुई सीढ़ीयो से नीचे की ओर जा रही थी...
    जब वो आखरी सीढ़ी पर पहुंची तो उसका सिर सीढी की नोक से टकरा गया!
    उसके सिर से खून निकलने लगा....
    और वो बेहोश हो गयी।


    सभी लोग भाग के उसके पास पहुंचे...
    सभी की आंखों में आंसू आ गए।


    कविता मैम:- (रोते हुए) गुड़िया बेटा उठ जा....
    बेटा देख तेरी मां तेरे पास है....
    (अंकल से)दीपक देखो हमारी गुडिया उठ क्यों नही रही है!
    उसे उठाओ प्लीज!


    दीपक अंकल ने जल्दी से प्रीत को गोद में उठाया.....
    और बाहर की ओर भागे....


    बाहर आकर उन्होंने गुड़िया को कार की पिछली सीट पर लिटाया...
    गुड़िया के साथ पीछे मैम भी बैठ गई।


    मैं अंकल के साथ आगे बैठ गया....
    मैं और आंटी उसे उठाने की पूरी कोशिश कर रहे थे।


    जल्दी ही हम लोग हॉस्पिटल पहुंच गए।


    प्रीत को OT मे ले जाया गया.....
    3 घंटे तक ऑपरेशन चलता रहा...
    फिर डॉक्टर बाहर आ गए।


    कविता मैम:- डॉक्टर मेरी बच्ची कैसी है?


    डॉक्टर:-देखिए अभी हम कुछ नहीं कह सकते....
    उसके सिर पर काफी चोट लगी है.....
    और खून भी काफी बह गया है.....
    इसलिए अभी पेशेंट को ऑब्जरवेशन में रखना होगा.....
    अगर उन्हें कल तक होश नहीं आया तो वो कोमा मे भी जा सकती है।


    ये सुनकर हम सभी की आंखों से झर-झर आंसू बहने लगे....
    जल्दी प्रीत को रूम में शिफ्ट कर दिया गया।


    मैम और अंकल उसके पास चले गए.....
    मैं बाहर ही बैठ गया...
    मेरे मन में कुछ चल रहा था....
    कुछ देर बाद में उठ के चल दिया।


    कहां पता नही....
    बस चलने लगा.....
    मैं कुछ कदम ही चला था कि मुझे हॉस्पिटल में एक मंदिर दिखा!


    मैं जाकर मंदिर के सामने हाथ जोड़कर घुटनों के बल बैठ गया।
    मै:- हे भगवान क्यों लिखा है ये सब मेरी किस्मत में?
    जो भी मेरे करीब आता है....
    उसके साथ हमेशा बुरा होता है....
    बड़ी मुश्किल से कोई मुझे प्यार करने लगा था....
    पर वो भी ज्यादा वक्त नहीं चला....
    क्यों भगवान आखिर क्यो.....
    मेरी उस प्यारी सी गुड़िया प्रीत की क्या गलती है.....
    वो तो फूल जैसी बच्ची है....
    उसके साथ इतना बुरा क्यों किया?
    जो कुछ करना है मेरे साथ करो...
    उस बच्ची को बचा लो भगवान....
    मेरी गुड़िया को बचा लो भगवान.....
    मैं वादा करता हूं कि मैं उससे हमेशा के लिए दूर हो जाऊंगा.....
    बस मेरी गुड़िया को ठीक कर दो....
    मेरी मनहूशियत का साया उसके ऊपर ना पड़े....
    भगवान प्लीज एक बार उसे होश आ जाए...
    फिर मैं उससे दूर हो जाऊंगा....
    प्लीज भगवान....
    प्लीज।


    इधर में भगवान के आगे प्रार्थना कर रहा था।
    और कोई था जो भी बातें सुन रहा था....
    ये कोई और नहीं मैम थी!


    दरअसल बात ये है कि जब मैम अंदर प्रीत के पास बैठी तो एकदम से उनके दिमाग में मेरे बारे में ख्याल आया...
    फिर मैम ने मुझे इधर-उधर देखा...
    पर मै रूम में नहीं था....
    फिर वो बाहर आ गई।


    जब वो बाहर आई तो मैं उनको बेसुध सा कहीं जाता हुआ दिखाई दिया।
    उन्होंने मुझे आवाज लगाई पर मैंने नहीं सुना..
    फिर मैम भी मेरे पीछे आ गई....
    फिर मैं मंदिर में चलते चलते बैठ गया।


    मैम भी मेरे पीछे ही थी..।।
    मैम के मुझ तक पहुंचने तक मैने अपनी प्रार्थना शुरू कर दी थी...
    जो कि मैम ने भी सुन ली....


    और मेरे साथ साथ उनकी भी आंखों में आंसू थे।


    फिर मैम पलट के वहां से चली गई।
    मैं भी वहां से उठकर वापस रूम के पास आकर बैठ गया...
    मैम अभी प्रीत के पास ही बैठी थी...
    पर उनके दिमाग में मेरी ही बातें घूम रही थी!


    ऐसे ही पूरा दिन बीत गया...
    और रात भी...
    पर प्रीत को होश नहीं आया था...


    अगले दिन....
    दोपहर का वक्त था पर अभी भी प्रीत को होश नहीं आया था...
    अब सभी के दिल का डर बढने लगा था....
    क्योंकि अगर प्रीत को होश नहीं आया...
    तो प्रीत कोमा में चली जाती।


    दोपहर के 1:30 का टाइम था...
    मैम प्रीत के पास ही बैठी थी।
    कविता मैम:-बेटा उठ जा ना.....
    क्यों अपनी मां को तड़पा रही है.....
    बेटा उठ जाना तेरी मम्मा की जान निकल जाएगी प्लीज बेटा.....


    इधर मैं भी मन ही मन प्रीत के ठीक होने की दुआ मांग रहा था...


    पर कहते हैं ना भगवान के घर देर है अंधेर नही।
    शायद ये कहावत किसी ने सच ही बनाई है....


    मैम प्रीत के हाथ पे सिर रख के रो रही थी....
    कि तभी अचानक!

  7. #17
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    Quote Originally Posted by prem_sagar View Post
    प्रिय मित्र , मेरे सूत्र के तो दोनों वृतांत संपूर्ण हो चुके है !
    आप कृपया फिर से देख ले , कुछ भी अधुरा नहीं है !

    महोदय नया सूत्र प्रारम्भ करने के विचार मे नहीं है
    कुछ ख्वाहिसों का कत्ल करके मुस्कुरा दो ज़िंदगी खुद बा खुद बेहतर हो जाएगी

  8. #18
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    अचानक क्या हुआ. जल्द ही अपडेट दीजिएगा
    कुछ ख्वाहिसों का कत्ल करके मुस्कुरा दो ज़िंदगी खुद बा खुद बेहतर हो जाएगी

  9. #19
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    Quote Originally Posted by bapu ji View Post
    अचानक क्या हुआ. जल्द ही अपडेट दीजिएगा
    इस अचानक के जवाब के लिए आपको थोड़ा सा इंतजार करना पडेगा।

  10. #20
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    मैम प्रीत के हाथ पर सिर रखकर रो रही थी...
    कि तभी अचानक मुझे कुछ याद आया....
    मैं उठा और हॉस्पिटल के गेट से बाहर आया....
    और ऑटो पकड़ के कहीं चल दिया।

    कुछ देर बाद ऑटो कहीं जाकर रुका!
    जहां ऑटो रुका था वहां एक मंदिर था।

    जैसे जैसे मैं आगे बढ़ रहा था......
    कुछ यादे मेरी आंखों के सामने आ गई....
    इस मंदिर मे मै अक्सर अपनी मां के साथ आया करता था..
    अपनी मां के गुजरने के बाद भी मै कभी-कभी यहां आता था....

    जैसे-जैसे मैं आगे बढ़ता गया....
    मेरी यादें ताजा होती गई....
    और आंखों से आंसू भी बहने लगी।

    मैं चलता हुआ मंदिर मे जा पहुंचा....
    और माता रानी की मूर्ति के आगे घुटनों के बल बैठ गया!

    मै:- माता रानी मेरी मां कहती थी कि आप सब की रक्षा करती है....
    दीन दुखियों के दुख हरती है....
    आपके आगे जिसने भी झोली फैलाई है....
    आपने हमेशा उसकी झोली भरी है....
    आज मैं भी आपके सामने झोली फैला रहा हूं....
    मुझ भिखारी की भी झोली भर दो माता....
    मेरी गुड़िया को ठीक कर दो....
    ये सब मेरी मनहूसियत के कारण हुआ है...
    जैसे जैसे मैं किसी के करीब होता जाता हूं....
    वैसे वैसे उसके साथ कोई ना कोई हादसा होता रहता है...
    मैं आपसे वादा करता हूं कि मैं गुड़िया और मैम की फैमिली से दूर चला जाऊंगा....
    प्लीज माता रानी मेरी गुड़िया को ठीक दो प्लीज माता रानी....
    मेरी गुड़िया को ठीक कर दो।

    उसके बाद मैं वही फूट फूट कर रोने लगा।

    मैं कुछ देर तक वही बैठा रोता रहा...
    फिर किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा!!

    पुजारी जी:- बेटा ऐसे निराश मत हो....
    माता रानी पर विश्वास रखो...
    वो सब ठीक करेंगी....
    माता रानी उनकी पुकार जरूर सुनती हैं जो सच्चे दिल से प्रार्थना करते है...
    तुम अपनी परेशानी बताओ।

    मै:-बाबा मेरी गुड़िया के सिर पर चोट लगी है...
    उसकी हालत गंभीर बनी हुई है....
    डॉक्टर ने कहा है कि अगर उसे होश नही आया तो वो कोमा में जा सकती है।

    मेरी बात सुन के पंडित जी मंदिर के अंदर चले गए...
    कुछ देर बाद वो वापस आए!!!

    पंडित जी:- ये लो!

    इतना बोल उन्होंने एक छोटी सी कांच शीशी मुझे पकड़ा दी....
    उसमें कुछ बूंदे घी की थी...
    इसे अपनी बहन के माथे पर लगा देना...
    और फिर उसकी आंखों पर...
    माता रानी कृपा करेंगी।

    फिर पंडित जी वहां से चले गए....
    और मैं उठा माता को प्रणाम किया और चल पड़ा वापस हॉस्पिटल!
    जल्दी ही मैं हॉस्पिटल पहुंच गया....

    फिर मै जाके प्रीत के रूम में घुस गया....
    मैम अभी भी प्रीत के बेड पे सिर रख के बैठी थी।

    मैने आगे बढ़ के वो घी प्रीत के माथे और आंखों पर लगा दिया...।
    और माता रानी से प्रीत को ठीक करने की दुआ मांगने लगा।

    फिर मैं बाहर आ गया....
    और सीसे से अंदर देखने लगा...
    कुछ देर बाद प्रीत के हाथ में हलचल होने लगी!

    फिर धीरे-धीरे उसने आंखे खोली...
    फिर उसने इधर उधर देखा....
    मैम उसके बेड पे सिर रख के लेटी हुई थी....
    उसने मैम को आवाज लगाई।

    प्रीत:- (धीमी आवाज में)मम्मी..

    प्रीत की आवाज सुन मैम एकदम से उठ बैठी....
    जब उन्होंने प्रीत को उठा हुआ देखा तो.....
    वो बहुत खुश हुई...
    वो उठ के प्रीत का चेहरा चूमने लगी।

    कविता मैम:- मेरी बच्ची तू ठीक तो है?

    प्रीत:- हां मां...
    बस सिर में थोड़ा सा दर्द है।

    कविता मैम:- चलो कोई बात नहीं वो भी ठीक हो जाएगा...
    इतने मे मै डॉक्टर को बुला लाया...
    डॉक्टर ने चेकअप किया...
    और बोला!!

    डॉक्टर:- अब आपकी बच्ची खतरे से बाहर है....
    कविता मेम :- थैंक्स डॉक्टर...

    फिर डॉक्टर वहाँ से चला गया।
    मैं भी बाहर आ गया..
    फिर मैम ने प्रीत से कुछ देर बाद की।

    उसके बाद मैम ने मुझे आवाज लगाई...
    मैं अंदर गया....
    और जा के प्रीत के पास खड़ा हो गया।

    मै:- अब कैसी है मेरी गुड़िया??

    प्रीत:- मै ठीक हूं भैया।

    मै:- चलो तुम आराम करो ।
    उसके बाद मैं कुछ देर उसके पास और बैठा...
    फिर नर्स आ गई और उसे नींद का इंजेक्शन लगा दिया...

    जिससे उसे नींद आ गई।

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