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Thread: मनहूस जिंदगी - एक मासूम लडका

  1. #41
    वेबमास्टर Loka's Avatar
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    अभी तक की कहानी बहुत शानंदर है, अब अगले अपडेट का इंतजार है.
    लोग मुझ पर हँसते है क्यों की मैं सबसे अलग हूँ, मैं उन पर हँसता हूँ क्यों की वो सब एक जैसे है |

  2. #42
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    मेरी आवाज मे रोने की वजह से भराव था।

    जैसे ही सब ने मेरी तरफ देखा....
    मेरे चेहरे पर आंसू थे....
    परी जल्दी से मेरे पास आई !
    और मुझे गले लगा लिया।

    परी:- क्या हुआ भाई?
    क्यो रो रहे हो?

    पर मै बस रोता रहा और कुछ नही बोला।

    परी:- भाई बोलो ना मेरा भी दिल बैठा जा रहा है।

    मै:- (रोते हुए)मै क्या करूं मुझे से आप लोगो का प्यार सहन नही हो रहा है...
    बचपन से सिर्फ नफरत के साए मे जिया हूं....
    आप लोगो का प्यार मेरे सीने मे एक तड़प सी पैदा कर रहा है....
    आखिर क्यो आप मुझे अपना भाई कह रही है?
    और तो और मेरे लिए अभी सर से भी झगड़ रही है... आखिर क्यो?

    मेरी बात सुनकर परी और अनु के आंखो मे भी आंसू आ जाते है।

    परी:-(रोते हुए)जहां तक नफरत का सवाल है तो वो मै तुमसे कभी नही कर पाऊंगी.....
    और रही बात प्यार की तो उसके लिए तुमने खुद मेरे दिल मे जगह बनाई है....
    और तुम्हे भाई इसलिए कहती हूँ क्योकि मै बचपन से अकेली रही हूं....
    सिर्फ अपने मां बाप के साथ....
    ना मेरा कोई भाई था ना बहन....
    मेरी बचपन से ही ख्वाहिश थी कि मेरा भी भाई हो...
    जिसे मै राखी बांधू और प्यार करूं....
    पर ऐसा कभी नही हुआ.....
    मै बस भगवान से प्रार्थना करती रही...
    वक्त बीता और भगवान ने मेरी नही सुनी...
    फिर उस दिन तुमने अभी की जान बचाई.....
    तुम पूछ रहे थे कि मै तुम्हे भाई क्यो कहती हूं तो इसलिए कहती हूं...
    भाई का काम क्या होता है बहन की रक्षा करना...
    सही कहा ना मैने (परी ने मुझसे पूछा)।

    मै कुछ ना बोला बस परी की बात सुनता रहा...
    परी ने मुझे खुद से अलग किया....
    और अपने दोनो हाथो से मेरे गालो को पकड़ा और मुझसे दोबारा पूछा।

    परी:- सही कहा ना मैने!
    मैने बस हां मे गर्दन हिला दी।

    परी:- तो उस दिन तुमने अभी की जान बचा के मेरी ही तो जान बचाई थी....
    और उस दिन मैने सोच लिया था कि मै तुम्हे अपना भाई मानूंगी।

    मै:-(रोते हुए)पर मै इस प्यार को सहन नही कर पा रहा हूं..
    डरता हूं कही मुझे इस प्यार की आदत ना पड़ जाए....
    अगर आदत पड गई तो मुझसे छिन ना जाए.....
    एक बार तो संभल गया पर दूसरी बार नही संभल पाऊगा...
    बिखर जाऊंगा मै(इतना बोलते हुए मै जमीन पर घुटनों के बल बैठ गया)
    बिखर जाऊगा मै...
    बिखर जाऊगा।

    परी ने फिर नीचे बैठ के मुझे गले से लगा लिया।

    परी:- नही ऐसा कुछ नही होगा.....
    मै कुछ नही होने दूंगी अपने भाई को.....
    और परी भी मेरे गले लग कर रोने लगी..
    फिर कुछ देर बाद अभी ने परी को चुप कराया।

    अभी:-(धीरे से) परी दीप को चुप कराओ खुद मत रोओ।

    परी ने उसकी बात मानी और मुझे चुप कराने लगी...
    पर मै चुप नही हो रहा था।

    परी:- भाई बस भी करो....
    अब कितना रोओगे?

    मै चुप ना हुआ!

    परी:- प्लीज भाई मेरी खातिर चुप हो जाओ....
    तुम्हे मेरी कसम है।

    “कसम” शब्द सुनते ही मै चुप हो गया...
    फिर परी ने अपने दुपट्टे से मेरे आंसू पूछे....
    और मुझे खड़ा करके कुर्सी पर बैठाया।

    और अनु ने मुझे पानी दीया....
    पर मेरी सिसकिया अभी भी निकल रही थी।

    इतने मे अभी बोला...

    अभी:- यार इन सब मे एक बात बीच मे रह गई।

    परी और अनु एक साथ:- कौन सी?
    मै भी अभी की ओर देखने लगा!

    अभी:- अरे वही कि परी ने मुझे माफ किया या नही?
    और मेरा खाना दोबारा चालू हुआ कि नही?

    अभी की बात सुन के हम तीनो की हंसी छूट गई।

    अब माहौल थोड़ा हल्का हो गया।

    पर कुछ देर बाद परी अपने चेहरे पर थोड़ा गुस्सा लाते हुए बोली!
    परी:- नही बिल्कुल नही!

    अभी:- दीप प्लीज सिफारिश कर दे ना।

    मै:- दी प्लीज माफ कर दो ना।

    मेरी बात सुनकर परी एकदम से पलट के मेरी तरफ देखने लगी!

    परी:- अभी क्या बोला है भाई तुमने?
    मै:- माफ कर दीजिए इन्हे।
    परी:- नही नही इससे पहले कुछ बोला था।
    मै:- दी!

    “दी” शब्द सुनते ही परी ने मुझे गले लगा लिया।

    परी:- भाई एक बार फिर से बोलो ना प्लीज।
    मै:- “दी”।

    परी आज मेरे दिल को सुकून मिला है भाई...
    कब से मै ये शब्द सुनने के लिए तड़प रही थी।

    अभी फिर से बोला....
    अभी:- तुम दोनो भाई बहन फिर शुरू हो गए...
    कोई मुझे भी जवाब दो मेरी बात का।

    अभी की बात पर हम तीनो फिर से हंस पड़े...
    फिर परी बोली...

    परी:- जाओ “अभी” इस बार माफ किया...
    आइंदा ऐसी गलती नही होनी चाहिए।

    हम फिर से हंस पड़े।

    फिर अभी ने कुछ खाने का ऑर्डर दिया क्योकि खाने का वक्त हो गया था।

    फिर सभी ने खाना खाया....
    शाम तक सभी कैफे मे ही रहे।

    रात को सभी अपने अपने घर निकल लिए...
    मै भी अपने घर चल पड़ा मै अभी आधे रास्ते मे ही पहुंचा था....
    यहां से रास्ता थोड़ा सुनसान था.....
    मै आगे बढ़ा ही रहा था कि..


    अअअअचचचचचचाननननन ककक!
    मेरी आवाज मे रोने की वजह से भराव था।

    जैसे ही सब ने मेरी तरफ देखा....
    मेरे चेहरे पर आंसू थे....
    परी जल्दी से मेरे पास आई !
    और मुझे गले लगा लिया।

    परी:- क्या हुआ भाई?
    क्यो रो रहे हो?

    पर मै बस रोता रहा और कुछ नही बोला।

    परी:- भाई बोलो ना मेरा भी दिल बैठा जा रहा है।

    मै:- (रोते हुए)मै क्या करूं मुझे से आप लोगो का प्यार सहन नही हो रहा है...
    बचपन से सिर्फ नफरत के साए मे जिया हूं....
    आप लोगो का प्यार मेरे सीने मे एक तड़प सी पैदा कर रहा है....
    आखिर क्यो आप मुझे अपना भाई कह रही है?
    और तो और मेरे लिए अभी सर से भी झगड़ रही है... आखिर क्यो?

    मेरी बात सुनकर परी और अनु के आंखो मे भी आंसू आ जाते है।

    परी:-(रोते हुए)जहां तक नफरत का सवाल है तो वो मै तुमसे कभी नही कर पाऊंगी.....
    और रही बात प्यार की तो उसके लिए तुमने खुद मेरे दिल मे जगह बनाई है....
    और तुम्हे भाई इसलिए कहती हूँ क्योकि मै बचपन से अकेली रही हूं....
    सिर्फ अपने मां बाप के साथ....
    ना मेरा कोई भाई था ना बहन....
    मेरी बचपन से ही ख्वाहिश थी कि मेरा भी भाई हो...
    जिसे मै राखी बांधू और प्यार करूं....
    पर ऐसा कभी नही हुआ.....
    मै बस भगवान से प्रार्थना करती रही...
    वक्त बीता और भगवान ने मेरी नही सुनी...
    फिर उस दिन तुमने अभी की जान बचाई.....
    तुम पूछ रहे थे कि मै तुम्हे भाई क्यो कहती हूं तो इसलिए कहती हूं...
    भाई का काम क्या होता है बहन की रक्षा करना...
    सही कहा ना मैने (परी ने मुझसे पूछा)।

    मै कुछ ना बोला बस परी की बात सुनता रहा...
    परी ने मुझे खुद से अलग किया....
    और अपने दोनो हाथो से मेरे गालो को पकड़ा और मुझसे दोबारा पूछा।

    परी:- सही कहा ना मैने!
    मैने बस हां मे गर्दन हिला दी।

    परी:- तो उस दिन तुमने अभी की जान बचा के मेरी ही तो जान बचाई थी....
    और उस दिन मैने सोच लिया था कि मै तुम्हे अपना भाई मानूंगी।

    मै:-(रोते हुए)पर मै इस प्यार को सहन नही कर पा रहा हूं..
    डरता हूं कही मुझे इस प्यार की आदत ना पड़ जाए....
    अगर आदत पड गई तो मुझसे छिन ना जाए.....
    एक बार तो संभल गया पर दूसरी बार नही संभल पाऊगा...
    बिखर जाऊंगा मै(इतना बोलते हुए मै जमीन पर घुटनों के बल बैठ गया)
    बिखर जाऊगा मै...
    बिखर जाऊगा।

    परी ने फिर नीचे बैठ के मुझे गले से लगा लिया।

    परी:- नही ऐसा कुछ नही होगा.....
    मै कुछ नही होने दूंगी अपने भाई को.....
    और परी भी मेरे गले लग कर रोने लगी..
    फिर कुछ देर बाद अभी ने परी को चुप कराया।

    अभी:-(धीरे से) परी दीप को चुप कराओ खुद मत रोओ।

    परी ने उसकी बात मानी और मुझे चुप कराने लगी...
    पर मै चुप नही हो रहा था।

    परी:- भाई बस भी करो....
    अब कितना रोओगे?

    मै चुप ना हुआ!

    परी:- प्लीज भाई मेरी खातिर चुप हो जाओ....
    तुम्हे मेरी कसम है।

    “कसम” शब्द सुनते ही मै चुप हो गया...
    फिर परी ने अपने दुपट्टे से मेरे आंसू पूछे....
    और मुझे खड़ा करके कुर्सी पर बैठाया।

    और अनु ने मुझे पानी दीया....
    पर मेरी सिसकिया अभी भी निकल रही थी।

    इतने मे अभी बोला...

    अभी:- यार इन सब मे एक बात बीच मे रह गई।

    परी और अनु एक साथ:- कौन सी?
    मै भी अभी की ओर देखने लगा!

    अभी:- अरे वही कि परी ने मुझे माफ किया या नही?
    और मेरा खाना दोबारा चालू हुआ कि नही?

    अभी की बात सुन के हम तीनो की हंसी छूट गई।

    अब माहौल थोड़ा हल्का हो गया।

    पर कुछ देर बाद परी अपने चेहरे पर थोड़ा गुस्सा लाते हुए बोली!
    परी:- नही बिल्कुल नही!

    अभी:- दीप प्लीज सिफारिश कर दे ना।

    मै:- दी प्लीज माफ कर दो ना।

    मेरी बात सुनकर परी एकदम से पलट के मेरी तरफ देखने लगी!

    परी:- अभी क्या बोला है भाई तुमने?
    मै:- माफ कर दीजिए इन्हे।
    परी:- नही नही इससे पहले कुछ बोला था।
    मै:- दी!

    “दी” शब्द सुनते ही परी ने मुझे गले लगा लिया।

    परी:- भाई एक बार फिर से बोलो ना प्लीज।
    मै:- “दी”।

    परी आज मेरे दिल को सुकून मिला है भाई...
    कब से मै ये शब्द सुनने के लिए तड़प रही थी।

    अभी फिर से बोला....
    अभी:- तुम दोनो भाई बहन फिर शुरू हो गए...
    कोई मुझे भी जवाब दो मेरी बात का।

    अभी की बात पर हम तीनो फिर से हंस पड़े...
    फिर परी बोली...

    परी:- जाओ “अभी” इस बार माफ किया...
    आइंदा ऐसी गलती नही होनी चाहिए।

    हम फिर से हंस पड़े।

    फिर अभी ने कुछ खाने का ऑर्डर दिया क्योकि खाने का वक्त हो गया था।

    फिर सभी ने खाना खाया....
    शाम तक सभी कैफे मे ही रहे।

    रात को सभी अपने अपने घर निकल लिए...
    मै भी अपने घर चल पड़ा मै अभी आधे रास्ते मे ही पहुंचा था....
    यहां से रास्ता थोड़ा सुनसान था.....
    मै आगे बढ़ा ही रहा था कि..


    अअअअचचचचचचानननक
    Last edited by pkpasi; 01-12-2018 at 07:45 PM.

  3. #43
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    अअअअचचचचचचानननक
    क्या
    कुछ ख्वाहिसों का कत्ल करके मुस्कुरा दो ज़िंदगी खुद बा खुद बेहतर हो जाएगी

  4. #44
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    Quote Originally Posted by bapu ji View Post
    अअअअचचचचचचानननक
    क्या
    बापू जी जल्द ही आपको इस "अचानक" का जवाब मिलेगा।

  5. #45
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    Quote Originally Posted by pkpasi View Post
    बापू जी जल्द ही आपको इस "अचानक" का जवाब मिलेगा।
    जी जबाब की प्रतीक्षा रहेगी
    कुछ ख्वाहिसों का कत्ल करके मुस्कुरा दो ज़िंदगी खुद बा खुद बेहतर हो जाएगी

  6. #46
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    काफी दिनो से कोई मजेदार रोमांचक कहानी पढ़ने को नहीं मिली है
    कुछ ख्वाहिसों का कत्ल करके मुस्कुरा दो ज़िंदगी खुद बा खुद बेहतर हो जाएगी

  7. #47
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    मै अपने घर जा रहा था।
    रास्ता जहां से थोड़ा सुनसान था।


    मेरे आगे एक लड़की चल रही थी!


    मै भी अपनी धुन मे चल रहा था।


    कि अचानक एक वैन फुल स्पीड मे मेरे पास से गुजरी....
    मै एकदम से साइड हो गया....
    मै उस गाड़ी की ओर देखने लगा....
    उस गाड़ी ने आगे जाकर एकदम से उस लड़की के पास ब्रेक लगा दिए!


    जिससे गाड़ी रुक गई....
    और लड़की भी डर के गिर गई।


    फिर उस वैन का दरवाजा खुला...
    उसमे से तीन लोग निकले और जबरदस्ती लड़की को उठाकर वैन मे डालने लगे!
    मैने जैसे ये सब देखा मैने उस तरफ दौड़ लगा दी...
    और उन्हे आवाज लगाने लगा।


    मै:- ऐ...रूको क्या कर रहे हो तुम ये?
    मैने कहा रुको...


    उन्होने मेरी तरफ देखा!


    पहला गुंडा:- जल्दी करो डालो इसे अंदर।


    मै भी उनकी और दौड़े जा रहा था।


    लड़की भी बचाओ बचाओ चिल्ला रही थी।
    जल्दी ही उन्होने उस लड़की को गाड़ी मे बैठा लिया!
    और खुद भी अंदर घुस गए।


    लड़की बाहर निकलने को हुई तो उन्होने उसे पकड़ के अंदर खीच लिया....
    और वैन का दरवाजा बंद कर लिया.....
    लडकी अभी भी चिल्ला रही थी।


    मै भी उस गाड़ी के पास पहुंच गया....
    पर उन्होने वैन पूरी रफ्तार से भगा ली।


    मेरे हाथ गाड़ी के शीशे को लग कर रह गए।


    मै फिर भी नही रुका...
    और उस वैन के पीछे भागने लगा।


    वो मुझसे काफी आगे निकल गई....
    मै फिर भी उसके पीछे दौड़ता रहा।


    आगे जाकर वो गाड़ी मुडने लगी...
    जैसे ही वो गाड़ी मुडी...
    मै भी एक पतली सी गली मे घुस गया...
    ये एक शॉर्टकट था...
    जिससे मै उस वैन तक जल्दी पहुंच सकता था।


    ये इलाका मेरे घर के बिल्कुल पास था....
    इसलिए मै इस इलाके के बारे मे अच्छे से जानता था।


    उधर उस गाड़ी मे वो तीनो उस लडकी के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश लगे....
    लड़की लगातार अपना बचाव कर रही थी।


    उस गाड़ी मे उस लड़की और 3 गुंडों के अलावा दो लोग और थे...
    एक गाड़ी चला रहा था....
    और दूसरा बैठ के उन चारो की ओर देख रहा था।


    लड़की:-नही....प्लीज मुझे छोड़ दीजिए मुझे....


    पहला गुंडा:-अरे इसे कैसे छोड़ दे....
    बड़ी मुश्किल से हाथ आई है!


    दूसरा गुंडा:- आज तो हम सब के मजे हो गए....
    क्या कड़क माल है।


    लड़की:- नही प्लीज मुझे छोड़ दीजिए...
    मै किसी को मुंह दिखाने लायक नही रह जाऊगी।


    तीसरा गुंडा:- अरे ऐसे कैसे जाने दे ?
    अभी तो हम लोग तेरे साथ सुहागरात मनाएगे!


    इतने मे चौथा गुंडा बोला....


    चौथा गुंडा:- भाई वो लड़का अभी भी हमारा पीछा कर रहा है...
    सब ने पीछे देखा!


    पहला गुंडा:- गाड़ी तेज भगाओ सालो!


    पांचवा गुंडा:-जी भाई अभी लो।


    इधर मै भी वैन से पहले रोड पर पहुंच गया था....
    और आसपास देख कर एक पत्थर उठा लिया।


    उधर वो लोग लड़की के साथ जबरदस्ती करने लगे...
    लड़की के कपड़े यहा वहा से फट गए थे।


    जल्द ही वो गाड़ी मेरे पास पहुंच गई...
    मै रोड के बीच खड़ा हो गया।


    इतने मे पाचवा गुंडा बोला...


    पांचवा गुंडा:- भाई वो देखो वो लौंडा रोड के बीचो-बीच खड़ा है।


    पहला गुंडा:- ये इतनी जल्दी वहां कैसे पहुंचा?


    दूसरा गुंडा:- आ गया तो क्या....
    उड़ा दो साले को....
    हीरो बनने चला है साला!


    पाचवा गुंडा:- ठीक है भाई...
    और वैन की स्पीड और बढ़ा दी।


    मै अभी भी रोड के बीचो-बीच खड़ा था....
    जब गाड़ी मेरे थोड़ा नजदीक आई ...
    तब मैने पत्थर वाला हाथ ऊपर उठा लिया निशाना लगाने के लिए...
    और एक एक आंख बंद करके निशाना पक्का कर लिया।


    वो गाड़ी अभी मुझ से थोड़ी दूर ही थी कि मैने पत्थर छोड़ दिया.....
    वो पत्थर काफी रफ्तार से आगे गया....
    और जाकर सीधा ड्राइवर की साइड शीशे मे लगा
    और वो चकनाचूर हो गया.. ..
    और ड्राइवर ने एकदम ब्रेक दबा दिया!
    और वैन स्लीप मारने लगी...
    और आखिर मे रुक गई।


    मै भी दौड़कर वैन के पास गया....
    और वैन का दरवाजा खोल कर उस लड़की को बाहर निकाल लिया।
    ये सब इतनी जल्दी हुआ कि उनमे से किसी को सम्भलने का मौका नही मिला था।


    मैने देखा लड़की के कपड़े फटे हुए थे....
    मैने जल्दी से अपना कोट उतारा और उस लड़की को दे दिया।


    मै:- जल्दी से भाग जाओ यहां से।


    और वो लड़की भागने लगी....
    इतने मे गाड़ी से सभी गुंडे बाहर आ गए।


    पहले गुंडे के हाथ मे चाकू था....
    दूसरे गुंडे के हाथ मे बेसबॉल बैट था....
    तीसरे गुंडे के हाथ मे हॉकी थी....
    चौथे गुंडे के हाथ में मोटरसाइकिल की चेन थी।


    मै भी तैयार था लड़ने के लिए।


    पहला गुंडा:- बड़ी मुश्किल से वो माल हाथ मे आया था साले....
    और तेरी वजह से वो मेरे हाथ से निकल गई....
    तुझे अब जिंदा नही छोडूंगा....
    मारो बे इसको।


    फिर दूसरा गुंडा और तीसरा गुंडा मुझे एक साथ मारने आए.....
    तीसरे गुंडे ने मुझे मारने के लिए हॉकी घुमा दी....उसकी हॉकी का निशाना मेरा सिर था....
    मैने आगे बढ़कर उसकी हॉकी पकड़ ली....
    उसके बाद दूसरे गुंडे ने आगे आ कर मेरे सिर पर बेसबॉल बैट मारना चाहा।


    मैने दोनो हाथो से हॉकी आगे कर ली और उसका वार रोक लिया...
    फिर मैने दूसरे गुंडे के पेट मे एक लात मारी....
    और वो पीछे जा गिरा....
    फिर मैने तीसरे गुंडे के मुंह पर एक पंच मार दिया....
    और उससे हॉकी छीन ली।


    फिर मैने उसी हॉकी से उसके पेट पर वार किया...
    और वो पेट पकड कर बैठ गया....
    उसके बैठते ही मैने उसके मुंह पर हॉकी से वार किया....
    और वो वही ढेर हो गया।


    इतने मे दूसरा गुंडा फिर से उठ कर मेरे पास आने लगा.... वो भागते हुए मेरी ओर आ रहा था....
    मैने अपनी हॉकी उसके पैर की ओर निशान लगाकर छोड़ दी....
    और वो लडखडा के गिर पड़ा।


    उसके हाथ से बेसबॉल बैट छुटकर मेरे पैरो के पास आकर गिर गया....
    मैने वो बेसबॉल बैट उठा लिया....
    और उस दूसरे गुंडे की ओर बढ गया....
    वो खड़ा होने ही वाला था कि मैने जल्दी से आगे बढ़ कर उसकी पीठ पर बेसबॉल बैट मारा.....
    और वो फिर से नीचे गिर गया....
    उसके बाद मैने उसके सिर पर वार किया.....
    उसके सिर से खून बहने लगा।


    फिर मै आगे बढ़ने लगा....
    उधर से चौथा और पांचवां गुंडा भी आगे आ रहा था।


    पांचवा गुंडा आगे था....
    उसने मुझे "गुप्ती" मारनी चाही....
    मै घूम गया...
    पर वो गुप्ती मेरे बाजू पर लग गई
    वहां से खून बहने लगा...
    पांचवे गुंडे के चेहरे पर मुस्कान आ गई।


    मुझे इस बार गुस्सा आ गया...
    मैने घूम के बेसबॉल बैट उसके हाथ पर दे मारा....
    जिससे उसके हाथ से वो गुप्ती छूट गई...
    और मैने फिर से एक वार उसके कंधे पर किया।


    वो अपना कंधा पकड़कर चिल्लाने लगा.....
    इतने मे चौथे गुंडे ने मेरे चेहरे पर उस मोटरसाइकिल की चैन से वार किया.....
    मै अभी इसके लिए तैयार नही था...
    वो चैन सीधा की मेरे मुंह पर लगी....
    मै पलट कर गिर गया।


    मुझे चेहरे पर तेज जलन हो रही थी.....
    जब मैने वहां हाथ लगाया तो वहां से खून निकल रहा था....
    ये मेरे गुस्से की इन्तहा थी....
    उससे पहले ही चौथे गुंडे ने मुझ पर फिर से वार कर दिया...
    इस पर चैन आ कर मेरे बाजू पर उसी जख्म पर लगी जहा पर गुप्ती लगी थी.....
    जब उसने फिर से हमला किया तब मैने अपने बाएं हाथ से चैन पकड़ ली.....
    और अपने हाथ मे पकडे बेसबॉल बैट से उसके हाथ पर वार किया.....
    उसके हाथ से चैन छूट गई.....
    फिर उसके बाद मैने बेसबॉल बैट नीचे गिरा दिया....
    और वो चैन अपने दाहिने हाथ मे पकड़ ली....
    और लगातार उस पर वार करने लगा।


    जिससे उसे काफी चोट लगी....
    जगह-जगह से उसके कपड़े फट गए और खून बहने लगा।


    फिर मै पहले गुंडे की ओर पलटा....
    इतने मे एक गोली की आवाज आई.....
    और गोली सीधा आके मेरे सीने मे लगी....
    मै अपनी छाती पकड़ के घुटनो के बल बैठ गया....
    ये गोली पहले गुंडे ने चलाई थी।


    फिर पहला गुंडा मेरे पास आया.....
    और अपने हाथ मे पकड़ा चाकू मेरे पेट मे दे मारा।


    इन सब के बाद उसके चेहरे पर एक कातिल मुस्कान थी......
    फिर वो ऊंची आवाज मे हंसने लगा।


    पहला गुंडा:- हा हा हा हा हा.....
    साले तू जानता नही तुने किससे पंगा लिया है....
    मैने तुझे कहा था ना कि तू जिंदा नही बचेगा.....
    और उसने मेरे पैर मे लात मारी और मै जमीन पर पड़ा तड़पने लगा।


    पर फिर भी मै खड़ा हुआ....
    जैसे ही मै उसको मारने को हुआ उसने मेरे पेट पर लात मारी.....
    मै फिर से गिर पड़ा।


    इस सब मे ये हुआ....
    कि गोली की आवाज सुनकर आसपास के घरो के लोग बाहर आ गए थे.....
    उनमे से वो लोग भी थे जिनको मैने उस ट्रक वाले हादसे मे बचाया था...
    यानी कि उस बच्चे के घर वाले!


    उन्होने मुझे पहचान लिया....
    और इधर अब वो पांचो एक साथ खड़े थे फिर उन्होने मुझ पर लातो की बरसात कर दी....
    मै बस नीचे पडा मार खा रहा था।


    इतने मे उस बच्चे के पिता ने अपने पड़ोसियो को आवाज लगाई।


    बच्चे के पापा:- भाई लोग उस भले आदमी को बचाओ....
    नही तो वो लोग उन्हे मार देगे।


    पहला पड़ोसी:- तो क्या हुआ....
    आबादी कम होगी।


    दूसरा पड़ोसी:-कैसी बात कर रहे हो.....
    चलो उन्हे बचाए।


    बच्चे के पिता:- चलो जल्दी से बचाए उन्हे....
    ये वही लडका है जिसने हमारे पूरे परिवार की जान बचाई थी।


    पहला पड़ोसी:- फिर तो जल्दी चलो।


    फिर कई लोग इकट्ठे हो गए और हमारी ओर भागने लगे।


    पांचवे गुंडे की नजर उन लोगो पर पड़ गई।


    पांचवा गुंडा:- भाई जल्दी से भागो यहां से देखो लोग इकट्ठा होकर आ रहे है।


    पहला गुंडा:- चलो सब लोग जल्दी से गाड़ी मे बैठो।


    और सभी गाड़ी मे बैठ गए....
    पहले गुंडे ने जाते जाते दो फायर और कर दिए मुझ पर... और वहां से गाड़ी मे बैठ के भाग गए।


    जब तक बच्चे के पिता और उनके पड़ोसी मेरे पास पहुचे तब तक मै बेहोश हो चुका था।


    और वो लोग मुझे उठा के हॉस्पिटल की ओर चल पड़े।

  8. #48
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    मुझे चार गोलियां....
    और एक चाकू लगा था।

    इन सब मे मै बेहोश हो गया....
    और उस बच्चे के पापा और उसके पड़ोसी मुझे लेकर हॉस्पिटल की ओर चल पड़े।

    इधर रुद्र को भी इन सब के बारे मे खबर मिल गई थी....
    वो भी पहले हॉस्पिटल की ओर चल पड़ा....
    पर उसे बस यही पता था कि किसी पर हमला हुआ है और उसे हॉस्पिटल लेकर गए है।

    इसलिए रुद्र ने अपनी टीम को घटनास्थल पर भेज दी और खुद अपने एक साथी के साथ हॉस्पिटल निकल गया।

    और टीवी पर भी ये खबर दिखाई जा रही थी.....
    कि गांधी रोड पर किसी पर हमला हुआ है....
    और उस शख्स की अभी कोई पहचान नही हुई है.....
    पर सुनने मे आया है कि उस लडके को चार गोलियां और एक चाकू लगा है।

    ये खबर अभी और उसके परिवार और कविता मैडम और उनके परिवार ने भी देखी।

    क्योकि ये घटना मेरे घर के पास मे हुई थी तो उनको भी चिंता होने लगी...
    और वो लोग सभी मेरे घर की ओर चल पड़े।

    इधर वो लोग मुझे लेकर हॉस्पिटल मे पहुंच गए थे...
    ये वही हॉस्पिटल था.....
    जहां मै एक बार मूझे खुद के लिए.....
    यहां मैम लेकर आई थी....
    फिर प्रीत के साथ जब वो जख्मी हुई थी....
    उसके बाद जब उस बच्चे के माता पिता का एक्सीडेंट हुआ था।

    बच्चे का पिता डॉक्टर डॉक्टर चिल्लाने लगा....
    जल्दी ही डॉक्टर भी आ गया....
    डॉक्टर ने भी जल्दी ही मुझे पहचान लिया।

    डॉक्टर:- हे भगवान! नर्स जल्दी करो....
    ये केस बहुत नाजुक हालत मे है....
    इनके पास वक्त बहुत कम है।

    और वो मुझे OT मे ले गए....
    मेरे मुंह के ऊपर एक लाइट कर दी....
    और मेरे ऊपर एक ऑक्सीजन मास्क लगा दिया.....
    मेरे एक हाथ पर ग्लूकोस की बोतल लगा दी और दूसरे हाथ मे खून की बोतल।

    फिर उन्होंने मेरा ऑपरेशन शुरू कर दिया।

    इधर रूद्र भी हॉस्पिटल पहुंच गया था और पूछताछ करने लगा उस आदमी और उसके पड़ोसी से।

    रूद्र:- हा तो आपका नाम क्या है?
    आदमी:- जी मेरा नाम हीरालाल है।
    (दोस्तो ये उस बच्चे के पिता का नाम है)

    रूद्र:- हा तो मिस्टर हीरा क्या आप बता सकते हो कि ये सब कैसे हुआ।

    हीरा:-जी साहब!
    हम सब लोग अपने अपने घरो मे थे...
    कि हमने गोली चलने की आवाज सुनी तो हम सभी अपने-अपने घरो से बाहर आ गए।

    रुद्र:- फिर क्या हुआ?

    हीरा:- फिर हमने देखा कि 5 आदमी एक लडके को मार रहे थे....
    हमारे घर से बाहर आने तक उन लोगो ने उस लडके को दो गोली मार दी थी....
    और उसे मार रहे थे....
    फिर हम सब इकट्ठा हो गए उसे बचाने के लिए भागे....
    पर उन्होने हमे देख लिया और वहां से भाग गए....
    पर जाते जाते वो लोग उस लडके को दो गोली और मार गए।

    रुद्र:- क्या तुम उन लोगो को पहचान सकते हो?
    हीरा:- जी नही!

    रूद्र:-और इस लडके को पहचान सकते हो?

    हीरा:-जी इनका नाम दीप है जिन्होने कुछ दिन पहले ट्रक एक्सीडेंट मे हमारी जान बचाई थी।

    रूद्र:- क्या नाम बताया?
    हीरा:- दीप!
    रुद्र:-दीप वर्मा यही ना!
    हीरा:-जी!

    रुद्र:- ठीक है!
    अब तुम लोग जाओ....
    मै यहां देखता हूं मै खुद इस केस की अच्छे से तहकीकात करूंगा।

    हीरा:-जी साहब!
    आप उन लोगो को सजा जरूर दिलवाना....
    जिसने इस भले आदमी के साथ ऐसा किया।

    रूद्र:- आप लोग चिंता मत कीजिए।

    फिर हीरा को छोड़कर बाकी सब वापस चले गए।

    इधर कविता मैम और उनका परिवार....
    और अभी का परिवार भी मेरे घर के पास पहुंच गए।

    पहले कविता मैम पहुंची...
    पर मेरे घर पर ताला लगा हुआ था.....
    जिससे उनकी परेशानी और बड़ गई।

    इतने मे परी अभी और अनु भी पहुंच गए....
    कविता मैम परी और उनके परिवार को देखकर हैरान हुई...
    वही परी भी कविता मैम प्रीत और दीपक अंकल को देख हैरान हुई।
    (इनकी हैरानी की वजह कुछ देर मे पता चल जाएगी)

    इतने मे कुछ ही दूरी पर कुछ लोग खड़े थे...
    ये वही लोग थे जो मुझे हॉस्पिटल लेकर गए थे।

    अभी की नजर भी उन पर पड़ गई।

    अभी:- वो देखिए वहां भीड कैसी....
    चलिए अंकल हम देख कर आए।

    फिर अंकल और अभी उस और चल दिए....
    अभी ने वहा किसी से पूछा।

    अभी:-सुनिए वहां इतनी भीड कैसी?
    आदमी:- जी वहां एक दीप नाम के लडके को मारने की कोशिश की गई है...
    पता नही उस भले मानस से किसी की क्या दुश्मनी....
    अभी उस बच्चे को हॉस्पिटल पहुंचा कर आए है।

    यह बात सुनके अभी और अंकल के हाथ पाव ठंडे पड़ गए ....
    पर अभी ने हिम्मत करके पूछा।

    अभी:- जी अभी उसे कौन से हॉस्पिटल लेकर गए थे।
    आदमी:- सिटी हॉस्पिटल।

    अभी:-आपका बहुत बहुत धन्यवाद भाई साहब।

    अंकल और अभी वापस अपने परिवार की ओर चल दिए।

    कविता मैम:- क्या हुआ?
    अंकल:- कुछ नही जल्दी कार मे बैठो।

    परी:-पर हुआ क्या है?
    दीप का कुछ पता चला।
    अभी:-अभी मै कुछ नही बता सकता।

    तुम सब जल्दी कार मे बैठो।
    सभी जल्दी से कार मे बैठ गए और अभी और अंकल ने कार हॉस्पिटल की ओर दौड़ा दी।

    कुछ ही देर मे वो लोग हॉस्पिटल पहुंच गए।

    हॉस्पिटल देख के कविता मैम प्रीत अनु और परी की दिल की धड़कन बढ़ गई।

    परी:- आप हमे यहा क्यो लाए हो ?

    उधर कविता ने भी यही सवाल अंकल से पूछा।

    अंकल/अभी:-क्योकि दीप यही पर है।

    सभी एक साथ:- क्या मतलब?

    अभी अभी जिस पर हमला हुआ था वो कोई और नही बल्कि दीप ही था।

    ये बात सुनकर उन चारो के पैरो के तले से जमीन निकल गई।
    और उनकी आंखो से आंसू निकलने लगे।

    और चारो कार से निकल के हॉस्पिटल के अंदर भागे अंकल और अभी भी उनके पीछे ही थे।

    रिसेप्शन पर जाकर उन्होंने पूछा...

    कविता मैम:-मैम जिस पर अभी अभी हमला हुआ है उनको कहा रखा गया है।

    रिसेप्शनिस्ट:- मैम उनका तो ऑपरेशन चल रहा है....
    लेकिन आप लोग उनके क्या लगते हो।

    अंकल:- हम उनके रिश्तेदार है।

    रिसेप्शनिस्ट:- तो प्लीज आप ये फॉर्म भर दीजिए।
    अंकल:- ठीक है तुम लोग आगे जाओ मै फॉर्म भर कर आता हूं।

    मैम और बाकी सब OT की ओर बढ़ गए।

  9. #49
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    *अंदर मेरा ऑपरेशन चल रहा था....
    और बाहर मैम और अभी सभी पहुंच गए थे।

    सभी मेरी सलामती के लिए दुआ माग रहे थे...
    परी मैम प्रीत और अनु की आंखो मे आंसू थे।

    अंदर डॉक्टर ने मेरे पेट से तीन गोलियां निकाल दी थी....
    और चोथी गोली निकालने की कोशिश कर रहे थे।

    चोथी गोली मेरे सीने मे दिल के बिल्कुल पास लगी थी....
    इसलिए डॉक्टर पूरी सावधानी से काम ले रहे थे....
    उनकी जरा सी गलती मेरे दिल की धडकन ही रोक सकती थी....
    डॉक्टर अभी गोली निकालने वाला ही था....
    कि मेरी सांस उखडने लगी!

    डॉक्टर:-नर्स जल्दी से ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाओ।
    नर्स:- ऑक्सीजन का सिलेंडर खत्म होने वाला है।

    डॉक्टर:- तो जल्दी से दूसरा सिलेंडर लगाओ!

    नर्स:- दूसरे भी खत्म है....
    और एक सिलेंडर है उसमे भी थोड़ी ही गैस है।

    डॉक्टर:- तो जल्दी करो....
    और बाहर जाकर जल्दी सिलेंडर का इंतजाम करने के लिए कहो।

    नर्स:- जी!!!

    और वो नर्स बाहर आ गई...
    नर्स बाहर मैम लोगो के पास जाकर!

    नर्स:- आप लोग कौन है?

    अंकल:- हम लोग दीप के साथ है....
    कैसी कंडीशन है उसकी?

    नर्स:- अभी सिचुएशन आउट ऑफ कंट्रोल है....
    और हां आपका अगर दूसरे हॉस्पिटल मे कोई कांटेक्ट है तो प्लीज एक ऑक्सीजन सिलेंडर का इंतजाम कर दीजिए....
    हम भी अपनी तरफ से कोशिश कर रहे है।

    इतना बोल कर वो नर्स चली गई....
    इधर अंकल और अभी सिलेंडर का इंतजाम करने लगे....

    इतने मे नर्स उस थोड़ी गैस वाले सिलेंडर को ले आई।

    नर्स:- आप लोग जल्दी सिलेंडर का इंतजाम कीजिए....
    और वो अंदर चली गई....
    अंदर जल्दी से सिलेंडर बदला गया।

    इधर बाहर...

    अभी:- (फोन पर) ठीक है थैंक्स...
    मैं जल्दी ही आता हूं।

    और अभी ने फोन काट दिया।

    अभी:- अंकल सिलेंडर मिल गया है मै अभी लेकर आता हूं...
    और वो जल्दी से निकल गया....
    और तकरीबन 25 मिनट बाद वो वापस आ गया....
    क्योकि हॉस्पिटल नजदीक ही था।

    नर्स भी उसी वक्त बाहर आई...
    और जल्दी से सिलेंडर लेकर अंदर चली गई।

    ऐसे ही वक्त गुजरता गया डॉक्टर ने पूरी सावधानी से चौथी गोली भी निकाल दी....
    और ड्रेसिंग करके बाहर आ गए।

    उसके बाहर आते ही सभी लोगो ने उसे घेर लिया।

    कविता मैम:- डॉक्टर अब कैसा है मेरा बेटा....
    डॉक्टर देखिए बहन जी मैने सारी गोलियां निकालती है....
    और ड्रेसिंग कर दी...
    72 घंटों तक हम कुछ नही कह सकते....
    अगर तब तक उसे होश आ गया तो ठीक है वरना!

    परी:- वरना क्या डॉक्टर?
    डॉक्टर:- वरना उसकी जान भी जा सकती है।

    प्रीत:- नही डॉक्टर प्लीज ऐसा मत कहिए....
    मेरे भैया को बचा लीजिए।
    डॉक्टर:- देखिए मै कुछ नही कर सकता....
    अब तो सब कुछ भगवान के भरोसे है।

    और डॉक्टर वहां से चला गया...
    और छोड़ गया तो सबकी आंखो मे आंसू!

    कविता मैम:- आखिर क्यो मेरे बेटे के साथ हर बार कुछ ना कुछ होता रहता है.....
    भगवान आखिर इस बच्चे को चैन से जीने नही देता...

    बहुत दुख सह लिए इस बच्चे ने!

    परी:- धीरज रखिए बुआ भाई को कुछ नही होगा।

    (परी शर्मा जोकि अब परी अभिनव त्यागी है....
    वो कविता मैम की भांजी है...
    यानी की प्रीत के मामा की बेटी...
    इसलिए ये सब एक दूसरे को देख कर हैरान हुए थे)

    कविता मैम:- कैसे धीरज रखू बेटा मेरा बेटा उधर जिंदगी और मौत के बीच लड रहा है।

    परी:-कुछ नही होगा भाई को...
    भगवान इतना कठोर नही हो सकता।

    कविता मैम:- बेटा तुम नही जानती...
    कि भगवान इस बच्चे के प्रति हमेशा ही कठोर रहा है।

    प्रीत:- (रोते हुए) बस करो मम्मी...
    चुप हो जाओ भैया को कुछ नही होगा....
    मै प्रार्थना करूगी भगवान जी से!

    प्रीत हॉस्पिटल के पास ही एक मंदिर था....
    वो वहां से उठी और मंदिर की ओर चल दी।

    प्रीत:- (अपने मन मे) भगवान जी मेरे भैया को कुछ मत होने देना...
    बड़ी मुश्किल से मुझे मेरे भैया मिले है।

    और चलते चलते मंदिर पहुंच गई और मूर्ति के पास जा के घुटनो के बल हाथ जोड कर बैठ गई....
    और मेरी सलामती की दुआ मांगने लगी।

    ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

    ## इधर मै बेहोशी की हालत मे एक सपना देख रहा था....
    जो कि मेरी बीती हुई जिंदगी का था####

    आज से 10 साल पहले...

    ये वो दिन था जब मुझे मेरे घर से "मनहूस" का ठप्पा लगाकर निकाला गया था।

    मुझे एक घर मे लाया गया ये वही घर था जहां मै आज रह रहा हूं।

    सब ने मुझे अकेला छोड दिया....
    मै बस एक कोने मे बैठा रो रहा था।

    मेरे कानो मे बस एक ही शब्द गूंज रहा था।

    "मनहूस" "मनहूस" "मनहूस" और "मनहूस"!

    मै अपने कान बंद करके बस रोए जा रहा था....
    और अपनी मां को पुकार रहा था।

    मै:- मां मां मां मां...
    कहां हो तुम मां....
    देखो सब मुझे अकेला छोड़कर चले गए....
    मां मुझे बहुत डर लग रहा है....
    सब मुझे पता नही क्यो "मनहूस" "मनहूस" बोल रहे है?
    मां प्लीज आ जाओ मुझे डर लग रहा है....
    मै ऐसे ही चिखते हुए रोने लगा।

    इतने मे मेरे घर का दरवाजा खुला...
    और एक 50-55 साल की औरत अंदर आई।

    (परिचय-पवित्रा देवी....
    पति की मौत हो चुकी है....
    और कोई बच्चा नही है....
    ये यहां बस अपने मायके मे रहती है)

    वो औरत मेरा चिल्लाना और रोना सुनकर आई थी।

    जैसे ही मैने किसी औरत को अपने घर मे देखा तो "मां मां मां" कहते हुए भागकर उस औरत से जा लिपटा....

    उसने भी मुझे कस के अपने गले से लगा लिया।

  10. #50
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    कभी-कभी किस्मत भी अच्छा खेल खेलती है....
    पल मे सब कुछ छीन लेती है....
    और पल मे सब कुछ दे देती है...
    मेरे साथ भी यही हुआ....
    जहा पूरे परिवार ने मुझे से मुंह मोड़ लिया वही जिंदगी दोबारा शुरू करने के लिए सहारा दे दिया


    पवित्रा जी के रूप मे....


    मै माँ माँ करता हुआ जाकर पवित्रा जी से लिपट गया।


    उन्होंने भी मुझे कस के गले लगा लिया।


    मै:- रोए जा रहा था और वो पवित्रा जी मुझे चुप कराने की कोशिश कर रही थी।


    पवित्रा:- बस कर बेटा कितना रोएगा?
    मै:- आप मुझे छोड़ कर चली गई थी?
    पवित्रा:- अरे बेटा मै यही तो हूं...
    मै:- ये देखो सब मुझे यहां अकेला छोड़ गए थे....और सभी लोग मुझे "मनहूस" कह रहे थे!


    पवित्रा:- कोई कुछ नही कहेगा मेरे बेटे को...
    अब मै आ गई हूं ना!


    फिर पवित्रा जी ने मुझे पानी पिलाया और पलंग पर बैठ गई।
    और मुझे अपनी गोद मे सिर रखकर लेटने को कहा...
    मै उनकी गोद मे सिर रखकर लेट गया।


    वो मेरे सिर मे उगलियां फिराने लगी.....
    जिससे मुझे नींद आ गई।


    एक सुकून था उन के साए मे....
    मुझे बहुत सुकून मिल रहा था...
    ना मुझे अकेलापन महसूस हो रहा था....
    और ना ही मुझे वो आवाजे सुनाई दे रही थी....
    था तो बस एक सुकून।


    पता नही मै कितनी देर सोता रहा...
    जब मै उठा तो मै किसी अंजान औरत की गोद मे सिर रखकर लेटा हुआ था....
    और वो अभी भी मेरे सिर मे उंगलियां फिरा रही थी...


    पवित्रा:- उठ गए बेटा?


    मै:- जी!
    पर आप कौन?
    और आप यहां कैसे....
    और मै आपकी गोद मे सिर रखकर कैसे सो रहा हूं?


    पवित्रा जी मेरे सवालो को सुन रही थी...
    जब मै चुप हुआ तो वह मुस्कुरा कर बोली...


    पवित्रा:- बेटा मै तुम्हारी पड़ोसी हूँ...
    तुम जब रो रहे थे तो मुझसे रहा नही गया.....
    और मै यहां चली आई....
    यहां आकर मैने देखा कि तुम रो रहे हो....
    तो मैने तुम्हे चुप कराया....
    और फिर सुला दिया।


    मै:- लेकिन मुझे कुछ भी याद नही आ रहा।


    पवित्रा:- कोई बात नही बेटा....
    जब ये सब हुआ तुम अपनी सुध-बुध मे नही थे....
    वैसे तुम्हारा नाम क्या है बेटा?


    मै:- जी मेरा नाम दीप वर्मा है।


    पवित्रा:- और तुम्हारा परिवार!


    परिवार का नाम सुनते ही है मै उदास हो गया और मेरी आंखो मे आंसू आ गए।


    मै:- उन्होंने ही मुझे यहां अकेला छोड़ा है।


    वो मेरे आंसू पूछते हुए वोली....


    पवित्रा:- क्यो?


    मै:- कुछ महीने पहले मेरी मां की मौत हो गई....
    उसके बाद मेरी बहन और पापा का एक्सीडेंट हो गया....
    इन सब का कारण सभी घरवाले और रिश्तेदारो ने मुझे ठहराया....
    और मुझे कहने लगे कि मै मनहूस हूँ.....
    मेरी ही मनहूसियत का साया इस घर पर पड़ा है....
    इसलिए सभी ने मुझे घर से निकाल दिया.....
    और यहां छोड़ गए।


    मेरी बातो को सुनकर पर पवित्रा जी की आंखो मे भी आंसू आ गए....
    पर जल्दी ही उन्होंने खुद पर काबू पा लिया।


    पवित्रा:- (मन मे) इस नन्ही सी जान को कितना कुछ सहना पड़ रहा है....
    पता नही कैसा परिवार है इसका!


    पवित्रा:- (मुझसे) चलो बेटा मै कुछ बना देती हूं तुम्हारे लिए......
    भूख लगी होगी ना।


    भूख तो मुझे सच मे लगी थी....
    तो क्या करूं....
    बच्चा था तो बर्दाश्त नही कर सकता था....
    इसलिए मैने भी हाँ मे सिर हिला दिया।
    फिर पवित्रा जी ने कुछ देर मे दाल और रोटी बना दी।


    रात का वक्त हो चला था....
    हम दोनो ही खाने बैठ गए.....
    पवित्रा जी ने मुझे अपने हाथो से खिलाया।


    फिर हम दोनो खाना खाकर चारपाई पर लेट गए और पवित्रा जी मुझे सीने से लगा कर सुलाने लगी।


    मै:- क्या मै आपसे एक बात पूछूं?
    पवित्रा:- हां पूछो!


    मै:-(झिझकते हुए) क्या मै आपको मां बुला सकता हूं?


    (यहां से अब मै पवित्रा जी को पवित्रा मां लिखूंगा)


    मेरी बात सुनकर पवित्रा माँ ने मुझे गले से लगा लिया पवित्रा माँ:- (मेरा माथा चूम कर) हां क्यो नही बेटा....
    तुम मुझे माँ बुला सकते हो।


    मै:- उनको अपनी बाहो मे कसते हुए आप भी मुझे को छोड़ के तो नही जाओगी...


    पवित्रा माँ:- नही बेटा मै कही नही जाऊंगी।


    फिर हम एक दूसरे से ऐसी बाते करते हुए सो गए।


    मै सुबह काफी देर तक सोता रहा....
    जब उठा तो अकेला था....
    पवित्रा माँ कही नही थी....
    मैने उन्हे चारो तरफ नजर घुमा कर देखा पर वो कही नही थी।
    मै फिर से रोने लगा।


    मै:- (रोते हुए )माँ माँ कहां हो तुम....
    फिर से मुझे छोड़ कर चली गई माँ माँ!


    इतने मे दरवाजा खुला पवित्रा माँ इतना अंदर आ गई....
    उनके हाथ मे एक खाने की थाली थी।


    वो मुझे रोता देख जल्दी से मेरे पास आई और खाने की थाल साइड मे रख कर मुझे गले से लगा लिया।


    पवित्रा माँ:- क्या हुआ मेरे बेटे को?
    मै:- कहां चली गई थी आप....
    मुझे अकेला छोड़ कर!


    पवित्रा माँ:- वो मै घर चली गई थी तैयार होने और तुम्हारे लिए खाना लेने।


    फिर वो मेरे आशु पूछते हुए बोली....


    पवित्रा माँ:- चलो अब जल्दी से चुप हो जाओ फ्रेश हो के आओ...
    फिर तुम्हे नाश्ता भी कराना है।


    फिर मै फ्रेश होकर आ गया....
    और हमने नाश्ता किया।

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