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Thread: मनहूस जिंदगी - एक मासूम लडका

  1. #51
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    कभी-कभी जिंदगी सब कुछ बदल देती है।किसी को पल भर मे खुशी देती है तो किसी को गम...पर हर किसी की झोली मे कुछ ना कुछ जरूर आता है!उस ऊपर वाले ने हमारे हाथो की लकीरो मे कुछ ना कुछ जरूर लिखा है....जो वक्त के साथ घटता रहता है।इस सब मे पूरा दिन गुजर गया....शाम को पवित्रा मां मुझे पार्क ले गई....पार्क मे हम दोनो ने मस्ती की।और थोड़ा दिन ढलते ही हम लोग घर आ गए....रास्ते मे पवित्रा मां ने मुझे आइसक्रीम भी खिलाई।घर आकर मां ने खाना बनाया और हमने मिलकर खाया.... फिर हम लोग चारपाई पर लेट गए....और बाते करने लगे।पवित्रा मां:- बेटा ये बताओ जब मै कही चली जाती हूं तो तुम रोने क्यो लग जाते हो?मै:- मुझे डर लगने लगता है कि कही आप भी मुझे छोड़ कर चली जाओगी।पवित्रा मां:- तो ये बात है....बेटा अब तुम बड़े हो गए हो....तुम्हे अकेला रहना सीखना होगा...तुम्हे जिंदगी मे अभी बहुत कुछ करना है!अगर ऐसे ही रोते रहे तो कभी अपने पैरो पर खड़े नही हो पाओगे।और जब मै नही रहूँगी तो तुम किसको बुलाओगे?मै मां की ना रहने वाली बात को सुनकर डर गया और उनसे से कसकर लिपट गया।मै:- मै आपको कही नही जाने दूंगा!पवित्रा मां:- बेटा एक ना एक दिन हर किसी को जाना पड़ता है...यही तो जिंदगी है!कब कहा और कैसे क्या हो जाए किसी को नही पता! इसलिए अपने अंदर के डर को खत्म करो।मै पवित्रा मां की बाते सुनते सुनते सो गया....क्योकि उनसे लिपटते ही मुझे सुकून मिला और मुझे कब नींद आई पता ही नही चला....जब मां ने मेरी ओर से कोई जवाब ना सुना....तो उन्होंने मेरी ओर देखा और मुझे सोते हुए पाया।मां के चेहरे पर स्माइल आ गई...और उन्होंने मुझे माथे पर किस किया और बालो मे उगलियाँ फिराने लगी।पवित्रा मां:- ये देखो मेरा नादान बेटा मेरी पूरी बात सुने बिना ही सो गया!ऐसे ही पवित्रा मां खुद से बाते करते हुए सो गई।ऐसे ही वक्त गुजरता गया...पवित्रा मां और मेरा रिश्ता बढता गया।देखते ही देखते 6 महीने गुजर गए...और एक दिन मां ने मुझसे कहा!पवित्रा मां:- बेटा मैने तुम्हारा एडमिशन स्कूल मे करवा दिया है।मै:- सच मे... लव यू मां।पवित्रा मां ने भी मुझे गले से लगा लिया।पवित्रा मा:- लव यू टू बेटा....चलो तैयार हो जाओ हमे मार्केट जाना है. .तुम्हारे लिए यूनिफॉर्म लेनी है...और बुक्स वगैरह भी लेनी है। फिर मै और मां चल दिए मार्केट...हम जल्द ही सारा सामान लेकर वापस आ गए....मेरा ऐडमिशन उस वक्त 4th मे हुआ था।ऐसी ही रात भी बीत गई।अगले दिन हम सुबह जल्दी उठे....पवित्रा मां ने मुझे जल्दी से स्कूल के लिए तैयार किया।और मुझे नाश्ता करवा के स्कूल छोड़ आई।मेरा मन तो नही था पवित्रा मां को छोड़कर जाने का पर जाना पड़ा क्योकि पढ़ना भी मुझे अच्छा लगता था...पर ना जाने क्यो मुझे बेचैनी हो रही थी दिल मे एक तडप सी उठ रही थी....मै क्लास मे पहुच गया...वहां पहुंचा तो मैडम ने सारी क्लास से मेरा इन्ट्रो करवाया और पढ़ाने लगी।इधर पवित्रा मां भी मुझे स्कूल छोड़कर घर पहुंच गई थी। जब ये घर पहुची तो अपने माईके वाले घर चली गई वहां उनके बाकी के घर वाले नाश्ता कर रहे थे....उनकी फैमिली मे बस एक भाई भाभी और उनकी एक बेटी थी। पवित्रा मां अभी घर के अंदर एंटर हुई ही थी कि...घर के बाहर दो गाड़ियां आकर रुकी!उसमे से कुछ आदमी बाहर निकल कर घर की ओर बढे.... जल्दी ही उन्होंने घर मे घुसकर तोड़फोड़ शुरू कर दी!पवित्रा मां के भाई आगे आए तो उनमे से एक ने पवित्रा मां के भाई के गले पर चाकू चला दिया....वो वही ढेर हो गए... घर की बाकी की तीन औरते भागने लगी।पवित्रा मां और उनकी भाभी और भतीजी की भी जल्द ही वहां लाशे पड़ी थी।(बात दरअसल ये थी कि गुंडे पवित्रा मा के भाई के एक बिजनेस मैन दुश्मन ने भेजे थे.... जिसका मुझे बात मे पता चला था)इधर मुझे स्कूल मे बहुत बेचैनी हो रही थी.....बार-बार मुझे पसीना आ रहा था....अजीब सी घबराहट हो रही थी!मुझसे और बर्दाश्त ना हुआ इसलिए मै रिसेस टाइम मे ही घर आने लगा...पर मुझे क्या पता था मेरी जिंदगी का "कड़वा सच" आने वाले तूफान से बेखबर मै घर की ओर बढ़ रहा था।

  2. #52
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    मै घर की ओर भागता हुआ आ रहा था....
    जल्दी ही मै घर पहुंच गया।

    पर मेरे घर पहुंचने से पहले ही पवित्रा मां के घर के बाहर लोग इकट्ठा हो गए थे....
    और पास मे पुलिस भी थी ....
    और एक एम्बुलेंस भी थी।

    मै भी पास चला गया।

    इतने में अंदर से कुछ लोग लाशो को ले आए...
    सबके चेहरे ढके हुए थे....
    और जब मैने ये दृश्य देखा तो मुझे अपनी मां की याद आ गई।

    इसलिए मै वहां से आगे जाने के लिए मुडा ही था कि एक लाश का कफन हवा के झोके से उड़ गया....
    और जब मैने वहां देखा तो उस लाश का चेहरा देख कर मै पूरा हिल गया...
    आखो से झर झर आंसू बहने लगे।

    मै लाश के पास जाने लगा धीमे कदमो से...
    और लाश के एकदम पास जाकर मै रोने लगा क्योकि ये लाश किसी और की नही बल्कि पवित्रा मां की थी।

    मै लाश से लिपट गया...
    वार्ड ब्वॉय स्टेचर नीचे रख दिया....
    और मै लिपट के जोर जोर से रोने लगा।

    मै:- मा मा...
    मा मा...
    मा मा उठो ना!

    मै ऐसे ही रोए जा रहा था....
    इतने मे एक आदमी आया और मुझे कंधे से पकड़ा

    आदमी:- बेटा चुप हो जाओ वो अब कभी नही उठेगी।

    मै:- ऐसे कैसे नही उठेगी...
    मां उठो ना मा प्लीज...
    तुमने वादा किया था मुझे छोड़कर नही जाओगी फिर क्यो चली गई मेरी असली मां की तरह तुम भी मुझे छोड़ कर चली गई...
    मा मा उठो ना!

    मै ऐसे ही रोता रहा....
    और रोता रोता मै बेहोश हो गया।

    जब आंख खुली तो मै हॉस्पिटल मे था...
    पास मे ही वो आदमी खड़ा था....
    मैने तुरंत ही उससे पूछा मा कहा है?

    आदमी:- वो लोग घर मे है...
    आज उनका अंतिम संस्कार होना है...
    चलो जल्दी चलो...
    फिर मै उस आदमी के साथ घर आ गया...
    घर आकर मै फिर पवित्रा मां से लिपट कर रोया।

    फिर सभी लोगो ने अर्थियो को उठा दिया और मै आगे चलने लगा।

    जल्दी ही हम सब लोग श्मशान पहुंच गए वहां पर चिताओ को आग दी गई।
    इस पूरे कार्यक्रम मे मेरी आंखो से आंसू बहते रहे फिर हम लोग घर आ गए।
    आज मै फिर से अकेला हो गया था...
    आज मै घर मे आकर फिर से रोने लगा....
    ऐसे ही रोता रहा!

    फिर अगले दिन हम लोग अस्थिया इकट्ठी करने गए और नदी मे बहा दी।

    अब मेरे दिन ऐसे ही गुजरने लगे....
    बस अकेला जिंदगी जी रहा था...
    सारा दिन मै घर की दहलीज मे बैठा रहता था और आते जाते लोगो को देखता रहता था।

    ऐसे ही दिन गुजरते गए....
    उस दिन के बाद मै स्कूल भी नही गया।

  3. #53
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    एक दिन मै रोज की तरह अपने घर के दरवाजे पर बैठा था।
    तभी वहाँ वो अंकल आए जिन्होंने पवित्रा मां की मौत वाले दिन मुझे संभाला था।

    उन्होंने मेरे सिर पर आप फेरते हुए पूछा...

    अंकल:- हैलो बेटा!कैसे हो?
    मै:- (हल्की सी आवाज मे)ठीक हूं अंकल!

    अंकल:- बेटा मुझसे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है....
    क्या हम अंदर चल कर बात करे?

    मैने अंकल को एक बार देखा....
    फिर वहां से उठकर अंदर आ गया...
    साथ मे अंकल भी आ गए....
    हम आकर चारपाई पर बैठ गए।

    अंकल:- बेटा बात दरअसल ये है कि मै पवित्रा देवी जी का वकील हूं!
    उन्होंने तुम्हारे बारे मे भी मुझे बताया था....
    उन्होंने मरने से पहले एक वसीयत बनाई थी।

    मैं अंकल की तरफ देख रहा था!

    अंकल बेटा पवित्रा देवी जी ने अपना बिजनेस और प्रॉपर्टी तुम्हारे नाम कर दी थी...
    और ये प्रॉपर्टी तुम्हे 19 साल पूरे होने पर मिलेगी....
    पवित्रा देवी जी के भाई और परिवार ने भी अपनी प्रॉपर्टी तुम्हारे नाम कर दी थी...
    क्योकि सभी ने तुम्हे घर का बेटा मान लिया था।

    पर भगवान को कुछ और ही मंजूर था!
    जब तक तुम बडे नही हो जाते तुम्हारा बिजनेस मैनेजर संभालेगा.....
    और पवित्रा जी ने तुम्हारा एक अलग अकाउंट खुलवाया दिया था बैक मे....
    जिस मे हर महीने तुम्हारे अकाउंट मे ₹30000 आया करेगे।

    फिर अंकल ने अपने साथ लाया हुआ एक बैग खोला जिसमे से उन्होंने कुछ कागजात निकाल कर मुझे दिए.... और साथ मे चेकबुक दी....
    एक एटीएम भी था।

    अंकल:- ये तो बेटा तुम्हारी प्रॉपर्टी के कागजात और अकाउंट डिटेल....
    एटीएम और चेक बुक....
    इनको संभाल के रख लो।

    और तुमसे एक बात और करनी है....
    बेटा तुम स्कूल जाना शुरू कर दो और अपना बिजनेस सम्भालने के काबिल बनो।

    स्कूल जाने से तुम्हारा अकेलापन भी कम होगा और तुम्हारा मन भी लगेगा....
    ऐसे अकेले मत रहा करो।

    जाने वालो को तो कोई रोक नही सकता इसलिए अपनी जिंदगी यादो के सहारे मत काटो....
    अपनी जिंदगी मे आगे बढ़ो...
    पवित्रा जी की भी यही इच्छा थी।

    मै अंकल की बातो को ध्यान से सुन रहा था....
    और मेरी आंखो से आंसू बह रहे थे।

    फिर अंकल ने मुझे गले से लगाया....
    और चुप करवाया घर से निकल गए।

    मै खड़ा हुआ और कागजात और बाकी के सामान संभाल के रख दिया।

    ऐसे ही रात भी हो गई....
    मैने सोच सोच के पक्का कर लिया कि मै कल स्कूल जाऊंगा क्योकि ये पवित्रा मां की भी इच्छा थी....
    इसलिए रात को मै सो गया।

    फिर सुबह जल्दी उठ गया और रेडी होकर स्कूल पहुंच गया।

    स्कूल मे मै जाकर अकेला बैठ गया....
    ना किसी से बात की और ना ही किसी की ओर देखा...
    बस अपनी सीट पर बैठा किताब खोल कर उसी मे निगाहे गडाए रखी!
    थोड़ी देर बाद मैडम आ गई।

    सभी बच्चो ने उन्हे गुड मॉर्निंग विश किया...
    सभी बैठ गए....
    फिर एक दम मैम की नजर मुझ पर पड़ी।

    मैम:- दीप यहां आओ!
    मै मैम के पास चला गया।

    मै:- तुम इतने दिन स्कूल क्यो नही आए?
    मै मैम की बात का जवाब देने लगा....
    और जो कुछ भी पवित्रा मां के साथ हुआ वो बताने लगा।

    मै:- मैम मेरी पवित्रा मां को किसी ने मार दिया था....
    उनके अलावा मेरा कोई नही था....
    इसलिए उनके जाने के बाद मै फिर से अकेला हो गया हू....
    और मेरा कही भी मन नही लगता....
    इसलिए मै स्कूल नही आ रहा था...
    पर कल वकील अंकल आए थे...
    उन्होंने मुझे समझाया था और स्कूल आने के लिए कहा था..
    इसलिए मै स्कूल आ गया।

    यह सब बोलते हुए मेरी आंखों मे आंसू आ गए थे...
    मैम ने मेरी आंखे साफ की....
    और मुझे गले लगाया।

    फिर सभी से बोली....

    मैम:-चलो बच्चो सभी अपनी अपनी जगह पर खड़े हो जाओ और 2 मिनट आंखे बंद करके मौन करो...
    ताकि भगवान दीप की मां की आत्मा को शांति दे।

    फिर सभी ने ऐसा किया...
    फिर मैम ने मुझे सीट पर बैठा दिया....
    और क्लास शुरू हुई....
    ऐसे ही क्लास लगती रही....
    रीसेस भी हो गई....
    सभी बच्चे बाहर चले गए पर मै क्लास मे ही बैठा गया.... फिर रीसेस भी खत्म हो गई....
    दोबारा क्लास लगी....
    और अंत मे स्कूल की छुट्टी हो गई।

    मै घर पहुंच कर सीधा चारपाई पर लेट गया और सो गया....
    फिर मेरी नींद रात को खुली....
    मैने दूध और ब्रेड खाया और फिर से चारपाई पर आकर लेट गया....
    आज फिर मुझे अपनी दोनो मां की याद आ रही थी....
    मै बस लेटा हुआ आंसू बहा रहा था।

    फिर से मेरे दिन ऐसे ही गुजरने लगे...
    घर से स्कूल स्कूल से घर....
    कभी कभी उस पार्क मे भी चला जाता जहां मै और पवित्रा मां जाते थे।

    थोड़ा वक्त गुजार के वापस आ जाता था...

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