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Thread: मनहूस जिंदगी - एक मासूम लडका

  1. #51
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    कभी-कभी जिंदगी सब कुछ बदल देती है।किसी को पल भर मे खुशी देती है तो किसी को गम...पर हर किसी की झोली मे कुछ ना कुछ जरूर आता है!उस ऊपर वाले ने हमारे हाथो की लकीरो मे कुछ ना कुछ जरूर लिखा है....जो वक्त के साथ घटता रहता है।इस सब मे पूरा दिन गुजर गया....शाम को पवित्रा मां मुझे पार्क ले गई....पार्क मे हम दोनो ने मस्ती की।और थोड़ा दिन ढलते ही हम लोग घर आ गए....रास्ते मे पवित्रा मां ने मुझे आइसक्रीम भी खिलाई।घर आकर मां ने खाना बनाया और हमने मिलकर खाया.... फिर हम लोग चारपाई पर लेट गए....और बाते करने लगे।पवित्रा मां:- बेटा ये बताओ जब मै कही चली जाती हूं तो तुम रोने क्यो लग जाते हो?मै:- मुझे डर लगने लगता है कि कही आप भी मुझे छोड़ कर चली जाओगी।पवित्रा मां:- तो ये बात है....बेटा अब तुम बड़े हो गए हो....तुम्हे अकेला रहना सीखना होगा...तुम्हे जिंदगी मे अभी बहुत कुछ करना है!अगर ऐसे ही रोते रहे तो कभी अपने पैरो पर खड़े नही हो पाओगे।और जब मै नही रहूँगी तो तुम किसको बुलाओगे?मै मां की ना रहने वाली बात को सुनकर डर गया और उनसे से कसकर लिपट गया।मै:- मै आपको कही नही जाने दूंगा!पवित्रा मां:- बेटा एक ना एक दिन हर किसी को जाना पड़ता है...यही तो जिंदगी है!कब कहा और कैसे क्या हो जाए किसी को नही पता! इसलिए अपने अंदर के डर को खत्म करो।मै पवित्रा मां की बाते सुनते सुनते सो गया....क्योकि उनसे लिपटते ही मुझे सुकून मिला और मुझे कब नींद आई पता ही नही चला....जब मां ने मेरी ओर से कोई जवाब ना सुना....तो उन्होंने मेरी ओर देखा और मुझे सोते हुए पाया।मां के चेहरे पर स्माइल आ गई...और उन्होंने मुझे माथे पर किस किया और बालो मे उगलियाँ फिराने लगी।पवित्रा मां:- ये देखो मेरा नादान बेटा मेरी पूरी बात सुने बिना ही सो गया!ऐसे ही पवित्रा मां खुद से बाते करते हुए सो गई।ऐसे ही वक्त गुजरता गया...पवित्रा मां और मेरा रिश्ता बढता गया।देखते ही देखते 6 महीने गुजर गए...और एक दिन मां ने मुझसे कहा!पवित्रा मां:- बेटा मैने तुम्हारा एडमिशन स्कूल मे करवा दिया है।मै:- सच मे... लव यू मां।पवित्रा मां ने भी मुझे गले से लगा लिया।पवित्रा मा:- लव यू टू बेटा....चलो तैयार हो जाओ हमे मार्केट जाना है. .तुम्हारे लिए यूनिफॉर्म लेनी है...और बुक्स वगैरह भी लेनी है। फिर मै और मां चल दिए मार्केट...हम जल्द ही सारा सामान लेकर वापस आ गए....मेरा ऐडमिशन उस वक्त 4th मे हुआ था।ऐसी ही रात भी बीत गई।अगले दिन हम सुबह जल्दी उठे....पवित्रा मां ने मुझे जल्दी से स्कूल के लिए तैयार किया।और मुझे नाश्ता करवा के स्कूल छोड़ आई।मेरा मन तो नही था पवित्रा मां को छोड़कर जाने का पर जाना पड़ा क्योकि पढ़ना भी मुझे अच्छा लगता था...पर ना जाने क्यो मुझे बेचैनी हो रही थी दिल मे एक तडप सी उठ रही थी....मै क्लास मे पहुच गया...वहां पहुंचा तो मैडम ने सारी क्लास से मेरा इन्ट्रो करवाया और पढ़ाने लगी।इधर पवित्रा मां भी मुझे स्कूल छोड़कर घर पहुंच गई थी। जब ये घर पहुची तो अपने माईके वाले घर चली गई वहां उनके बाकी के घर वाले नाश्ता कर रहे थे....उनकी फैमिली मे बस एक भाई भाभी और उनकी एक बेटी थी। पवित्रा मां अभी घर के अंदर एंटर हुई ही थी कि...घर के बाहर दो गाड़ियां आकर रुकी!उसमे से कुछ आदमी बाहर निकल कर घर की ओर बढे.... जल्दी ही उन्होंने घर मे घुसकर तोड़फोड़ शुरू कर दी!पवित्रा मां के भाई आगे आए तो उनमे से एक ने पवित्रा मां के भाई के गले पर चाकू चला दिया....वो वही ढेर हो गए... घर की बाकी की तीन औरते भागने लगी।पवित्रा मां और उनकी भाभी और भतीजी की भी जल्द ही वहां लाशे पड़ी थी।(बात दरअसल ये थी कि गुंडे पवित्रा मा के भाई के एक बिजनेस मैन दुश्मन ने भेजे थे.... जिसका मुझे बात मे पता चला था)इधर मुझे स्कूल मे बहुत बेचैनी हो रही थी.....बार-बार मुझे पसीना आ रहा था....अजीब सी घबराहट हो रही थी!मुझसे और बर्दाश्त ना हुआ इसलिए मै रिसेस टाइम मे ही घर आने लगा...पर मुझे क्या पता था मेरी जिंदगी का "कड़वा सच" आने वाले तूफान से बेखबर मै घर की ओर बढ़ रहा था।

  2. #52
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    मै घर की ओर भागता हुआ आ रहा था....
    जल्दी ही मै घर पहुंच गया।

    पर मेरे घर पहुंचने से पहले ही पवित्रा मां के घर के बाहर लोग इकट्ठा हो गए थे....
    और पास मे पुलिस भी थी ....
    और एक एम्बुलेंस भी थी।

    मै भी पास चला गया।

    इतने में अंदर से कुछ लोग लाशो को ले आए...
    सबके चेहरे ढके हुए थे....
    और जब मैने ये दृश्य देखा तो मुझे अपनी मां की याद आ गई।

    इसलिए मै वहां से आगे जाने के लिए मुडा ही था कि एक लाश का कफन हवा के झोके से उड़ गया....
    और जब मैने वहां देखा तो उस लाश का चेहरा देख कर मै पूरा हिल गया...
    आखो से झर झर आंसू बहने लगे।

    मै लाश के पास जाने लगा धीमे कदमो से...
    और लाश के एकदम पास जाकर मै रोने लगा क्योकि ये लाश किसी और की नही बल्कि पवित्रा मां की थी।

    मै लाश से लिपट गया...
    वार्ड ब्वॉय स्टेचर नीचे रख दिया....
    और मै लिपट के जोर जोर से रोने लगा।

    मै:- मा मा...
    मा मा...
    मा मा उठो ना!

    मै ऐसे ही रोए जा रहा था....
    इतने मे एक आदमी आया और मुझे कंधे से पकड़ा

    आदमी:- बेटा चुप हो जाओ वो अब कभी नही उठेगी।

    मै:- ऐसे कैसे नही उठेगी...
    मां उठो ना मा प्लीज...
    तुमने वादा किया था मुझे छोड़कर नही जाओगी फिर क्यो चली गई मेरी असली मां की तरह तुम भी मुझे छोड़ कर चली गई...
    मा मा उठो ना!

    मै ऐसे ही रोता रहा....
    और रोता रोता मै बेहोश हो गया।

    जब आंख खुली तो मै हॉस्पिटल मे था...
    पास मे ही वो आदमी खड़ा था....
    मैने तुरंत ही उससे पूछा मा कहा है?

    आदमी:- वो लोग घर मे है...
    आज उनका अंतिम संस्कार होना है...
    चलो जल्दी चलो...
    फिर मै उस आदमी के साथ घर आ गया...
    घर आकर मै फिर पवित्रा मां से लिपट कर रोया।

    फिर सभी लोगो ने अर्थियो को उठा दिया और मै आगे चलने लगा।

    जल्दी ही हम सब लोग श्मशान पहुंच गए वहां पर चिताओ को आग दी गई।
    इस पूरे कार्यक्रम मे मेरी आंखो से आंसू बहते रहे फिर हम लोग घर आ गए।
    आज मै फिर से अकेला हो गया था...
    आज मै घर मे आकर फिर से रोने लगा....
    ऐसे ही रोता रहा!

    फिर अगले दिन हम लोग अस्थिया इकट्ठी करने गए और नदी मे बहा दी।

    अब मेरे दिन ऐसे ही गुजरने लगे....
    बस अकेला जिंदगी जी रहा था...
    सारा दिन मै घर की दहलीज मे बैठा रहता था और आते जाते लोगो को देखता रहता था।

    ऐसे ही दिन गुजरते गए....
    उस दिन के बाद मै स्कूल भी नही गया।

  3. #53
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    एक दिन मै रोज की तरह अपने घर के दरवाजे पर बैठा था।
    तभी वहाँ वो अंकल आए जिन्होंने पवित्रा मां की मौत वाले दिन मुझे संभाला था।

    उन्होंने मेरे सिर पर आप फेरते हुए पूछा...

    अंकल:- हैलो बेटा!कैसे हो?
    मै:- (हल्की सी आवाज मे)ठीक हूं अंकल!

    अंकल:- बेटा मुझसे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है....
    क्या हम अंदर चल कर बात करे?

    मैने अंकल को एक बार देखा....
    फिर वहां से उठकर अंदर आ गया...
    साथ मे अंकल भी आ गए....
    हम आकर चारपाई पर बैठ गए।

    अंकल:- बेटा बात दरअसल ये है कि मै पवित्रा देवी जी का वकील हूं!
    उन्होंने तुम्हारे बारे मे भी मुझे बताया था....
    उन्होंने मरने से पहले एक वसीयत बनाई थी।

    मैं अंकल की तरफ देख रहा था!

    अंकल बेटा पवित्रा देवी जी ने अपना बिजनेस और प्रॉपर्टी तुम्हारे नाम कर दी थी...
    और ये प्रॉपर्टी तुम्हे 19 साल पूरे होने पर मिलेगी....
    पवित्रा देवी जी के भाई और परिवार ने भी अपनी प्रॉपर्टी तुम्हारे नाम कर दी थी...
    क्योकि सभी ने तुम्हे घर का बेटा मान लिया था।

    पर भगवान को कुछ और ही मंजूर था!
    जब तक तुम बडे नही हो जाते तुम्हारा बिजनेस मैनेजर संभालेगा.....
    और पवित्रा जी ने तुम्हारा एक अलग अकाउंट खुलवाया दिया था बैक मे....
    जिस मे हर महीने तुम्हारे अकाउंट मे ₹30000 आया करेगे।

    फिर अंकल ने अपने साथ लाया हुआ एक बैग खोला जिसमे से उन्होंने कुछ कागजात निकाल कर मुझे दिए.... और साथ मे चेकबुक दी....
    एक एटीएम भी था।

    अंकल:- ये तो बेटा तुम्हारी प्रॉपर्टी के कागजात और अकाउंट डिटेल....
    एटीएम और चेक बुक....
    इनको संभाल के रख लो।

    और तुमसे एक बात और करनी है....
    बेटा तुम स्कूल जाना शुरू कर दो और अपना बिजनेस सम्भालने के काबिल बनो।

    स्कूल जाने से तुम्हारा अकेलापन भी कम होगा और तुम्हारा मन भी लगेगा....
    ऐसे अकेले मत रहा करो।

    जाने वालो को तो कोई रोक नही सकता इसलिए अपनी जिंदगी यादो के सहारे मत काटो....
    अपनी जिंदगी मे आगे बढ़ो...
    पवित्रा जी की भी यही इच्छा थी।

    मै अंकल की बातो को ध्यान से सुन रहा था....
    और मेरी आंखो से आंसू बह रहे थे।

    फिर अंकल ने मुझे गले से लगाया....
    और चुप करवाया घर से निकल गए।

    मै खड़ा हुआ और कागजात और बाकी के सामान संभाल के रख दिया।

    ऐसे ही रात भी हो गई....
    मैने सोच सोच के पक्का कर लिया कि मै कल स्कूल जाऊंगा क्योकि ये पवित्रा मां की भी इच्छा थी....
    इसलिए रात को मै सो गया।

    फिर सुबह जल्दी उठ गया और रेडी होकर स्कूल पहुंच गया।

    स्कूल मे मै जाकर अकेला बैठ गया....
    ना किसी से बात की और ना ही किसी की ओर देखा...
    बस अपनी सीट पर बैठा किताब खोल कर उसी मे निगाहे गडाए रखी!
    थोड़ी देर बाद मैडम आ गई।

    सभी बच्चो ने उन्हे गुड मॉर्निंग विश किया...
    सभी बैठ गए....
    फिर एक दम मैम की नजर मुझ पर पड़ी।

    मैम:- दीप यहां आओ!
    मै मैम के पास चला गया।

    मै:- तुम इतने दिन स्कूल क्यो नही आए?
    मै मैम की बात का जवाब देने लगा....
    और जो कुछ भी पवित्रा मां के साथ हुआ वो बताने लगा।

    मै:- मैम मेरी पवित्रा मां को किसी ने मार दिया था....
    उनके अलावा मेरा कोई नही था....
    इसलिए उनके जाने के बाद मै फिर से अकेला हो गया हू....
    और मेरा कही भी मन नही लगता....
    इसलिए मै स्कूल नही आ रहा था...
    पर कल वकील अंकल आए थे...
    उन्होंने मुझे समझाया था और स्कूल आने के लिए कहा था..
    इसलिए मै स्कूल आ गया।

    यह सब बोलते हुए मेरी आंखों मे आंसू आ गए थे...
    मैम ने मेरी आंखे साफ की....
    और मुझे गले लगाया।

    फिर सभी से बोली....

    मैम:-चलो बच्चो सभी अपनी अपनी जगह पर खड़े हो जाओ और 2 मिनट आंखे बंद करके मौन करो...
    ताकि भगवान दीप की मां की आत्मा को शांति दे।

    फिर सभी ने ऐसा किया...
    फिर मैम ने मुझे सीट पर बैठा दिया....
    और क्लास शुरू हुई....
    ऐसे ही क्लास लगती रही....
    रीसेस भी हो गई....
    सभी बच्चे बाहर चले गए पर मै क्लास मे ही बैठा गया.... फिर रीसेस भी खत्म हो गई....
    दोबारा क्लास लगी....
    और अंत मे स्कूल की छुट्टी हो गई।

    मै घर पहुंच कर सीधा चारपाई पर लेट गया और सो गया....
    फिर मेरी नींद रात को खुली....
    मैने दूध और ब्रेड खाया और फिर से चारपाई पर आकर लेट गया....
    आज फिर मुझे अपनी दोनो मां की याद आ रही थी....
    मै बस लेटा हुआ आंसू बहा रहा था।

    फिर से मेरे दिन ऐसे ही गुजरने लगे...
    घर से स्कूल स्कूल से घर....
    कभी कभी उस पार्क मे भी चला जाता जहां मै और पवित्रा मां जाते थे।

    थोड़ा वक्त गुजार के वापस आ जाता था...

  4. #54
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    ऐसे ही एक दिन एक लड़का आकर मेरे साथ बैठ गया.... कुछ देर वो मेरी ओर देखता रहा!


    फिर उसने मेरी और हाथ बढाकर बोला!


    लड़का:-हेलो मेरा नाम रवि है।
    मैने भी हाथ मिला लिया।


    मै:- मेरा नाम दीप है।


    आज ये पहली बार था कि किसी ने मैम के अलावा मुझे स्कूल मे बुलाया था।


    रवि:- क्यो मुझसे दोस्ती करोगे?


    मै:- क्यो सभी तो मुझसे दूर भागते है....
    तुम क्यो कर रहे हो मुझसे दोस्ती?


    रवि:- क्योकि तुम्हारी तरह मै भी अकेला हूँ इस दुनिया मे.....
    मै एक अनाथ हूं।


    मै:- किसने कहा मै हूं ना तेरा दोस्त!


    रवि:- तो ठीक है आज से हम लोग दोस्त....
    मै:- ठीक है।


    रवि के साथ आज मेरा दिन गुजर गया....
    रवि एक अच्छा लड़का था...
    उसके माता-पिता नही थे .....
    वो आश्रम मे रहता था।


    वो आश्रम मे एक लड़की के साथ रहता था....
    और उसे अपनी बहन मानता था।


    मै उस दिन उसके साथ जाकर उससे भी मिला...
    वो भी बहुत अच्छी थी।


    उसका नाम "परिधी" था....
    ये नाम भी उसका रवि ने ही रखा था...
    दोनो एक दूसरे पर जान छिडकते थे।


    रवि के साथ मेरी दोस्ती एक ही दिन मे बहुत अच्छी हो गई थी.....
    शायद इसलिए क्योकि वो भी अकेला था मेरी तरह!
    बस उसके पास "मनहूस" का टैग नही था....
    और उसके पास एक बहन थी जो उसके जीने का सहारा थी।


    मै उनसे मिलकर घर आ गया....
    घर मे फिर से वही रूटीन...
    पर आज मै पार्क मे चला गया था।


    वहाँ जाकर एक बेंच पर बैठ गया....
    और बस वहाँ बैठ के बच्चो को देख रहा था जो अपने मम्मी पापा के साथ आए थे।


    मै उन सब को देखने मे इतना खोया हुआ था कि मेरी आंखो मे आंसू आ गए मुझे पता ही नही चला!


    फिर मेरी नजर दो लोगो पर पड़ी....
    वो एक लड़का और एक लड़की थे...
    जब मैने ध्यान से देखा तो पता चला कि ये तो रवि और परिधि थे।


    मैने गौर से देखा तो परिधि वहां पास खड़े आइसक्रीम वाले की तरफ इशारा करके रवि से कुछ कह रही थी....
    पर रवि उसे मना कर रहा था।


    मै उठ के पास जाके रवि के पीछे खड़ा हो गया...
    मैने सुना तो परिधि रवि से आइसक्रीम आ गई थी।


    परिधि:- भैया मुझे आइसक्रीम खानी है।


    रवि:- नही बेटू! अभी मेरे पास पैसे नही है...
    हम फिर कभी खाएगे।


    परिधि:- नही भैया मुझे अभी खानी है...
    आपने पिछली बार भी यही कहा था।


    रवि:- परिधि मैने कहा ना फिर कभी खाएगे!


    परिधि:- नही मुझे अभी खानी है।


    रवि:-परिधि!


    इतना बोल वो हाथ उठाने ही वाला था.....
    कि मैने पीछे से हाथ पकड़ लिया।


    उसे नही पता था कि मै उसके पीछे खड़ा हूं उसने बिना देखे मुझे गाली दे दी....
    मैने कुछ नही कहा...
    और उसके आगे आ गया...
    तब उसकी शक्ल देखने वाली थी...
    और मुझसे बोला!


    रवि:- दीप तू था!
    सॉरी यार!


    मै:- चल कोई बात नही।


    मै परिधि की ओर मुड़ गया...
    और घुटनो पे बैठ गया।


    मै:- क्या हुआ गुड़िया?


    परिधि:- कुछ नही भैया!


    मै:- मेरी गुड़िया को आइसक्रीम क्रीम खानी है....
    चलो मै दिलवता हूं....
    चलो मेरे साथ।


    परिधि ने रवि की ओर देखा!


    मै:- चलो भी गुड़िया....
    उसकी तरफ मत देखो ये तो बुद्धू है।


    परिधि:- मेरे भैया को कुछ मत कहना जाओ....
    मुझे नही खानी आप की आइसक्रीम।


    मै:- ओह! इतना गुस्सा...
    ओके बाबा! मै आपके भैया को कुछ नही कहूँगा।


    परिधि:- मुझे नही खानी।


    मै:- नही खानी?


    परिधि:- नही खानी।


    मै:- देखो सच मे नही खानी?


    परिधि:- नही खानी नही खानी।


    मै:- तो फिर ठीक है मै और रवि तो चले खाने...
    चलो रवि!


    परिधि:- मेरे भैया भी कही नही जाएगे!


    मैने रवि के कान मे कुछ कहा!


    मै:-अच्छा ऐसा क्या?


    फिर मै और रवि परिधि कि ओर बड़े....
    और उसे गुदगुदी करने लगे....
    परिधि वही पार्क मे घास पर लेट गई...
    और हंसने लगी।


    परिधि:- (हँसते हुए) भैया बस करो....
    भैया बस करो।


    मै:- अब बताओ गुस्सा करोगी?


    परिधि:- नही करूँगी।


    मै:- आइसक्रीम खाओगी?


    परिधि:-(हंसते हुए) नही खाऊगी।


    मै:- क्या कहा?
    नही खाओगी!


    परिधि:-(लगातार हँसते हुए) नही नही....
    मै खाऊंगी।


    फिर मैने और रवि ने उसे छोड़ दिया....
    पहले रवि ने परिधि को गले लगाया....
    फिर मैने गले लगा के उसके सिर पर हाथ फेर दिया।


    फिर हम तीनो ने आइसक्रीम खाई।


    फिर हम तीनो एक जगह एक साथ बैठ गए।


    मै:- यार रवि गुड़िया मे तो गुस्सा ही बहुत है।


    रवि:- सही कहा...
    बहुत ही गुस्सा खोर है ये....
    अगर गुस्सा हो जाती है तो बहुत मुश्किल से मानती है।


    मै:- पर आज तो जल्दी मान गई?


    परिधि:- वो इसलिए क्योकि आप लोगो ने मुझे गुदगुदी की....
    इसलिए....


    परिधि की बात पर मै और रवि हंसने लगे।


    मै:- वैसे रवि कुछ भी कहो ये हमारी गुड़िया है तो बहुत प्यारी।


    ये:- परिधि को गले लगा लिया....
    और उसके माथे पर किस की....
    और उसके सिर पर हाथ फेर दिया प्यार से....


    मै:- गुडिया मेरे घर चलोगी?


    परिधि:- हाँ चलूंगी।


    मै:- तो चले?


    फिर हम तीनो मेरे घर पर आ गए....
    घर पहुंच कर मैने उन्हे चारपाई पर बैठाया.....
    और उनको पानी दिया।


    मै:- तो गुड़िया कैसा है तुम्हारे भैया का घर?


    परिधि:- अच्छा है भैया....
    आपके मम्मी पापा कहा है?


    मै:-(उदास होकर) मम्मी तो भगवान के पास है....
    और पापा ने मुझे यहां छोड़ दिया....
    अब मै यहां अकेला रहता हूँ।


    मेरी आंखो मे आंसू आ गए!
    परिधि ने मेरी आंखे साफ की और बोली!


    परिधि:- ये देखो इतने बड़े होकर रोते हो....
    बच्चे हो क्या आप?


    परिधि की बात पर हम सब हंस पडे।


    मै:- जी दादी अम्मा।


    रवि:- और दीप तुमसे किसने कहा कि तुम अकेले हो?
    हम दोनो है ना...
    हम तुम्हे मिलते रहेगे।


    परिधि:- भैया सही कह रहे है....
    भैया हम रोज आपसे मिलेगे।


    हाथ की उगली से उसकी नाक छेढते हुए!


    मै:- अच्छा जी!


    वो भी अपनी जगह से खड़ी हो गई....
    और अपने कमर पर दोनो हाथ रख कर बोली...


    परिधि:- हां जी हम रोज आएगे।


    परिधि की स्टाइल मे बोलने से हम दोनो हंस पड़े हमारे साथ परिधि भी हंसने लगी।


    परिधि और रवि फिर से मेरे चेहरे पर खुशी लेकर आए थे।


    एक हिस्सा बनकर आए थे मेरी जिंदगी का....
    आज काफी समय बाद मै परिधि और रवि के साथ खुलकर बाते कर रहा था और हंस रहा था।


    पर वो सब थोड़े समय के लिए था...
    रात होने से पहले वो चले गए....
    रह गई सिर्फ मै और मेरी तनहाईयाँ!


    मैने खाना बनाया....
    और खाकर चारपाई पर लेट गया....
    और अपनी दोनो मां की तस्वीर अपने हाथो मे पकडकर उनसे आज के दिन के बारे मे बताने लगा...
    ऐसे ही मै बात करते हुए उनकी तस्वीर को सीने से लगा कर सो गया।

  5. #55
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    दोनो के साथ कैसे 7 साल गुजर गए पता ही नही चला।


    ऐसे ही जिंदगी हंसते खेलते गुजर रही थी...
    हम तीनो अपनी जिंदगी मे खुश थे...
    पर कोई था जो हमारी खुशी से खुश नही था!


    ये कौन है ये तो आगे पता चलेगा।


    कि ये बुरा बंदा जिसने सोच रखा था कि मुझे चैन से जीने नही देगा।


    .
    .
    .
    .
    रवि और परिधि मेरी जिंदगी का एक हिस्सा बन गए थे। वो मेरे साथ ही रहने लगे थे....
    हम तीनो मिलकर जिंदगी काट रहे थे...
    हमने परिधि का एडमिशन भी अपने स्कूल मे करवा लिया।


    स्कूल मे एक मैम भी अब मुझे बहुत प्यार करती थी...
    यह कोई और नही कविता मैम थी....
    ये हमारे स्कूल मे 6 साल पहले आई थी...
    व्यवहार की बहुत अच्छी थी।


    कहते है वक्त कोई भी चीज एक जैसी नही रहने देता।


    ये 7 साल अच्छे से गुजरे इस बीच मे दो-तीन हादसे हुए....
    पर वो इतने बड़े नही थे जिन्हे सारी उम्र याद रखा जाए।


    पर 7 साल पहले ऐसा कुछ हुआ कि सब कुछ उल्ट-पलट हो गया।


    उस दिन मै परिधि और रवि स्कूल गए....
    दोपहर को लंच टाइम मे हम दोनो मै और रवि कैंटीन मे बैठे थे.....
    परिधि अपना खाना खा के खेलने चली गई!


    xxxxxxxxxxxxxxxxxx


    और कही कोई किसी से फोन पर बात कर रहा था!


    आदमी:- (फोन पर) नही इस बार कोई चूक नही होगी...
    अब बहुत साल इंतजार कर लिया.....
    अब की बार उसे खत्म करके रहूंगा।


    उधर से फोन पर.....


    आदमी:- नही नही मैने कहा ना इस बार कोई चुक नही होगी....
    आज का दिन उसकी जिंदगी का आखरी दिन होगा....
    और फिर फोन कट गया।




    उस आदमी के चेहरे पर कातिल मुस्कान थी....
    उसके पास ही एक आदमी खड़ा था....
    उसे बोला....


    बॉस:- जाओ आज उसका काम तमाम कर दो।


    आदमी:- जी जनाब।


    बॉस:- और हां इस पर कोई चुक न हो.....
    पिछले 7 साल मे 5 बार बात किया उस पर....
    पर वो हर बार बच गया.....
    अबकी बार नही बचना चाहिए समझे।


    आदमी:- जी जनाब!


    फिर वो आदमी चला गया...
    उसके जाते ही बॉस हँसने लगा....


    बॉस:- आज वो मरेगा...
    फिर होगा सब कुछ मेरा!
    हह्हहह्हहहह.....
    हहहहहह!


    xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx


    मै और रवि कैंटीन मे बैठे थे।


    मै:- रवि चल पानी पीकर आए ।


    रवि:- चलो।


    फिर हम लोग वाटर कूलर पर आ गए.....
    और मै पहले पानी पीने लगा....
    इतने मे एक आदमी चपरासी की ड्रेस मे चाकू लेकर मेरी ओर बढने लगा....
    मुझे इसका कोई भी ध्यान नही था।


    वो मेरे बिल्कुल करीब आ गया.....
    मै पानी पीने मे मगन था.....
    जैसे ही उसने मुझे मारने के लिए चाकू वाला हाथ उठाया रवि की नजर उस पर पड़ गई।


    वो तुरंत आगे आकर उसका हाथ पकड़ने की कोशिश करने लगा....
    पर अब देर हो चुकी थी....
    चाकू जाकर सीधा रवि के पेट मे घुस गया।


    रवि चिल्लाया!


    रवि:- दीप भाग....
    दीप भाग!


    मै जल्दी से उसकी ओर पलटा....
    जैसे ही मै पलटा मेरी सांसे थम गई!


    एक आदमी रवि के पेट मे चाकू घुसाए हुए था और रवि चिल्ला रहा था।
    दीप भाग जा....
    दीप भाग जा...
    पर मुझे कुछ सुनाई नही दे रहा था....
    वो आदमी रवि से हाथ छुड़ाने की कोशिश कर रहा था।


    फिर उसने मुझे एक लात मारी जिससे मुझसे मुझे होश आया....
    मै रवि की ओर बढ़ा!


    रवि:- नही दीप तू पास मत आ....
    ये तुझे मार देगा....
    पास मत आ।


    मैने आसपास देखा....
    वहाँ एक लोहे की पाइप पड़ी थी....
    जो नलो पर लगाई जाती है।


    मैने वो उठाई और उस आदमी के हाथ पर वार किया....
    फिर उसके घुटनो पर किया....
    जिससे वो जमीन पर बैठ गया...
    फिर तीन-चार वार इसके सिर पर किए....
    जिससे उसका सर फट गया....
    उसके सिर से खून बहने लगा।


    और वही बेहोश होकर गिर पड़ा


    मै जल्दी से रवि की ओर पलटा....
    और उसके पास चला गया....
    और उसे उठाने की कोशिश की पर मै इतना ताकतवर नही था....
    कि उसे उठा सकता।


    आसपास खडे स्टूडेंट बस तमाशा देख रहे थे....


    मै:- रवि तुझे कुछ नही होगा....
    भाई मै अभी मदद का इंतजाम करता हूं....
    मै वहाँ लगातार चिल्लाने लगा मेरी मदद करो! मेरी मदद करो....
    किसी ने मेरी कोई मदद नही की।


    इतने मे रवि ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोला....


    रवि:- (तड़पते हुए....हल्की सी आवाज मे)
    मै अब नही बचूँगा भाई.....
    मेरी गुडिया का ख्याल रखना.....
    मै जा रहा हूं....
    अलविदा.....


    मै:- तुझे कुछ नही होगा।


    रवि:- (वैसे ही तड़पते हुए.....)
    और एक बात तुम इन लोगो की तरह मत बनना.....
    एक नेक दिल इंसान बनना.....
    हर किसी की मदद करना....
    मेरे भाई अपना और गुड़िया का ख्याल रखना।


    इतना बोल वो हमेशा हमेशा के लिए मुझे छोड़ कर चला गया।
    अब मै परिधि को क्या जवाब दूँ?

  6. #56
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    मैने आज अपना दोस्त खो दिया....
    मेरा दोस्त भी आज अपनी जान दे के अपनी दोस्ती निभा गया।


    दोस्ती तो निभाई पर हमे छोड़ कर चला गया....
    अब मै परिधि को क्या जवाब दूं?


    वहाँ धीरे धीरे भीड बढने लगी....
    कविता मैम और बाकी टीचर भी आ गए।




    जिसका मुझे सबसे ज्यादा डर था परिधि पहुंच गई....
    वो आते ही रवि से लिपट कर रोने लगी।


    परिधि:- भैया क्या हुआ उठो ना भैया....
    भैया....
    आप क्यो नही बोल रहे....
    बोलो ना भैया!


    मैने आगे बढकर परिधि के कंधे पर हाथ रखा....
    पर तुरंत उसने मेरा हाथ झटक दिया।


    परिधि:- (गुस्से मे) आप दूर रहिए मुझसे.....
    ये सब आपकी वजह से हुआ है.....
    मेरी सभी फ्रेंड कहती थी आप "मनहूस" हो...
    आज आपने मेरे भाई को भी निगल लिया।


    मेरे भैया को मुझसे छीन लिया....
    भैया....
    भैया उठो ना।


    और जोर जोर से रोने लगी।


    परिधि की बातो ने आज फिर मुझे तोड दिया था....
    ये तो सच था कि आज रवि मेरी वजह से ही मर गया था।


    जिंदगी ने हर मोड़ पर मेरे साथ नया खेल खेला है ...
    मै भी बस पास बैठा रोए जा रहा था।


    इतने मे पुलिस आ गई ....
    कविता मैम ने उन्हे बुलाया था।


    पुलिस:- हटिए यहां से!


    फिर उसने सारी जगह का जायजा लिया...
    फिर बोला....


    इंस्पेक्टर:- ये सब कैसे हुआ?
    इस लडके और इस आदमी को किसने मारा?


    कविता मैम:- हमे तो कुछ नही मालूम पर दीप को सब मालूम है।


    फिर इंस्पेक्टर मेरे पास आया!


    इंस्पेक्टर:- हाँ तो बेटा बताओ ये सब कैसे हुआ?


    मै:- सर मै यहां खड़ा पानी पी रहा था।


    तभी ये आदमी मुझे मारने आया था.....
    पर वो मेरे दोस्त ने इसे देख लिया और इसके वार करने से पहले हम दोनो के बीच आ गया....
    और उसको चाकू लग गया....
    और वो चीखने लगा।


    आदमी उस से छुटना चाहता था क्योकि वो फिर से मेरी ओर आने वाला था।


    फिर मैने आसपास देखा तो ये पानी वाली लोहे की पाइप नजर आई....
    इससे मैने इसके सिर पर, हाथ पर वार किया....
    जिससे ये बेहोश हो गया।


    और इसका सिर फट गया और उसमे से खून निकल आया...
    सर इस आदमी को कड़ी से कड़ी सजा देना....
    इसने मेरे दोस्त मार डाला.....
    इसने मेरे भाई जैसे दोस्त को मार डाला......
    और मै वही पर बैठ कर रोने लगा।


    कविता मैम ने मुझे संभाला परिधि को भी दो टीचर संभाल रही थी।


    इंस्पेक्टर:- हवलदार इस लडके का बयान दर्ज कर लिया क्या?
    और हाँ एंबुलेंस बुलाकर लाश और खूनी को हॉस्पिटल पहुंचाओ....
    लाश का पंचनामा करना है और इस खूनी की मरहम पट्टी करवा कर लॉकअप में बंद करो।


    हवलदार:- जी साहब!


    मै खड़ा होकर रवि के पास आ गया.....
    जैसे ही मैने रवि को हाथ लगाया....
    परिधि ने मेरा हाथ झटक दिया....


    परिधि:- दूर रहो मेरे भाई से
    मै:- (...अबकी बार थोड़ा गुस्सा मे)क्यो दूर रहू?
    मेरे भाई से भी बढ़कर था....
    इसका अंतिम संस्कार भी मुझे ही करना है समझी।


    और मै भी वही बैठ के रोने लगा....
    फिर कुछ देर बाद एंबुलेंस आई....
    और रवि और उस आदमी को लेकर मै और हवलदार एंबुलेंस मे बैठ गए।


    मैने परीधि को कविता मैम के पास के घर भेज दिया।


    हॉस्पिटल मे रवि का पोस्टमार्टम हुआ....
    और उस आदमी की मरहम पट्टी करवाकर उसे पुलिस स्टेशन ले गए।


    मै रवि की बॉडी को लेकर घर आ गया....
    फिर तैयारी की गई....
    फिर कुछ लोग मिलकर रवि को लेकर श्मशान आए....
    जहां उसका अंतिम संस्कार किया....
    फिर हम घर आ गए।


    कुछ दिन ऐसे ही रोते हुए गुजरते है।


    एक दिन परीधि अपना सामान पैक कर के जा रही थी....


    मै:-कहां जा रही हो।


    परीधि:-कही भी जाऊं आप से मतलब?


    मै:- तुम जिम्मेदारी हो मेरी!


    परिधि:- अब मेरा आपसे कोई रिश्ता नही।
    मै वापस अनाथाश्रम जा रही हूं....
    मुझे रोकने की कोशिश भी मत करना।


    मै:- ठीक है अगर यही तुम्हारी मर्जी है तो।


    फिर परिधि चली गई....
    इस तरह एक महीना बीत गया....
    मै रोज उसे देखने जाता....
    और उसके लिए अनाथाश्रम मे डोनेशन भी दे दी थी।


    फिर एक दिन मुझे एक ख्याल आया।


    मेरे चाचा की शादी को हुए 13 साल हो गए थे पर उन्हे कोई बच्चा नही था....
    हर फ्राइडे को मेरी चाची मंदिर आती थी और किस्मत से आज फ्राइडे था।


    चाची दिल की साफ थी....
    और भोली भी....
    मै मंदिर पहुंच गया।


    चाची अभी नही आई थी.....
    मै वही उनका इंतजार करने लगा।


    1 घंटे बाद वो मंदिर आई.....
    मैने उन्हे पूजा करनी दी फिर उनके पीछे जाकर खड़ा हो गया।


    जैसे ही वो पलटी पहले तो वो मुझे वहां देख कर चौक गई फिर बगल से होकर जाने लगी।


    तो मैने उन्हे आवाज दी।


    मै:- चाची!


    चाची ना रूकी तो मै फिर से बोला...


    मै:- चाची एक बार मेरी बात सुन लीजिए....
    उसके बाद चाहे तो सारी उम्र मेरी शक्ल मत देखना.....
    बस एक बार मेरी बात सुन लीजिए।


    चाची मेरी बात सुन कर रूक गई!


    मै चाची के आगे जाकर हाथ जोड़कर खड़ा हो गया।


    मै:- चाची मै सिर्फ आपके पास एक विनती लेकर आया हूं.....
    (एक फोटो निकाल के उनको दिखाई जिसमे मै रवि और परिधि थे)


    चाची इस फोटो वाले लड़की को प्लीज आप लोग गोद ले लीजिए.....
    मै आपके आगे हाथ जोड़कर बिनती करता हूं।


    चाची:- आखिर मै इसे गोद क्यो लू?


    मै:- (रोते हुए घुटनो के बल बैठ गया) क्योकि चाची मेरी वजह से इसके भाई की जान चली गई.....
    इसके भाई ने इसकी जिम्मेदारी मुझे दी थी मरते वक्त!
    पर ये अपने भाई की मौत का जिम्मेदार मुझे मानती है.... इसलिए ये मुझसे नफरत करने लगी है....
    मै चाह कर भी इसके पास नही जा पा रहा....
    मुझ मे इसका सामना करने की हिम्मत नही है।


    चाची:- तो फिर मै क्या करूं?


    मै:- (रोते हुए चाची के पैर पडते हुए) चाची आप इस को गोद ले लीजिए.....
    मै आपके पैर पकड़ता हूं....
    एक आप ही है जो मेरी बात समझ सकती है....
    इसलिए आज मुद्दतो बाद मै आपके पास आया हूं.....
    प्लीज चाची आप मेरी ये विनती स्वीकार कर लीजिए चाची प्लीज....
    मेरे लिए ना सही तो उस बच्ची के लिए ही सही....
    और आपको भी एक बेटी है मिल जाएगी....
    प्लीज चाची।


    चाची अपने पैर छुड़वा कर....


    चाची:- मेरे पास पहले एक बेटी है....
    तो मै क्यो किसी और को गोद लूँ?
    तुम चुपचाप यहां से चले जाओ।


    और चाची आगे बढ़ गई!


    मै:- चाची एक बार मुझे भुलाकर कर की उस बच्ची के बारे मे सोच लीजिए प्लीज!


    पर चाची ने मेरी एक न सुनी.....
    और मंदिर के बाहर चली गई....
    पर मुझे नही पता था कि वो मुझे चुपके से मुझे रही थी।


    मै मंदिर मे बैठा रो रहा था....
    रोते-रोते एकदम मेरी सांसे उखड़ने लगी!


    जब चाची ने एक बार ये देखा तो वो भागकर मेरे पास आई.....
    और जल्द ही मंदिर से पानी लेकर मुझे पिलाया....
    और मुझे गले लगा लिया।


    मै रोते हुए ये सब बोल रहा था...


    मै:- चाची उस बच्ची को गोद ले लीजिए....
    प्लीज चाची....
    उस बच्ची के बारे मे सोचिए।


    चाची:- (मुझे गले लगा के रोते हुए) हां बेटा मै लूंगी उसे गोद.....
    अब बस चुप हो जाओ।


    मै रोते-रोते बेहोश हो गया...
    जब मेरी आंखें खुली तो मै अपने घर मे था।


    पर जब मै उठा तो मेरे कानो मे सिर्फ चाची के आखिरी शब्द गूंज रहे थे....
    "मै लूंगी उसे गोद"।


    मै अंदर ही अंदर खुश हो गया....
    कि अब परीधि की जिंदगी सवर जाएगी।


    अगले दिन किसी ने मेरा दरवाजा खटखटाया....
    मैने जब देखा तो वो चाची थी...
    उसके चेहरे पर मुस्कुराहट थी।


    चाची अब तबीयत कैसी है?


    मै:- चाची अब मै ठीक हूं...
    आइए अंदर आइए।


    चाची:- नही मै लेट हो रही हूं (फिर अपनी कार की ओर इशारा करके...)
    वो देखो....
    अब तो खुश हो?


    जब मैने कार मे देखा....
    तो उसमे परीधि सो गई थी.....
    मै उसको देख कर खुश हो गया....
    मेरी आंखें नम हो गई।


    मैने झुक के चाची के पैर पकड़ने चाहे तो चाची ने मुझे रोक दिया।


    मै:- चाची प्लीज....
    आपको कसम है मत रोकिए....
    फिर मैने चाची की पैर छूम लिए।


    फिर एकदम से चाची ने मुझे गले लगा लिया।


    मै:- थैंक यू चाची थैंक यू सो मच।


    चाची:- चुप अब चुप हो जा....
    मै जा रही हूं लेट हो रहा है।


    मै:- बस आप इसका ध्यान रखिएगा.....
    और हां ये थोड़ी सी जिद्दी है।


    चाची:- कोई बात नही....
    मै इसका पूरा ध्यान रखूंगी....
    चलो बाय....


    फिर चाची मेरे सिर पर हाथ फेरकर चली गई।


    अब जाके मेरे दिल को सुकून मिला था....
    मेरी गुड़िया की जिंदगी सवर गई थी.....
    पार्क मे मै गुड़िया के लिए ही जाता था....
    ताकि उसको देख सकूं।


    रवि के जाने के बाद मैने जरूरतमंदों की मदद करनी शुरू कर दी....
    अगर मेरे बस में होता था तो हर किसी की मदद करता था।


    अतीतावलोकन समाप्त
    Last edited by pkpasi; 28-02-2019 at 06:30 PM.

  7. #57
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    अब वर्तमान मे



    इन 3 दिनो मे मैम प्रीत परी अनू अभी और अंकल किसी ने चैन से एक पल नही काटा।

    हीरा ने भी एक पल भी इधर से उधर नही होने दिया।

    रुद्रा भी अपनी खोज मे लगा था...
    कि उसे कोई सुराग मिल जाए।

    3 दिन से उसने की चैन की सांस नही ली।

    प्रीति परी अनु ने तो खाना तक छोड़ दिया था....
    वो या तो पूरा दिन मंदिर मे रहती थी...
    या फिर मेरे रूम के बाहर बैठ के रोती रहती।

    कविता मैम अभी और अंकल किसी तरह उन्हे चुप करवाते.....
    और खाना खिलाते.

    एक दो बार चाची भी हॉस्पिटल आई।

    आज तीसरा और आखिरी दिन था जिसको बीतने मे अभी 5 मिनट बाकी थे सभी इसी आस मे थे कि मुझे होश आ जाए।

    सभी के दिल बैठे हुए थे।

    डॉक्टर भी अपनी पूरी कोशिश कर रहे थे...
    मुझे होश मे लाने की!

    करते करते 5 मिनट भी गुजर गए....
    और एकदम से मेरी सांस टूटने लगी!

    मै बड़ी मुश्किल से सास ले पा रहा था...
    डॉक्टर जल्दी-जल्दी हाथ पांव चलाने लगे।

    पर अंत मे सब कुछ समाप्त...
    मेरी सांसे थम चुकी थी।


    मुझे ऐसा लग रहा था कि कोई मुझे खीच रहा है....
    मै भी खुशी-खुशी उस ओर खीचा चला जा रहा था....
    क्योकि मुझे भी अपनी मां और पवित्रा माँ के पास जाना था।

    मेरी मां और पवित्रा मां मेरा इंतजार कर रही थी....
    मै चला जा रहा था....
    मै चला जा रहा था!


    और इधर....


    डॉक्टर रूम से चला गया...
    बाहर सभी ने उन्हे घेर लिया।

    कविता मैम:- डॉक्टर मेरा बेटा कैसा है?
    डॉक्टर:- सॉरी... ही इज नो मोर।

    डॉक्टर का इतना बड़ा था कि परी घुटनो के बल बैठ कर रोने लगी.....
    अनु और अभी उसे संभाल लेगे।

    प्रीत ये बात सुन के बेहोश हो गई...
    क्योकि उस बच्ची ने अपने इस भाई से कुछ ही दिनो मे गहरा नाता बना लिया था।

    डॉक्टर ने फौरन उन्हे उठाया और दूसरे रूम मे ले जाकर इलाज किया।

    अंकल:- अब कैसी है ये?

    डॉक्टर:- ये ठीक है....
    कुछ ही देर मे इसे होश आ जाएगा।

    अंकल:- थैंक्यू डॉक्टर!

    ######इधर रूम मे अनू परी और कविता मैम तीनो मुझ से लिपट कर रो रही थी।

    सब ने कुछ दिनो मे मुझे अपने दिल मे बसा लिया था।

    वो बस रोए जा रहे थे....

    ######कही दूर शहर के किसी कोने मे किसी को मेरे मरने की खबर लग चुकी थी....
    और वो बहुत खुश था।

    पर फिर भी उसने किसी को फोन लगाया।
    ये वही बॉस था जो मुझे मरना चाहता था।

    बॉस:- हैलो बात सुनो....
    तुम अभी उस पर नजर रखो....
    वो हर बार मौत को चकमा दे देता है.....
    देखना कही इस बार भी....
    मुझे पल पल की खबर देते रहना।
    उधर फोन पर:- जी भाई!

    फोन कट हो गया।

    ##### इधर हॉस्पिटल मे प्रीत को भी होश आ गया था......
    वो भी उठके मेरे पास आ गई!

    प्रीत:- (मुझसे लिपट कर रोते हुए) भैया उठो ना प्लीज... मुश्किल से मुझे एक भाई मिला था....
    वो भी आज मुझसे दूर हो जा रहा है।

    ऐसे ही रोती रही...
    फिर उसने मेरा हाथ पकड़ लिया!

    प्रीत:- मै आपने भैया को कही नही जाने दूगी....
    भैया....
    उठो ना प्लीज!

    #### उधर मै उस ओर जा रहा था...
    जो मुझे मेरी मंजिल लगती थी।

    चलते चलते एक जानी पहचानी आवाज मेरे कानो मे पडी.....

    आवाज:- कहां चल दिया भाई....
    इतनी जल्दी मे....
    जरा ठहर जा...


    मै आवाज सुन को तुरंत पहचान गया....
    ये कोई और नही रवि था

    मै:- रवि मेरे भाई कहां है तू?

    फिर एक धुआं सा उड के मेरे पास आया....
    और उसका आकार बदलने लगा...
    जब धुआं अच्छी तरह से हटा तो सामने रवि खड़ा था...
    और थोड़ा गुस्से मे लग रहा था।

    रवि:- कहां चला जा रहा है?

    मै:- मै अपनी दोनो मां के पास जा रहा हूं।

    रवि:- और जो काम पड़े है तेरे और मेरे हिस्से के करने वाले....
    वो कौन करेगा?

    मै:- अब और कितना काम करूं?
    थक गया हूं काम कर कर के....
    और इस दुनिया की नफरत से शह शह के....
    और मै इस "मनहूस" शब्द के टैग को और नही सहन कर सकता।

    रवि:- एक झपड लगाऊंगा सारी अकल ठिकाने आ जाएगी....
    अभी तुझे बहुत से काम करने है....
    जो बहुत जरूरी है....
    और वो तेरे ही हाथो होने है.....
    और किसने कहा कि सभी तुझे नफरत करते है.....
    प्रीत कविता मैम अनू परी अभी दीपक अंकल.....
    चाची और उस बच्चे का परिवार क्या तुझे प्यार नही करता?

    अब जाओ वापिस देख तेरी गुड़िया प्रीत कैसे हो रही है.....
    और अभी मेरी गुड़िया को भी मनाना बाकी है जो तुझ से नाराज है।

    मै:- भाई मै परिधि के सामने जाने की हिम्मत ही बहुत मुश्किल से जूटा पाता हूं....
    तो मनाऊं कैसे?

    रवि:- वक्त आने पर मै तेरी मदद करूंगा....
    और हां एक और बात तेरे आसपास एक इंसान ऐसा भी है जो तुझे दिलो जान से मोहब्बत करता है....
    उस इंसान को पहचान.....
    समझा अब वापस जा।

    मै:- देख लूंगा तुझे तूने मुझे अपनी मां से मिलने से रोक लिया।

    रवि:- जाता है कि नही....
    कि दूँ कान के नीचे एक।

    मै:- जाता हूँ भड़कता क्यो है।

    फिर मै वापस आ गया....
    पर मैने भी कोई हरकत नही की।

  8. #58
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    इधर प्रीत....

    प्रीत:-(मेरा हाथ थामते हुए) भैया उठ भी जाओ....
    मै आपको कही नही जाने दूंगी।

    कविता मैम:- बस कर बेटा वो अब कभी नही उठेगा।

    प्रीत:- नही भैया बोलेगे....

    भैया उठो ना प्लीज।

    तभी अचानक एक आवाज आई जिसे सुनकर सभी चौक गए सिवाय प्रीत के....

    प्रीत:- नही मै अपने भैया को कही नही जाने दूगी....
    उठो ना भैया प्लीज!

    इतने मे मैने प्रीत का हाथ अपने हाथ मे कस लिया....
    और बोला....

    मै:- (करहाते हुए) ओके मेरी गुड़िया....
    मै कही नही जा रहा....
    मै यही हूं।

    प्रीत के अलावा सभी मेरी आवाज सुन के चौक गए....
    पर जल्दी ही सभी खुश हो गए....
    अभी जल्दी से डॉक्टर को बुलाने भाग गया।

    कविता मैम:- बेटा तू ठीक है....
    तूने तो आज हम सबकी जान ही निकाल दी थी....
    तुझे पता भी है कि हम सब क्या बीती है इतने दिन?

    परी:- और नही तो क्या....
    मुझे लगा था कि भगवान ने मुझे एक भाई दे के मुझसे फिर से छीन लिया।

    अनू भी मेरे पास आई....
    और मेरा हाथ चूम लिया।
    अनू:- मुझे भी ऐसा ही लगा था.....
    कि भगवान मुझसे मेरा सबसे अच्छा दोस्त छीन लिया।
    (अब मुझे ये भी पता चल गया था कि मुझे दिलो जान से चाहने वाला कौन है वो वक्त आने पर पता चलेगा)

    अंकल ने भी मेरे पास आकर मेरे सिर पर प्यार से हाथ फेर दिया।

    इतने मे प्रीत बोली....

    प्रीत:- अब आप लोग भैया को आराम करने दीजिए....
    अपनी बाते बाद मे करना...
    वैसे भैया आप बहुत गंदे हो।

    मै:- (मुस्कुराते हुए) क्यो प्रीत?

    प्रीत:- और नही तो क्या.....
    आपको पता है आपने हमे इतने दिनो से कितना रुलाया....
    आप एक बार ठीक हो जाओ...
    फिर देखना आपकी कैसी हजामत करती हूं।

    प्रीत की बात पर सभी मुस्कुरा दिए....
    अभी डॉक्टर को ले आया।

    डॉक्टर ने सभी को बाहर जाने को कहा....
    सभी बाहर जाने लगे पर प्रीत वही बैठी रही!

    डॉक्टर बेटा आप भी बाहर जाओ।

    प्रीत:- नही मै नही जाऊंगी अगर मै चली गई तो भैया फिर से कही.......
    ना बाबा ना मै नही जाऊंगी।

    मै:- गुड़िया मै कही नही जा रहा....
    डॉक्टर की बात मान लो....
    प्लीज...

    प्रीत:- आप तो चुप रहिए.....
    मै नही...जाऊंगी नही जाऊंगी नही जाऊंगी समझे!

    मै:- डॉक्टर चेक कर लीजिए....
    ये नही मानेगी।

    फिर डॉक्टर ने मेरा पूरा चेकअप किया।

    डॉक्टर:- जल्दी ठीक हो जाओगे....
    डोंट वरी।

    सभी फिर से अंदर आ गए और डॉक्टर चला गया

    xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx

    एक आदमी बॉस से बात करने लगा जो मुझ पर नजर रख रहा था।

    आदमी:- भाई वो लड़का जिंदा है....
    पता नही कैसे पर पहले डॉक्टर ने जवाब दे दिया था....
    फिर न जाने कैसे वो लड़का एकदम से बोलने लगा।

    बॉस:- मैने तुझे कहा था कि वो मौत से भी बच के आ जाता है...
    चल कोई बात नही तू वापस आ जा.....
    कुछ महीने रुक पूरी प्लानिग के साथ इसको खत्म करेगे।
    फोन कट गया।

    xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx xxxxxxxxxxx

    इधर चाची को भी मेरे होश मे आने का पता चल गया....
    पर वो आ नही पाई मुझसे मिलने पर मैम के फोन पर उनसे बात हो गई।

    रुद्रा भी खबर मिलते ही मुझ से मिलने आ गया।

    रुद्रा:- अब कैसे हो दीप?
    मै ठीक हूं रुद्रा भाई।

    रुद्रा:- दरअसल मुझे तुम्हारा बयान लेना है।
    मै:- ठीक है पूछो।

    रुद्रा:-दीप उस दिन क्या हुआ था?
    और तुम पर गोलियां किसने चलाई?

    मै:- नही मुझे ये तो नही पता कि वो कौन था पर.....
    एक गुंडा था।

    रुद्रा:- तुम मुझे सब कुछ बताओ जो उस दिन हुआ।

    मै:-ठीक है।

    फिर मैने उस दिन जो जो हुआ सब कुछ रुद्रा को बता दिया.......
    पास मे मैम और बाकी के लोग भी ये सब सुन रहे थे।

    रुद्रा:- ओके तो मै अपनी इन्वेस्टिगेशन नए सिरे से शुरू करता हूं।

    मै:- आप सभी लोग जरा बाहर जाएंगे मुझे रुद्रा भाई से अकेले में बात करनी है।

    सभी बाहर चले गए।

    रुद्रा:- बोलो क्या बात करनी है?

    मै:- रुद्रा भाई मै अंडर कवर क्रॉप बनने को तैयार हूं।

    रुद्रा:- तो तुम ने फैसला कर ही लिया।

    मै:- और एक बात उस गुंडे का सिर्फ पता लगाना वो क्या-क्या करता है उसके सिर पर किसका हाथ है सब कुछ........
    उसे मै देखूंगा।

    रुद्रा:- ठीक है....
    तो तुम जल्दी ठीक हो जाओ....
    मै तुम्हे ट्रेनिंग दे दूंगा.....
    फिर मिलकर कर शहर के सभी गुंडों की खटिया खड़ी करगे।

    मै:- सही कहा....
    वैसे भी अभी भी मेरे कॉलेज को स्टार्ट होने मे ढाई महीने बाकी है।

    फिर रुद्रा चला गया....

    रुद्रा के जाने के बाद सभी लोग फिर से अंदर आ गए.....
    उनके साथ अबकी बार हीरा भी था।

    कविता मैम ने आकर मेरा माथा चूमा।

    कविता मैम:- मेरा बहादुर बेटा।

    परी:- सही कहा बुआ मेरा भाई बहुत बहादुर है।

    प्रीत:- नही दीदी पहले ये मुझसे मिले थे....
    तो ये मेरे बहादुर भैया है।

    परी:- नही मेरा भाई है।
    प्रीत:- नही मेरे भैया है।
    परी:- अरे मेरी शैतानो की नानी ये हम दोनो के भाई है...
    समझी।

    प्रीत:- हाँ समझी....
    दादी अम्मा!

    और दोनो गले मिल गई।

    उनकी नोकझोंक देखकर हम मुस्कुरा रहे थे।
    फिर हीरा बोला....

    हीरा:- दीप बाबू अब आप कैसे हो?

    मै:- अब मै ठीक हूं....
    और आपका बहुत बहुत शुक्रिया मेरी जान बचाने के लिए....
    मुझे प्रीत ने बताया था कि आपने मेरी जान बचाई....
    अगर आप उस दिन हिम्मत ना दिखाते तो......

    मै आगे कुछ बोल पता कि अनू ने आगे बडकर मेरे मुंह पर हाथ रख दिया।

    अनू:- चुप!

    हीरा:- ये भी तो दीप बाबू मैने आप ही से सीखा है.....
    अगर उस दिन आप ने हिम्मत ना दिखाई होती तो शायद हमारा पूरा परिवार ही इस दुनिया मे ना होता।

    फिर कुछ देर और बात होती रही और हीरा चला गया।

    उसके जाने के बाद मैडम परी से बोली.....
    कविता मैम परी बेटा तुम दीप को कैसे जानती हो?

    परी:- बुआ मैने आपको बताया तो था कि अभी पर किसी ने हमला किया था....
    तब दीप ने ही इन की जान बचाई थी....

    अब आप मुझे बताओ कि आप दीप को कैसे जानती हो?

    प्रीत:- मै बताऊं?

    परी:- हाँ गुड़िया बोल...

    प्रीत:- भैया मम्मी के स्टूडेंट रह चुके है....
    और वो भी कोई ऐसे वैसे नही फेवरेट स्टूडेंट....
    और मॉम भी इन को अपना बेटा मानती है इसलिए....
    और कुछ पूछना है?

    परी:- हमम ओके इतना काफी है....
    नानी अम्मा!

    मै:- अब आप लोग मुझे बताओगे कि आप लोग एक दूसरे को कैसे जानते हो?

    परी:- (कविता मैम की ओर इशारा करते हुए) ये मेरी बुआ है...
    यानी कि मेरे डैड की बहन।

    फिर कविता मैम परी के पास चली गई....
    और पीछे से उसके हग करके बोली.....

    कविता मैम:- और ये है मेरी प्यारी सी भतीजी ....
    यानी कि मेरे भाई की बेटी और प्रीत के मामा की बेटी।

    प्रीत:- और मै प्यारी नहीं हूं क्या?

    परी:- नही तुम तो कड़वी हो।

    और परी अपना मुंह बिगड़ने लगी.....
    और प्रीत अपना मुंह फुला लिया।

    हम दोनो की हरकतों को देखकर मुस्कुरा रहे थे।

    फिर परी ने प्रीत को गले लगाकर उसके गालो को चूम लिया और बोली.....
    परी:- तुम तो मेरी प्यारी सी मीठी सी गुड़िया हो।

    फिर रात तक ऐसे ही सभी बाते करते रहे....
    रात को अनू प्रीत परी अभी और अंकल घर चले गए.....
    कविता मैम मेरे पास ही रुक गई।

    मै बाते करते करते सो गया....
    कविता मैम भी मेरे पास मेरी लगे बेड पर सो गई।

  9. #59
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    सुबह जब मै उठा तो फिर से मेला लगा हुआ था....
    सभी लोग मेरे सामने ही खड़े थे।

    और मेरी गुड़िया प्रीत मेरा हाथ पकड़े मेरे पास ही बैठी थी।

    मै:- गुड मॉर्निंग एवरीवन!
    आप सब लोग सुबह सुबह।

    सभी:-गुड मॉर्निंग।

    परी:- वो क्या है ना कि हमारा मन ही नही लगा घर पर।

    मैने देखा आज हीरा काका के साथ उसकी मां बीवी और बेटा भी था।

    हीरा की मां:- अब कैसे हो बेटा?

    मै:- जी मां जी मै ठीक हूं।

    वो बच्चा भी मेरे पास आ गया और मेरे बेड पर आ गया.....
    और झुक कर मेरे गाल पर किस कर ली।

    बच्चा:- भैया क्या हुआ आपको?
    मै:- कुछ नही बेटा वो थोड़ी चोट आई है।

    फिर कुछ देर हम लोग आपस मे बाते करते रहे....
    फिर हीरा और उसकी फैमिली चली गई।

    रह गई मेरी फैमिली....
    यानी कि मैम और उनका परिवार और अभी का परिवार....
    फिर अभी और अंकल चले गए....
    क्योकि इनको काम भी देखना था 4 दिन हो गए थे उन्हे ऑफिस गए।

    अब रह गई कविता मैम प्रीत परी और अनू....
    कविता मैम को भी परी ने घर भेज दिया....
    फैश होने और ड्रेस वगैरा चेंज करने के लिए आराम करने के लिए....
    परी ने प्रीत को भी कहां जाने को पर वो ना मानी....
    इसलिए परी ने अनू को भेज दिया मैम के साथ।

    परी:- दादी अम्मा!
    तुम बहुत जिद्दी हो गई हो।

    प्रीत:- बहन किसकी हूँ?
    नानी अम्मा की तो जिद्दी तो होगी ही।

    प्रीत की बात पर मै हंस पड़ा....
    मेरी हंसी सुन के प्रीत और परी भी हंस पडी।

    मै:- आप दोनो ऐसे ही क्यो झगडती रहती हो?

    परी:- वो क्या है ना....
    हम दोनो एक दूसरे की बहुत अच्छी दोस्त है.....
    हम दोनो एक दूसरे के साथ बहुत वक्त बिताती थी....
    और हम एक दूसरे को राखी भी बांधती थी.....
    जब तक हमारा कोई भाई नही था....
    तुम आ गए हो तो अब तुम्हे राखी बांधेगे....
    क्यो प्रीत?

    प्रीत:- क्यो नही....
    और अच्छे से जेब भी खाली करवाएगे हम इनकी ....
    क्यो।

    परी:- (ताली देते हुए) क्यो नही?
    हा बचकर रहना....
    रक्षाबंधन भी नजदीक है .....
    अब जल्दी से ठीक हो जाओ।

    प्रीत:- बिल्कुल।

    मै उनकी हंसी ठिठोली देखकर खुश हो रहा था।

    मैने प्रीत को अपने पास बुलाया वो मेरी ओर झुक गई...
    मै:- अपने गाल इधर लाओ!

    प्रीत ने अपने गाल मेरे नजदीक कर दिए....
    मैने उसके गाल पर किस कर दीया....
    जिससे प्रीत खुश हो गई.....
    उसने वही मेरे सीने पर सिर रख दिया।

    प्रीत:- भैया आपको पता है मै इस प्यार के लिए बहुत तड़पी हूं....
    मुझे हमेशा भाई की कमी खलती थी.....
    पर अब मै बहुत खुश हूं आप जो मेरे पास है।

    मेरी भी आंखे नम हो गई थी...
    फिर मेरी नजर परी पर पड़ी....
    उसने मुंह फुला कर नजरे फेर ली।

    मै:- क्या हुआ दीदी?

    परी:- कुछ नही!

    मै समझ गया।
    अच्छा इधर आइए!

    परी:- मुझे नही आना!

    मै अच्छा तो फिर ठीक है....
    प्रीत तुम आ जाओ।

    प्रीत:- आई एम ऑलवेज रेडी!

    और उसने दूसरा गाल भी आगे करती दिया...
    जिससे परी जल गई।

    परी:- ऐ मिर्ची साइड हो जा अब मेरी बारी है।
    प्रीत:- क्यो तुम तो भैया से गुस्सा थी!

    परी:- किसने कहा मै कैसे नाराज हो सकती हूँ.....
    है ना भाई।
    उसकी बात पर मै और प्रीत हँस पड़े....
    इस बात पर परी ने फिर से मुंह फुला लिया।

    मै:- अब ठीक है।

    इससे परी के चेहरे पर स्माइल आ गई पर परी और प्रीत एक साथ बोली....
    परी और प्रीत:- ठीक नही बिल्कुल ठीक है.....
    और दोनो झुक के जल्दी से मेरे दोनो गाल चूम लिए।

    फिर हम लोग थोड़ी देर और हंसी मजाक करते रहे।

    फिर दोपहर को मैम और अनू भी आ गई....
    वो भी आकर बाते करने लगे....
    मैम ने अपने साथ लाया हुआ टिफिन को खोला और उसमे खिचड़ी थी।

    फिर मैम ने मुझे थोड़ा सा सहारा देकर बैठाया.....
    और अपने हाथो से मुझे खिलाने लगी।

    मैम की देखा देखी प्रीत परी और अनु ने भी मुझे खिलाया...
    ये चारो मुझे खिला के रुके ही थे कि.....
    एक और हाथ आया और चम्मच पकड़ के मेरे मुँह को लगा दिया।

    यह कोई और नही चाची थी।
    चाची ने खिचड़ी खिला कर मेरे सिर पर हाथ फेरा।

    चाची:- अभी कैसे हो बेटा?

    मै:- ठीक हूं चाची।
    चाची:- सॉरी बेटा मै कल नही आ सकी।
    मै:- कोई बात नही चाची मै आपकी प्रॉब्लम समझ सकता हूँ.....
    और बताइए घर मे सब कैसे हैं परिधि कैसी है?
    क्या अब भी मुझसे नाराज है वो?

    चाची:- घर मे सब ठीक है....
    और हां परिधि का तो तुम्हे पता है जब तक तुम खुद उसके सामने जाकर उससे बात नही करोगे.....
    वो तुम से ऐसे ही नाराज रहेगी .....
    तुम ही ने तो कहा था कि वो जिद्दी है।

    मै:- (मुस्कुराते हुए) हां वो तो है।

    चाची:- चलो ओके मै चलती हूं ....
    परिधि गाड़ी मे मेरा इंतजार कर रही है।
    बाय बेटा!

    फिर चाची भी चली गई।

    अब फिर से मैम और बाकी तीनो ने मुझे खिलाना शुरु कर दिया.....
    तब तक खिलाते गए जब तक पूरा खत्म नही हो गया ....
    फिर उन्होंने मुझे लिटा दिया।

    कविता मैम:- चलो लेट जाओ और आराम करो.....
    आज डॉक्टर कह रहे थे कि वो तुम्हे डिस्चार्ज कर देगे।

    फिर मै सभी से बाते करने लगा।

    तभी कोई आके मेरे कमरे के दरवाजे पर खड़ा हो गया.... .
    उसकी नजरे झुकी हुई थी.....
    उसके साथ दो और लोग भी थे।

    मै पहले वाले शख्स को देखते ही पहचान गया....
    और वो लोग चलते हुए मेरे पास आ गए।

  10. #60
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    ये कोई और नही ये वही एक लड़की थी जिसे मैने बचाया था....
    और जो दो लोग उसके साथ थे वो उसके माता और पिता थे।
    वो तीनो चलते हुए मेरे पास आ गए।

    लड़की के पिता:- अब कैसी तबीयत है बेटा?
    मै:- अब ठीक हूं अंकल!

    लड़की के पिता:- बेटा तुम्हारा बहुत बहुत शुक्रिया.....
    जो हमारी बेटी की जिंदगी बचा ली.....
    वरना हम लोग किसी को मुँह ना दिखा पाते।

    लड़की की मां:- हां बेटा तुम्हारा जितना शुक्रिया किया जाए उतना कम है....
    अगर उस दिन तुम ना होते तो पता नही क्या हो जाता।


    लड़की के पिता:- हमारी बेटी की इज्जत बचाकर तुमने हम सब पर एहसान किया है....
    धन्यवाद बेटा!

    मै:- अरे अंकल आंटी!
    इसमे शुक्रिया की क्या बात है....
    मै भी तो इसी देश का नागरिक हूँ.....
    और ये तो मेरा फर्ज था....
    वैसे भी आपकी बेटी मेरी बहन जैसी है.....
    तो मै उसकी मदद क्यो ना करता....
    वैसे भी मैने अपने एक दोस्त से वादा किया था कि.....
    जहां तक हो सके मैं सबकी मदद करूंगा....
    बस मै अपना वादा पूरा कर रहा हूं।

    इतने मे वो लड़की बोली.....
    लड़की:- थैंक्स भैया.....
    अगर उस दिन आप ना होते तो पता नहीं क्या हो जाता.....
    और आपने ये दूसरी बार मुझ पर उपकार किया है।

    लड़की की बात सुनकर दीप और बाकी सब चौक जाते है।
    सिर्फ अनू को छोड़कर....
    क्योकि अनू ने उसे पहचान लिया था।
    मै:- (सोच मे) दूसरी बार?

    लड़की :- जी भैया एक साल पहले आपने मुझे किडनैप होने से बचाया था.....
    तब भी आपने ही मेरी मदद की थी.....
    जबकि वहां इतने सारे लोग मौजूद थे।

    लड़की के पिता:- बेटा ये दो दो उपकार हम कैसे चुकाएंगे?

    मै:- अंकल कोई भाई कभी अपनी बहन पर उपकार कर सकता है क्या?
    भाई का तो फर्ज होता है बहन की रक्षा करना....
    वही मैने किया तो इसमे ऊपकार कैसा....
    अगर कोई भाई अपनी बहन की रक्षा करके उसे उपकार बोले तो लानत है उस भाई पर।

    फिर हम लोग कुछ देर ऐसे ही बात करते रहे....
    कुछ देर बैठने के बाद वो तीनो चले गए।

    उनके जाने के बाद कविता मैम बोली....

    कविता मैम:- मेरा बेटा बहुत समझदार हो गया है....
    चलो मै डॉक्टर से बात करके आती हूं।

    फिर कविता मैम चली गई...
    और बाकी सब मेरे साथ बाते करने लगे।

    ऐसे ही शाम हो गई....
    डॉक्टर ने मेरा चेकअप किया।

    डॉक्टर:- इस लडके के जखम बहुत जल्दी भर रहे है....
    ये मेरे जीवन मे पहला केस है.....
    मुझे हैरानी हो रही है इस बात पर .....
    ये तो एक चमत्कार है......
    ये सारे जखम 6 से 8 दिन मे ठीक हो जाएंगे।

    फिर डॉक्टर ने पूरी फॉर्मेलिटी की और मुझे एंबुलेंस मे कविता मैम के छोड़ दिया।

    यहां भी सभी मौजूद थे....
    अभी दीपक अंकल कविता मैम प्रीत परी और अनू।

    सभी एक बच्चे की तरह मेरा ख्याल रख रहे थे....
    कोई भी मुझे अकेला नही छोड़ रहा था।

    फिर रात हो गई।

    रात को परी और प्रीत ने मुझे अपने हाथो से खाना खिलाया और खुद भी खाया।

    फिर दोनो का प्यार भरा झगड़ा शुरू हो गया।
    आओ देखे झगड़ा किस बात पर था...
    अरे बाप रे....
    ये तो मेरे लिए झगड़ रही है।

    प्रीत:- आप अपने घर नही गई?

    परी:- ये भी तो मेरा घर है!

    प्रीत:- तो फिर जाओ अपने रूम मे....
    मै यहां हूँ भैया के पास!

    परी:- नही तुम जाओ अपने रूम मे....
    मैं हूं भाई के पास।

    प्रीत:- नही आप जाओ।
    परी:- नही तुम जाओ।

    प्रीत भाग कर आई और मेरे बगल में लेट गई।

    प्रीत:- अब तो आपको जाना ही पड़ेगा....
    और वो परी को जीभ दिखाने लगी।

    मै उनकी लड़ाई देखकर मुस्कुरा रहा था।

    परी भी प्रीत पर चिढ गई....
    प्रीत के साथ वो भी बच्ची बन गई....
    और ये सब कुछ कर रही थी.....
    वो भी आकर मेरी दूसरी तरफ लेट गई।

    परी:- लो मै भी यही हूं....
    कर लो जो करना है।

    इतना बोल उसने करवट लेकर मेरे सीने पर हाथ रख दिया।
    ये देख कर प्रीत भी चिढ गई....
    इसलिए उसने जबरदस्ती परी का हाथ मेरे सीने पर से हटा कर अपना हाथ रख दिया।

    परी ने भी उसी तरह किया....
    कुछ देर दोनो की धक्का-मुक्की चलती रही।

    वो ये भी भूल गई कि अभी मेरे जख्म हरे है....
    उनके ऐसा करते वक्त उनके हाथ मेरे जख्मो पर लग गए।

    जिससे मेरी आह् निकल आई.....
    और मुझे दर्द होने लगा।

    मेरी आह् सुन के उन दोनो का ध्यान मेरी और गया....
    मेरे चेहरे पर दर्द देख कर उनको अपनी गलती का एहसास हो गया....
    दोनो जल्दी से उठ कर बैठ गई....

    प्रीत:- सॉरी भैया....
    सॉरी.....
    हमने जानबूझकर नही किया।

    परी:- सॉरी भाई हम तो बस थोड़ी मस्ती कर रहे थे....
    गलती हो गई।

    दोनो की आंखो मे आंसू आ गए थे।

    मै:- कोई बात नही....
    चलो आओ लेट जाओ....
    कुछ नही होता इतने से।

    दोनो फिर से लेट गई....
    मैने उनके आसू साफ किए.....
    और उन दोनों के माथे चूम लिए।

    पर इस बार दोनों शांत थी.....
    और एकदम सीधी लेटी हुई थी।

    मै:- अरे क्या हुआ इतनी शांत क्यो हो?
    मेरी ये नटखट बहने मस्ती करती हुई अच्छी लगती है....
    चलो आओ पहले की तरह लेट जाओ।

    प्रीत:- नही भैया.....
    आपको फिर से दर्द होगा
    मै:- कुछ नही इतने से.......
    आओ मेरे पास।
    फिर दोनो ने फिर से करवट ले ली....
    और मेरे दोनो बाजू पर सिर रख लिया....
    फिर ऐसे ही हम छोटी मोटी बातें करते हुए सो गए।

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