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Thread: मनहूस जिंदगी - एक मासूम लडका

  1. #61
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    सुबह मेरी नींद पहले खुली!
    प्रीत और परी अभी वैसे ही सोई थी जैसे मै कही भाग ना जाऊ।

    सोते हुए दोनो बिल्कुल बच्चियाँ लग रही थी.....
    दोनो की हरकते बच्चो वाली थी।

    ये दोनो मुझसे बहुत प्यार करती थी....
    कि इन दोनो का प्यार मुझसे इतना सुकून दे रहा था जितना मैने आज तक दुख झेला था....
    कल से उन्होने मुझे एक पल भी अकेला नही छोड़ा था....
    बिल्कुल पवित्रा मां की तरह!

    पवित्रा मा को याद करके मेरी आखो मे आँसू आ गए थे.....
    कब आसू आए मुझे पता ही नही चला....
    पर तभी प्रीत की आंख खुल गई।

    प्रीत:- गुड मॉर्निंग भैया.....
    और मेरे गाल पर किस किया।

    पर किस करते ही उसे मेरे गालो पर गीला महसूस हुआ......
    उसने झट से गर्दन उठाकर देखा!
    तो मेरी आंखों मे आंसू बह रहे थे....
    उसने झट से मुझसे पूछा।

    प्रीत:- क्या हुआ भैया?
    रो क्यो रहे हो?
    दर्द हो रहा है क्या?

    मैने ना मे गर्दन हिला दी।

    प्रीत:- तो फिर रो क्यो रहे हो?

    (परी को हिलाते हुए)
    दीदी उठो....
    कुछ मेहनत के बाद परी उठ गई।

    परी:- क्या हुआ प्रीत?

    प्रीत:- दीदी देखो भैया रो रहे है और कुछ बता भी नही रहे है।

    परी:- झट से उठ कर बैठ गई....
    और मेरा सिर अपनी गोद मे रख लिया....
    क्या हुआ भाई?

    मै:- कुछ नही दी....
    बस कुछ याद आ गया था।

    परी:- ऐसे बार-बार बच्चो की तरह रोना बंद कर दो।

    मै:- मै रो कब रहा था?
    वो तो मै ऐसे ही कुछ याद कर रहा था...
    तो आखो मे पानी आ गया।

    परी:- चलो कोई बात नही...
    अब बिल्कुल नही रोना....
    तुम्हारे रोने से हमे तकलीफ होती है।

    फिर प्रीत और परी दोनो फ्रेश होने चली गई।

    कविता मैम और अनू ने भी सुबह मेरा हाल चाल पूछा।

    मेरे जख्मो मे इतना दर्द और जलन महसूस नही हो रही थी.....
    पता नही क्यो?
    मैने जब अपने जखम देखे तो हैरान रह गया!
    आधे से ज्यादा मेरे जख्म खुद-ब-खुद भर गए थे।
    मुझे हैरानी इस बात की थी कि मेरे जखम इतनी जल्दी कैसे भर रहे है....
    क्योकि आमतौर पर ये जख्म 30 से 45 दिन मे भरते है।

    मै इन्ही विचारो मे गुम था कि मैम ने मुझसे पूछा.....

    कविता मैम:- बेटा नाश्ता लाऊं?

    मै:- मैम मेरा नाश्ता भी डाइनिंग टेबल पर लगा दीजिए।

    कविता मैम:- क्यो?

    मै:- जी मै वही आ रहा हूं।

    फिर मै धीरे से बेड से उठ कर खड़ा हो गया....
    प्रीत और परी ने झट से मुझे पकड़ लिया।

    मै:- अरे मेरी प्यारी बहनो मै अभी ठीक हूं....
    अब छोड़ दो मै चल लूंगा।

    परी:- नही भाई अभी भी खून ज्यादा बह जाने की वजह से तुम मे कमजोरी है....
    डॉक्टर ने हमे बताया था।

    मै:- अरे दी! अब मै ठीक हूं....
    चलो एक बार मुझे छोड़ दो अगर मै गिरने लगूं तो आप सहारा दे देना ठीक है।

    फिर परी और प्रीत ने मुझे छोड़ दिया।

    मै अच्छे से चल पा रहा था.....
    फिर ऐसे धीरे धीरे चल के मै डाइनिंग टेबल पर बैठ गया।

    अंकल और अभी वही मौजूद थे।

    अंकल:- अरे दीप बेटा तुम यहां!
    अभी तुम्हे आराम करना है।

    मै:- अरे अंकल मै अभी ठीक हूं।

    अभी:- हां दीप अंकल एकदम ठीक बोल रहे है.....
    तुम्हे आराम करना चाहिए।

    मै:- अरे अभी भाई कल परसो तक तो मै अच्छे से उछल कूद करने लग जाऊंगा।
    परी:- हां कर लेना उछल कूद पहले मुंह खोलो और खाना खाओ।

    मैने मुंह खोल दिया और खाने लगा....
    फिर रोज की तरह कविता मैम प्रीत परी और अनू मुझे बारी-बारी से खिलाने लगी।

    अभी:- बच्चो की तरह दूसरो से खा रहा है और बोल रहा है मै ठीक हूं।

    अभी की इस बात का जवाब प्रीत ने दिया....

    प्रीत:- तो आप क्यो जल रहे हो?

    अनू:- (परी से) भाभी मुझे जलने की बू आ रही है।
    परी:- हां अनू मुझे भी आ रही है।
    प्रीत:- मुझे तो दो-दो तरफ से आ रही है।

    अंकल:- अरे भाई मैने तो कुछ नही कहा....
    मुझे क्यो बीच मे खीच रहे हो?

    कविता मैम:- समझदार के लिए इशारा ही काफी है....
    क्योकि वो आपकी शह मे वो बोल रहा है वरना उस मे इतनी हिम्मत नही।

    अभी:-क्या यार फूफा जी अपनी तो इज्जत ही नही घर मे!

    अंकल:- यही तो अपनी कोई इज्जत ही नही है....
    ये तो शुक्र मनाओ हमे खाना मिल रहा है चुपचाप खा लेते है.....
    वरना भूखे पेट ही ऑफिस आना पड़ेगा।

    हम लोग हंसने लगे और अभी और अंकल चुपचाप खाना खाने लगे।

    क्योकि उनको पता था कि इन चारो से जीतना बहुत मुश्किल है...।.
    फिर उन चारो ने मुझे खाना खिलाया।

    ऐसे ही तीन-चार दिन गुजर गए....
    मै अब बिल्कुल ठीक था....
    पर इस बात की हैरानी अभी भी बनी हुई थी कि मेरे जख्म इतनी जल्दी कैसे भर गए।

    मै आज कई दिन बाद अच्छे से नहा धोकर रेडी हो गया।

    वहां मुझे आज अनू कुछ उदास सी दिखी.....
    और उसको ऐसा उदास देख कर मुझे भी अच्छा नही लगा....
    पता नही क्यो इतने दिनो मे अनू के साथ मेरी अच्छी अटैचमेंट हो गई थी।

    फिर हम सब ने लंच किया.....
    और फिर से अपने अपने रूम मे पहुंच गए।

    मै थोड़ी देर बाद अनू के रूम मे पहुंच गया।

    मैने दरवाजा खटखटाया....
    अंदर से आवाज आई "खुला है आ जाओ"

  2. #62
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    मैने अंदर आते हुए अनू को चिडाने का सोचा.....

    मै:- हेलो! अनू मैम....
    कैसी हो?

    अनू:- यू बंदर! तुम्हे कितनी बार कहा है मुझे मैम ना कहा करो.....
    ऐसा लगता है जैसे मै कोई बूढ़ी हूँ।

    मै:- लेकिन अनू मैम आप तो मेरी बॉस की बहन हो तो मै आपको मैम ही बुलाऊगा ना।

    अनू:- हे भगवान! तुम जाओ यहां से....
    मुझे तुमसे कोई बात नही करनी जाओ यहां से.....
    अगर मुझे मैम बुलाना है तो आगे से मुझसे कोई बात मत करना।

    जाओ यहां से....
    और वो मुझे धक्के देने लगी।

    मै हंसने लगा।

    मै:- ओके बाबा अनू जी....
    मै अब आपको मैम नही बुलाऊंगा ठीक है।

    अनू:- हां अब ठीक है।

    मै:- अनू मुझे तुमसे कोई काम है।
    अनू:- बोलो...

    मै:- क्या तुम मेरे साथ शॉपिंग पर चल सकती हो?

    अनू:- ओके चलेगे....
    कब चलना है?

    मै:- एक घंटे बाद!

    अनू:- ठीक है....
    मै रेडी होती हूं।

    मै:- ओके!

    फिर एक घंटे बाद हम लोग घर से निकल गए।

    कुछ ही देर मे हम दोनो मॉल के सामने थे।

    हम लोग मॉल के अंदर घुस गए....
    वहां हम ने मेरे लिए कुछ कपड़े लिए....
    ऐसे ही हम मॉल मे घूमने लगे।

    अनू लेडीस सेक्शन मे घुस गई....
    उसने भी दो-तीन सलवार सूट ले लिए....
    जिसमे से दो मेरी पसंद के रंग के लिए थे।

    ऐसे ही अनू की नजर 3 सूट पर पड़ी....
    तीनो अलग अलग थे....
    फिर अनू ने अपनी शॉपिंग देखी....
    वो सूट लेना चाहती थी पर नही खरीदे!
    मैने ये नोट कर लिया।

    मै:- क्या हुआ?
    अनू:- वो सूट भाभी को पसंद है पर मैने शॉपिंग ज्यादा कर ली है....
    अगर अब करूगी तो वो फिजूलखर्ची होगी...
    ये बात करते हुए उसके मुंह पर उदासी थी...
    मैने ये नोट किया।

    वैसे वो तीनो सूट अलग-अलग साइज के थे....
    देखने मे भी अच्छे थे।

    मै:- अनू तुम ऐसा करो फूड सेक्शन मे चलो...
    मै तुम्हे वही मिलता हूं...
    मुझे वॉशरूम जाना है।

    अनू:- ठीक है जल्दी आना।

    फिर वो वहां से चली गई।

    मैने जल्दी से तीनो सूट खरीदे....
    और कविता मैम के लिए भी एक साड़ी ली....
    फिर अभी और अंकल के लिए भी एक एक ड्रेस ली....
    और उसे पैक करवाकर घर का एड्रेस देकर....
    वहां भेजने को कहा और टाइम भी बता दिया।

    इधर मै ये सब कर रहा था और उधर अनू अपने मन मे

    अनू:- मै पता कैसे लगाऊं की दीप के मन मे मेरी क्या जगह है?
    वो भी मुझसे प्यार करता है या नही.....
    पता कैसे करूँ?
    उतने मे उसके पास वाले टेबल पर बैठा लड़का बोला...

    लडका:- धत्त! तेरी कि मेरा पर्स गिर गया....
    अब तो पक्का बर्तन धोने पडेगे।

    जैसे ही अनू ने ये सुना उसके दिमाग मे एक प्लान आया वो उस लडके से बोली.....

    अनू:- मै तुम्हारा बिल भर दूंगी....
    पर तुम मेरा एक काम कर दो।

    पहले तो उसने अनू की ओर देखा फिर बोला.....

    लड़का:- ओके....
    मंजूर है।

    इधर मै फूड सेक्शन चला गया रास्ते मे मैने देखा कि अनू किसी लडके को कुछ पैसे दे रही थी...
    और साथ मे कुछ समझा रही थी....
    बीच मे उसने मेरी तरफ इशारा किया...
    मुझे कुछ गडबड लगी....
    पर अनू को ये पता नही था कि मैने उसे देख लिया है।

    और उसके बाद वो लड़का उसके पास खड़ा हो गया....
    जैसे उसे परेशान कर रहा हो...
    मै जाकर अनू के सामने टेबल पर बैठ गया।

    अनू ने जब मुझे देखा तो उसके चेहरे पर स्माइल आ गई।

    मै:- क्यो भाई क्या परेशानी है?
    क्यो तंग कर रहा है इसे?

    लड़का:- तू कौन है बे?
    क्यो बीच मे आ रहा है?

    मै:- तू ये बता मेरी मंगेतर के साथ छेडछाड क्यो कर रहा है।


    मै:- अरे यार ये चीज ही ऐसी है कि किसी को भी प्यार हो जाए...
    मै एक साल से प्यार कर रहा हूं।
    मेरी बात सुनकर अनू और उस लड़के का फेस देखने लायक था....
    दोनो के चेहरे के रंग उडे हुए थे।

    लड़का:- करता होगा....
    पर अब ये मेरी है।

    मै खड़ा हुआ और एक जोर का थप्पड उसे मार दिया।

    मै:- प्यार का भूत उतरा कि नही?

    लड़का:- अरे भाई मारा क्यो?
    इस लडकी ने मुझे पैसे दिए थे....
    ये बोली एक मजाक करना है बस....
    मुझे क्या पता था मुझे मार पड़ेगी.....
    मुझे पैसे की जरूरत थी।

    उसकी बात सुन के मै हसने लगा।

    मै:-कैसी लगी एक्टिंग।
    अनू:- क्या मतलब?

    मै:- मतलब मैने तुम्हे इसे पैसे देते देख लिया था...
    और मेरी तरफ इशारा करते हुए भी....
    तुम ये देखना चाहती थी की मै लडूंगा झगडूगा या नही।

    अनू:- तो इसका मतलब को एक साल वाला डायलॉग झूठा था।

    मै:- जी हां!
    (उस लड़के से)सॉरी भाई....
    इसके मजाक के चक्कर मे तुझे थप्पड़ पड़ गया।
    सॉरी अगेन....

    लड़का:- कोई बात नही।
    फिर वो लड़का भी चला गया।

    मै:- (अनू से) तुम्हे भी सजा मिलेगी...
    इस काम के लिए खा-म-खा इस बेचारे को थप्पड पडवा दिया।

    अनु:- ओह! अच्छा जी और मेरी सजा क्या है?

    मै:- तुम्हारी सजा ये है कि तुम मेरे साथ मोबाइल शॉप पर चलोगी...
    वहां हम मोबाइल लेगे....
    उसके बाद तुम मुझे आज शहर घूमाओगी।

    अनू:- (दिल मे खुश होती हुई) ओके मंजूर है।

    अनू तो खुद यही चाहती थी....
    मेरे साथ वक्त बिताने का बहाना जो उसे मिल गया।

    मै:- वैसे अनू तुम्हे मिला क्या ये सब करके?
    अनू:- वो तो मैने सिर्फ मस्ती के लिए किया था।

    मै:- ओके।

    फिर हमने वहाँ एक कॉफी पी और चल दिए।
    वहां से हम एक मोबाइल शॉप पर गए....
    वहां मैने मोबाइल लिया जो कि 4जी था...
    और दो सिम लिए एक तो सिंपल था दूसरा वो था जो प्राइवेट नंबर से शो होता है....
    प्राइवेट वाले को मैने अनु को पता भी नही लगने दिया।


    फिर हम वहां से निकल गए....
    ऐसे ही शाम तक हम घूमते रहे....
    फिर शाम को हम पार्क मे चले गए।

    वहां पर हमने थोड़ा बहुत मस्ती मजाक किया....
    वहां पर बाते करते करते मेरी नजर कही पे एक दम जम गई।

    पार्क मे एक साइड दो भाई बहन खेल रहे थे...
    दोनो भाई बहन पकड़ा पकड़ी खेल रहे थे।

    उन दोनो को देखकर मै अपने ही खयालो मे खो गया....
    अपनी उन यादो को टटोलने लगा....
    जो मेरी सबसे अच्छी यादे थी।

    मै भी अपनी बहन के साथ पार्क मे जाता था...
    एक बार की बात है जब मै और दीदी मां के साथ पार्क मे गए थे।
    हम लोग भी पकडा पकडी खेल रहे थे.....
    खेलते खेलते मै गिर गया...
    गिरते वक्त मुझे थोडी सी चोट लग गई...
    जिससे मै रोने लगा....
    जब मेरी दीदी ने ये देखा तो वो भाग के आई और मुझे खड़ा किया।

    दीदी:- क्या हुआ गुड्डू?

    मैने अपनी बाजू उन्हे दिखाई....
    जिसमे से हल्का सा खून आ रहा था।

    दीदी:- अरे अरे मेरे भाई को चोट लग गई....
    किसने मारा (नीचे हाथ लगाते हुए)इस ने मारा है...
    मै भी मारती हूं इसे....
    ये ले मेरे भाई को चोट पहुंचाई तूने.....
    ये ले और ले....
    और फिर ऐसे बोलते हुए वो नीचे मारने लगी....
    ये देख मेरे मुंह पर अपने आप स्माइल आ गई।

    और मै भी दीदी के साथ मारने लगा....
    ऐसे करते-करते मै चुप हो गया...
    फिर दीदी मुझे मां के पास ले गई।

    ये था उनका प्यार....

    अचानक मेरी आंखों के सामने वो सीन आ गया....
    जब सभी मुझे घर से बाहर निकाल रहे थे....
    वो पहली बार था जब मैने दीदी की आंखो मे मेरे लिए नफरत देखी थी...
    उस दिन दीदी ने मेरे मुंह पर का दरवाजा बंद कर दिया।

    जैसे ही मेरे खयालो मे दीदी ने दरवाजा बंद किया मुझे एकदम झटका लगा और मै असली दुनिया मे आ गया।

    मेरी आंखो मे आंसू थे....
    अनू जो अब तक पागलो की तरह कुछ भी बोले जा रही थी...
    उसने एकदम से मेरी ओर देखा।

    अनू:- क्या हुआ दीप?
    रो क्यो रहे हो?

    मै:- कुछ नही बस कुछ पुरानी यादो मे चला गया था....
    और पता नही कैसे अपने आप आँसू आ गए।

    मैने अपने आंसू पोछ लिए।

    अनू:- (अपने मन मे) पता नही कैसा लगता है...
    कभी-कभी तो किसी मासूम बच्चे की तरह रोने लगता है....
    और कभी बड़े-बड़े खतरो से खेलता है...
    इसे समझना मुश्किल है

    मै:- चलो अनू घर चले।

    फिर हम घर की ओर चले गए।

  3. #63
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    हम दोनो पार्क से चल पडे...
    मेरा मूड ऑफ हो गया था।

    बार बार "दी" का चेहरा आंखो के सामने आ रहा था।

    अनू ने रास्ते मे बात करनी चाही पर मैने उससे कोई बात नही की।
    जल्दी ही हम घर पहुंच गए ...
    घर पहुंचकर मै अपने रूम की ओर चल पड़ा...
    मै तो बस अपनी दी के चेहरे को देखता हुआ अपने रूम मे जा रहा था।

    प्रीत और परी ने मुझे आवाज भी दी...
    पर मुझे कुछ भी सुनाई नही दे रहा था....
    मैने अपने रूम मे जाकर रूम अंदर से बंद कर लिया।

    जब परी और प्रीत मेरे पीछे रूम मे आने लगी तब अनू ने उन्हे रोक लिया।

    कविता मैम:- क्या हुआ अनू?
    ये दीप को क्या हुआ इतना चुप सा क्यो है?
    और बिना बात किए रूम मे चला गया

    अनु:- पता नही आंटी जी!
    हम थोड़ी देर पहले पार्क मे बैठे थे....
    पार्क मे जाने से पहले तो दीप बहुत हंस रहा था मजाक कर रहा था....
    पर जब हम पार्क मे पहुंचे तब भी वो अच्छा भला था पर.....
    पर जब दीप की नजर वहां खेल रहे दो भाई बहन पर पड़ी तो वो खामोश हो गया....
    उन दोनो को देखते-देखते दीप अपने मे ही कही खो गया।

    फिर कुछ देर बाद एक झटके के साथ दीप को होश आया...
    और इसकी आंखो मे आंसू थे.....
    जब मैने पूछा तो उसने कुछ नही बताया....
    और रास्ते भर इसने मुझसे कुछ भी बात नही की....
    बाकी तो आपके सामने ही है।

    परी:- हां बुआ ये बात मैने भी नोट की है....
    पता नही ऐसा क्या हुआ है दीप की लाइफ मे जो वो हमसे शेयर नही करता....
    बस अकेला ही दर्द सहता है....
    अकेला बैठ के रोता है....
    और किसी को कुछ नही बताता।

    प्रीत:- हां मम्मी ये बात इनकी सही है….
    मै भैया से बात करती हूं।

    कविता मैम:- प्रीत पहले का तो पता नही पर आज जो हुआ वो मै तुम लोगो को बता सकती हूं।

    परी:- वो कैसे?

    कविता मैम:- जैसा कि अनू ने बताया कि वो भाई बहन को देख रहा था...
    इसका मतलब वो उस भाई की जगह खुद को इमेजिन कर रहा था और उस बहन की जगह अपनी बड़ी बहन को इमेजिन कर रहा था।

    परी प्रीत और अनू एक साथ:- क्या?
    दीप की बड़ी बहन है पर वो है कहां....
    अभी तक आपने हमे क्यो नही मिलवाया?

    कविता मैम:- दीप की सिर्फ एक बहन ही नही है....
    बल्कि दीप के डेड,एक बहन,एक चाचा चाची जो उस दिन हॉस्पिटल मे आई थी...
    चाचा चाची की एक बेटी परिधि जोकि उसके दोस्त रवि की मुंह बोली बहन है.....
    एक मौसी है, मौसी की एक बेटी है,एक मामा मामी है और मामा की बेटी है....
    एक बुआ भी है उसका हस्बैंड और उसकी एक बेटी है।

    प्रीत:- वो सब इस वक्त कहां है?
    दीप उनके साथ क्यो नही रहता?
    और दीप के साथ इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी सिर्फ चाची ही आई और कोई नही आया।

    कविता मैम:- चाची के अलावा सभी दीप से नफरत करते है.....
    उसकी मौसी की फैमिली भी उससे प्यार करती है पर वो अभी दीप के सामने नही आई....
    और वो लोग दीप से इतनी नफरत क्यो करते है ये तो मुझे भी अच्छे से नही पता....
    पर जितना मुझे पता है वो मै तुम लोगो को फुर्सत से बताऊंगी।

    प्रीत:- ठीक है...
    मम्मी पर बताना जरूर।
    फिर वो लोग इसी मुद्दे पर चर्चा करती रही।

    (इन औरतो को भी बाते करने के लिए कोई बात चाहिए होती है....
    कोई बात निकली नही की चर्चा शुरू....
    फिर तो काफी लंबी चलती है....
    पूछो ही मत)

    इधर मै रुम मे पहुंचकर अपने कपड़ो से सारा सामान निकाल दिया....
    और कपड़ो को समेटते हुए बाथरूम मे जाकर शावर के नीचे ही खड़ा हो गया.....
    करीब 30 मिनट शावर के नीचे खड़े रहने के बाद मुझे कुछ आराम मिला।

    फिर मैने शावर बंद किया और कपड़े उतार के टावल पहन के रूम मे आ गया...
    और दूसरे कपड़े पहन के बेड पर लेट गया....
    मैने कुछ देर आँखे बंद रखी और ऐसे ही लेटा रहा।

    फिर करीब एक घंटे बाद डोर बेल बजी....
    मैने भी आंखे खोली....
    मुझे कुछ याद आया और जल्दी से उठ कर बैठ गया....
    और अपना माथा पीट लिया।

    मै:- (खुद से) ये क्या हुआ मुझे?
    मै मैम प्रीत और परी से बात किए बिना ही रूम मे आ गया....
    उनको बुरा लगा होगा....
    और अनू उसके साथ भी मैने अच्छा नही किया वो बेचारी सारे रास्ते मुझसे बात करना चाह रही थी....
    पर मै बेवकूफ कितनो का दिल दुखाया...
    और अभी पार्सल आया होगा....
    चलो बाहर चलता हूं....
    बाहर जाकर सबको सरप्राइस देना हूं जो मैने उनके लिए लिया था।

    फिर मै रूम से बाहर आ गया....
    बाहर देखा तो सोफे के पास टेबल पर पार्सल पड़ा हुआ था.....
    पास ही मे अनू प्रीत परी और मैम बैठे थे....
    मै उनके पास जाकर बैठ गया।

    प्रीत:- भैया आपके लिए पार्सल आया है।

    मै:- देखता हूं बेटू।

    फिर मैने पार्सल खोला....
    और उसमे से पहले मैने साडी निकाली....
    और मैम को दे दी।

    कविता मैम:- ये क्या है बेटा?

    मै:- कुछ नही मैम....
    मै और अनू शॉपिंग गए थे....
    वहां मैने ये आपके लिए खरीदी थी

    कविता मैम:- पर इसकी क्या जरूरत थी?
    मै:- अब आप इसे रख रही हो या नही?
    अगर अभी भी आपने बहस की तो मै आपसे बात नही करूंगा।

    कविता मैम:- ओके बाबा रख ली।

    फिर मैने एक रेड कलर का सूट निकाला....
    और वो परी को दे दिया।

    परी वो सूट देख कर खुश हो गई....
    और मेरे गाल पर किस करके मुझे हग कर लिया।

    परी:- थैंक यू भाई तुम्हे नही पता मुझे ये कितना पसंद आया था....
    पर तब हमने शॉपिंग ज्यादा कर ली थी.....
    पर तुमने ये मुझे लेकर दे दीया....
    थैंक यू।
    अगेन.....
    मै:- यू आर मोस्ट वेलकम दीदू।

    फिर मैने प्रीत को उसका सूट दिया जो येलो कलर का कमीज था.....
    और ग्रीन सलवार थी....
    वो सूट लेकर खुश हो गई.....
    उसने भी मुझे गाल पर किस की....
    और मुझे हग करके बोली।

    प्रीत:- लव यू भैया....
    ये ड्रेस बहुत सुंदर है।

    मै:- लव यू टू बेटू।

    फिर मैने एक सूट निकाल के अनू को दिया....
    जिसमे ब्लू कलर का कमीज था....
    और वाइट कलर की सलवार थी....
    अनू को भी सूट अच्छा लगा और उसने मुझे थैंक्स बोला।

    फिर मैने अंकल और अभी का ड्रेस निकाल कर परी और मैम को दे दिया।

    अनू:- वैसे दीप ये सब कब खरीदा?
    मै:- जब तुम फूड सेक्शन मे थी तब।

    अनू:- अच्छा याद दिलाया....
    मै आप सबको एक बात बताती हूं....
    आज मैने दीप से मजाक करने की सोची....
    पर इसने मेरा ही पोपट कर दिया।

    और फिर उसने मॉल मे जो हुआ वो सब को बता दिया.....
    सब हंस के लोटपोट हो गए।

    प्रीत:- मेरे भैया को बुद्धू बनाना आसान नही है।

    परी:- सही कहा....
    आगे से ध्यान रखना।

    सब लोग फिर से हंसने लगे।

  4. #64
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    ऐसे ही हंसी मजाक मे हमने डिनर किया....
    फिर हम सो गए।

    आज की रात सिर्फ प्रीत ही मेरे रूम मे मेरे साथ थी...
    हम दोनो सुकून की नींद सो रहे थे।
    मुझे रात को एक सपना आने लगा.....
    उस सपने मे रवि दिखाई दे रहा था!

    रवि:- भाई अब और कितना देर करेगा?
    तुझे तेरा फर्ज पुकार रहा है...
    कल जाकर रुद्रा से मिल....
    और अपने काम पर लग....
    मै बार-बार तुझे याद दिलाने नही आऊंगा।
    समझा अगर नही माना तो तेरा बुरा हाल कर दूंगा.....
    समझा कि नही?

    मै:- समझ गया भाई...
    मै कल ही जाऊंगा....
    और इसी के साथ ही मेरी आंख खुल गई।

    मैने उठ कर पानी पिया....
    और फिर से लेट गया।

    प्रीत मेरे पास सो रही थी.....
    वो सोते हुए बहुत ही प्यारी लग रही थी।

    फिर मै सोचने लगा....
    कि आखिर रवि बार-बार कौन से काम के बारे मे बोल रहा है....
    मै सुबह ही रुद्रा से जाकर मिलूगा।

    मै ऐसे ही सुबह तक सोचता रहा और जल्द ही सुबह भी हो गई.....
    मै बैड से उठा और फ्रेश होने चला गया।

    उसके बाद मैने प्रीत को जगाया....
    और बाहर आ गया.....
    बाहर अंकल बैठे थे और अखबार पढ़ रहे थे।

    मै:- गुड मॉर्निंग अंकल।

    अंकल:- मॉर्निंग बेटा...
    कैसे हो?

    मै:- एकदम फिट एंड फाइन।
    अच्छा अंकल मै किसी काम से बाहर जा रहा हूं....
    दोपहर तक आ जाऊंगा।

    अंकल:- ठीक है बेटा।

    फिर मै वहां से रुद्रा के घर की ओर निकल गया...
    जल्दी ही मै रुद्रा के घर मे सोफे पर बैठा था।

    तभी रूद्रा आया।

    रुद्रा:- कैसे हो?

    दीप:- मै बिल्कुल ठीक हूं भाई....
    मै यहां आपसे ये पूछने आया था कि मेरी ट्रेनिंग कब शुरू होगी और कितने वक्त की होगी।

    रुद्रा:- तुम्हारी ट्रेनिग कल से शुरू होगी....
    और तुम्हारी ट्रेनिग 50 से 60 दिन की होगी।

    और हां मै तुम्हे किसी से मिलवाना चाहता हूं!
    (जोर से)....पीटर!

    उसके बाद वहां पर करीब 30 साल का एक लड़का आया।

    रुद्रा:- इनसे मिलो ये है पीटर....
    तुम्हारा ट्रेनर....
    यही तुम्हे ट्रेनिग देगा ये अमेरिका की आर्मी मे काम करता है....
    मैने स्पेशल इसे यहां बुलाया है।

    मैने और पीटर ने हाथ मिलाया और एक दूसरे को विश किया।

    रुद्रा:- हां तुम्हे अब दो महीने पीटर के साथ ही रहना है.....
    पीटर तुम्हे बहुत सारी चीजो की ट्रेनिग देगा।

    मै:- ठीक है तो अब मै चलता हूं।

    फिर मै रुद्रा और पीटर से मिलकर घर आ गया।

    अभी समय कुछ भी नही हुआ था....
    सभी बैठे नाश्ता कर रहे थे....
    मै भी उन्ही के साथ बैठ गया।

    नाश्ते के बाद....

    कविता मैम:- बेटा इतनी सुबह सुबह कहां गए थे?

    मै:- मैम वो मै अपने एक जरूरी काम से गया था।
    कविता मैम:- ओके!

    मै:- मुझे आप सब से कुछ बात करनी है.....
    मै कल 2 महीनो के लिए कही काम से जा रहा हूं।

    सभी:- क्या?
    मै:- जी!

    परी:- पर कहां जा रहे हो....
    वो भी इतने दिनों के लिए?

    कविता मैम:- और तुम्हारी पढ़ाई!

    मै:- मैम मै किसी जरूरी काम से जा रहा हूं....
    और मेरा जाना जरूरी है....
    और मै कॉलेज शुरू होने से पहले आ जाऊंगा।

    मेरी बात सुनकर सभी उदास हो गए।

  5. #65
    कर्मठ सदस्य pkpasi's Avatar
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    मै:- आप लोग उदास क्यो हो गए?
    मेरे पास फोन तो है ही ना....
    मै आप लोगो को फोन करता रहूंगा।


    प्रीत:- पक्का ना!
    मै:-हाँ बेटू पक्का....
    मै रोज कॉल करूंगा....
    ठीक है।


    फिर हमने कुछ देर और बाते की....
    फिर मेरे दिमाग में एक आइडिया आया।


    मै:- क्यो ना आज हम सब लोग पिकनिक चले?
    परी:- गुड आइडिया.


    बाकी सब भी:- अच्छा आईडिया है....
    वैसे भी काफी वक्त हो गया है आउटिग किए।


    फिर सभी पिकनिक की तैयारी करने लगे....
    जल्द ही सभी रेडी हो गए।


    सब गाड़ियो मे बैठ के निकल पड़े एक अच्छी सी जगह पर.....
    जल्दी ही हम एक ऐसी जगह पहुंच गए......
    जहां चारो तरफ हरियाली थी मौसम भी सुहाना था....
    हर तरफ का नजारा मनमोहक था....
    पर पास मे ही एक खाई थी.....
    पर वो भी अच्छी लग रही थी।


    सभी यहां आकर बहुत खुश थे....
    मै भी आज इस जगह पहली बार आया था.....
    मै बहुत वक्त बाद कई लोगो के साथ घूमने आया था....
    बस बचपन मे दो बार अपनी फैमिली के साथ घूमने गया था....
    उसके बाद बस आज ही घूमने आया हूं.....
    इसलिए आज मै भी बहुत खुश था।


    फिर सभी चादर बिछा के बैठ गए जो हम अपने साथ लाए थे....
    फिर हम वहां बैठकर हंसी मजाक कर रहे थे।
    फिर प्रीत बोली....


    प्रीत:- हम लोग पकड़ा पकड़ी खेले क्या?
    सभी:- हाँ।


    फिर सभी खेलने लगे....
    सबसे पहले अनू का नंबर आया।


    प्रीत ने खेल को और मजेदार बनाने के लिए एक पट्टी उसकी आंखो पर बांध दी....
    फिर उसे घुमा कर छोड़ दिया...
    फिर वो हम सब को पकड़ने लगी....
    ऐसे ही हम लोग उसको आवाज लगाते हुए उसके साथ मस्ती करते रहे।


    फिर अनू ने परी को पकड़ लिया.....
    ऐसे ही कुछ देर बाद परी ने प्रीत को पकड़ लिया।


    फिर काफी देर प्रीत सभी को पकडने की कोशिश करती रही....
    पर कोई भी उसकी पकड मे नही आया....
    फिर मै जानबूझकर उसकी पकड मे आ गया।


    प्रीत:- मैने भैया को पकड़ लिया....
    अब आपका नंबर....
    चलो झुको।


    फिर मेरा नंबर आया....
    मैने सब को पकडना शुरू कर दिया।


    इस सब खेल मे एक गलती हो गई....
    हम लोग खेलते खेलते खाई के बिल्कुल पास आ गए ये गलती हम मे से किसी पर भी भारी पड सकती थी।


    ऐसे ही हम खेलते रहे.....
    खेलते खेलते मै उनको ढूंढते ढूंढते खाई के एकदम पास आ गया....
    खाई मेरे से कुछ दो कदम ही आगे थी....
    जैसे ही मै एक कदम आगे बढाकर दूसरा कदम उठाया!


    तभी परी ने मेरा हाथ पकड के खीच लिया।


    परी:-भभभभाई!
    और मुझे अपने गले से लगा लिया....
    मैने फौरन अपनी आंखो से पट्टी हटाई।


    मै:- क्या हुआ दी?


    फिर परी ने खाई की ओर इशारा किया....
    परी तुम अभी खाई मे गिरने वाले थे।


    इतने मे सभी हमारे पास आ गए।


    कविता मैम:- क्या हुआ परी?
    तुम चीखी क्यो?


    परी:- वो वो! भाई खाई मे गिरने वाला था।


    वो बहुत डर गई थी...
    और साथ मे उसकी आंखो मे दो आंसू भी आ गए थे....
    मैने उनकी आंखे साफ की।


    मै:- जब तक आप लोगो जैसे प्यार करने वाले लोग मेरे साथ है मुझे कुछ भी नही होगा.....
    सो प्लीज आप रोना बंद कीजिए.....
    मुझे कुछ भी तो नही हुआ।


    परी:- अगर थोड़ी सी भी देर हो जाती तो....
    और उसने वो पट्टी मेरे सिर से उतार के फेक दी...
    बंद करो इस खेल को.....
    अब और नही खेलना है।


    मै:- ठीक है चलो।


    फिर हम सब वहां आ गए जहां हम सब बैठे थे।


    परी अभी भी मेरे पास ही बैठी थी....
    लंच का टाइम हो गया था...
    लंच के वक्त मैने परी के मुंह मे निवाला डाला....
    तो प्रीत अनू और कविता मैम ने भी अपने मुंह खोल दीया।


    तीनो एक साथ:- हमे भी खिलाओ।


    मैने उन तीनो को भी खिलाया।


    इतने मे अंकल भी बोले...


    अंकल:- कभी हमे भी खिला दिया करो।


    कविता मैम और परी:- हम खिलाते है ना पहले आंखे बंद करो।


    अभी:- वो क्यो भला?
    परी:- अरे आंखे बंद नही करोगे तो फील कैसे करोगे इस मोमेंट को?


    अंकल:- (खुश होते हुए)परी बेटा यू आर सो स्वीट।


    परी:-(कविता मैम के कान मे) स्वीट!
    वो तो मै इन्हे अभी बता देती हूं.....
    जैसा मै करूं वैसा ही करना आप भी।


    कविता मैम:-ठीक है।
    परी:- चलिए करिए आंखे बंद।


    अभी:- ओके कर ली।


    फिर वो दोनो आंखे बंद करके बैठ गए....
    फिर परी ने रोटी का निवाला तोड़ा.....
    और उसमे एक पूरी मिर्च डाल दी।


    कविता मैम ने भी ऐसा ही किया।
    परी और कविता मैम:- ओके अपना मुंह खोलो।


    अभी और अंकल ने एक्साइटमेंट मे अपने अपने मुंह खोल दिए.....
    अंकल को ये नही पता था कि उनके साथ क्या होने वाला था है।


    कविता मैम और परी ने वो निवाले उनके मुंह मे डाल दिए......
    जैसे ही उन्होंने मुंह बंद करके कुछ देर चबाया....
    उसके बाद उनकी चीखें निकलने लगी।


    अंकल:- आह्! सी..सी...पानी दो....
    मुँह जल रहा है।


    अभी:- परी प्लीज पानी दो....
    यार ये क्या तुमने प्लीज पानी दो।


    वो दोनो सी!सी! कर रहे थे और हम लोग पास बैठे हंस रहे थे....
    फिर कविता मैम और परी ने उनको पानी दे दिया।


    अभी:- परी ऐसा क्यो किया?
    सी..सी..अभी भी जल रहा है।


    परी:-आप लोग हमसे जलते रहते हो....
    इसलिए आप को सजा तो मिलनी ही थी।


    फिर परी और कविता मैम ने मिलकर एक एक गुलाब-जामुन जो हम साथ लेकर आए थे...
    वो उठा के अभी और अंकल के मुंह मे डाल दिया।


    परी:- हाँ तो फूफा जी आप बताए कि मै स्वीट हूं या नही?


    अंकल:-हां भाई! आज पता लग गया.....
    स्वीट वाकई मे सेहत के लिए हानिकारक है।


    अंकल की बात पर हम सब लोग फिर से हंस पड़े।


    फिर ऐसे ही मस्ती करते हुए शाम हो गई.....
    और उसके बाद हम घर को निकल पडे।


    घर पहुंचते हमे रात हो गई.....
    हमने बाहर ही डिनर किया।


    और घर आ गए....
    घर आके एक बार तो सभी अपने अपने रूम मे चले गए....
    पर कुछ देर बाद प्रीत परी अनू और कविता मैम मेरे रूम मे आ गए।


    मै:- अरे आप लोग इतनी रात को यहां?


    प्रीत:- वो क्या है ना भैया कल आप जा रहे है तो आज हम आपके साथ रूम मे सोएगे।


    सब मेरे बेड पर आ गए.....
    परी और प्रीत ने मुझे लिटा दिया।


    फिर कविता मैम ने मेरा सिर अपनी गोद मे रख लिया....
    परी और प्रीत मेरे दोनो साइड लेट गई.....
    और अनू ने मेरी जांघो पर अपना सिर रख लिया।


    इतने लोगो का मेरे पास होना मुझे बहुत सुकून दे रहा था.....
    मैम मेरे सिर पर हाथ फेर रही थी।


    फिर कुछ देर बाते करने के बाद हम सो गए।

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