Page 8 of 8 प्रथमप्रथम ... 678
Results 71 to 75 of 75

Thread: मनहूस जिंदगी - एक मासूम लडका

  1. #71
    कर्मठ सदस्य pkpasi's Avatar
    Join Date
    Jun 2009
    प्रविष्टियाँ
    1,795
    Rep Power
    12
    ###########अगले दिन############

    आज अमेरिका मे मेरा आखिरी दिन था।
    मै आज इंडिया जा रहा था.....
    जाने से पहले मै सब से मिल लिया.....
    और निकल पडा इंडिया की ओर......
    कुछ घंटो के बाद मै इंडिया मे था।

    एयरपोर्ट से टैक्सी लेकर मै घर पहुंच गया.....
    अपने घर यानी कि एक रूम वाले घर मे......
    आज 2 महीने बाद मै अपने घर मे था।

    कुछ देर मै अपनी यादो को ताजा करता रहा.....
    और फिर निकल पड़ा मैम के घर की ओर......
    अपने साथ गिफ्ट वाला बैग भी ले गया था।

    15 मिनट बाद मैने मैम के घर की बेल बजाई......
    गेट हरिया काका ने खोला.....
    मैने उन्हे नमस्ते किया और अंदर आ गया।

    कविता मैम और प्रीत हॉल मे सोफे पर ही बैठे थे.....
    और साथ मे परी भी थी.....
    और परी के बगल मे अनु भी बैठी थी।
    मै जब उनके पास पहुंचा....
    तब मैम ने मुझे गले लगाया.....
    फिर मैने उनके पैर छू लिए।

    परी अनु और प्रीत मुँह फेर कर खड़ी हो गई.....
    और तीनो प्रीत के रूम में चली गई।

    मैने उन्हे आवाज लगाई.....
    पर तीनो नही रुकी.....
    अब इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता था.....
    कि वो कितना गुस्सा है...।
    फिर मैम और मैं वही बैठ कर बाते करने लगे।

    कविता मैम:- कैसे हो बेटा?
    और बड़ी तेजी से घर वापिस आ ही गए....
    क्यो!

    मै:- जी मैम वो काम भी बहुत जरूरी था।
    कविता मैम:- हो गया काम पूरा?
    मै:- जी!

    कविता मैम:- वैसे काफी बदल गए हो....
    अच्छी खासी बॉडी भी बना ली.....
    अब पहले से भी अच्छे लग रहे हो।

    मै:- थैक्यू मैम....
    वैसे प्रीत परी और अनु बहुत गुस्से मे है शायद।
    कविता मैम:- हाँ बिल्कुल!
    बहुत ही गुस्से मे है .....
    बड़ी मुश्किल से मानेगी.....
    क्योकि तुमने उससे बात भी नही की।

    मै:- मैम मैने बताया तो था आपको.....
    कि वहां सिग्नल नही मिल रहा था.....
    फिर मै अमेरिका चला गया.....
    वहां से आपको कॉल किया था....
    फिर वहां से रोज आपको कॉल करता था।

    कविता मैम:- अमेरिका क्यो?
    मै:- मैम वहां कुछ जरूरी काम था इसलिए......
    चलिए अभी उनको मनाने की कोशिश करता हूँ।

    मै उठकर प्रीत के रूम के बाहर आ गया।

    मैने रूम के बाहर पहुँच कर अंदर देखा....
    तभी परी की नजर मुझ पर पड़ गई....
    वो तुरंत उठ कर आई और दरवाजा बंद करने लगी........
    और मै उन्हे रोकने की कोशिश करने लगा।
    यू तो मै जोर लगा सकता था.....
    पर उससे उनको चोट लग जाती।

    मै:- अरे दी!
    सुनो तो मेरी बात....
    सुनो दी प्लीज सुनो तो!

    परी:- हमे कुछ नही सुनना.....
    तुम जाओ वापस अपने काम पर जाओ।

    मै:- अरे दी सुनो तो.....
    प्लीज एक बार सुन लो....
    उसके बाद प्रीत आई .....
    और प्रीत ने भी परी का साथ देकर दरवाजा बंद कर दिया।

    मै बाहर से दरवाजा खटखटाने लगा.....
    और उन्हे मनाता रहा पर उन्होने एक ना सुनी.....
    फिर लगभग 30 मिनट बाद मै वापस मैम के पास आ गया।

    कविता मैम:- क्यो क्या हुआ?
    मानी क्या?
    मै:- नही....
    उल्टा उन्होने मेरे मुँह पर दरवाजा बंद कर दिया।

    कविता मैम हँसने लगी।
    कविता मैम:- मैने कहा था ना....
    कि उन्हे मनाना मुश्किल है।

    मै:- मुश्किल है नामुमकिन नही।

    फिर मैने एक प्लान बनाया और मैम को भी बता दिया.....
    उनसे बोला.....

    मै:- बस मैम आप मेरी हेल्प कर दो.....
    ये तो झट से मान जाएगी......
    और साथ मे अंकल और अभी को भी बता देना।

    कविता मैम:- वैसे प्लान अच्छा है.....
    और मै उन्हे समझा दूंगी।

    फिर मैने अपने साथ लाया हुआ पैक खोला.....
    और उसमे से दो ड्रेस निकाले....
    और मैम को दे दिए....
    एक साडी थी वो मैम को दे दी....
    ये साडी मैने यही से ली थी.....
    और एक कोट पैंट था....
    जो अंकल के लिए था।

    फिर मै प्लान के हिसाब से घर से निकल गया....
    और घर आकर आगे की तैयारी की।

    इधर मैम के घर डाइनिंग टेबल पर परी प्रीत और अनु रूम से बाहर आकर बैठ गई।

    अभी भी आ गया था और अंकल भी.....
    परी प्रीत और अनु तीनो की आँखे किसी को ढूंढ रही थी....
    बाकी के तीनो ने ये नोटिस किया....
    क्योकि मैम ने अंकल और अभी को मेरा प्लान बता दिया था।

    कविता मैम:- हाँ मै तुम सबको एक बात बताना भूल गई....
    सभी मैम की ओर देखने लगे!

    कविता मैम:- कल हमारे घर मे काम करने के लिए नई नौकरानी आएगी।
    प्रीत:- पर मॉम पहले से ही बहुत लोग है....
    और लोगो की क्या जरूरत है।

    मैम :- उसे काम की बहुत जरूरत थी....
    तो मैने इसे रख लिया।

    सभी ने ओके कहा और खाना खाने लगे.....
    प्रीत परी उदास मन से खाना खाने लगे।

    फिर सभी अपने अपने रूम मे चले गए।
    अनु और प्रीत एक रूम मे....
    अभी और परी एक रूम मे....
    और कविता मैम और अंकल अपने रूम मे।

    इधर मै भी अपनी तैयारी करके सो गया।
    अगले दिन मै प्लानिंग के हिसाब से सुबह 5:00 बजे ही मैम के घर पहुंच गया.....
    सब कुछ ठीक कर दिया....
    वॉचमैन को भी उसका रोल समझा दिया....
    वॉचमैन का भी छोटा सा रोल है।

    8:00 बजे सभी डाइनिंग टेबल पर बैठे थे।

    मै भी अच्छा खासा लड़कियो वाला सलवार सूट पहन के चुनरी से घुंघट निकाल कर घूम रहा था....
    ठीक 8:10 पर बेल बजी.....
    जोकि वॉचमैन ने बजाई।
    (एक बात और मै दूसरो की आवाज निकालने मे एक्सपर्ट हूं यही वजह है किसी को शक नही हुआ मुझ पर ये कला आज मेरे काम आ रही थी)

    मैने गेट खोला और अपनी दोनो आवाज मे बात करने लगा।

    मै:- नमस्ते! क्या मैम घर पर है?
    मै(लेडी वॉइस):- जी हां....
    पर आप कौन?

    मै:- मै उनका स्टूडेंट दीप।
    मै(लेडीस वॉइस):- रुको पूछती हूं...
    (चिल्लाकर) साहब कोई दीप आया है आपसे मिलने। कविता मैम:- उसे वापस भेज दो....
    हमे उससे कोई बात नही करनी।

    मै(लेडीस वॉइस):- आप वापस चले जाइए।
    मै:- पर मुझे कुछ जरूरी बात करनी है।
    मै(लेडीस वॉइस):- आप वापस चले जाओ।

    (सारी बाते तेज आवाज मे हो रही थी जिसे सब सुन सकते थे)

    मै:- प्लीज जाने दीजिए!
    मै(लेडीस वॉइस):- एक बार मे सुनाई नही देता?

    और दरवाज़े के पास पड़ा झाड़ू उठा लिया....
    जो की प्लानिंग के हिसाब से रखा गया था।

    उससे मै खुद को मारने की एक्टिंग करने लगा।

    मै(लेडी वॉइस):- जाओ यहाँ से।
    (मै दर्द का नाटक करते हुए )
    मारो मत मै जा रहा हूं....
    फिर मै दरवाजा बंद करके वापस आ गया।

    कविता मैम:- क्या हुआ?
    मै(लेडीस वॉइस):- वो जा नही रहा था....
    तो मैने झाड़ू से मार कर भगा दिया।
    कविता मैम:- अच्छा किया।

    ये बाते सुनकर प्रीत परी और अनु गुस्सा हो गई।

    प्रीत:- मॉम आपको तो बाद मे देखेगे.....
    पहले इसे ठीक कर ले।

    वो तीनो अपनी जगह से खड़ी हो गई।

  2. #72
    कर्मठ सदस्य pkpasi's Avatar
    Join Date
    Jun 2009
    प्रविष्टियाँ
    1,795
    Rep Power
    12
    वो तीनो मेरी और बढ़ने लगी।

    मै धीरे-धीरे पीछे हटने लगा....
    क्योकि मेरी वाट लग चुकी थी.....
    मैने मधुमक्खियों के छत्ते मे हाथ डाल दिया था।

    जल्दी ही उन्होने मुझे पकड़ लिया....
    फिर शुरू हो गई धुलाई।

    प्रीत:- मेरे भाई को क्यो मारा तूने?
    तुझे अभी बताती हूं।

    परी:- कमीनी आज तेरे हाथ पैर न तोड़ दूं तो कहना।
    अनु:- पहले ही दिन घर की मालकिन बन बैठी।

    इधर मुझे मार पड़ रही थी....
    मै लड़की की आवाज मे चीख चिल्ला रहा था।

    मै(लेडीस वॉइस):- मेमसाहब बचाइए!
    कविता मैम:- बस करो तुम तीनो।

    परी:- बुआ बीच मे मत आइए....
    आज तो इसकी हड्डी पसली एक करनी है.....
    और आपको भी कुछ ही देर मे देखते है।

    उधर कविता मैम हँस रही थी....
    और अंकल और अभी अपनी हंसी दबाए बैठे थे।

    फिर एकदम से प्रीत का हाथ मेरे नकली बालो मे पड़ा....
    जब उसने मेरे बाल खीचे तो बाल उसके हाथ मे चले गए.....
    और तभी एक मुक्का मेरी नाक पर पड़ा....
    और इसी के साथ मेरी असली आवाज मे हल्की सी चीख निकल गई।

    मै:- आह! मार डाला....
    और इसी के साथ मुझे अपनी गलती का एहसास हो गया......
    कि गड़बड़ हो गई....
    मै अपना मुँह छुपाने लगा और वो तीनो मेरा घूंघट उठाने लगी।

    प्रीत:- घूंघट उठाओ।

    मैने ना मे सर हिला दिया.....
    प्रीत:- मैने कहा घूंघट उठाओ।

    परी:- प्रीत ये ऐसे नही मानेगी।

    और तीनो ने जबरदस्ती मेरा घूंघट उठा दिया।

    तीनो पहले तो चौक गई....
    फिर एकदम से तीनो जोर जोर से हँसने लगी.....
    साथ मे कविता मैम अंकल और अभी भी हँसने लगे.... क्योकि उन्होंने बहुत देर से अपनी हँसी रोकी हुई थी।

    परी प्रीत और अनु ने मुझे गले लगा लिया....
    वो भी तीनो ने एक साथ।

    मै:- मुझे तुम लोगो से कोई बात नही करनी।
    प्रीत:- क्यो?
    मै:- कोई किसी की इतनी धुलाई करता है क्या ?

    दर्द का नाटक करते हुए....
    हाय मार डाला हड्डी पसली एक कर दी।

    परी:- ये भी तुम्हारी गलती है.....
    पहले तुमने हमे वादा किया था.....
    कि रोज फोन करोगे फिर 1 महीने तक कोई फोन नही किया.....
    उसके बाद हमे गुस्सा आया।

    मै:- सॉरी उस 1 महीने के लिए....
    इसका कारण मैने मैम को बताया था.....
    तीनो मुझसे अलग हुई।

    प्रीत:- वैसे इस गैटअप मे अच्छे लग रहे हो।
    परी:- और बॉडी भी अच्छी बना ली....
    बॉडीबिल्डर लड़की!

    इस बार फिर सभी हँस पडे...
    मेरे चेहरे पर भी मुस्कान आ गई।

    फिर मै कपडे चेज करके डाइनिंग टेबल पर आ गया....
    और नाश्ता करने लगा।

    नाश्ते के बाद अभी मैम को एक कैमरा देते हुए।

    अभी:- बुआ ये लो आपका काम हो गया।
    कविता मैम:- थैंक्स अभी।
    प्रीत:- इसमे क्या है मॉम?
    कविता मैम:- तुम सब खुद ही देख लो।

    फिर मैम ने वो कैमरा एलसीडी पर लगवा दिया....
    फिर सभी उस चीज को देख कर खूब हँसे....
    क्योकि उसमे मेरी आज की सारी रिकॉर्डिंग थी....
    शुरू से लेकर मार खाने तक....
    वीडियो को देख सभी एक बार फिर से ठहाके लगाकर हँसने लगे।

    कविता मैम:- वैसे तुमने मना ही लिया।
    मै:- मनाने वाले से पूछो उसका क्या हाल हुआ।

    प्रीत परी और अनु एक साथ:- सॉरी!
    मै:- इट्स ओके!
    वैसे भी गलती तो मेरी थी इसलिए सजा भी बनती थी।

    फिर हम लोगो ने पूरा दिन मस्ती की।

    #############अगले दिन#############

    आज फ्रेंडशिप डे है।
    आज का ये दिन सभी दोस्त मिलकर मनाते है!
    पर मै एक अकेला था जिसका कोई दोस्त नही था....
    मुझे आज रवि की बहुत याद आ रही थी।

    इतने मे मेरे रूम का दरवाजा खुला.....
    और अनु प्रीत और परी अंदर आ गए।

    प्रीत:- हैप्पी फ्रेंडशिप डे भैया....
    और मुझे हग किया।

    परी:- हैप्पी फ्रेंडशिप डे भाई....
    इसने भी मुझे हग किया।

    अनु:- हैप्पी फ्रेंडशिप डे दीप
    और अनु ने भी मुझे हग किया।

    फिर तीनो ने मुझसे कुछ देर बाते की.....
    उसके बाद प्रीत और परी चली गई।

    अनु:- दीप चलो आज घूम कर आते है....
    और आज का दिन भी सेलिब्रेट कर लेगे।
    मुझे भी सही लगा फिर हम दोनो घर से निकल गए।

    अनु मुझे एक जगह ले कर गई और ये एक रेस्टोरेंट था।
    मै और अनु अंदर चले गए....
    अंदर अनु ने किसी को देखकर हाथ हिलाया...
    और उधर से भी एक लड़की ने हाय कहाँ....
    और हमारी और आ गई।

    लड़की:-हाय!बेबी हाउ आर यू?
    अनु:- आई एम फाइन...
    तुम बताओ कितने दिन बाद मिली।
    अनु:- बस कुछ नही यार थोड़ा लाइफ मे बिजी थी।

    लड़की:- और ये कौन है तुम्हारे साथ!
    अनु:- अरे मै भूल गई ये है दीप वर्मा!
    मेरी भाभी के भाई और मेरे फ्रेंड.....
    मैने तुम्हे बताया था.....
    और ये है अनीता.....
    हॉस्टल मे मेरे साथ थी और मेरी बेस्ट फ्रेंड भी।

    हम दोनो ने एक दूसरे को हाय कहाँ।
    अनीता (अनु के कान मे) ओह! तो ये है तेरा वही हीरो.....
    वैसे है बहुत हैंडसम और बॉडी सोडी भी अच्छी है।

    अनु:- बस बस नजर लग जाएगी....
    और दोनो हँसने लगी।

    अनीता:- मेरा तो मन कर रहा है इसे भगा के ले जाऊँ। दोनो फिर से हंँसने लगी....
    मुझे कुछ समझ नही आ रहा था।

    इतने मे वहाँ 3 लड़के आए।

    ये कोई और नही वही तीनो थे......
    जिनका स्कूल के आखिरी दिन मुझसे पंगा हुआ था।

    पहला लड़का:- क्यो बे लूजर?
    यहाँ क्या कर रहा है?
    अनु:- माइंड यूअर टंग।

    दूसरा लड़का:- ओ बेबी को गुस्सा आया।
    मै:- देखो रॉकी हमसे पंगा मत लो.....
    यहाँ पार्टी चल रही है....
    मै नही चाहता कि कोई सीन क्रिएट हो।

    रॉकी:- बच्चा डर गया....
    और उसके साथ बाकी के दोनो भी हँस पड़े।

    दूसरा लड़का:- जा बच्चे! जा उस दिन भी हमने तुझे मैम के सामने छोड़ दिया था।
    मै:-वाह! पीठ पीछे वार करके कोई भी शेर बन सकता है....
    तो एक काम करते है...
    तुम तीनो के साथ मेरा एक मैच हो जाए।

    रॉकी:- डन।
    मै:- ओके जो हारेगा उसे रेस्टोरेंट के बर्तन धोने पडेगे। रॉकी:- डन....
    और जो जीतेगा उसे(अनु की ओर इशारा करके) ये लडकी किस भी करेगी....
    मंजूर है।

    मै:- ओके मंजूर है।
    अनु:- दीप क्या कर रहे हो?
    हैव यू गोन क्रेजी।

    मै:- मुझ पर भरोसा है कि नही?
    अनु:- अपने से भी ज्यादा।
    मै:- तो अब देखो मेरा कमाल....
    वैसे "किस" के लिए तैयार रहना....
    ठीक है।
    अनु मेरी इस बात से अंदर पर झूम गई।

    वहाँ से बीच से टेबल हटा दिए गए.....
    और एक रिंग की तरह चारो तरफ बाकी के लोगो ने घेरा बना लिया।
    मै और वो तीनो बीच मे आ गए।

    मै:- चलो स्टार्ट करते है....
    पर मै तुम्हे एक बात और कहना चाहता हूँ....
    अगर मै हारा या तुम हारे हमारी दुश्मनी आज ही से खत्म ठीक है....
    मै अपनी मां की कसम खा खाता हूँ।

    रॉकी:- ठीक है....
    मै भी अपनी मां की कसम खाता हूं।

    फिर क्या था शुरू हुआ मैच अब उन्हे मेरे बारे मे क्या पता था।
    पहले लडके ने वार किया मै आसानी से बच गया....
    फिर तीसरे लड़की ने मारा उससे भी मै बच गया....
    फिर रॉकी ने मुझे मुक्का मारा मुक्का मेरी सीने पर लगा....
    पर मै टस से मस ना हुआ।

    फिर तीनो ने एक साथ वार किया.....
    एक पंच मेरे मुंह पर दूसरा सीने पर और तीसरा पेट पर पर......
    मै वैसे का पैसा थोड़ा पीछे जरूर हुआ.....
    और इसके साथ ही जो लोग उसका नाम लेकर चिल्ला रहे थे....
    वो ठंडे पड़ गए।

    फिर शुरू हुआ अनु का हंगामा।
    अनु:- दीप! दीप! दीप!
    कम ऑन गेम खत्म करो!
    दीप! दीप! दीप!

    और इसी के साथ उन्होने लगातार मुझ पर हमला कर दिया....
    पर मुझे इतना फर्क नही पड़ा।

    फिर मैने दूसरे लड़के को पंच किया.....
    वो अपना जबडा पकड कर बैठ गया....
    फिर मैने तीसरे को पंच किया.....
    वो अपना पेट पकड़कर वही लेट गया.....
    और फिर बारी आई रॉकी की.....
    मैने एक पंच उसके पेट मे मारा.....
    और दूसरा उसी वक्त उसके चेहरे पर लगा दिया.....
    वो भी अब गेम से बाहर था।

    पूरे रेस्टोरेंट मे सीटिया गूंज उठी.....
    मैने रॉकी को खड़ा किया।

    रॉकी:- मान गए भाई....
    तू पहले से भी ज्यादा भारी पड़ने लगा है।
    मै:- चल छोड तुझे बर्तन नही मांजने पडेगे....
    वो तो मैने हमारी दुश्मनी खत्म करने के लिए कहा था....
    जो सक्सेसफुल हुआ।

    फिर मै अनु की और बडा।
    मै:- चलो मेरी किस की बारी...
    अनु ने अपनी आँखे बंद कर ली....
    मैने अनु का हाथ अपने हाथ मे लिया
    फिर धीरे से ऊपर उठाने लगा....
    अनु तो मेरी किस का इंतजार कर रही थी .....
    कि कब मै उसके होठो पर किस करूंगा.....
    पर मैने आगे बढकर घुटनो के बल बैठ कर उसके हाथ पर किस कर दिया......
    उसने तुरंत आँखे खोल ली।

  3. #73
    कर्मठ सदस्य pkpasi's Avatar
    Join Date
    Jun 2009
    प्रविष्टियाँ
    1,795
    Rep Power
    12
    अनु के चेहरे पर एक मुस्कुराहट थी.....
    जो कि ये बता रही थी कि उसे इस सब की उम्मीद थी.......
    और वही हुआ क्योकि इतने दिन मे वो ये तो जान गई थी.....
    कि मै किसी को दुख नही पहुँचा सकता।

    उसके बाद.....
    अनीता:- यार ये कैसा बंदा है कि "किस" छोड़ दिया......
    क्या यार?
    अनु:- अरे बुद्धू!
    इस सब की मुझे उम्मीद थी.....
    यही सब मैने सोचा था और वही हुआ।

    अनीता:- तू और तेरी बाते मेरे सिर के ऊपर से जाती है।

    फिर कुछ देर उन्होंने म्यूजिक लगा के डांस किया.....
    कुछ देर मैने भी डांस किया.....
    उसके बाद हम शाम तक कई जगह घूमे.....
    और वापस घर आ गए।

    रात को डिनर टेबल पर कविता मैम......
    बच्चो कल "राखी" है सब तैयारी कर ली है ना?

    प्रीत:- हाँ मॉम हमने सारी तैयारी कर ली है....
    अब तो इंतजार है कल का.....
    और भैया की जेब ढीली करवाने का दिन।

    परी:- मजा आएगा।
    फिर कुछ देर इस टॉपिक पर बाते हुई।

    उसके बाद सभी अपने अपने रूम मे चले गए।

    कुछ देर बाद एक रूम मे.....

    प्रीत:- अनु बताओ आज क्या हुआ?
    बात कहाँ तक पहुंची?
    आप और भैया घूमने गए थे।

    अनु:- बात अभी भी वही है।
    परी और प्रीत:- क्या मतलब?

    फिर अनु ने रेस्टोरेंट वाला सारा किस्सा उन दोनो को सुना दिया(और एक बात अनु की वन साइड लव के बारे मे प्रीत को भी पता था)
    प्रीत:- क्या यार भैया ने एक किस की वो भी हाथ पर।
    परी:- सही कहा अगर मै होती तो कच्चा ही खा जाती इन गुलाबी होठो को।

    और इसके साथ परी अपने होठो को चबाने लगी.....
    जिससे अनु शर्मा गई.....
    और प्रीत और परी हँसने लगी।

    फिर कुछ देर उनमे इसी तरह हँसी ठिठोली चलती रही।

    इधर मेरे रूम मे.....
    मै अपनी सोच मे गुम था.....
    पहले 7 साल तक मेरी बहन मुझे राखी बांधती थी.....
    फिर उसके बाद परिधि आई.....
    वो मुझे और रवि को एक साथ राखी बांधती थी.....
    रवि के जाने के बाद और परिधि के गुस्सा होने के बाद पिछले 3 सालो से मेरी कलाई सुनी थी.....
    पर आज मेरे पास दो बहने थी......
    जो मुझे बहुत प्यार करती थी।

    मै तो भगवान से यही प्रार्थना करता हूँ.....
    कि भगवान उन दोनो को सदा खुश रखे......
    बस भगवान से इतनी ही दुआ थी कि कभी ये दोनो मुझसे दूर ना हो.....
    यही सब सोचते हुए मै सो गया।

    ########अगले दिन रक्षाबंधन का दिन#######

    मै सुबह उठा जोगिंग की और कुछ देर अपनी प्रैक्टिस की और घर आ गया।
    उसके बाद रेडी होकर रूम से बाहर आ गया.....
    तभी परी मेरे पास आई उसके हाथ मे एक ड्रेस थी।

    परी:- भाई आप ये ड्रेस पहन लो आज राखी है ना.....
    मैने चुपचाप ड्रेस लिया और चेंज करके आ गया।

    कुछ देर बाद मेरी दोनो बहने प्रीत और परी आ गई.....
    दोनो बहुत खूबसूरत लग रही थी।

    परी ने पिंक कलर की साड़ी पहनी हुई थी.....
    और प्रीत मे मेरा दिया हुआ वाइट कलर का ड्रेस पहना हुआ था....
    वो दोनो आकर सोफे पर बैठ गई.....
    और मुझे भी पास बैठा लिया।

    पहले परी ने राखी उठाई.....
    पहले उसने मेरे माथे पर टीका लगाया....
    उसके बाद मेरी आरती उतारी.....
    और मेरी कलाई पर राखी बांधी.....
    और मिठाई से मेरा मुँह मीठा करवा दिया।

    इस सब के बीच उसकी आँखो मे आँसू आ गए थे।

    मै:- क्या हुआ दी?
    रो क्यो रही हो?

    परी:-आज मेरी बचपन की इच्छा पूरी हो गई।
    मै:- बचपन से ही मै भाई के लिए तरसी हूं हर रक्षाबंधन पर......
    मै रोती रहती थी.....
    पर इस बार भगवान ने मेरी सुन ली.....
    और मुझे इतना प्यारा भाई दे दिया.....
    और हाँ ये आँसू तो खुशी के आँसू है....
    और वो मेरे गले लग कर रोने लगी।

    मैने उसे अपने से अलग किया और उसके आँसू पूछे।
    मै:- बस कर दी....
    त्यौहार के दिन भी भला कोई रोता है.....
    फिर वो चुप हो गई।

    उसके बाद मै प्रीत की ओर पलटा.....
    प्रीत ने भी पहले मेरे माथे पर टीका लगाया.....
    फिर आरती उतारी....
    और उसके बाद राखी बांध के तेरा मुंह मीठा करवा दिया......
    वो ये सब करते हुए रो पड़ी थी।

    मैने उसे भी चुप करवाया....
    मैने उन दोनो को उनके गिफ्ट दिए।

    मै:- मै भी आज बहुत खुश हूँ क्योकि पिछले 3 सालो से मेरी भी कलाई सूनी थी।

    मैने इतना ही बोला था.....
    कि वो लडकी मैने जिसकी जान बचाई थी वो अंदर दाखिल हुई और बोली......

    लड़की:- भाई अब से ऐसा नही होगा....
    पिछले 3 सालो की कसर हम तीनो बहने पूरी करेगी।

    वो लडकी अंदर आ गई और उसके माता-पिता भी....
    लड़की:- मै भी आपको राखी बाँधने आई हूँ...
    क्या बांध सकती हूँ?

    मै:- हाँ क्यो नही?
    फिर उसने भी मुझे राखी बांधी।

    मै:- तुम्हारा नाम क्या है बहन?
    लड़की:- भाई मेरा नाम ज्योति है।

    (परिचय

    मै आप लोगो को उन तीनो का परिचय दे दूँ।

    प्रतीक शाह
    ज्योति के पिता

    ये भी इस शहर के बड़े आदमी है.....
    ये अपने परिवार से बहुत प्यार करते है.....
    इनकी ज्वेलरी की दुकान है।

    दीपा शाह
    ज्योति की माँ

    अपनी बेटी से बहुत प्यार करती है.....
    और एक हाउसवाइफ है।

    ज्योति शाह

    ये उनकी छोटी बेटी है....
    और इसके अलावा ज्योति का एक बड़ा भाई है....
    जिसका परिचय समय आने पर दिया जाएगा)

    फिर कुछ देर और बाते हुई।

    अनु ने भी अभी को राखी बांधी।

    फिर परी प्रीत और कविता मैम प्रीत के मामा के घर चली गई।
    शाम को वो वापस आ गई....
    ऐसे ही ये दिन भी बीत गया।

  4. #74
    कर्मठ सदस्य pkpasi's Avatar
    Join Date
    Jun 2009
    प्रविष्टियाँ
    1,795
    Rep Power
    12
    आज मेरे दिल मे एक सवाल था....
    कि इतने सालो मे दी ने किसे राखी बांधी होगी....
    किसको भाई बुलाया होगा.....
    और इतने सालो से परिधि ने किसे को राखी बांधी होगी....
    पर मेरे पास कोई जवाब नही था।

    अगले दिन मैने रोज का रूटीन किया......
    और बाहर हॉल मे बैठ गया।

    कविता मैम:- दीप तुम्हे कॉलेज नही जाना है एडमिशन के लिए?
    मै:- जी मैम ब्रेकफास्ट करके मै निकल रहा हूँ घर की ओर......
    अपने डॉक्यूमेंट कोलेक्ट कर के वहाँ से कॉलेज जाऊँगा।

    कविता मैम:- और हां क्या कोर्स लोगे?
    मै:- जी पहले ग्रेजुएशन कर लूंगा.....
    फिर एमबीए।
    कविता मैम:- ओके!
    और हां अपना वो स्कॉलरशिप वाला कॉल लेटर ले जाना मत भूलना।
    मै:- जी मैम कुछ देर बाद मै ब्रेकफास्ट करके निकलने ही वाला था.....
    कि अनु ने मुझे आवाज दी।

    अनु:- दीप रुको मै भी चलती हूं।
    परी:- क्यो?
    अभी:- वो क्या है ना?
    अनु को भी एडमिशन लेना है?
    तो दीप और अनु एक साथ मे एडमिशन ले लेगे।

    परी:- हाँ ये सही रहेगा।

    परी अनु के पास जाकर(उसके कान मे):-वाह अब साथ टाइम स्पेंडिंग ग्रेट।
    अनु और परी हंस पड़े।

    फिर मै और अनु निकल पडे मेरे घर की ओर....
    वहाँ से मेरे सर्टिफिकेट लिए और निकल पडे कॉलेज....
    ये कॉलेज शहर का बेस्ट कॉलेज था।

    हम लोग जब कॉलेज मे पहुँचे तो लाइन लगी हुई थी.....
    पर लाइन इतनी बडी नही थी.....
    तकरीबन 15 मिनट बाद हमारी बारी आ गई....
    पहले मैने अपना फॉर्म सबमिट करवाया....
    फिर अनु ने।

    फिर हम लोग घूम फिर के कॉलेज देखने लगे....
    कॉलेज देखने मे अच्छा था......
    हमने घूम कर पूरा कॉलेज देख लिया.....
    फिर हम कैंटीन मे चले गए.....
    घूमते घूमते पता चला कि आज आखिरी दिन था एडमिशन का तो इतनी भीड थी.....
    और 2 दिन बाद कॉलेज स्टार्ट होने वाला था।

    हम कैंटीन मे पहुँचकर टेबल पर बैठ गए.....
    और दो कोल्ड ड्रिंक पी और सिप लेते हुए......
    साथ मे कॉलेज की बाते करने लगे.....
    पर इस सब मे एक बात हुई.....
    मेरी नजरे अनु पर से हट ही नही रही थी।

    मेरे दिल मे बार-बार फीलिंग उठ रही थी....
    पर मुश्किल से मैने अपने आप को कंट्रोल किया....
    ये बात अनु ने नोट की.....
    और उसके चेहरे पर मुस्कुराहट थी.....
    फिर हम वहाँ से निकल कर घर आ गए।

    घर आकर मैने कुछ देर सबसे बाते की.....
    और घर से निकल गया और 1 गैरेज मे पहुँच गया....
    और एक पुरानी बाइक पसंद की....
    वो भी सिंपल सी बाइक स्प्लेंडर प्लस....
    और वापस मैम के घर आ गया.....
    बाइक पार्क की .......
    और अंदर चला गया।

    रात को रूम मे पडा पडा.....
    मै अनु के बारे मे सोचता रहा.....
    आज पहली बार अनु के प्रति मेरे दिल मे आकर्षण आ गया था.....
    पर इसकी मुझे समझ नही थी।

    इतने मे रवि की आवाज आई।
    रवि:- क्या सोच रहा है भाई?
    मै:- कुछ नही भाई....
    आज पता नही क्यो अनु के लिए मेरे दिल मे फीलिंग उठ रही है.....
    बार-बार उसके पास जाने का दिल कर रहा है।
    रवि:- अरे बुद्धू!
    इसमे इतना सोच क्या रहा है....
    मै बताता हूँ ये सब क्या है।

    मै:- तो बता जल्दी।
    रवि:- तुझे प्यार हुआ है।
    मै:- क्या?

    रवि:- हाँ तुसे प्यार हुआ है.....
    ये सब निशानियाँ उसी की है।

    मै:- क्या सच बोल रहा है।
    रवि:- बिल्कुल सच....
    कल ही उसे बता दे।

    तभी मेरे दिमाग के एक कोने मे से आवाज आई।
    आवाज:- नही! ऐसा मत करना.....
    पता है ना हम "मनहूस" है.....
    कही ऐसा ना हो हम उसके करीब जाए......
    और हमारी "मनहूसियत" माँ, पवित्रा माँ और रवि की तरह उसे भी निगल जाए.....
    ऐसी गलती भूल से भी नही करना.....
    वरना अंजाम बहुत बुरा होगा।

    रवि:- भाई दीप!
    ये सब मत सोच.....
    कल अपने प्यार का इजहार कर देना।

    मै:- नही भाई!
    ये सब सच तो है......
    मै अब किसी और को खोने की हिम्मत नही रखता.....
    मै बाहर से चाहे कितना भी स्ट्रांग क्यो ना हो जाऊँ.....
    पर फीलिंग के मामले मे वही पुराना दीप हूं।

    रवि:- भाई पर!
    मै:- नही रवि....
    इस टॉपिक को यही छोड़ देते है....
    और ऐसे ही सोच विचार करते हुए मै सो गया।

    अगले दिन मै फ्री था।
    मै जाकर रुद्रा से मिला वहाँ उसने मुझे एक फाइल दी जिसमे कुछ गुंडों के नाम थे।

    मै:- रुद्रा जिसने मुझ पर हमला किया था....
    शिवराज वो कहाँ मिलेगा?
    रुद्रा:- क्यो?
    मै:- क्योकि मै अपना खाता उन्ही से खोलूँगा।
    रुद्रा:- ओके!
    तो सुनो वो तुम्हे सिटी के बाहर एक खाली बिल्डिंग मे मिलेगे.....
    वहाँ की चौथी मंजिल पर रहता है वो...।
    मै:- ओके! तो परसो सुबह वहाँ पहुँच जाना....
    उनकी लाशे इकट्ठा करने!

    रुद्रा:- पहले सुनो...
    दो आदमी नीचे पहरा देते है....
    एक स्नीपर पर होता है....
    और तीन से चार लोग उनके साथ होते है.....
    जो भी करना हो ध्यान से करना।
    मै:- ठीक है।

    रुद्रा:- ये लो तुम्हारी गन और तुम्हारा आईडी कार्ड!
    मै:- ओके!
    तो मै चलता हूँ।

    मै बाइक पर अपने घर आ गया गन छुपा दी....
    मै वापस मैम के घर पहुंच गया।
    हम ने लंच किया....
    और फिर सारा दिन ऐसे ही बाते करते रहे।

    फिर हम लोगो ने रात को डिनर किया....
    डिनर के बाद सभी हॉल मे बैठे थे।

    मै:- मै आप सब से एक बात कहना चाहता हूं....
    मै कल अपने पुराने घर जा रहा हूँ....
    क्योकि वहाँ मुझे सुकून की नींद आती है।

    कविता मैम:- क्यो यहाँ क्या हुआ?
    मै:- मैम यहाँ कुछ भी नही हुआ....
    बस उस घर मे मेरी पवित्रा माँ बस्ती है....
    बस इसीलिए जाना चाहता हूँ.....
    फिर उसके बाद कुछ देर हमने बाते की और जल्दी ही अपने अपने कमरो मे चले गए और सो गए।

    मेरे साथ आज प्रीत सोई।

  5. #75
    कर्मठ सदस्य pkpasi's Avatar
    Join Date
    Jun 2009
    प्रविष्टियाँ
    1,795
    Rep Power
    12
    आज भी मै रूटीन के हिसाब से उठा।
    आज प्रीत मेरे साथ सोई थी।

    सोते वक्त वो बिल्कुल प्यारी सी गुड़िया लगती थी.....
    वो बिल्कुल मुझसे चिपककर सो रही थी.....
    मैने धीरे से खुद को उसकी पकड से छुडवाया.....
    और फ्रेश होकर जोगिग के लिए निकल गया।

    थोडी रनिंग की और अपनी प्रैक्टिस.....
    अब मैने अपना पार्क बदल लिया था.....
    ये पार्क ज्यादातर खाली रहता था......
    कोई डिस्टरबेंस नही।

    1 घंटे बाद मै वापस आ गया रूम मे.....
    अभी प्रीत सो रही थी....
    मै नहा धोकर तैयार हुआ।

    फिर प्रीत को उठाया।

    मै उसके पास बैड पर बैठ गया।
    मै:- (उसके बालो मे हाथ फेरते हुए) बेटू उठो!
    सुबह हो गई।
    मेरी बात सुन कर वो थोड़ा कसमसाई...
    और अपना सिर उठाकर मेरी गोद मे रख लिया।

    प्रीत:- थोड़ा और सोने दो ना......
    बहुत अच्छी नींद आती है आपके पास।

    मै:- पर बेटू!
    तुझे स्कूल भी तो जाना है........
    प्रीत:- ओके बस 5 मिनट ।

    फिर तकरीबन 5 मिनट बाद मैने उसके माथे पर किस करके उसे उठाया।

    फिर वो अपने रूम मे चली गई.....
    उसके बाद मै हॉल मे आ गया.....
    थोडी देर न्यूज़पेपर पढा.....
    धीरे-धीरे सभी आ गए.....
    उसके बाद सभी ने ब्रेकफास्ट किया।

    फिर मै अपने घर आ गया।
    कुछ देर बाद मुझे फोन आया.....
    ये फोन कीर्ति भाभी का था।

    मै:- हेलो भाभी!
    क्या रिपोर्ट है?
    कीर्ति:- हमारा शक सही था....
    तुम्हारा पुलिस का आई कार्ड नकली था.....
    पर तुम टेंशन मत लो......
    मैने इंटेलिजेंस मे बात की है......
    तकरीबन आधे घंटे बाद इस पते पर एक आदमी तुम्हे मिलेगा.....
    उससे तुम अपना आई कार्ड ले लेना।

    मै:- थैंक्स भाभी।
    कीर्ति:- थैंक्स की क्या बात....
    मै भी पहले इंटेलिजेंस मे रह चुकी हूं.....
    तो कोई टेंशन की बात नही.....
    तो शुरू कर दो अपना काम।

    मै:- ओके भाभी.....
    और बाकी सब का भी ख्याल रखना......
    और हो सके तो पीटर को सच्चाई बताने की कोशिश कीजिए।

    कीर्ति:- ओके.....
    आई विल ट्राई।

    फिर फोन कट हो गया।

    मैने रुद्रा को कॉल किया।
    मै:- हेलो रुद्रा....
    मुझे एक स्निपर गन चाहिए विद साइलेंसर.....
    और मेरी गन का सैलेंसर भी चाहिए।

    रुद्रा:- ओके।
    मै 1 घंटे मे तुम्हे तुम्हारे घर पर मिलूंगा।

    उसके बाद मैने कॉल कट करके एक फाइल कुछ जरूरी चीजे अपने साथ उठाई......
    और पवित्रा माँ वाले घर मे लॉकर मे रख दिया.....
    इस घर मे आने के बाद मुझे सभी लोगो की लाशे दिखने लगी.....
    मेरी आँखो मे आँसू भी थे और आँखो मे आग भी।

    मै:- पवित्रा माँ!
    मै वादा करता हूँ कि आप के कातिलो को इसी घर के सामने चिता पर लिटा कर आग लगाऊँगा....
    अगर ऐसा नही किया तो मै आपका बेटा नही.....
    मै कसम खाता हूँ......
    और मै घर से बाहर आ गया।

    उसके बाद मै भाभी के बताए हुए एड्रेस पर चला गया......
    ये कॉफी कैफे था.....
    मै जाकर एक टेबल पर बैठ गया और कॉफी ऑर्डर की.....
    कुछ देर बाद एक आदमी चलता हुआ.....
    मेरे पास से गुजरते वक्त एक सूटकेस मेरी चेयर के पास रख गया.....
    फिर वो कैफे के बाहर निकल गया......
    मैने जल्दी से कॉफी पी और सूटकेस लेकर निकल गया वहाँ से......
    उस सूटकेस को भी मैने पवित्रा माँ के घर मे रख दिया.....
    फिर रुद्रा भी अपने बताए हुए टाइम पर मेरे पास आ गया।

    उसके पास भी एक सूटकेस था.....
    फिर उसने अंदर आकर सूटकेस खोला.....
    और उसमे से गन निकाली उसमे गन के तीन पीस थे.....
    फिर उसने मुझे एक-एक करके तीनो पीस जोडकर दिखाए.....
    और कैसे चलानी है ये भी बता दिया....
    उसके बाद रुद्रा चला गया।

    और अब मुझे इंतजार था बस रात का.....
    उससे पहले मैने दूसरे घर जाकर इंटेलिजेंस वाला बैग देखा.....
    उसमे एक मास्क था साथ मे आई कार्ड उसके साथ 2 गन कुछ और जरूरी चीजे थी।

    वक्त बिता दोपहर से शाम शाम से रात हो गई.....
    तकरीबन 10:00 बजे मै रुद्रा की बताई जगह पर पहुंच गया......
    ये एक अंडर कंस्ट्रक्शन बिल्डिग थी जिसका काम रुका हुआ था.......
    मैने पूरा जायजा लिया जिस तरह रुद्रा ने कहा था वैसे ही था सब कुछ.....
    मैने स्निपर निकाली और सबसे पहले जो ऊपर खड़ा था.....
    स्निपर लिया उसको टारगेट किया........
    और ट्रिगर दबा दिया।

    वो बिना आवाज किए वही ढेर हो गया.....
    फिर मैने स्निपर से नीचे गेट पर खडे दो लोगो को चेक किया....
    दोनो अलग-अलग दिशा मे थे......
    पहले मैने एक के सिर पर टारगेट किया....
    और ट्रिगर दबा दिया......
    वो भी ढेर!

    फिर मैने फुर्ती से दूसरे पर निशाना लगाया.....
    इसी के साथ वो भी ढेर हो गया।

    फिर मैने स्निपर को अलग किया.....
    और वापिस ब्रीफकेस मे रख दिया.....
    और वही छोड़ कर आगे बढने लगा.....
    धीरे-धीरे मै आगे बढता गया और फर्स्ट फ्लोर पर पहुँच गया......
    तभी मुझे सीढ़ियाँ उतरने की आवाज आई......
    मै छिप गया सीढियो से एक आदमी उतर कर नीचे आया......
    वो नीचे उतरने लगा तब मैने फुर्ती से उसे भी शूट कर दिया......
    वो भी ढेर।

    फिर मै आगे बढ़ा थर्ड फ्लोर पर.....
    फिर से मुझे दो आदमी मिले.....
    मैने अपनी गन पैंट मे रखी और उनकी और बढ गया......
    मैने जाकर पहले एक के सिर पर मुक्का मारा.....
    और दूसरे का गला पकड़ कर उसे दीवार पर लगा दिया.......
    उसके बाद उसके मुंह पर कई पंच मारे......
    जो पहला सिर पकड कर बैठा था मै उसके पास गया और उसकी गर्दन पकड़कर मरोड दी.....
    वो भी ढेर।

    अब बचा था फोर्थ फ्लोर......
    वहाँ पर था मेरा शिकार राणा!
    मै रूम के पास पहुंच गया....
    अंदर से किसी लड़की के चीखने की आवाज आ रही थी।

    लड़की:- नही प्लीज!
    मुझे जाने दो।
    राणा:- ऐसे कैसे जाने दे....
    तेरे बाप से पैसे माँगे थे पर उसने नही दिए....
    आज तेरी इज्जत लूटूगा और अपने साथियो को भी तुझ पर छोड़ दूंगा.....
    तब तेरे बाप को पता चलेगा कि राणा क्या चीज है।

    लडकी:- प्लीज!
    ऐसा मत करो मै तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूँ......
    बचाओ कोई है......
    हेल्प! हेल्प!

    आवाज सुनकर मैने जोर से लात दरवाजे पर मारी।

    जब अंदर देखा तो राणा और उसके 3 साथी एक लड़की का रेप करने की कोशिश कर रहे थे.....
    एक ने उस लडकी की दोनो बाजू पकड़ रखी थी.....
    बाकी के दो ने उसकी टाँगे पकड रखी थी.....
    राणा अपने कपडे उतरने जा रहा था....
    पर दरवाजे के टूटने की आवाज सुनकर वह पीछे पलट गया।

    जिससे वो थोडा साइड हो गया....
    जब वो साइड हुआ तब मैने उस लड़की का चेहरा देखा........
    जैसे ही मुझे उस लड़की का चेहरा दिखा.....
    मेरी आँखो मे अंगारे बरसने लगे.....
    ये कोई और नही परिधि थी।

    मैने झट से गन निकाली और बाकी के तीनो को शूट कर दिया......
    तीनो एक एक करके भगवान को प्यारे हो गए.....
    ये सब मैने बहुत फुर्ती से किया था.....
    पर राणा भी मंझा हुआ था.....
    तभी उसने भी अपनी गन निकाल कर उससे फायर किया......
    गोली मेरे बाए कंधे पर लगी।

    राणा:- क्यो बे साले!
    तू फिर से आ गया उस दिन तो बच गया था आज नही बचेगा।

    मै:- साले तू मेरा कुछ नही बिगाड़ पाएगा.....
    उस दिन एक अनजान लड़की के लिए तेरे कुत्तो को इतना मारा था.....
    सोच आज तो मेरी बहन है तेरा वो हाल करूँगा कि याद रखेगा।

    राणा:- चल देखते है।

    राणा ने फिर से गन का पॉइंट मेरी और किया.....
    और ट्रिगर दबा दिया.....
    पर मै तैयार था इसलिए जल्दी से नीचे हुआ.....
    और फ्लिप करके घूमता हुआ उसके पास पहुंचा.....
    और उसका गन वाला हाथ पकड़कर उसकी ओर करके अपनी कोहानी उसके मुंह पर दे मारी.....
    उसके हाथ से गन छूट गई.....
    और वो पीछे गिर पडा।

    फिर वो खडा हुआ और मुझे पंच मारा.....
    मै थोड़ा सा पीछे हुआ.....
    उधर परिधि बहुत सहमी सी वही बैठी थी.....
    इधर मैने राणा के मुँह पर पंच दिया और उसे पकड़ कर अपने दोनो हाथ ऊपर उठा लिया......
    और पूरी ताकत से जमीन पर दे मारा।

    राणा नीचे पड़ा कसमसा रहा था......
    पर वो फिर भी उठने की कोशिश करने लगा.....
    मैने आगे बढ कर उसके मुँह पर लात दे मारी......
    और वो फिर से पलटी खा कर पेट के बल गिर गया.....
    मै उसके सीने पर बैठ गया और दनादन मुक्को की बरसात उसके मुँह पर कर दी.....
    मै अपना पूरा जोर लगाकर उसे मार रहा था।

    उधर परिधि भी अब तक काफी सामान्य हो चुकी थी.....
    और मेरी और बढ़ने लगी।
    इधर मै राणा को मारे जा रहा था।

    मै:- साले इतना बड़ा गुंडा बन गया है क्या?
    जो मेरे परिवार को धमकी देगा उनसे हफ्ता माँगेगा.....
    मेरी बहनो पर गंदी नजर रखेगा......
    आज मै तुझे जान से मार डालूंगा।

    मै उसे मारे जा रहा था.....
    मैने उसे इतना मारा कि उसकी सांसे टूटने लगी.....
    पर मेरा गुस्सा शांत नही हुआ।

    परीधि ने आ कर मुझे रोका।

    परीधि:- बस करो भैया!
    वो मर जाएगा.....
    बस करो।

    मै:- नही गुड़िया!
    इसने आज तुझे पर अपना गंदा साया डाला है।
    परीधि:- नही भैया!
    आपको रवि भैया की कसम रुक जाइए।

    मै रुक गया.....
    जब मैने परीधि की ओर देखा तो उसकी आँखो मे आँसू थे........
    और चेहरे पर चोट के निशान जिसका मतलब ये था कि राणा ने उसे मारा था.....
    मैने ये देख कर एक लात राणा के पेट मे मारी.....
    परीधि ने मुझे अपने गले लगा लिया।

    परीधि:- बस करो भैया।
    मै:- गुड़िया तू ठीक है ना?
    परीधि:- हां भाई!
    मै ठीक हूं आप भी शांत हो जाइए.....
    और चलिए यहां से।

    इस सब मे मेरी पीठ राणा की और हो गई......
    और मेरा ध्यान उसकी ओर से हट गया.....
    राणा ने अपने आप को थोड़ा सा संभाल कर पास मे पडे गन को उठा लिया......
    और फायर कर दिया और एक गोली आकर मेरी पीठ पर लगी.....
    मैने पीछे मुडकर देखा और अपनी गन निकाल कर राणा को सूट कर दिया.....
    और वो वही भगवान को प्यारा हो गया।

    फिर मै परिधि को लेकर बाहर आया.....
    और नीचे जो एक आदमी जिंदा था उसे भी वापस जाते वक्त गोली मार दी.....
    फिर हम बाहर आ गए जहाँ पर मेरी बाइक खड़ी थी.....
    मैने अपना ब्रीफकेस उठाया और बाइक स्टार्ट कर दी.....
    और परीधि को बैठाकर हॉस्पिटल की ओर चल दिया.....
    ये वही हॉस्पिटल था जहां मेरा दो बार पहले इलाज हुआ था।

    मै सीधा डॉक्टर के कैबिन मे चला गया वो मुझे देखते ही पहचान गया।

    मै:- डॉक्टर मुझे दो गोलियाँ लगी है.....
    वो आपको ही निकालनी है।
    डॉक्टर:- पर ये तो पुलिस केस है।

    मैने अपना आईडी कार्ड उन्हे दिखाया।
    मै:- अब तो निकालोगे!

    फिर डॉक्टर ने ही केबिन मे मेरी पीठ और कंधे से गोली निकाली......
    और उस पर पट्टी कर दी और एक इंजेक्शन लगा दिया।

    उसके बाद पेमेंट करके मै परीधि को लेकर अपने घर आ गया।

Page 8 of 8 प्रथमप्रथम ... 678

Thread Information

Users Browsing this Thread

There are currently 2 users browsing this thread. (0 members and 2 guests)

Bookmarks

Posting Permissions

  • You may not post new threads
  • You may not post replies
  • You may not post attachments
  • You may not edit your posts
  •