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Thread: मनहूस जिंदगी - एक मासूम लडका

  1. #1
    कर्मठ सदस्य pkpasi's Avatar
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    मनहूस जिंदगी - एक मासूम लडका

    एक छोटा सा घर जिसमे सिर्फ एक कमरा था और उसमे एक साइड चारपाई पडी थी...
    एक कोने मे कुछ बर्तन और एक कोने मे टायलेट बना हुआ था।
    टायलेट मे दरवाजा और दीवारे सब थी यानि एक आदमी के रहने के लिए बहुत था।


    सुबह के 5 बजे का टाइम था...
    एक लडका चारपाई पर सो रहा था....
    कि तभी घडी पर लगाया हुआ अलार्म बज उठा.....
    एक लड़का चारपाई पर सो रहा था...
    कि तभी घड़ी पर लगाया हुआ अलार्म बज उठा....


    वो लड़का अलार्म की आवाज सुनकर उठ गया....
    फिर उसने अलार्म बंद किया और टॉयलेट में घुस गया...


    फिर फ्रेश होकर जोगिंग सूट पहन लिया...
    और निकल क्या जोगिंग पे....
    15 मिनट बाद वो एक पार्क में पहुंच गया....
    वहां कुछ देर जोगिंग करके थोड़ी बहुत दूसरी एक्सरसाइज करने लगा।


    कुछ देर बाद उसने एक्सरसाइज की और चल पड़ा गेट की ओर!


    वो गेट के पास पहुंचा ही था कि तभी वहां पर तीन लोगों की एंट्री हुई!


    उन तीनों को देखकर लड़के के चेहरे पर मुस्कान आ गई।


    पर जैसे ही उन तीनों की नजर उस पर पड़ी तीनों ने मुंह फेर लिया और आगे बढ़ गए...
    इन मे से एक आदमी था और बाकी दो लड़कियांँ..




    पहली लड़कीः- पता नही ये मनहूस कब तक हमें अपनी शक्ल दिखाता रहेगा...


    आदमीः- पता नहीं ये अभी तक हमारे जीवन में ग्रहण की तरह क्यों लगा हुआ है....


    दूसरी लड़की:- जी करता है इसे यही जान से मार दूं...
    आ जाता है सुबह-सुबह मुंह उठाकर...
    मनहूस कहीं का...


    फिर वो तीनो अपनी जोगिंग करने लग जाते हैं।


    इनकी बातें उस लड़के ने भी सुन ली वो लड़का इनकी बाते को सुनकर मुंह लटका के गेट से बाहर चला गया।


    ये सब उसके लिए रोज का था...
    उसके साथ ही सब कुछ रोज होता था...
    वो लड़का घर पहुंच गया था...


    और अपनी मां की तस्वीर को पकड़ के उसे देखने लगा.....
    उसकी आंखों से आंसू बहने लगे!


    लड़का:- मां मुझे क्यों छोड़ के गई....
    आखिर क्या गुनाह था मेरा.....
    एक तू ही तो थी जो मुझे समझती थी....
    क्यों छोड़ के गई मुझे आखिर क्यों...
    इस दुनिया में मैं बिल्कुल अकेला हूँ...
    मैंने तुम्हें मारा है...
    क्या ऐसा कभी हो सकता है कि कभी किसी बेटे ने अपनी मां को मारा हो....
    मां मुझे भी अपने साथ ले चल मां....
    अब और नहीं सहा जाता ये अकेलापन....


    (अब थोड़ा सा परिचय हो जाए....
    दीप वर्मा इस कहानी का हीरो यानी कि मै...
    लम्बाई5"4'
    सामान्य सा शरीर...
    सांवला रंग....
    पढ़ने में अच्छा हूं...
    स्पोर्ट्स में भी अच्छा हूं....
    पर मेरा ना तो कोई दोस्त हैं ना ही कोई अपना कहने वाला..


    क्योंकि सब मुझसे नफरत करते है...
    सभी मुझे मनहूस कहते है...
    इसलिए आज तक अकेला हूं...
    ऐसा नहीं है कि मेरा कोई परिवार नहीं है...
    मेरा भी परिवार है...
    पर सभी ने मुझे अलग कर दिया है...
    क्योकि वो सब मुझे मेरी मां का कातिल मानते हैं...
    क्योंकि मैं मनहूस हूं..
    पर हां वो लोग मुझे महीने के महीने कुछ रुपए भेज देते है....


    जिससे मेरा गुजारा चल है....
    पर इसी के साथ मै एक कॉफी शॉप में भी काम करता हूं...
    वहां से भी कुछ पैसे आ जाते है...


    कुछ लोग तो मुझसे नफरत करते हैं और कुछ को मैं अपने करीब नहीं आने देता क्योंकि कहीं ना कहीं मैं भी खुद को मनहूस मानता हूं।


    यह तो था हीरो का परिचय...
    बाकी के लोग कहानी में समय के साथ आते रहेंगे)


    आज मेरा 12th का रिजल्ट है ...
    मुझे पता था...
    इस बार भी मैं टॉप करूंगा....
    फिर भी इंसान के मन में एक डर होता है।


    वही सब कुछ मेरे अंदर भी था....
    कहीं कोई और टॉप कर गया तो...
    पर मुझे इस बात की परेशानी थी कि कहीं टॉप 3 की रैंकिंग में मेरा नाम नहीं आया तो?


    इसी उधेड़बुन में मैं स्कूल पहुंच गया...
    सभी विद्यार्थी एक बड़े हॉल की तरफ जा रहे थे।


    जब मैं हॉल में पहुंचा तो हॉल खचाखच भरा हुआ था...
    सभी सीट बुक हो गई थी...
    मुझे कहीं भी बैठने के लिए जगह नहीं मिली इसलिए मैं एक तरफ खड़ा हो गया।


    फिर कुछ देर बाद प्रिंसिपल मैम स्टेज पर आई...
    और माइक अपने हाथ में ले लिया....
    और बोलना शुरू किया।


    प्रिंसिपल मैम:- मेरे प्यारे विद्यार्थियों....
    मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हमारे स्कूल का रिजल्ट इस बार बहुत अच्छा आया है....
    बस कुछ विद्यार्थियों को छोड़ के सभी का रिजल्ट बहुत अच्छा रहा...
    और एक सबसे बड़ी खुशखबरी की बात ये है कि हमारे स्कूल के एक विद्यार्थी ने पूरे स्टेट में टॉप किया है।


    पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा...
    फिर प्रिंसिपल मैम सभी का रिजल्ट अनाउंस करने लगी।


    सभी स्टेज पर जाकर अपना रिजल्ट लेने लगे....
    फिर आई टॉप 3 की बारी थर्ड नंबर पर हमारे स्कूल की एक लड़की थी...
    सेकंड नंबर पर भी एक लड़की थी...
    मेरा दिल धक धक करने लगा....
    क्योंकि वहां हॉल में हम चार लोग थे जिनका रिजल्ट अनाउंस नहीं हुआ था...


    प्रिंसिपल मैम की बात सुनकर हम चारों लोग के पसीने छूटने लगे कि आखिर कौन है वो टापर और कौन 3 फेल है...
    पर मुझे यकीन था कि मैं ही टॉप करूंगा।


    प्रिंसिपल मैम तो विद्यार्थियों पहले मैं आप सबको फेल होने वालों के नाम बताऊंगी...
    पहला नाम है राहुल सिन्हा.....
    दूसरा नाम है पुलकित शर्मा...
    और तीसरा नाम है क्या कोई बता सकता है?


    सभी मेरा नाम पुकारने लगे....
    और यहां हमारे दोनों के पसीने छूट रहे थे...
    प्रिंसिपल मैम:- तो विद्यार्थियों तीसरे फैलियर का नाम है प्रताप सिंह....
    अब आप लोगों को टॉपर का नाम भी पता चल ही गया होगा।


    And the name us Deep Verma the topper of our state give big hands to him.
    दीप वर्मा आप स्टेज पर आए।


    मैं तो ये खबर सुनकर अंदर से बहुत खुश हूआ..
    फिर मैं स्टेज की ओर बढ़ने लगा...


    सभी अध्यापक और विद्यार्थी मुझे खा जाने वाली निगाहों से देख रहे थे...
    मैं स्टेज पर पहुंचा और झुक के प्रिंसिपल मैम के पैर छू लिए....
    प्रिंसिपल मैम ने मुझे गले से लगा लिया....


    पूरे स्कूल में एक प्रिंसिपल मैम ही थी जो मुझसे प्यार करती थी....
    वरना सभी अध्यापक और विद्यार्थी मुझसे नफरत करते थे..


    प्रिंसिपल मैम मुबारक हो मेरे बच्चे.....
    इस बार भी तुम ने मेरा सिर ऊचा कर दिया है..
    विद्यार्थियों दीप को पूरे राज्य में टॉप करने की खुशी मे अपने शहर के बेस्ट कॉलेज में स्कॉलरशिप मिला है।
    तो तालियों से दीप को बधाई दीजिए....


    एक बार फिर हॉल में तालियों का शोर सुनाई देने लगा...

    फिर मैं अपना रिजल्ट लेकर स्टेज से नीचे आ गया....


    सभी लोग वापस अपने अपने घर जाने लगे...
    मैं भी अपने घर जाने लगा जैसे ही गेट से बाहर निकला कि!
    अचचचाननननक......
    Last edited by pkpasi; 20-10-2018 at 05:05 PM.

  2. #2
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    शुरुआत तो अच्छी है
    Last edited by garima; 20-10-2018 at 05:13 PM.
    मंच तुम आँखों की पलको से हो गए हो,
    के मिले बिना सुकून ही नहीं आता...!!!

  3. #3
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    Quote Originally Posted by garima View Post
    जॉगिंग करने गया
    पार्क में
    या बार मे
    गरिमा जी जोगिंग तो पार्क मे ही होगी

  4. #4
    कांस्य सदस्य garima's Avatar
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    Vo pahle ka bola aapne theek kr diya 2no mistake.
    मंच तुम आँखों की पलको से हो गए हो,
    के मिले बिना सुकून ही नहीं आता...!!!

  5. #5
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    Quote Originally Posted by garima View Post
    Vo pahle ka bola aapne theek kr diya 2no mistake.
    गलत फाइल अपलोड हो गई थी

  6. #6
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    अच्छी कहानी है। जल्द से जल्द दूसरा अपडेट दे श्रीमान जी
    कुछ ख्वाहिसों का कत्ल करके मुस्कुरा दो ज़िंदगी खुद बा खुद बेहतर हो जाएगी

  7. #7
    कर्मठ सदस्य pkpasi's Avatar
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    जैसे ही गेट से बाहर निकला अचानक किसी ने मेरा रास्ता रोक लिया।


    वो कोई और नहीं बल्कि हमारे स्कूल के सबसे बिगड़े हुए लड़के थे...


    पहला लड़का:- क्यों बे टॉपर कहां चल दिया...
    मै:- घर जा रहा हूं भाई...
    क्या आप मेरा रास्ता छोड़ देंगे।


    दूसरा लड़का:-क्यों नहीं इतनी भी क्या जल्दी है....
    हमसे अपने टॉपर होने का गिफ्ट तो लेता जा...

    मै:-भाई मुझे कोई गिफ्ट नहीं चाहिए....
    क्या आप मुझे जाने देंगे....


    तीसरा लड़का:- क्यों बे म****** तुझे सुनाई नहीं देता...
    तुझे रुकने के लिए बोला ना तो रुक...


    मै:- देखो भाई मां की गाली मत दो वरना...
    दूसरा लड़का:-वरना क्या बे...
    प्रिंसिपल को कमप्लेंट करेगा....
    जा मुन्ना जा....


    ये कहकर तीनों लड़के हंसने लगे...
    मै:- देखो भाई लोग ये ज्यादा हो रहा है।


    तीसरा लड़का:-ये ऐसे नहीं मानेगा...
    इसे सबक सिखाना ही पड़ेगा...
    तेरी मां की साले...
    वो लड़का इतना बोल मुझे मारने के लिए आगे बढ़ा।
    उसने मेरे मुंह पर पंच मारना चाहा...


    मैं ट्विस्ट करके साइड हो गया और उसी वक्त उसके पेट के दाएं तरफ पंच मार दिया...
    जिससे वो नीचे गिर पड़ा और कराहने लगा...


    ( मुझे लड़ना तो नहीं आता....
    पर पार्क में सुबह जब मैं जोगिंग पे जाता हूं तो वहां एक टीचर अपने स्टूडेंट को कुछ कराटे वगैरा और आत्मरक्षा सिखाता है.....
    इसलिए कुछ मूव मैंने भी सीख लिए)


    मै:- मैंने पहले ही कहा था कि मुझे मां की गाली मत देना....
    पर इसने नहीं सुना अब भुगत...


    दूसरा लड़का भी मुझे मारने को बढ़ा...
    पर मैंने आगे बड़ के नीचे बैठ के एक टविस्टग किक उसके पैरों पर मारी...
    जिससे वो हवा में गुलाटी खाता हुआ नीचे गिर पड़ा...
    जैसे ही मैं खड़ा हुआ!
    किसी ने पीछे से मेरे सिर पर किसी सख्त चीज से वार किया...


    मुझे सिर मैं बहुत ज्यादा दर्द होने लगा...
    और खून भी बहने लगा जब मैंने पीछे पलट के देखा तो पीछे पहला लड़का एक बेसबाल बैट लिए खड़ा था।


    जैसे ही वो दोबारा मुझे मारने को हुआ....
    मैंने आगे बढ़ के बेसबॉल बैट को पकड़ लिया...
    और एक पंच उसके पेट में दे मारा....
    वो भी पेट पकड़कर नीचे बैठ गया...
    फिर मैंने उसके मुँह पर एक किक जड दी...
    वो वही लेट के तड़पने लगा...


    हमारे चारों तरफ काफी भीड़ जमा हो गई थी।


    प्रिंसिपल मैम और बाकी के अध्यापक भी वहां पहुंच गए....
    पहला अध्यापक:- क्या हुआ यहां?
    दूसरा लड़का:- सर इसने हमे मारा!
    पहला अध्यापक:- क्यों बे लड़के तुने इन्हे क्यों मारा?


    मै:-सर लड़ाई इन्होंने शुरू की थी...
    और इन्होंने मुझे मां की गाली भी दी...


    इतने में प्रिंसिपल मैम ने आगे बढ़कर उन तीनों लड़कों को थप्पड़ मार दिया।


    पहला अध्यापक:- मैम ये आप क्या कर रही है...
    गलती उस लड़के की है...


    प्रिंसिपल मैम:- गलती उसकी नहीं इनकी है...


    दूसरा अध्यापक:- आप इतने विश्वास के साथ कैसे कह सकती हैं कि गलती इनकी है और उस लड़के कि नही?


    प्रिंसिपल मैम:- क्योंकि मैं दीप को कई सालों से जानती हूं...
    वो कभी भी झूठ नहीं बोलता..
    समझे..
    (उन तीनों से) दफा हो जाओ यहां से...


    वो तीनो मुझे घूरते हुए वहां से चले गए...
    इतने में मुझे चक्कर आने लगे और मैं बेहोश होने लगा।


    और कुछ ही पलों में नीचे गिर पड़ा.....


    प्रिंसिपल मैम की निगाह जब मुझ पर पड़ी तो वो भाग के मेरे पास आ गई।


    जब उन्होंने मेरे सिर के पीछे हाथ लगाया तो उन्हें वहां कुछ गिला गिला सा महसूस हुआ।
    जब उन्होंने अपना हाथ देखा तो वहां खून लगा हुआ था।


    प्रिंसिपल मैम हे भगवान खून...
    खड़े-खड़े मेरा मुंह क्या देख रहे हो?
    जल्दी से इसे मेरी गाड़ी तक पहुंचाओ।


    फिर कुछ अध्यापकों ने मुझे उठा के प्रिंसिपल मैम की गाड़ी मे लिटाया....
    प्रिंसिपल मैम ने मेरा सिर अपनी गोद में रख लिया...
    और ड्राइवर को गाड़ी हॉस्पिटल ले जाने के लिए कहा।


    जल्द ही हम लोग हॉस्पिटल पहुंच गए...
    मैम ने वार्ड बॉय को बुलाकर मुझे स्ट्रेचर पर लिटाया और अंदर ले गई....
    डॉक्टर ने मेरे सिर पर पट्टी कर दी....
    प्रिंसिपल:- डॉक्टर दीप अभी कैसा है?


    डॉक्टर:-ये अब ठीक है....
    ज्यादा खून बह जाने की वजह से शरीर में कमजोरी आ गई और वो बेहोश हो गया....
    अगर थोड़ी सी देर हो जाती तो....
    इसे बचाना मुश्किल हो जाता...
    बस कुछ देर बाद इसे होश आ जाएगा।


    प्रिंसिपल मैम:- धन्यवाद डॉक्टर।


    फिर डॉक्टर वहां से चला गया...
    मैम वहां मेरे पास ही बैठी रही...


    करीब रात के 8:00 बजे मुझे होश आया...
    मैंने देखा मैं कहीं नई जगह पर हूं....
    फिर मुझे दवा की स्मेल आने लगी....
    मैं समझ गया....
    मै हॉस्पिटल में हूं....
    फिर मै अपने चारों तरफ देखने लगा...
    प्रिंसिपल मैम मेरे पास ही बैठी थी....
    प्रिंसिपल मैम ने जब मुझे होश में आते देखा तो वो उठ के मेरे पास आ गई और मेरे माथे को चुम के बोली..
    प्रिंसिपल मैम:- अब कैसी तबीयत है बेटा तुम्हारी?


    मै:- अभी अच्छा हूं....
    पर मैं यहां कैसे?


    प्रिंसिपल मैम:-मैं तुम्हे यहां लेकर आई हूं।
    तुम्हारे सिर पर चोट लगी थी...
    जिससे तुम्हारा बहुत खून बह गया...
    और बेहोश हो गए...
    फिर मैं तुम्हें यहाँ ले आई।
    पर तुम मुझे ये बताओ कि तुमने उनसे झगड़ा क्यों किया??


    मैं:-(भोली सी सूरत बना के)मैम झगड़ा मैंने नहीं उन्होने शुरू किया था...


    फिर मैंने मैम को वहां पे जो कुछ हुआ सब बता दिया।


    प्रिंसिपल मैम:- चलो कोई बात नहीं तुम यहीं रुको मैं डॉक्टर के पास हो के आई...
    तुम्हें डिस्चार्ज करवाना है।


    फिर मैम रुम से बाहर चली गई....
    कुछ देर बाद वो रूम में वापस आई....
    उनके साथ डॉक्टर भी था....
    फिर डॉक्टर ने कुछ चेकअप किया...
    और कुछ दवा लिखकर मुझे डिस्चार्ज कर दिया।
    Last edited by pkpasi; 24-10-2018 at 09:29 AM.

  8. #8
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    फिर हम प्रिंसिपल मैम की कार में बैठकर घर को निकल गए.....
    मैंने मैम को अपने घर चलने को कहा....


    मै:- मैम प्लीज मुझे मेरे घर छोड़ दीजिए...
    प्रिंसिपल मैम:- चुपचाप बैठे रहो....
    तुम मेरे साथ मेरे घर जा रहे हो....
    तुम्हारे सिर पर काफी चोट आई है और तुम काफी कमजोर भी हो गए हो.....
    और तुम अपने घर में अकेले रहते हो...
    कोई भी तुम्हारी देखभाल करने वाला नही....
    तो अब चुपचाप मेरे घर चलो समझे।


    मै:-पर मैम....
    प्रिंसिपल मैम:-(बीच में ही बात काटते हुए)कोई एक्सक्यूज नही....
    अब तुम मेरे साथ चल रहे हो तो चल रहे हो समझे।


    मैंने सिर्फ हां मैं गर्दन हिला दी।
    जिसे देख प्रिंसिपल मैम के होठो पर मुस्कुराहट आ गई.....
    उन्होंने मुझे गले लगा लिया....


    प्रिंसिपल मैम:- देट्स लाइक ए गुड बॉय....


    मैम ने मुझे लिटा के मेरा सिर अपनी गोद में रख लिया....
    जल्दी ही हम मैम के घर के बाहर थे....


    मैम के घर में सिर्फ उनके पति उनकी बेटी और वो ही रहती थी...
    उनका घर दो मंजिला था....


    घर के गेट से एंटर होते ही सामने सीटिंग हाल था....
    उसके एक साइड में डाइनिंग टेबल था और उसी साइड किचन भी था सीटिंग के दूसरी साइड तीन रूम थे।
    एक रूम मैम का दूसरा गेस्ट रूम और तीसरा स्टोर रूम....


    फर्स्ट फ्लोर पर भी 3 रूम थे...
    एक उनकी बेटी का और बाकी के गेस्ट रूम थे।


    ( मैम की फैमिली का थोड़ा सा परिचय हो जाए....
    मैम कविता वर्मा उम्र 36....
    दिखने में खूबसूरत....
    दिल की साफ....
    इनका काम है सिर्फ प्यार बांटना.....
    हमेशा खुश रहती है


    मैम की बेटी प्रीत शर्मा उम्र 16...
    बिल्कुल प्यारी सी गुड़िया....
    इकलौती बेटी....
    शरारती और समझ दोनों का कंबीनेशन है)


    जब हम घर पहुंचे तो मैम के हस्बैंड हॉल में सोफे पर बैठे थे...
    जब उनकी नजर हम पे पड़ी तो वो उठ के हमारे पास आ गए...


    दीपक:-कविता कहां थी तुम आज काफी देर हो गई?
    अगर कोई जरूरी काम था तो बता तो देती....
    उपर से फोन भी नहीं उठा रही थी।


    कविता मैम:- सॉरी वो मैं भूल गई थी...
    और फोन साइलेंट पर था....


    फिर दीपक अंकल की नजर मुझ पर पड़ी।


    दीपक:- ठीक है...
    वैसे ये लड़का कौन है?
    तुमने परिचय नहीं करवाया!


    कविता मैम:- खुद पहचानो...
    दीपक:- ओह्हहह तो ये चैलेंज है?
    तो सोचने तो कौन हो सकता है....
    हां कही ये दीप तो नहीं?


    दीपक अंकल की बात सुन मैं सन्न रह गया....
    फिर मैंने मैम की तरफ देखा जो मुस्कुरा रही थी.....
    उन्होंने अंकल की तरफ हां में गर्दन हिला दी...
    अंकल ने भी मुझे गले से लगा लिया....


    फिर मुझे अलग करके बोले
    दीपक:- पर इसके सिर पे ये पट्टी कैसी?


    उसके बाद जो कुछ आज स्कूल में हुआ मैम ने वो सब कुछ अंकल को बता दिया।


    दीपक:- चलो कोई बात नहीं...
    आओ बैठो...
    फिर हम सभी सोफे पर बैठ गए।


    कविता मैम:- वैसे मेरी गुड़िया कहां है?
    दीपक:- वो अभी तक अपने रूम में पढ़ाई कर रही है। कविता मैम:- हे राम डिनर किया कि नहीं उसने?


    दीपक:- तुम्हारी लाडली है....
    मैं तो कह-कह के थक गया...
    पर वो बोली मां के साथ ही खाऊंगी।


    कविता मैम:- चलो मैं ही बुला कर आती हूं उसे।


    कविता मैम:-(एक नौकर से) हरिया जाके रामू से कहो वो दीप के लिए खिचड़ी बना दे।


    हरिया:- जी मालकिन....


    फिर कविता प्रीत के रूम की ओर बढ गई।


    इधर दीप इस सोच में डूबा था कि...
    मैम उसे इतना प्यार कैसे करती है बाकी सभी तो उससे नफरत करते है....


    उधर मैम प्रीत के रूम के पास आ चुकी थी।
    उन्होंने जा के प्रीत का डोर नॉक किया...
    नॉक नॉक...


    प्रीत:- पापा मैंने कह दिया ना मुझे भूख नहीं है...
    फिर आप क्यों बार-बार आ रहे है....
    कविता मैम:- अच्छा बेटा जी मेरे साथ भी नहीं खाओगी...


    जैसे ही प्रीत ने अपनी मां की आवाज सुनी...
    उसने भाग के दरवाजा खोला...
    और अपनी मां के गले लग गई...
    प्रीत:- मां आप आ गई...
    मैम ने उसे अपने से अलग किया और उसका गाल चूम लिया।


    कविता मैम:- जी मेरी गुड़िया...
    प्रीत:- तो फिर जल्दी जल्दी नीचे चलो मुझे बहुत भूख लगी है...
    मैम मजे लेने के मूड मे..


    कविता मैम:- लेकिन तुम्हें भूख नहीं थी अब तो तुम सिर्फ मेरे लिए खा रही हो..।
    प्रीत:- तो जाओ मुझे सच में नहीं खाना...
    और उसने मुंह फुला लिया...
    कविता मैम:- अरे अरे मेरी गुड़िया तो गुस्सा हो गई..
    मैं तो मजाक कर रही थी।


    कविता मैम:-सॉरी बाबा....
    अब माफ भी कर दो....
    प्रीत:- नहीं करूंगी...नहीं करूंगी...
    जाओ आप यहां से..
    कविता मैम:- अच्छा तो ठीक है...
    तो मैं तुम्हारे हिस्से का खाना तुम्हारे भैया को खिला दूँ?


    प्रीत ने जैसे ही मैम की ये बात सुनी तो वो फौरन अपनी मां की तरह देखने लगी!


    प्रीत:- मां क्या सच में भैया आए है?
    कविता मैम ने सिर्फ हां में गर्दन हिला दिया।


    प्रीत खुशी से उछल पड़ी।


    प्रीत:- क्या सच्ची में दीप भैया आए हैं?
    तो चलो ना जल्दी से मुझे उनसे मिलना है।


    फिर कविता मैम और प्रीत नीचे आ गई...
    मैं और अंकल अभी भी सोफे पर बैठे थे.....


    प्रीत भागकर मेरी और आने लगी....
    मैं भी खड़ा हो गया...
    खुशी से नही....
    मैं तो इसलिए खड़ा हुआ था कि ये लड़की मेरी तरफ क्यों भागी आ रही।


    इतने में प्रीत आ के मेरे गले लग गई।


    प्रीत:- मेरे भैया आ गए...
    मेरे भैया आ गए...
    अब मैं अपने भैया को कहीं नहीं जाने दूंगी (अपना चेहरा ऊपर करके)
    बोलो ना भैया मुझे छोड़ कर तो नहीं जाओगे।


    मैंने सिर्फ ना मैं गर्दन हिला दी...


    क्योंकि तब मेरा दिमाग चल ही नहीं रहा था।


    मैं तो इस बात से हैरान था!
    कि प्रिंसिपल मैम का पूरा परिवार मुझे जानता था।




    फिर जब उसने मेरे सिर पे पट्टी देखी तो मुझसे पूछा....


    प्रीत:- भैया ये आपके सिर पे क्या हुआ?


    मै:-कुछ नहीं गुड़िया वो थोड़ी सी चोट लग गई थी..
    प्रीत:- आप भी ना भैया...
    बिल्कुल बच्चे हो बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखते हो अपना...
    आओ मेरे साथ डिनर करो और फिर आप रूम में जाना है आराम करने समझे कि नही?


    मैंने सिर्फ हां में सिर हिलाया...
    मैम और अंकल वहां बैठे मुस्कुरा रहे थे..


    फिर हम लोग डाइनिंग टेबल पे बैठ गए।


    प्रीत:- आज मैं अपने भैया को अपने हाथ से खिलाऊंगी... खाओगे ना मेरे हाथ से....


    मैंने इस बार भी सिर्फ हां मैं गर्दन हिलाई।


    फिर प्रीत मुझे अपने हाथों से खिलाने लगी....
    मुझे आज तक सिर्फ नफरत ही मिली थी...
    आज मैं इतना प्यार सहन ना कर पाया और मेरी आंखों से आंसू निकल आए।
    मेरी आंखों में आंसू देखकर प्रीत ने मैम से कहा....


    प्रीत:- मां देखो भैया रो रहे है।


    मैम उठ के मेरे पास आ गई...


    कविता मैम:- क्या हुआ बेटा रो क्यों रही हो....


    मै:- कुछ नहीं मैम आज तक मैंने सिर्फ लोगों की नफरत ही देखी है आज आप लोगों के द्वारा मिला प्यार सहन नही हुआ....
    और मेरी आंखों से अपने आप आंसू निकल आए।


    ये सुनकर मैम ने मुझे गले लगा लिया....


    कविता मैम:- अरे मेरा बच्चा...
    बस चुप हो जा....


    इतने ने प्रीत बोली!


    प्रीत:-मां आपने सही कहा भैया सच में ही बच्चे हैं देखो तो कैसे बच्चों की तरह रो रहे है।


    प्रीत की बात सुनकर सभी मुस्कुरा दिए।


    फिर हम सब ने अपना डिनर कंप्लीट किया...


    फिर सभी वहां बैठकर बातें करने लगे।

  9. #9
    सदस्य bapu ji's Avatar
    Join Date
    Sep 2018
    Location
    rajputana
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    1
    बहुतइ बढ़िया जी
    कुछ ख्वाहिसों का कत्ल करके मुस्कुरा दो ज़िंदगी खुद बा खुद बेहतर हो जाएगी

  10. #10
    कर्मठ सदस्य pkpasi's Avatar
    Join Date
    Jun 2009
    प्रविष्टियाँ
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    12
    मित्र हौसला बढाने के लिए धन्यवाद

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