Page 23 of 25 प्रथमप्रथम ... 132122232425 LastLast
Results 221 to 230 of 241

Thread: कंटेनर

  1. #221
    कर्मठ सदस्य superidiotonline's Avatar
    Join Date
    May 2017
    प्रविष्टियाँ
    4,209
    Rep Power
    6
    'कंटेनर'

    (दृष्य-६५)

    (अनुषा लाल चन्दानी के फ़्लैट में पंकज और शीतल सोफ़े पर बैठे कॉफ़ी पी रहे हैं। शीतल दीवार घड़ी देखती है- दीवार घड़ी सुबह के छः बजा रही है।)

    शीतल : (चिन्तित स्वर में) सुबह हो गया। अनुषा अभी तक नहीं आई।

    पंकज : आती होगी। गधा रंजन की खोज में देर हो गई होगी।

    (उसी समय दरवाज़ा खुलता है और अनुषा लाल चन्दानी हाथ में गधा-गाड़ी हाँकने वाला चाबुक लिए अन्दर आती है।)

    अनुषा : (उबासी लेते हुए) पूरी रात दिल्ली की सड़कों पर गधा-गाड़ी हाँकती रही, मगर गधा रंजन का कोई अता-पता नहीं चल सका!

    शीतल : (हँसते हुए) बिन माँगे मोती मिलें, माँगे मिले न भीख!

    अनुषा : बहुत थक गई। आज मैंने ऑफ़िस से छुट्टी ले ली है। दिन भर तान के सोऊँगी और शाम को हम लोग प्रदर्शनी देखने चलेंगे। बड़ी बोर हो गई गधा रंजन को ढूँढ़ते-ढूँढ़ते!

    शीतल : (खुश होकर) ठीक है.. मैं भी बड़ी बोर हो गई पड़े-पड़े!

    अनुषा : (उबासी लेते हुए) मैं सोने जा रही हूँ.. गुड नाइट।

    (अनुषा लाल चन्दानी जाने लगती है।)

    शीतल : रुको.. रुको.. रुको.. मेरी गिफ़्ट कहाँ है?

    (अनुषा लाल चन्दानी जेब में हाथ डालकर एक छोटा पैकेट निकालती है और शीतल के हाथ में दे देती है।)

    अनुषा : ये लो..

    (शीतल देखती है- अनुषा लाल चन्दानी ने महँगा वाला कंडोम का पैकेट दिया है। शीतल मुँह बनाती है।)

    शीतल : ये गिफ़्ट है?

    अनुषा : हाँ.. बाज़ार में सबसे महँगा वाला पैकेट यही है! चलो, मेरा रिटर्न गिफ्ट निकालो।

    शीतल : (मुँह बनाकर) ये तो वन नाइट स्टैंड वालों के काम आता है। तुम्हारे लिए ठीक रहेगा। हम लोग तो 'मल्टी नाइट स्टैंड' वाले हैं!

    अनुषा : बात न बनाओ और मेरा रिटर्न गिफ्ट दो!

    शीतल : अच्छा.. आँखें बन्द करो।

    (अनुषा लाल चन्दानी आँखें बन्द कर लेती है। शीतल अनुषा लाल चन्दानी के हाथ में उसका दिया हुआ कंडोम का पैकेट वापस रख देती है। अनुषा लाल चन्दानी आँखें खोलकर कंडोम का पैकेट देखती है।)

    अनुषा : थैंक यू........

    (अनुषा लाल चन्दानी कंडोम का पैकेट जेब में रखकर पंकज का हाथ पकड़कर खींचती है।)

    ........चलो पंकज।

    शीतल : पंकज को कहाँ ले जा रही हो?

    अनुषा : रिटर्न गिफ़्ट का इस्तेमाल करने ले जा रही हूँ!

    शीतल : (क्रोधपूर्वक) तेरी तो..

    (शीतल अनुषा लाल चन्दानी का बाल पकड़कर खींचती है।)

    अनुषा : (हँसते हुए) सॉरी-सॉरी-सॉरी.. मैं तो मज़ाक़ कर रही थी!

    (शीतल अनुषा लाल चन्दानी का बाल छोड़ देती है। अनुषा लाल चन्दानी टाटा दिखाते हुए बेडरूम में जाकर दरवाज़ा बन्द कर लेती है।)

    (दृष्य - ६५ समाप्त)

  2. #222
    कर्मठ सदस्य superidiotonline's Avatar
    Join Date
    May 2017
    प्रविष्टियाँ
    4,209
    Rep Power
    6
    'कंटेनर'

    (दृष्य-६६)

    (प्रदर्शनी में बड़े-बड़े झूले लगे हुए हैं और लोग झूल रहे हैं। रंगबिरंगी बत्तियाँ जल-बुझ रही हैं। प्रदर्शनी के बाहर एक टैक्सी आकर रुकती है और टैक्सी से पंकज और शीतल बदले हुए भेष में नीचे उतरते हैं। पंकज ड्राइवर को किराया देकर शीतल की ओर देखता है।)

    पंकज : चलो, अन्दर चलें।

    शीतल : अरे, अनुषा को तो आ जाने दो।

    पंकज : अनुषा के आने में अभी देर लगेगी। गधा-गाड़ी हाँक रही है, हवाई जहाज नहीं!

    शीतल : हाँ.. बेचारी गधा रंजन से इंटरव्यू लेने के लिए पागल हुई जा रही है! चलो फिर.. अन्दर चलकर झूला झूलते हैं। टाइम पास होगा।

    (पंकज और शीतल प्रदर्शनी के अन्दर जाते हैं और प्रदर्शनी में घूमते-फिरते हुए एक झूले के पालने में बैठ जाते हैं। जैसे-जैसे लोग झूले के दूसरे पालनों में बैठते जाते हैं, पंकज और शीतल का पालना सबसे ऊपर पहुँच जाता है और प्रदर्शनी के बाहर का दूर तक का दृष्य दिखाई पड़ने लगता है। शीतल देखती है- सड़क पर गधा-गाड़ी हाँकते हुए अनुषा लाल चन्दानी आ रही है।)

    शीतल : (खुश होकर) वो देखो, पिंटू। अनुषा आ गई!

    (पंकज अनुषा लाल चन्दानी को गधा-गाड़ी हाँकते हुए आता देखता है। उसी समय गधा रंजन के दहाड़ने की आवाज़ आती है। पंकज घबड़ाकर दहाड़ की दिशा में देखता है- गधा रंजन अपने भीमकाय स्वरूप में दहाड़ता हुआ प्रदर्शनी की ओर आ रहा है।)

    पंकज : (घबड़ाकर) वो देखो, शीतू- गधा रंजन आ गया!

    (शीतल घबड़ाकर गधा रंजन को आता हुआ देखती है। अनुषा लाल चन्दानी भी गधा रंजन को देख लेती है और प्रसन्नता के साथ हाथ में लाउड हेलर लेकर गधा-गाड़ी से नीचे उतरती है।)



    अनुषा : (लाउड हेलर पर) आदरणीय माननीय पूज्यनीय गधा रंजन जी.. आदरणीय माननीय पूज्यनीय गधा रंजन जी.. आदरणीय माननीय पूज्यनीय गधा रंजन जी.. क्या आप हमें सुन पा रहे हैं?

    (गधा रंजन गुर्राकर अनुषा लाल चन्दानी की ओर देखता है।)

    अनुषा : गुस्सा न करिए, आदरणीय गधा रंजन जी.. गुस्सा न करिए। मैं अनुषा लाल चन्दानी हूँ.. प्रेस रिपोर्टर। मैं आपकी बड़ी फैन हूँ। आपकी बातों में दम है। गधों को रोटी, कपड़ा और मकान मिलना ही चाहिए!

    गधा रंजन : (गुर्राते हुए) कपड़ा?

    अनुषा : म.. मेरा मतलब है- जाड़े के दिनों में गधों को कम्बल मिलना चाहिए जिससे उन्हें ठण्ड न लगे! मेरा मतलब था- गधों को चरने के लिए हरी-हरी घास, जाड़े में ओढ़ने के लिए कम्बल और सिर पर छत मिलना चाहिए।

    (गधा रंजन ज़ोरों से गुर्राता है।)

    गधा रंजन : हाँ, गधों को ये सब मिलना ही चाहिए और तुरन्त मिलना चाहिए। नहीं तो मैं चारों ओर भारी तबाही मचा दूँगा। वाशिंग मशीन इस्तेमाल करने वालों की लाशें बिछा दूँगा!

    अनुषा : आदरणीय गधा रंजन जी, मैं भी आपकी तरह बहुत बड़ी गधा प्रेमी हूँ। मैंने भी आपकी तरह गधों पर रिसर्च करके एक बात का पता लगाया है। वो ये कि गधों की मुख्य समस्या बेरोज़गारी है जिसके कारण बेचारे गधे भूखे मर रहे हैं।

    (गधा रंजन की आँखों से खुशी के आँसू बहने लगते हैं।)

    पंकज : अनुषा की चाल कामयाब हो गई, शीतू। वो देखाे- गधा रंजन की आँखों से खुशी का आँसू बह रहा है।

    शीतल : (हँसते हुए) छोटी-मोटी नहीं, बहुत बड़ी ड्रामेबाज है अनुषा।

    गधा रंजन : हाँ.. बिल्कुल ठीक कहा तुमने। गधों की बेरोज़गारी दूर होना ही चाहिए।

    अनुषा : गधों की बेरोज़गारी दूर करने के लिए मैंने बहुत बड़ा कदम उठाया है, आदरणीय गधा रंजन जी.. और मैंने गधों को रोज़गार देना शुरू भी कर दिया है। ये देखिए- अब मैं कार की जगह गधा-गाड़ी का इस्तेमाल करती हूँ। मैंने अपनी गधा-गाड़ी के जरिए एक गधे को रोज़गार दिया है! एक गधे की रोज़ी-रोटी की समस्या दूर की है। मैं आपका इंटरव्यू लेना चाहती हूँ, आदरणीय गधा रंजन जी.. और जानना चाहती हूँ- गधों के कल्याण के लिए आप क्या-क्या करना चाहते हैं?

    (गधा रंजन गधा अनुषा लाल चन्दानी की गधा-गाड़ी को देखता है। गधा रंजन की आँखों से खून का आँसू बहने लगता है।)

    पंकज : (घबड़ाकर) गधा रंजन की आँखों से खून का आँसू बहने लगा है, शीतू।

    शीतल : (घबड़ाकर) हे भगवान्! अब क्या होगा?

    गधा रंजन : (क्रोधपूर्वक) रोज़गार के नाम पर बेचारे गधे का इतना बड़ा शोषण.. और वो भी गधा रंजन की आँखों के सामने? धोबी की छोटी-मोटी कपड़े की गठरी ढ़ोने वाले बेचारे मासूम गधे को घोड़ा समझकर गाड़ी में जोत दिया!

    (गधा रंजन खून का आँसू रोते हुए गधा-गाड़ी से गधे को आज़ाद कर देता है और क्रोधपूर्वक गधा-गाड़ी उठाकर उसके परखचे उड़ा देता है। अनुषा लाल चन्दानी डरकर भागने लगती है। गधा रंजन अपने दोनों हाथों से अनुषा लाल चन्दानी का दोनों पैर पकड़कर हवा में टाँग देता है। अनुषा लाल चन्दानी चीखती हुई गधा रंजन की पकड़ से छूटने के लिए मचलती है।)

    गधा रंजन : (क्रोधपूर्वक) तूने गधे के साथ इतनी बड़ी हिमाकत करने की जुर्रत कैसे की? अब ले मज़ा चख!

    (गधा रंजन अनुषा लाल चन्दानी की टाँग खींचकर बीच से चीरकर दो टुकड़े कर देता है। अनुषा लाल चन्दानी की हृदय विदारक अन्तिम चीख गूँजती है। गधा रंजन ज़ोरदार दहाड़ मारते हुए एक टुकड़े को कोलकाता पर और दूसरे टुकड़े को मुम्बई पर फेंक देता है। पंकज और शीतल थर-थर काँपने लगते हैं। गधा रंजन प्रदर्शनी को तबाह करने के लिए आगे बढ़ता है, किन्तु अचानक रुककर थोड़ी देर के लिए बुरी तरह छटपटाकर चीखता है और फिर आगे बढ़ता है। पंकज और शीतल आश्चर्यपूर्वक गधा रंजन को छटपटाते और चीखते हुए देखते हैं। आगे बढ़ते-बढ़ते गधा रंजन फिर रुककर थोड़ी देर के लिए बुरी तरह छटपटाकर चीखता है और फिर आगे बढ़ता है, किन्तु आगे बढ़ नहीं पाता और फिर बुरी तरह छटपटाकर चीखने लगता है। छटपटाते और चीखते हुए गधा रंजन एकाएक गायब हो जाता है।)

    (दृष्य - ६६ समाप्त)

  3. #223
    कर्मठ सदस्य superidiotonline's Avatar
    Join Date
    May 2017
    प्रविष्टियाँ
    4,209
    Rep Power
    6
    'कंटेनर'

    (दृष्य-६७)

    (अनुषा लाल चन्दानी के फ़्लैट में दीवार पर अनुषा लाल चन्दानी की तस्वीर लगी है। शोकग्रस्त शीतल तस्वीर को माला पहनाती है। शीतल की आँखों में आँसू आ जाते हैं और शीतल को अनुषा लाल चन्दानी की बहुत याद आती है।)

    अनुषा : तुम देखती रहना- गधा रंजन का इंटरव्यू अखबार में छपते ही मैं दुनिया की सबसे बड़ी धाँकड़ रिपोर्टर बन जाऊँगी तेरी तरह और तू हाय-हाय करेगी!

    *****

    अनुषा : कहाँ पकड़ा जिगालो? बड़ा चिकना है!

    *****

    अनुषा : मैं किस करके देखती हूँ पंकज को। अभी पता लग जाएगा- बीमारी ठीक होगी या नहीं।

    (अनुषा लाल चन्दानी पंकज को खींचकर खड़ा कर देती है और अपनी नाक पंकज की नाक से सटा देती है। शीतल अनुषा लाल चन्दानी का बाल पकड़कर खींचने लगती है।)

    शीतल : अरे-अरे.. बॉयफ्रेंड है मेरा। तू रहने ही दे। बड़ी आई किस करके पता लगाने वाली!

    अनुषा : (हँसते हुए) सॉरी-सॉरी-सॉरी.. मैं तो मज़ाक़ कर रही थी!

    *****

    अनुषा : जब साँस बहुत तेज़ चलने लगे तो बिल्कुल नहीं घबड़ाना चाहिए और तुरन्त बत्ती बुझाकर सारे कपड़े उतार देना चाहिए।

    *****

    अनुषा : बड़े काम की सी०डी० है। इस सी०डी० को तुम दोनों एक साथ बैठकर देखना। तुम दोनों की बीमारी एक साथ छूमन्तर हो जाएगी!

    *****

    अनुषा : (हँसते हुए) बताया तो था- सनी लियोन की डेब्यू फ़िल्म है जो कनाडा में बनी थी। अब तू नहीं समझी तो मैं बेचारी भोली-भाली क्या करूँ?

    *****

    अनुषा : थैंक यू........

    (अनुषा लाल चन्दानी कंडोम का पैकेट जेब में रखकर पंकज का हाथ पकड़कर खींचती है।)

    ........चलो पंकज।

    शीतल : पंकज को कहाँ ले जा रही हो?

    अनुषा : रिटर्न गिफ़्ट का इस्तेमाल करने ले जा रही हूँ!

    शीतल : (क्रोधपूर्वक) तेरी तो..

    (शीतल अनुषा लाल चन्दानी का बाल पकड़कर खींचती है।)

    अनुषा : (हँसते हुए) सॉरी-सॉरी-सॉरी.. मैं तो मज़ाक़ कर रही थी!

    *****

    अनुषा : जब अख़बारों में छपेगा तभी तो दुनिया की सबसे बड़ी धाँकड़ रिपोर्टर बनूँगी.. तेरी तरह!

    *****

    (शीतल अनुषा लाल चन्दानी को याद करके फूट-फूट कर रोने लगती है। उसी समय बाथरूम का दरवाज़ा खुलता है और पंकज नहाकर तौलिए से सिर पोछता हुआ बाहर आता है। पंकज शीतल को अनुषा लाल चन्दानी की तस्वीर के सामने रोता हुआ देखकर विचलित हो जाता है और शीतल के पास आकर तौलिए से शीतल का आँसू पोछता है।)

    पंकज : रोओ मत, शीतल। इस दुनिया से सभी को एक न एक दिन जाना है। अनुषा मरी नहीं, शहीद हुई है। हमारे दिल-ओ-दिमाग़ में वो आज भी ज़िन्दा है। कल भी ज़िन्दा रहेगी!

    शीतल : (बिगड़कर) बात मत करो मुझसे। इतने बड़े ताँत्रिक बाबा बनते हो और मेरी सहेली को नहीं बचा सके!

    पंकज : मैं तो एक सेकेण्ड में बचा लेता, मगर कहानी के स्क्रिप्ट राइटर का आदेश नहीं था!

    शीतल : कौन है स्क्रिप्ट राइटर?

    पंकज : वही जिसके आदेश पर हम सभी उठते-बैठते और बोलते हैं! ये देखो....

    (पंकज मंत्र पढ़कर हाथ की ऊँगली से दीवार की ओर इशारा करता है और दीवार पर सुनहरे रंग से लिख जाता है- 'सुपरइडियटऑनलाइन'। फ्रेम तीन सेकेन्ड के लिए फ्रिज़ हो जाता है।)

    ......स्क्रिप्ट राइटर का कहना है- दर्शकों को रुलाने के लिए अनुषा लाल चन्दानी का मरना बहुत ज़रूरी था!

    शीतल : कुछ भी हो। हमें अनुषा की मौत का बदला लेना होगा। गधा रंजन को बुरी तरह तड़पा-तड़पा कर मारना होगा!

    पंकज : बुरी तरह तड़पा-तड़पा कर.. अच्छा याद दिलाया। कल तुमने एक बात पर गौर किया?

    शीतल : किस बात पर?

    पंकज : अनुषा को मारने के बाद गधा रंजन तीन बार बुरी तरह छटपटाया था और फिर अचानक गायब हो गया।

    शीतल : ऐसा पहली बार हुआ है, जब गधा रंजन बिना तबाही मचाए भाग गया हो।

    पंकज : कुछ तो बात ज़रूर है। हमें पता लगाना होगा- गधा रंजन बुरी तरह क्यों छटपटा रहा था?

    (उसी समय टी०वी० पर समाचार आने लगता है। पंकज और शीतल टी०वी० की ओर देखते हैं। पंकज टी०वी० की आवाज़ तेज़ कर देता है। टी०वी० के पर्दे पर गधा रंजन दिखाई पड़ता है।)

    न्यूज़ एंकर : कल रात गधा रंजन के भूत ने शहर में लगी प्रदर्शनी के बाहर न्यूज़ रिपोर्टर अनुषा लाल चन्दानी की गधा-गाड़ी के परखचे उड़ा दिए......

    (टी०वी० के पर्दे पर गधा रंजन अनुषा लाल चन्दानी की गधा-गाड़ी के परखचे उड़ाता हुआ दिखाई पड़ता है।)

    ......गौरतलब है कि अनुषा लाल चन्दानी गधा रंजन का इंटरव्यू लेना चाहती थी। गधा-गाड़ी के परखचे उड़ाने के बाद गधा रंजन ने अनुषा लाल चन्दानी को पकड़कर जान से मार दिया और उसके शरीर के टुकड़ों को मुम्बई और कोलकाता पर फेंक दिया। राज्य सरकार ने अनुषा लाल चन्दानी को शहीद घोषित करते हुए एक दिन का राजकीय शोक मनाने की घोषणा की है। अनुषा लाल चन्दानी को मारने के बाद गधा रंजन प्रदर्शनी को तबाह और बर्बाद करने के लिए आगे बढ़ा, मगर अचानक न जाने क्या हुआ- गधा रंजन आगे नहीं बढ़ सका और बुरी तरह चीखने-चिल्लाने और छटपटाने लगा। तीन बार चीखने-चिल्लाने और छटपटाने के बाद गधा रंजन अचानक गायब हो गया जिसके कारण प्रदर्शनी तबाह और बर्बाद होने से बच गई।

    (टी०वी० के पर्दे पर गधा रंजन को चीखते-चिल्लाते, छटपटाते और फिर गायब होते दिखाया जाता है।)

    पंकज : कुछ तो है, शीतू जिसके कारण गधा रंजन बुरी तरह चीख-चिल्ला और छटपटा रहा है। अगर यह सीन किसी तरह दोबारा देखा जा सकता तो पता लगाने में बड़ी आसानी होती।

    (शीतल देखती है- टी०वी० के बगल में डिश एनएक्सटी० टी०वी० का एच०डी० सेट टॉप बॉक्स लगा है।)

    शीतल : ये न्यूज़ डिश टी०वी० के जरिए आ रही है, पिंटू.. और डिश टी०वी० में कोई भी चैनल रिकार्ड किया जा सकता है।

    पंकज : अरे वाह.. यह तो बड़ी अच्छी चीज़ है। मैं भी अपने आश्रम में डिश टी०वी० लगवाऊँगा।

    (शीतल पंकज के हाथ से रिमोट लेकर कुछ बटन दबाती है।)

    शीतल : अपने आप कोई चैनल नहीं रिकार्ड होता, पिंटू। उसके लिए रिकार्डिंग मॉड ऑन करना पड़ता है। अरे वाह.. अनुषा ने रिकार्डिंग मॉड पहले से ऑन कर रखा है।

    पंकज : अरे वाह! चलो फिर.. जल्दी से न्यूज़ रिप्ले करके दिखाओ।

    (शीतल समाचार रिप्ले करती है। पंकज खुशी से चीखता है।)

    पंकज : यूरेका.. यूरेका..

    शीतल : क्या पता चल गया, पिंटू?

    पंकज : ये देखो, शीतू.. नीले रंग की चमकदार रोशनी और ये रोशनी जब-जब गधा रंजन पर पड़ी है, गधा रंजन चीखा-चिल्लाया और छटपटाया है!

    शीतल : हाँ, तुम ठीक कहते हो। शायद इसी रोशनी के कारण गधा रंजन घबड़ाकर भाग गया!

    पंकज : अब समझ में आया- नास्त्रेदमस की आत्मा ने अपनी भविष्यवाणी में 'रोशनी से पैदा होगा नीला महाकाल.. पहलवान का बनेगा काल..' क्यों कहा था!

    शीतल : (खुश होकर) बिल्कुल सही कहा! गधा रंजन को नीले रंग की रोशनी से एलर्जी है!

    (पंकज सोचने लगता है।)

    पंकज : इसका मतलब है- अगर गधा रंजन को घेरकर चारों ओर से नीले रंग की रोशनी फेंकी जाए तो गधा रंजन ख़त्म हो जाएगा!

    शीतल : बिल्कुल सही पकड़ा। नास्त्रेदमस की आत्मा की भविष्यवाणी भी यही कहती है!

    पंकज : गधा रंजन को घेरने के लिए एक बार फिर जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में गधा रंजन को बुलाना होगा!

    शीतल : ठीक है। मैं पुलिस कमिश्नर से बात करती हूँ। अब तुम बाबा पिद्दी के भेष में आ जाओ।

    (पंकज मंत्र पढ़कर हवा में हाथ हिलाता है और बाबा पिद्दी बन जाता है।)

    (दृष्य - ६७ समाप्त)

  4. #224
    कर्मठ सदस्य superidiotonline's Avatar
    Join Date
    May 2017
    प्रविष्टियाँ
    4,209
    Rep Power
    6
    'कंटेनर'

    (दृष्य-६८)

    (जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम दर्शकों से खचाखच भरा हुआ है। सभी लोगों के हाथों में नीले रंग के शीशे वाली टार्च है। शीतल भी दर्शक दीर्घा में नीले रंग के शीशे वाली टार्च लिए बैठी है। गधा रंजन पर चारों ओर से नीले रंग की तेज़ रोशनी फेंकने के लिए सैकड़ों फोकस लाइट की विशेष व्यवस्था की गई है। सीआइडी० अधिकारी एसीपी० प्रद्युमन, दया, अभिजित और श्रेया के साथ नीले रंग के शीशे वाली टार्च लिए अन्दर आते हैं और दर्शक दीर्घा में बैठ जाते हैं।)

    एसीपी० प्रद्युमन : दया......

    (श्रेया जल्दी से अपने दुपट्टे से एसीपी० प्रद्युमन का मुँह बाँध देती है।)

    (बाबा पिद्दी काला चोगा पहने और सिर पर ताँत्रिकों वाली पगड़ी लगाए और हाथ में जादुई छड़ी लिए अपने कई सहायकों के साथ आते हैं। दर्शक बाबा पिद्दी को देखते ही जोश में खड़े हो जाते हैं और जयघोष करते हैं।)

    सभी दर्शक : (एक साथ) पिद्दी.. पिद्दी.. पिद्दी.. पिद्दी.. पिद्दी.. पिद्दी.. पिद्दी.. पिद्दी.. पिद्दी.. पिद्दी..

    (बाबा पिद्दी माइक उठाकर घोषणा करते हैं।)

    बाबा पिद्दी : गधा रंजन भूत नहीं, ऑरा है जिसके कारण गधा रंजन पर तंत्र-मंत्र का कोई असर नहीं पड़ता। हमने पता लगा लिया है- गधा रंजन पर सिर्फ नीले रंग की रोशनी का असर पड़ता है। मैं मंत्र पढ़कर गधा रंजन को बुलाऊँगा। जैसे ही गधा रंजन आएगा, उस पर चारों ओर से नीले रंग की तेज़ रोशनी फेंकी जाएगी.. और आप सभी को भी गधा रंजन पर अपनी-अपनी टार्च से नीली रोशनी फेंकना है। गधा रंजन पर चारों ओर से नीली रोशनी पड़ते ही वह तड़प-तड़प कर चीखते हुए हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगा!

    (तालियों की गड़गड़ाहट से स्टेडियम गूँज उठता है। बाबा पिद्दी स्टेडियम के बीच में खड़ी मशाल के पास आते हैं और भभूत और सिन्दूर उड़ाते हुए मंत्र जपना शुरू करते हैं। मशाल अपने आप जल जाती है। थोड़ी देर में गधों के दौड़ने की आवाज़ आती है और मशाल ज़मीन से ऊपर हवा में उड़ने लगती है। थोड़ी देर बाद एक गधा दौड़ता हुआ स्टेडियम में प्रवेश करता है और स्टेडियम का चक्कर काटने लगता है। दर्शक उत्साहित होकर सीटी बजाने लगते हैं। शीतल भी सीटी बजाकर ताली बजाती है। उसी समय दूसरा गधा दौड़ता हुआ आता है और स्टेडियम का चक्कर लगाने लगता है। धीरे-धीरे करके स्टेडियम में सैकड़ों गधे चक्कर लगाने लगते हैं। अचानक सभी गधे एक-एक करके एक दूसरे में समाते चले जाते हैं और फिर अन्त में एक गधा बचता है जिसका आकार बहुत बड़ा है। एकाएक गधे का स्वरूप परिवर्तित होकर गधा रंजन बन जाता है। गधा रंजन को देखकर बाबा पिद्दी अट्टहास करते हैं।)

    बाबा पिद्दी : हा-हा-हा.. तो तू आ गया, गधा रंजन?

    गधा रंजन : मैं तेरे बुलावे पर नहीं, अपनी मर्ज़ी से आया हूँ, बाबा पिद्दी!

    बाबा पिद्दी : पता है, मगर आज तू बचकर नहीं जा सकता, गधा रंजन। जब गीदड़ की मौत आती है तो वह शहर की ओर भागता है और जब भूतों की मौत आती है तो वह बाबा पिद्दी से पंगा लेता है! तेरा खेल ख़त्म हुआ। लाइट्स ऑन!

    (स्टेडियम के चारों ओर लगी नीले रंग की विशेष फ़ोकस लाइट से गधा रंजन पर तेज़ नीली रोशनी फेंकी जाती है। गधा रंजन तेज़ नीली रोशनी से नहा जाता है। बाबा पिद्दी भी टार्च से नीली रोशनी गधा रंजन पर फेंकते हैं। हजारों दर्शक भी सीटी बजाते हुए गधा रंजन पर चारों ओर से टार्च की नीली रोशनी फेंकते हैं, किन्तु गधा रंजन पर कोई असर नहीं पड़ता। गधा रंजन दहाड़ते हुए स्टेडियम में लगी नीले रंग की लाइटों को तोड़ने लगता है।)

    (एसीपी० प्रद्युमन जल्दी से दुपट्टा अपने मुँह से हटा देते हैं।)

    एसीपी० प्रद्युमन : दया, भागो यहाँ से जान बचाकर।

    दया, अभिजित और श्रेया : (एक साथ सल्यूट मारते हुए) यस सर!

    (एसीपी० प्रद्युमन फुर्ती के साथ बाहर की ओर भागते हैं। दया, अभिजित और श्रेया भी एसीपी० प्रद्युमन के पीछे-पीछे भागते हैं। गधा रंजन पर नीली रोशनी का कोई असर होता न देखकर बाबा पिद्दी घबड़ा जाते हैं। उसी समय गधा रंजन की नज़र दर्शक दीर्घा में घबड़ाई हुई बैठी शीतल पर पड़ती है। शीतल को देखकर गधा रंजन ज़ोरों से दहाड़ता है और अपने भीमकाय रूप से सामान्य कद में परिवर्तित होकर शीतल की ओर बढ़ता है।)

    गधा रंजन : (गुर्राते हुए) मैं तुझे कब से ढूँढ़ रहा हूँ, दुनिया की सबसे बड़ी टर्रर.. तेरा खेल ख़त्म हुआ!

    (शीतल टार्च गधा रंजन पर फेंकते हुए उठकर भागती है। गधा रंजन दौड़कर शीतल को पकड़ लेता है। बाबा पिद्दी शीतल को बचाने आ जाते हैं और गधा रंजन को पकड़ लेते हैं। गधा रंजन बाबा पिद्दी को एक ज़ोरदार लात मारता है। बाबा पिद्दी दूर जा गिरते हैं। गधा रंजन शीतल को घसीटते हुए स्टेडियम के किनारे खड़े एक कंटेनर की ओर ले जाता है।)

    गधा रंजन : तूने मुझसे कहा था न- गधों को एक कंटेनर में बन्द करके मुम्बई के जंगल में ले जाकर छोड़ने के लिए। आज मैं तुझे कंटेनर में बन्द करके मुम्बई ले जाऊँगा और कंटेनर समेत तुझे गहरे समुन्दर में डुबा दूँगा!

    (गधा रंजन शीतल को कंटेनर में बन्द कर देता है और खुद ड्राइविंग सीट पर बैठकर इंजन स्टार्ट करता है। बाबा पिद्दी दौड़ते हुए आते हैं और गधा रंजन को ड्राइविंग सीट से बाहर घसीट लेते हैं। गधा रंजन क्रोधित होकर अपने भीमकाय स्वरूप में आ जाता है और बाबा पिद्दी को अपनी हथेली पर उठाकर ज़ोर से फूँक देता है। बाबा पिद्दी तेज़ी के साथ हवा में उड़ते हुए स्टेडियम से बाहर निकल जाते हैं। गधा रंजन दोबारा कंटेनर की ड्राइविंग सीट पर बैठ जाता है और तेज़ी के साथ कंटेनर चलाता हुआ मुम्बई की ओर जाता है।)

    (दृष्य - ६८ समाप्त)

  5. #225
    कर्मठ सदस्य superidiotonline's Avatar
    Join Date
    May 2017
    प्रविष्टियाँ
    4,209
    Rep Power
    6
    'कंटेनर'

    (दृष्य-६९)

    (बाबा पिद्दी दोनों हाथ फैलाए जेट विमान की तरह हवा में उड़ रहे हैं। उड़ते-उड़ते बाबा पिद्दी समुन्दर में गिरकर पानी में समा जाते हैं और फिर तैरते हुए ऊपर आते हैं।)

    बाबा पिद्दी : इस बार तो लगता है कोचीन के समुन्दर में आ गिरा हूँ। कम्बख्त गधा रंजन ने बड़ी जोर से फूँक दिया। गधा रंजन तेरा बेड़ा गर्क हो!

    (बाबा पिद्दी तैरते हुए किनारे आ जाते हैं और गेट वे ऑफ़ इंडिया देखकर खुश हो जाते हैं।)

    बाबा पिद्दी : अरे.. ये तो गेट वे ऑफ़ इंडिया है! वाह-वाह.. अच्छा हुआ- मुम्बई में आकर गिरा। गधा रंजन कंटेनर में शीतल को लेकर इधर ही आएगा। पहले बाबा पिद्दी से पंकज बन जाता हूँ!

    (बाबा पिद्दी चेहरे से दाढ़ी उतारकर फेंक देते हैं और फिर मंत्र पढ़कर हाथ हिलाते हैं। बाबा पिद्दी के शरीर पर पंकज के कपड़े आ जाते हैं।)

    पंकज : गधा रंजन को कंटेनर के साथ मुम्बई पहुँचने में कम से कम दो दिन का समय लगेगा। तब तक यह पता लगाना होगा- गधा रंजन पर नीली रोशनी का असर क्यों नहीं पड़ा? नास्त्रेदमस की आत्मा तो यही कहती है अपनी भविष्यवाणी में- 'रोशनी से पैदा होगा नीला महाकाल.. पहलवान का बनेगा काल..'

    (पंकज एक टैक्सी रोककर बैठ जाता है। टैक्सी जाती है। थोड़ी दूर चलने के बाद टैक्सी बाज़ार से गुज़रती है। पंकज खिड़की से दूकानों का नज़ारा देखता रहता है। तभी पंकज की दृष्टि एक चश्मे की दूकान के बाहर लगे बड़े से बोर्ड पर पड़ती है।)

    पंकज : (ड्राइवर से) रोको-रोको.. टैक्सी रोको!

    (ड्राइवर टैक्सी रोक देता है। पंकज टैक्सी से उतरकर चश्मे की दूकान के बाहर लगे बड़े से बोर्ड को पढ़ता है।)

    पंकज : ब्लू रे कट प्रीमियम आप्टिकल लेंस.. ब्लू रे यानि नीली किरण.. किरण का मतलब रोशनी भी होता है, मगर ये ब्लू रे कट क्या होता है? चलो, अन्दर चलकर पूछते हैं।



    (पंकज दूकान के अन्दर जाता है।)

    (दृष्य - ६९ समाप्त)

  6. #226
    कर्मठ सदस्य superidiotonline's Avatar
    Join Date
    May 2017
    प्रविष्टियाँ
    4,209
    Rep Power
    6
    'कंटेनर'

    (दृष्य-७०)

    (पंकज दरवाज़ा खोलकर चश्मे की दूकान के अन्दर आता है। दूकानदार पंकज को देखता है।)

    दूकानदार : आइए.. आइए..

    पंकज : ये ब्लू रे कट ग्लास क्या होता है? मैं कुछ समझा नहीं।

    दूकानदार : मैं समझाता हूँ। देखिए- हमारे लैपटाप, टैबलेट, डेस्कटॉप, स्मार्टफ़ोन वगैरा की स्क्रीन से एक बहुत ही ख़तरनाक रोशनी निकलती है जिसे अल्ट्रावायलेट रेज़ कहते हैं। यह रोशनी आँखों को दिखाई तो नहीं पड़ती मगर हमारी आँखों को बहुत नुकसान पहुँचाती है। आपने सुना होगा- सूरज की रोशनी में भी अल्ट्रावायलेट रेज़ होती है।

    पंकज : हाँ-हाँ.. सुना है। शायद इसीलिए ड्राकुला और भूत-प्रेत दिन के समय दिखाई नहीं देते!

    (दूकानदार की समझ में कुछ नहीं आता।)

    दूकानदार : भूत-प्रेत? ड्राकुला?

    पंकज : कुछ नहीं.. आप आगे बताइए।

    (दूकानदार चश्मे का एक लेंस निकालकर पंकज को दिखाता है।)

    दूकानदार : इस ख़तरनाक अल्ट्रावायलेट रोशनी से आँखों को बचाने के लिए एक ख़ास किस्म का लेंस बनाया गया है जो अल्ट्रावायलेट रेज़ को पूरी तरह से रोक देता है।

    पंकज : अच्छा.. ये कैसे पता चलता है- लेंस वाकई ब्लू रे कट है? देखने में तो साधारण लेंस की तरह लगता है?

    (दूकानदार एक छोटी पेन टार्च निकालता है जो देखने में कलम की तरह लग रही है।)

    दूकानदार : इस लेंस को चेक करने के लिए इस ख़ास किस्म की टार्च को बनाया गया गया है। इस टार्च में से अल्ट्रावायलेट रोशनी निकलती है। ये देखिए....

    (दूकानदार टार्च से लेंस पर नीली रोशनी फेंकता है। रोशनी लेंस के आरपार नहीं होती। पंकज आश्चर्यचकित रह जाता है।)

    ....देखा आपने- नीली रोशनी लेंस के आरपार नहीं हुई!

    (पंकज सोचता है- 'अब समझ में आया- गधा रंजन साधारण नीली रोशनी से नहीं, अल्ट्रावायलेट रोशनी से ख़त्म होगा! इसीलिए नास्त्रेदमस की आत्मा ने भविष्यवाणी की थी- रोशनी से पैदा होगा नीला महाकाल.. पहलवान का बनेगा काल..' पंकज खुश हो जाता है।)

    पंकज : ये अल्ट्रावायलेट रोशनी फेंकने वाला कलम कितने का है?

    दूकानदार : दो सौ रुपए।

    पंकज : मुझे दस हजार कलम चाहिए.. अभी इसी वक्त।

    (दूकानदार आश्चर्यपूर्वक पंकज को देखता है।)

    दूकानदार : इतना कलम तो अभी हमारे पास स्टॉक में नहीं है। आप हमें आधे घंटे का समय दीजिए। इन्तेजाम हो जाएगा।

    पंकज : ठीक है। मैं इन्तेज़ार कर रहा हूँ।।

    (दृष्य - ७० समाप्त)

  7. #227
    कर्मठ सदस्य MahaThug's Avatar
    Join Date
    Aug 2016
    प्रविष्टियाँ
    1,298
    Rep Power
    4
    क्या कहानी लिखी है!
    महाठग आप ठगाईए, ओर न ठगिए कोय । आप ठगें सुख ऊपजे, ओर ठगें दुःख होय ॥

  8. #228
    कर्मठ सदस्य superidiotonline's Avatar
    Join Date
    May 2017
    प्रविष्टियाँ
    4,209
    Rep Power
    6
    Quote Originally Posted by MahaThug View Post
    क्या कहानी लिखी है!
    तारीफ़ कर रहे हैं या मज़ाक़?

  9. #229
    कर्मठ सदस्य sanjaychatu's Avatar
    Join Date
    Aug 2015
    प्रविष्टियाँ
    3,857
    Rep Power
    7
    Quote Originally Posted by superidiotonline View Post
    तारीफ़ कर रहे हैं या मज़ाक़?
    मजाक में तारीफ कर रहे लगते है महाठग जी !

  10. #230
    कर्मठ सदस्य sanjaychatu's Avatar
    Join Date
    Aug 2015
    प्रविष्टियाँ
    3,857
    Rep Power
    7
    वैसे मेरी तरफ से तारीफ का एक ब्रांड न्यू बनाया हुवा पुल पेश है !
    रसिको के लिए रससिद्ध रचना ,,,,
    आभार ,,

Page 23 of 25 प्रथमप्रथम ... 132122232425 LastLast

Thread Information

Users Browsing this Thread

There are currently 2 users browsing this thread. (0 members and 2 guests)

Bookmarks

Posting Permissions

  • You may not post new threads
  • You may not post replies
  • You may not post attachments
  • You may not edit your posts
  •