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Thread: कंटेनर

  1. #1
    कर्मठ सदस्य superidiotonline's Avatar
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    May 2017
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    Cool कंटेनर

    कथा सार

    कंटेनर कहानी की फिल्मी शुरूआत होती है- सड़क पर एक बड़ा सा कंटेनर चला जा रहा है। लोग समझते हैं- खाली कंटेनर है मगर कंटेनर में कैद किया गया है एक नामी-गिरामी समाचार-पत्र के चीफ करेस्पांडेंट को। बाद में राज़ खुलता है कंटेनर में चीफ करेस्पांडेंट को कैद किया है एक साइंटिस्ट धोबी की आत्मा ने जो गधों से बहुत प्रेम करता है। धोबी जब जिन्दा था तो अपने 'गधा-प्रेम' के कारण उसने अपनी सारी जिंदगी गधों के कल्याण में लगा दी। 'गधा-प्रेमी' धोबी ने अपने शोध से पता चलाया कि वाशिंग मशीन के बढ़ते उपयोग के कारण गधों का धंधा बन्द हो गया है जिसके कारण गधे भूखे मर रहे हैं। गधों की जिंदगी बचाने के लिए लोगों में वाशिंग मशीन का उपयोग कम करने के लिए गधा-प्रेमी धोबी बड़ी कोशिश करता है, मगर उसकी बात कोई नहीं सुनता। अदालत से भी गधा-प्रेमी धोबी हार जाता है और गधों को बचाने में नाकामयाब रहता है। अपनी नाकामी से निराश होकर धोबी आत्महत्या कर लेता है.. और फिर धोबी की आत्मा में तमाम गधों की आत्मा मिल जाती है और धोबी की आत्मा बहुत ही खतरनाक आत्मा बन जाती है जो गधों की मौत का बदला इन्सानों से लेने के लिए उतारू है। लोगों के घरों से वाशिंग मशीन उड़-उड़ कर गायब होने लगते हैं और लोग हैरान और परेशान हो जाते हैं। कंटेनर में जिस चीफ़ करेस्पांडेट को बन्द किया गया है उसकी गलती सिर्फ़ इतनी है कि वह बेचारी वाशिंग मशीन का उपयोग करती है और गधा-प्रेमी धोबी जब जिन्दा था तो एक बार वह मरते गधों को बचाने के लिये अखबार में न्यूज़ छपवाने गया था मगर चीफ करेस्पांडेंट ने बकवास बताकर न्यूज़ छापने से इंकार कर दिया था। इसी बात का बदला लेने के लिये धोबी की आत्मा ने चीफ करेस्पांडेंट को कंटेनर में बन्द कर दिया!

    चीफ करेस्पांडेंट कंटेनर से कैसे आजाद होती है? गधा-प्रेमी धोबी की खतरनाक आत्मा कैसे काबू में आती है? जानने के लिए हमारी यह सूपर-ढूपर ब्लॉकबस्टर फिल्मी स्टोरी 'कंटेनर' मात्र १० करोड़ में खरीदकर फिल्म बनाने का महाआनन्द उठाएँ!

  2. #2
    कर्मठ सदस्य sanjaychatu's Avatar
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    Aug 2015
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    बहुत अच्छे सुपर साहब ,,,,,लगे रहिये ,,,

  3. #3
    कर्मठ सदस्य MahaThug's Avatar
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    Aug 2016
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    एकदम नया विषय है! ज़ारि रखिए!
    महाठग आप ठगाईए, ओर न ठगिए कोय । आप ठगें सुख ऊपजे, ओर ठगें दुःख होय ॥

  4. #4
    सदस्य bapu ji's Avatar
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    Sep 2018
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    rajputana
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    Quote Originally Posted by superidiotonline View Post
    कन्टेनर का एक दृष्य चीफ करेस्पांडेंट और गधा प्रेमी धोबी के साथ-

    (गधा-प्रेमी धोबी एक महिला चीफ करेस्पांडेंट के कक्ष में प्रवेश करता है।)

    चीफ करेस्पांडेंट : आइए, बैठिए।

    (गधा-प्रेमी धोबी कुर्सी पर बैठ जाता है।)

    चीफ करेस्पांडेंट : बताइए.. क्या न्यूज़ है आपके पास? सुना है- आपके पास बहुत दमदार स्टोरी है?

    गधा-प्रेमी धोबी : हाँ जी.. गधे..

    चीफ करेस्पांडेंट : (उछलकर घबड़ाते हुए) गधे? कहाँ हैं गधे? अखबार के दफ़्तर में ये गधे कहाँ से घुस आए? सिक्योरिटी..

    (चीफ करेस्पांडेंट घंटी बजाती है। दो सिक्योरिटी गार्ड दरवाज़ा खोलकर कक्ष में प्रवेश करते हैं और भागते हुए चीफ करेस्पांडेंट के पास आकर प्रश्नवाचक दृष्टि से चीफ करेस्पांडेंट को देखते हैं।)

    गधा-प्रेमी धोबी : (जल्दी से) जी.. अखबार के दफ़्तर में गधे नहीं घुस आए हैं। मैं कह रहा था- गधे भूखे मर रहे हैं। गधों पर बहुत बड़ा संकट आ चुका है। गधों की जान ख़तरे में है। बेचारे बेज़ुबान गधों को बचाइए।

    (चीफ करेस्पांडेंट जाने का इशारा करती है और सिक्योरिटी गार्ड कक्ष से बाहर चले जाते हैं।)

    चीफ करेस्पांडेंट : (आश्चर्यपूर्वक गधा-प्रेमी धोबी से) मैं कुछ समझी नहीं? गधों पर संकट? कैसा संकट?

    गधा-प्रेमी धोबी : छोटा-मोटा नहीं.. गधों के सिर पर बहुत बड़ा संकट मंडरा रहा है। बेचारे बेज़ुबान गधों का धंधा पानी बन्द हो गया है!

    चीफ करेस्पांडेंट : (आश्चर्यपूर्वक) गधों का धंधा-पानी बन्द हो गया है? मतलब?

    गधा-प्रेमी धोबी : बिल्कुल ठीक सुना आपने। गधों का धंधा-पानी बन्द हो गया है जिसके कारण गधे भूखे मर रहे हैं!

    चीफ करेस्पांडेंट : देखिए, आप साफ-साफ बताइए- गधों का धंधा-पानी बन्द हुआ है या धोबियों का? क्या आप धोबी हैं?

    गधा-प्रेमी धोबी : जी नहीं.. मैं नहीं, मेरे पिताजी धोबी थे और वे अपने गधों से बहुत प्यार करते थे।

    चीफ करेस्पांडेंट : (उबासी लेते हुए) अच्छा!

    गधा-प्रेमी धोबी : (उत्साहपूर्वक) पिता जी ने बचपन से मुझे गधों से प्यार करने की तालीम दी।

    चीफ करेस्पांडेंट : (उबासी लेते हुए) अच्छा!

    गधा-प्रेमी धोबी : (उत्साहपूर्वक) पिता जी के कारण मैं भी गधों से बहुत प्यार करता हूँ।

    चीफ करेस्पांडेंट : (उबासी लेते हुए) ठीक है.. ठीक है! मैं समझ गई- आपके पिता जी गधों से बहुत प्यार करते थे.. और आप भी गधों से बहुत प्यार करते हैं! मगर आप एक दमदार स्टोरी लेकर मुझसे मिलने आए थे? प्लीज़ आप स्टोरी सुनाइए।

    गधा-प्रेमी धोबी : वही तो सुना रहा हूँ। मैं एक साइंटिस्ट हूँ और मैंने गधों पर एक बहुत बड़ा रिसर्च किया है।

    चीफ करेस्पांडेंट : (उबासी लेते हुए) अच्छा! क्या पता चला आपको अपनी गधा-रिसर्च से?

    गधा-प्रेमी धोबी : जी.. मुझे पता चला है- कपड़ा धुलने के लिए धोबियों ने गधों का इस्तेमाल करना बिल्कुल बन्द कर दिया है। अब वे गधों पर कपड़ों की गठरी लादकर घाट पर नहीं ले जाते!

    चीफ करेस्पांडेंट : (मुँह बनाकर) अच्छा!

    गधा-प्रेमी धोबी : जी.. अब धोबी गधों की जगह बड़ी-बड़ी वाशिंग मशीनों का प्रयोग करने लगे हैं जिसके कारण गधों का धंधा-पानी बन्द हो गया है!

    चीफ करेस्पांडेंट : (मुँह बनाकर) अच्छा!

    गधा-प्रेमी धोबी : यही नहीं, अपने बेकार गधों को धोबियों ने आवारा छोड़ दिया है। बेचारे गधों के सिर से छ्त छिन गई है और गधे बेचारे भूखे मर रहे हैं, क्योंकि शहर में उनके चरने के लिए घास नहीं है!

    चीफ करेस्पांडेंट : (मुँह बनाकर) अच्छा!

    गधा-प्रेमी धोबी : वाशिंग मशीन के बढ़ते उपयोग के कारण लोग अपना कपड़ा घर पर ही धुल लेते हैं जिसके कारण धोबियों का काम बहुत कम हो गया है। हमें वाशिंग मशीन का उपयोग करना बन्द करने के लिए लोगों को जागरूक करना होगा.. धोबियों को जागरूक करना होगा.. बेचारे मरते गधों को बचाना होगा!

    चीफ करेस्पांडेंट : (अलक्ष्यतापूर्वक) तो इसमें मैं आपकी क्या सहायता कर सकती हूँ?

    गधा-प्रेमी धोबी : (उत्साहपूर्वक) आप इस न्यूज़ को अखबार में छापिए, जिससे धोबी जागरूक हो सकें.. लोग जागरूक हो सकें और वाशिंग मशीन का उपयोग हमेशा के लिए बन्द हो सके। वाशिंग मशीन का उपयोग बन्द हो गया तो धोबी लोग फिर से गधे पालना शुरू कर देंगे और बेचारे गधे भूखे नहीं मरेंगे!

    चीफ करेस्पांडेंट : (क्रोधपूर्वक मेज़ पर मुक्का मारते हुए) ये दमदार न्यूज़ है?

    गधा-प्रेमी धोबी : बेचारे गधे भूखे मर रहे हैं। क्या यह आपके लिए दमदार स्टोरी नहीं है?

    चीफ करेस्पांडेंट : देखिए, मीडिया का कीमती वक्त बर्बाद कर रहे हैं आप! अरे, इस न्यूज़ को मैं अखबार में छापूँगी तो मेरी नौकरी चली जाएगी। आप चाहते हैं- आपके गधों के साथ मैं भी भूखी मरूँ?

    गधा-प्रेमी धोबी : (गिड़गिड़ाते हुए) बेचारे बेज़ुबान गधों के लिए भूखा मरना पुण्य का काम है, मैडम! आप इस न्यूज़ को अखबार में छापिए, मैडम। मैं हाथ जोड़कर आपसे विनती करता हूँ- बेचारे गधों को मरने से बचा लीजिए, मैडम। प्लीज़ मैडम।

    चीफ करेस्पांडेंट : (क्रोधपूर्वक) देखिए.. इंसानों की न्यूज़ छापने के लिए तो प्रिंट मीडिया में स्पेस कम पड़ता है और आप चाहते हैं- मैं गधों की एक महाबकवास न्यूज़ छाप दूँ?

    गधा-प्रेमी धोबी : (हाथ जोड़कर) प्लीज़ मैडम.. बेचारे गधों की सोचिए जो बोल भी नहीं सकते!
    लगता है बाबाजी 2.0 मूवी देखकर आए है वह भी पहले दिन पहला शो
    कुछ ख्वाहिसों का कत्ल करके मुस्कुरा दो ज़िंदगी खुद बा खुद बेहतर हो जाएगी

  5. #5
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    Quote Originally Posted by bapu ji View Post
    लगता है बाबाजी 2.0 मूवी देखकर आए है वह भी पहले दिन पहला शो
    गुर्रर.. गुर्रर.. गुर्रर..

    अनीता जी, जल्दी आइए और हमारी कम्प्लेन्ट दर्ज़ कीजिए-

    बापूजी जी हमारी कहानी का भंडाफोड़ करके हमारा फिल्मी धंधा-पानी बिगाड़ रहे हैं!

  6. #6
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    Quote Originally Posted by superidiotonline View Post
    गुर्रर.. गुर्रर.. गुर्रर..

    अनीता जी, जल्दी आइए और हमारी कम्प्लेन्ट दर्ज़ कीजिए-

    बापूजी जी हमारी कहानी का भंडाफोड़ करके हमारा फिल्मी धंधा-पानी बिगाड़ रहे हैं!
    इसके संबंध मे हम यही कहेंगे की हुर्रर..... हुर्रर..... हुर्रर..... हुर्रर..... हुर्रर..... हुर्रर....
    कुछ ख्वाहिसों का कत्ल करके मुस्कुरा दो ज़िंदगी खुद बा खुद बेहतर हो जाएगी

  7. #7
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    लगता है बाबाजी 2.0 मूवी देखकर आए है वह भी पहले दिन पहला शो
    बिल्कुल गलत। पहला दिन पहला शो तो बिल्कुल नहीं देखा!


  8. #8
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    बिल्कुल गलत। पहला दिन पहला शो तो बिल्कुल नहीं देखा!

    मेरे पास भी थी कहीं खो गयी
    कुछ ख्वाहिसों का कत्ल करके मुस्कुरा दो ज़िंदगी खुद बा खुद बेहतर हो जाएगी

  9. #9
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    मेरे पास भी थी कहीं खो गयी
    ये वाला थोड़े ही रहा होगा! हिन्दी का रहा होगा।

  10. #10
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    Quote Originally Posted by superidiotonline View Post
    बिल्कुल गलत। पहला दिन पहला शो तो बिल्कुल नहीं देखा!


    यह क्या बाबा जी अकेले अकेले मूवी देख आए!! वे अपने साथ देढ-दो लाख आशिकोंवाली गर्लफ्रेन्ड नहीं ले गए???
    महाठग आप ठगाईए, ओर न ठगिए कोय । आप ठगें सुख ऊपजे, ओर ठगें दुःख होय ॥

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