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Thread: नए साल की खोज

  1. #1
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    Cool नए साल की खोज

    बचपन से हर साल ३१ दिसम्बर को लोगों के मुँह से सुनते-सुनते हमारे कान पक गए। जिधर देखो, उधर एक ही शोर- नया साल आने वाला है, नया साल आ रहा है और फिर रात १२ बजे पटाखों की आवाज़ के साथ चारों ओर एक ही शोर- 'हैप्पी न्यू इयर!' लो जी, नया साल आ गया! बचपन से ही हम नए साल को खोजते चले आ रहे हैं मगर हमें आज तक यह न पता चल सका- ये कम्बख्त नया साल आता किधर से है?

  2. #2
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    २०१८ में हमने इस बात का बीड़ा उठाया कि हम इस बात का खुलासा, भंडाफोड़ और पर्दाफ़ाश करके ही दम लेंगे कि नया साल २०१९ आता किधर से है? ३१ दिसम्बर की सुबह सात बजते ही नया साल आने की टोह लेने के लिए हम सड़क पर उतर आए और इधर-उधर टहलते हुए कान लगाकर लोगों की बातें ध्यान से सुनने लगे।

  3. #3
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    सुबह सात बजे से लेकर दस बजे तक तीन घण्टे की भारी मशक्कत के बाद हमें लोगों के मुँह से सिर्फ़ इतना पता चला कि 'नया साल आने वाला है और रात १२ बजे आएगा।' धीरे-धीरे टहलते हुए हम बस अड्डा पहुँच गए और नए साल के आने की टोह लेने लगे।

  4. #4
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    थोड़ा ध्यान देने पर पता चला कि पुदुच्चेरी जाने वाली बसों में गजब की भीड़ थी जबकि दूसरी बसें खाली चल रहीं थीं। पूछने पर पता चला कि 'नया साल आने वाला है न। इसीलिए लोग पुदुच्चेरी जा रहे हैं।' हमारे तो कान खड़े हो गए। कम्बख्त नया साल पुदुच्चेरी के रास्ते आने वाला था और हम जन्मजात मूखों की तरह अभी बस अड्डे पर ही टहल रहे थे!

  5. #5
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    उसी समय चलने के लिए तैयार खड़ी एक बस का कंडक्टर हलक फाड़कर चीखा- 'पाण्डि-पाण्डि-पाण्डि।' ..और फिर बस धीरे-धीरे चल दी। हमने देखा कि बस यात्रियों से भर चुकी थी, फिर भी नए साल के आगमन को रंगे हाथ पकड़ने के लालच में हमने आव देखा न ताव- दौड़कर चलती बस में लटक गए। थोड़ी देर में बस सड़क पर फर्राटे भरने लगी। हमने चैन की साँस ली। इस बार बचकर न जाने पाएगा कम्बख्त नया साल!

  6. #6
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    लगभग पौन घंटे की फर्राटेदार साहसिक यात्रा के बाद बस ने हमें पुदुच्चेरी बस अड्डे पर उतार दिया। हमने इस यात्रा को 'फर्राटेदार साहसिक यात्रा' का नाम इसलिए दिया, क्योंकि पुदुच्चेरी जाने वाली इन निजी संचालकों की बसों में यात्रा करना ही जोखिम से भरा होता है। एक-दूसरे से आगे निकलकर सवारी पकड़ने की होड़ में इन बसों के ड्राइवर बस को बस नहीं, हवाई जहाज समझकर चलाते हैं। फिर भी हमारी जानकारी में आज तक इन बसों द्वारा कोई दुर्घटना घटित नहीं हुई। फर्राटेदार बस चलाने में इतने माहिर होते हैं इन बसों के ड्राइवर।

  7. #7
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    पुदुच्चेरी बस अड्डे पर उतरकर हम ध्यान से इधर-उधर टोह लेने लगे। पता नहीं कम्बख़्त नया साल किस कोने से प्रकट हो जाए! बहुत देर तक टोह लेने के बाद जब हमें नए साल के बारे में कुछ पता नहीं चल सका तो हम निराश होकर धीरे-धीरे चलते हुए बस अड्डे से बाहर आ गए। बस अड्डे के बाहर एक विक्रम ऑटोरिक्शा का ड्राइवर सवारियों को ठूँस-ठूँसकर विक्रम में भर रहा था। हमें खड़ा देखकर ड्राइवर ने दहाड़कर हमसे पूछा- 'कहाँ जाना है?' जैसे हमने विक्रम में न बैठकर बहुत बड़ा ज़ुर्म कर दिया हो। हमने कहा- 'वो नया साल....' हमारी बात पूरी होने से पहले ही ड्राइवर ने गर्जदार स्वर में 'हाँ-हाँ' कहते हुए हमें विक्रम में ठूँस दिया। थोड़ी देर में सवारियों से ठुँसी-भरी विक्रम हिचकोले खाती हुई सड़क पर दौड़ने लगी।

  8. #8
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    विक्रम को चले अभी दो मिनट भी नहीं हुए होंगे कि ड्राइवर ने गुर्राते हुए सवारियों से कहा- 'चलो, सब किराया निकालो.. सात-सात रुपया फुटकर।' हम चौंके क्योंकि ऐसे वाहनों में गंतव्य पर पहुँचने के बाद ही किराए का भुगतान करने का रिवाज पूरे देश में है, किन्तु यहाँ पर तो ड्राइवर किराए के लिए इस तरह चीख रहा था जैसे सवारियाँ बिना किराया दिए बीच रास्ते में ही उतरकर भाग जाएँगी। जब सवारियों ने भी ना-नुकुर किए बिना चुपचाप ड्राइवर को किराए का भुगतान करना शुरू कर दिया तो हम समझ गए कि यहाँ पर विक्रम के किराए का भुगतान 'बस और ट्रेन की तरह' एडवांस में करना पड़ता है। हमने भी चुपचाप ड्राइवर को किराए का भुगतान कर दिया। सरकार ड्राइविंग करते वक्त मोबाइल पर बात करने तक से मना करती है और नियम तोड़ने पर चालान कर देती है। दरअसल इंसान के दिमाग़ का प्रॉसेसर भगवान ने सिंगल कोर वाला बनाया है जिसके कारण दिमाग़ एक समय में एक ही काम कुशलतापूर्वक कर सकता है। मगर यहाँ तो ड्राइवर का ड्राइविंग कौशल देखने लायक था। विक्रम का ड्राइवर भीड़-भाड़ वाली सड़क पर फर्राटेदार ड्राइविंग करते हुए यात्रियों से किराया वसूल कर इस तरह सहजतापूर्वक फुटकर की वापसी कर रहा था जैसे उसके दिमाग़ में भगवान ने दस कोर वाला 'डेका कोर' प्रॉसेसर लगा रखा हो!

  9. #9
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    बहरहाल दस मिनट बाद ड्राइवर ने विक्रम रोककर दहाड़ लगाई- 'चलो, उतर लो सब।' और फिर सभी सवारियाँ फटाफट उतरने लगीं। हमने विक्रम से उतरकर देखा तो हक्का-बक्का रह गए। विक्रम के ड्राइवर ने हमें पुदुच्चेरी सरकारी अस्पताल के सामने उतार दिया था। हमने घबड़ाते हुए ड्राइवर से पूछा- 'वो नया साल....' हमारी बात पूरी भी न हो सकी और ड्राइवर ने एक सड़क की ओर इशारा करते हुए कहा- 'बस थोड़ी दूर है। सीधे चला जाना है। कहीं मुड़ना नहीं है।' हमने देखा कि बड़ी तादाद में लोग उधर ही जा रहे थे। अपनी अक्ल का प्रयोग करके हम तत्काल समझ गए कि नया साल उधर से ही आने वाला है जिसे देखने के लिए लोग तत्परता से भागे जा रहे हैं। हम भी खुशी-खुशी उसी दिशा में चल दिए। मगर ये क्या? पास जाने पर पता चला कि पुलिस ने बैरीकेड लगाकर रास्ता बन्द कर रखा था और वाहनों को उधर नहीं जाने दिया जा रहा था।

  10. #10
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    May 2017
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    वैसे इधर पाँडिचेरी में हिन्दी पढ़ने वाले न के बराबर हैं, लेकिन उस समय हमें बड़ी हैरानी हुई जब इस व्यंग्य के आंशिक प्रकाशन के बाद पिछले हफ्ते हम पाँडिचेरी गए। हमने देखा कि विक्रम चालकों ने फर्राटेदार चलती गाड़ी में यात्रियों से किराया वसूल करके फुटकर वापस करने का सर्कस और करतब दिखाना बन्द कर दिया है और बड़ी शराफत से गाड़ी चलने से पहले ही यात्रियों से किराया वसूल कर रहे हैं! शायद पाँडिचेरी पुलिस के किसी उच्चाधिकारी की नज़र इस लेख पर पड़ गई होगी। वैसे भी आइएएस० और आइपीएस० प्रायः हिन्दी भाषी ही होते हैं और यदि ऑनलाइन पढ़ने का शौक हो तो गूगल बाबा की कृपा से हि०वि०मं० सर्च में ऊपर आ ही जाता है!

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