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Thread: 'हर-हर मोदी, घर-घर मोदी': आखिर कब तक?

  1. #11
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    उपरोक्त लेख में इस बात का स्पष्ट संकेत मिलता है कि आगे भी मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार भारत गणराज्य में कायम रहने की पूरी सम्भावना है। आइए, अब नज़र डालते हैं आजादी के बाद भारत गणराज्य में अब तक हुए सभी आम चुनावों पर एक नज़र-

    67 सालों के आंकड़ों से समझें, कभी देश की इकलौती राष्ट्रीय पार्टी रही कांग्रेस कैसे खोती गई जनाधार

    26 May. 2019 08:44

    1984 सीटों पर जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस ने खोया जनाधार

    साल 2014 के लोकसभा चुनाव में 'मोदी लहर' में भाजपा को अपार सफलता मिली थी और सत्ता में रही कांग्रेस ने अबतक का सबसे खराब प्रदर्शन किया था। इस बार नतीजे के एक दिन पहले तक सरकार बनाने का दावा करने वाली कांग्रेस 'मोदी' नाम की सुनामी में बह गई और 17 राज्यों में खाता भी नहीं खोल पाई। यह वही कांग्रेस पार्टी है, जो एक समय देश की एकमात्र राष्ट्रीय पार्टी हुआ करती थी और कई आम चुनावों में आराम से जीत दर्ज करती रही।

  2. #12
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    साल 1984 में हुए आम चुनावों में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कीर्तिमान स्थापित कर दिया था। इस चुनाव में 415 सीटों पर जीत हासिल कर इतिहास में रिकॉर्ड दर्ज कर चुकी कांग्रेस धीरे-धीरे अपना जनाधार खोती चली जाएगी, ऐसा कांग्रेस ने भी नहीं सोचा होगा। देखा जाए तो साल 1951-52 में हुए पहले आम चुनाव से लेकर इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के दौर तक कोई पार्टी कड़ी टक्कर नहीं दे सकी थी। इंदिरा की सरकार गिरी भी तो दूसरी बार जोरदार वापसी हुई, लेकिन पिछले दो चुनावों में कांग्रेस का ऐसा बुरा हाल हुआ कि मुख्य विपक्षी दल का दर्जा मिलना भी मुश्किल हो गया।

  3. #13
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    आइए देश के पहले आम चुनाव से अब तक हुए चुनावों पर नजर डालते हैं कि कैसे कांग्रेस अपना जनाधार खोती चली गई:

    1951-52 पहला आम चुनाव: 264 सीटों पर जीती थी कांग्रेस

    आजाद भारत का पहला लोकसभा चुनाव अक्टूबर 1951 से लेकर फरवरी 1952 के बीच हुआ था। पहला लोकसभा चुनाव 489 सीटों पर लड़ा गया था। कांग्रेस के साथ ही भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, सोशलिस्ट पार्टी, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया, भारतीय बोल्शेविक पार्टी, जमींदार पार्टी समेत 53 पार्टियां मैदान में थीं। 38 सीटों पर 47 निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे। चुनाव में कुल 1874 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे थे। कांग्रेस ने 264 सीटों पर जीत दर्ज की थी और सरकार बनाई थी। भाकपा को 16, सोशलिस्ट पार्टी को 12 और भारतीय जनसंघ को तीन सीटें मिली थी।

  4. #14
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    1957 आम चुनाव: कांग्रेस को मिली 371 सीटें

    साल 1957 में 494 सीटों पर देश का दूसरा आम चुनाव हुआ, जिसमें कांग्रेस को प्रचंड बहुमत मिला था। कांग्रेस ने 371 सीटें जीती थी। 542 निर्दलियों ने दूसरा आम चुनाव लड़ा और इनमें से 42 ने जीत दर्ज की, वहीं भाकपा ने 111 प्रत्याशी मैदान में उतारे और 27 पर जीत दर्ज की। प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के 194 में से 19 ने चुनाव जीता। वहीं, भारतीय जनसंघ ने 133 प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे थे जिनमें से सिर्फ चार ही जीत दर्ज कर पाए।

  5. #15
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    1962 आम चुनाव : 361 सीटें जीत कर इंदिरा गांधी बनी पीएम

    1962 का आम चुनाव पंडित जवाहर लाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री के देहांत से लेकर इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने का गवाह रहा। कांग्रेस ने 494 सीटों में से 361 सीटें जीती। तीसरे आम चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के खाते में 29 सीटें आई थीं। स्वतंत्र पार्टी को 18, जनसंघ को 14, जबकि सोशलिस्ट पार्टी को 12 सीटों पर जीत मिली थी। 1959 में इंदिरा को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया था और इस चुनाव में जीत और प्रधानमंत्री के रूप में आधिकारिक तौर पर भारतीय राजनीति में जोरदार उपस्थिति बनी।

  6. #16
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    1967 आम चुनाव: कांग्रेस को मिली 283 सीटें

    1967 में हुए चौथे आम चुनाव में कांग्रेस ने 520 सीटों में से 283 सीटें जीतीं। यह पहली बार था जब कांग्रेस को किसी लोकसभा चुनाव में इतना कम बहुमत मिला था। पार्टी का वोट शेयर भी कम रहा। इस लोकसभा चुनाव में 35 सीटें जीतकर 'जनसंघ' तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। वहीं 'स्वतंत्र पार्टी' ने 44 सीटें जीती। प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने इस चुनाव में 13 सीटें जीती थीं। इस चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर 40.78 फीसदी में ही सिमट गया था और चौथे लोकसभा चुनाव में तीसरे लोकसभा चुनाव के मुकाबले 78 सीटें कम मिली थीं।

  7. #17
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    1971 पांचवा आम चुनाव: इंदिरा विरोध के बावजूद कांग्रेस को मिली जीत

    1971 में विपक्ष के 'इंदिरा हटाओ' नारे पर इंदिरा गांधी का 'गरीबी हटाओ' नारा भारी पड़ा। उनके नेतृत्व वाली कांग्रेस नेे लोकसभा की 545 सीटों में से 352 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस (ओ) के खाते में सिर्फ 16 सीटें ही आई। भारतीय जनसंघ ने चुनाव में 22 सीटें जीतीं। सीपीआई ने चुनाव में 23 सीटें जीतीं। जबकि सीपीआईएम के खाते में 25 सीटें आईं। प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने दो सीटें जीतीं जबकि संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के खाते में 3 सीटें आईं। स्वतंत्र पार्टी के खाते में सिर्फ 8 सीटें आई।

  8. #18
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    1977 आम चुनाव: इंदिरा का किला ढहा, मिली मात्र 153 सीटें

    23 जनवरी 1977 ही वो दिन था जब अचानक इंदिरा गांधी ने आकाशवाणी के जरिए देश में आम चुनाव की घोषणा की। देश में तीन दिन में ही चुनाव संपन्न हो गए। चुनाव 16 मार्च 1977 से लेकर 19 मार्च 1977 के बीच हुए। 22 मार्च 1977 को आए चुनाव नतीजे ने कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर दिया। चुनाव में कांग्रेस गठबंधन को मात्र 153 सीटें ही मिली थीं। इस चुनाव में पूरा विपक्ष समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में गोलबंद हुआ था। जनता पार्टी को चुनाव चिन्ह नहीं मिल पाया था, जिसकी वजह से पार्टी ने 'भारतीय लोक दल' के चिन्ह "हलधर किसान" पर चुनाव लड़ा और 298 सीटें जीतीं।

  9. #19
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    *1980 आम चुनाव: कांग्रेस को मिलीं 353 सीटें

    जनता पार्टी की सरकार गिर जाने के बाद इंदिरा गाँधी के नेतृत्व में कांग्रेस (आई) बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 529 में से 353 सीटें जीतकर एक बार फिर सत्ता में वापस लौटी। अन्य पार्टियों का 'जनता गठबंधन' पहले की तरह कोई चमत्कार न दिखा सका और विपक्ष का सूपड़ा साफ हो गया।

    --------------------
    *यह भाग मूल लेख में न होने के कारण सूत्र लेखक द्वारा जोड़ा गया है।

  10. #20
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    1984 आम चुनाव: 415 सीटों पर जीत के साथ कांग्रेस ने रचा इतिहास

    1984 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को रिकॉर्ड तोड़ सीटें मिलीं। इंदिरा गांधी की हत्या से पैदा हुई हमदर्दी ने राजीव गांधी को सत्ता पर बैठाया। यह चुनाव कांग्रेस पूरी तरह इंदिरा की सहानूभूति पर लड़ रही थी। जबकि विपक्ष के पास इसका कोई तोड़ नहीं था। कांग्रेस ने 401 सीटों का प्रचंड बहुमत हासिल कर इतिहास रचा। यह चुनाव 542 लोकसभा सीटों के लिए हुआ था। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को सिर्फ दो सीटें मिली थीं। यह दोनों सीटें भाजपा के बड़े नेता अटल या आडवाणी ने नहीं जीतीं थी। यह सीटें गुजरात और आंध्रप्रदेश में जीती गई थीं। उस वक्त कई दिग्गज नेता चुनाव हार गए थे।

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