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Thread: 'हर-हर मोदी, घर-घर मोदी': आखिर कब तक?

  1. #21
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    *1989 आम चुनाव: पहली बार त्रिशंकु सरकार, कांग्रेस को मिलीं 197 सीटें

    बोफोर्स कांड, एल०टी०टी०ई० और अन्य विवादों के कारण कांग्रेस का जनाधार गिर गया। पहली बार त्रिशंकु लोकसभा बनी जिसमें किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था। 529 सीटों के लिए हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 197, जनता दल ने 143 और भाजपा ने 85 सीटें जीतीं। भाजपा और वाम दलों के बाहरी समर्थन से जनता दल ने नेशनल फ्रंट सरकार बनाई और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी०पी० सिंह) प्रधानमंत्री बने। 1990 में जनता दल में उनके प्रतिद्वंदी चन्द्रशेखर ने बगावत करके समाजवादी जनता पार्टी बना ली और कांग्रेस के वाह्य समर्थन से प्रधानमंत्री बन गए। यह प्रयोग बहुत कम समय के लिए ही चल पाया जिसके कारण मात्र दो वर्षों बाद ही फिर से आम चुनाव हुए।

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    *यह भाग मूल लेख में न होने के कारण सूत्र लेखक द्वारा जोड़ा गया है।

  2. #22
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    1991 आम चुनाव: राजीव गांधी की हत्या के बाद मिलीं 244 सीटें

    21 मई 1991 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की वोटिंग के पहले दौर के ठीक एक दिन बाद हत्या कर दी गई। एलटीटीआई ने तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में चुनाव प्रचार के दौरान राजीव गांधी की हत्या कर दी। इसके बाद जून के मध्य तक चुनाव को स्थगित कर दिया गया। पंजाब में लोकसभा चुनाव बाद में कराए गए, जबकि जम्मू-कश्मीर में आम चुनाव हुए ही नहीं। जून में चुनाव संपन्न हुआ जिसमें कांग्रेस को सबसे ज्यादा 232 सीटें मिलीं। भारतीय जनता पार्टी 120 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही। जनता दल को सिर्फ 59 सीटें मिलीं। 21 जून 1991 को कांग्रेस के पी.वी. नरसिंहराव ने प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।

  3. #23
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    1996 आम चुनाव: कांग्रेस की सीटें घटी, 140 पर सिमटी

    1996 में 11वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। 161 सीटें जीतकर भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। इस चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 140 सीटें मिली और पार्टी दक्षिण में भी पिछड़ गई। अटल बिहारी वाजपेयी ने 16 मई को प्रधानमंत्री का पद संभाला लेकिन बहुमत साबित न कर पाने के कारण 13 दिन ही प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठ पाए। जनता दल के नेता एचडी देवेगौडा ने एक जून को संयुक्त मोर्चा गठबंधन सरकार का गठन किया, लेकिन उनकी सरकार भी 18 महीने ही चली। देवेगौड़ा के कार्यकाल में ही विदेश मंत्री रहे इन्द्र कुमार गुजराल ने अगले प्रधानमंत्री के रूप में 1997 में पदभार संभाला। कांग्रेस इस सरकार को बाहर से समर्थन दे रही थी।

  4. #24
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    1998 आम चुनाव: 141 पर सिमटी कांग्रेस, भाजपा की सरकार

    साल 1998 देश में 12वें लोकसभा चुनाव का गवाह बना। इस चुनाव में भाजपा को 182 सीटें मिली, जबकि कांग्रेस के खाते में 141 सीटें आईं। सीपीएम ने 32 सीटें जीती और सीपाआई के खाते में सिर्फ नौ सीटें आई। समता पार्टी को 12, जनता दल को 6 और बसपा को 5 लोकसभा सीटें मिली। क्षेत्रीय पार्टियों ने 150 लोकसभा सीटें जीतीं। भाजपा ने शिवसेना, अकाली दल, समता पार्टी, एआईएडीएमके और बिजू जनता दल के सहयोग से सरकार बनाई और अटल बिहार वाजपेयी फिर से प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे, लेकिन इस बार अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार 13 महीने में ही गिर गई।

  5. #25
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    1999 आम चुनाव: 141 से घटकर 114 पर सिमट गई कांग्रेस

    साल 1999 के आम चुनाव में कांग्रेस और सिमटी। इस चुनाव में विदेशी सोनिया बनाम स्वदेशी वाजपेयी का माहौल बनाया गया। भारतीय जनता पार्टी को सबसे ज्यादा 182 सीटें मिली और वाजपेयी केंद्र में सरकार बनाने में कामयाब रहे, जबकि कांग्रेस के खाते में सिर्फ 114 सीटें आई थीं। सीपीआई ने चुनाव में 33 सीटें जीतीं। यह पहली बार था जब अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई में केंद्र में किसी गैर-कांग्रेसी सरकार ने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया।

  6. #26
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    2004 आम चुनाव: 145 सीटों के साथ कांग्रेस की सत्ता में वापसी

    साल 2004 के 14वें लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का 'इंडिया शाइनिंग' का नारा असफल रहा और कांग्रेस सत्ता में लौटी। कांग्रेस की जीत भाजपा के लिए करारा झटका थी क्योंकि साल 1999 में जीत के बाद पहली बार भाजपा केंद्र में पांच साल सरकार चलाने में सफल रही थी। इस चुनाव में कांग्रेस को 145 सीटें मिलीं। जबकि भाजपा के खाते में 138 सीटें आई। सीपीएम के खाते में 43 सीटें गई और सीपीआई 10 सीटें जीतने में कामयाब रही।

  7. #27
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    2009 आम चुनाव: 206 सीटों के साथ दोबारा पीएम बने मनमोहन

    इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस दोबारा सत्ता में आई। सोनिया गांधी के पीएम बनने से इंकार के बाद मनमोहन सिंह दूसरी बार प्रधानमंत्री बने। 2009 के 15वें आम चुनाव में कांग्रेस ने 206 सीटें जीतीं और भारतीय जनता पार्टी के खाते में सिर्फ 116 सीटें ही आई। एनडीए फिर से सरकार बनाने में विफल रही। कांग्रेस ने यूपी में 21 सीटें जीतीं जबकि भाजपा के खाते में इस सूबे से सिर्फ 10 सीटें ही आई।

  8. #28
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    2014 आम चुनाव: कांग्रेस का शर्मनाक प्रदर्शन, विपक्ष को तरसी

    2014 में हुए देश के 16वें आम चुनाव में पहली बार ऐसा हुआ था कि कोई गैर-कांग्रेसी सरकार प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई थी। 2014 में एनडीए ने कुल 336 लोकसभा सीटों पर रिकॉर्ड जीत दर्ज की थी, जिनमें से 282 सीटें अकेले भारतीय जनता पार्टी की थी। वहीं कांग्रेस के लिए यह चुनाव शर्मनाक प्रदर्शन वाला रहा। कांग्रेस महज 44 सीटों पर सिमट गई। 1984 में जहां कांग्रेस ने बहुमत की सरकार बनाई थी, वहीं 2014 में भाजपा ने अपने दम पर सरकार बनाई।

  9. #29
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    2019 आम चुनाव: 52 सीटों के साथ फिर मोदी सुनामी में बही कांग्रेस

    2014 के आम चुनाव में जहां मोदी लहर दिखी थी, तो वहीं 2019 लोकसभा चुनाव में मोदी सुनामी का माहौल बना। 2014 में 44 सीटें लाने वाली कांग्रेस कुछ ही सीटों का इजाफा कर सकी और 52 पर ही पहुंच सकी। शर्मनाक बात यह रही कि देश के 17 राज्यों में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया।

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    साभार : अमर उजाला

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