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Thread: हिन्दी के विकास में 'लुंगी' का महत्व

  1. #11
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    रोज़ाना दो ग़र्म समोसा और एक ग़र्म इमरती के साथ एक ग़र्म कॉफ़ी की आकर्षक योजना सुनकर हिन्दी वाले 'हिन्दी विकार क्लब' के नाम से खुले 'हिन्दी विकास क्लब' पर टूट पड़े और धड़ाधड़ क्लब का सदस्य बनने लगे। सदस्यों की संख्या में अच्छी-खासी बढ़ोत्तरी होने के बाद एक दिन 'हिन्दी विकार क्लब' के नाम से खुले 'हिन्दी विकास क्लब' का उद्घाटन किया गया और जिस दिन 'हिन्दी विकार क्लब' का उद्घाटन हो रहा था उस दिन इत्तेफाक से हमारा गुजरना उधर से ही हुआ। अचानक हमारी दृष्टि चमचमाती हुई नई बिल्डिंग के सामने लगे बड़े से बोर्ड पर केन्द्रित हो गई जिस पर लिखा था- 'हिन्दी विकार क्लब'। बोर्ड पढ़कर हमें बड़ी खुशी हुई। हिन्दी साहित्य के विकारों के बारे में जानकारी देने के लिए शहर में नया क्लब जो खुल गया था। उसी समय लाउडस्पीकर पर घोषणा हुई कि क्लब का सदस्य बनकर नियमित रूप से आने वाले सदस्यों को रोज़ाना दो ग़र्म समोसा और एक ग़र्म इमरती के साथ एक ग़र्म कॉफ़ी दी जाएगी। सुनकर हमारी चटोरी जीभ लपलपाने लगी। यह तो बड़ा अच्छा क्लब है। सदस्यों को रोज़ाना मुफ़्त में नाश्ता-पानी दिया जा रहा है!

  2. #12
    कांस्य सदस्य superidiotonline's Avatar
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    फिर क्या था? हिन्दी साहित्य के तड़के के साथ रोज़ाना मुफ्त में मिलने वाले दो ग़र्म समोसा और एक ग़र्म इमरती के साथ एक ग़र्म कॉफ़ी से भला कौन मूर्ख हाथ धोना चाहेगा? हम लपकते हुए 'हिन्दी विकार क्लब' के बाहर बने पंजीकरण-काउंटर पर पहुँचे और क्लब की सदस्यता का कार्ड बनवाकर अन्दर दाखिल हुए। 'हिन्दी विकार क्लब' के वातानुकूलित स्वागत-कक्ष की दीवारों पर जगह-जगह पर लिखा हुआ था-

    --'हिदी बिकार क्लब मे आपका हर्दिक स्वगत है।'

    --'हिदी आपकी मात्रभषा ही नही राजभषा भी है। ईसलीये क्रप्या हिदी मे बोलीये।'

    --'हिदी बिकार क्लब मे इंगलीश मे बुलना सख्त माना है।'

    --'सदस्यगन क्रप्या हिदी के बिकास में अपना सकिृय योघधान दे।'

  3. #13
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    गलत-सलत हिन्दी पढ़कर हमारे कान खड़े हो गए। इस क्लब में हिन्दी के विकारों के बारे में बताया जा रहा है या हिन्दी में विकार पैदा किया जा रहा है? यह कैसा क्लब है जहाँ पर हिन्दी के विकास के नाम पर हिन्दी की टाँग तोड़कर हिन्दी की अर्थी उठाने की तैयारी चल रही है? इस बात का पता लगाना होगा- इतने बड़े षड़यन्त्र को कौन अंजाम दे रहा है?

  4. #14
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    हिन्दी के खिलाफ़ इतना बड़ा षड़यन्त्र रचने वालों का खुलासा, पर्दाफ़ाश और भण्डाफोड़ करना ही पड़ेगा, नहीं तो ये लोग हिन्दी का कचूमर निकालकर हिन्दी साहित्य में 'टुटही हिन्दी युग' पैदा कर देंगे जिसके बारे में इतिहासकार लिखेंगे कि 'टुटही हिन्दी युग' का यह काल हिन्दी साहित्य का 'काला युग' था जिसमें हिन्दी की टाँग तोड़कर उसका कचूमर निकाल दिया गया था। हिन्दी का कचूमर बनता देखकर सरकार के कान खड़े हो गए और हिन्दी को बचाने के लिए 'टुटही हिन्दी प्रतिबन्ध अधिनियम-2094' नामक एक कठोर कानून बनाया गया, जिसमें हिंगलिश पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाए जाने के साथ अन्तर्जाल में लिखी हिन्दी में दो प्रतिशत से अधिक गलती पाए जाने पर बहुत ही कठोर दण्ड देने का प्रावधान किया गया था।' उसी समय स्वागत-कक्ष में मौजूद युवती ने 'आपका स्वगत है' कहकर हमारे हाथ में जूस का गिलास थमा दिया जिसके कारण हम कल्पनालोक से बाहर आ गए। युवती ने कहा- 'जल्दी से अन्दर जइए। हिन्दी बिकास का कार्यक्रम सुरू हो चूका है!'

  5. #15
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    हम क्रोधपूर्वक लपकते हुए अन्दर पहुँचे तो देखा कि बड़ा सा वातानुकूलित हॉल हिन्दी वालों से खचाखच भरा हुआ था।

    हम यह देखकर दंग रह गए कि शहर में डेढ़ लाख आशिक़ों वाली गर्लफ्रेंड 'हिन्दी विकार क्लब' की अध्यक्ष बनी मंच पर बैठी थी और लुंगी पहने हुए थी। हमने खुश होकर हाथ हिलाते हुए ज़ोर से 'हाय' कहा तो उसने मुँह बनाकर बताया कि क्लब में अँग्रेज़ी बोलने पर सौ रुपया जुर्माना लगता है। इसलिए 'हाय' को हिन्दी में बोलें, नहीं तो जुर्माना भरने के लिए तैयार रहें। हमने घबड़ाकर तत्काल 'हाय' का हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत करते हुए एक बार फिर हाथ हिलाकर ज़ोर से 'ओए' कहा। 'हाय' का 'अचूक अनुवाद' सुनकर शहर में डेढ़ लाख आशिक़ों वाली गर्लफ्रेंड ने खुश होकर 'ओए' का जवाब 'ओए' से दिया। उसी समय लुंगी पहने उद्घोषक ने घोषणा की- 'सबसे पहले हमारे क्लब की मननीय अद्धक्ष महोदया हिन्दी ग्यान बान्टेन्गि।'

  6. #16
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    हमने ज़ोरदार तालियों के साथ सीटी बजाकर अध्यक्ष महोदया का उत्साहवर्धन किया, क्योंकि तालियाँ और सीटियाँ बजाना हमारे व्यक्तिगत प्रोटोकाल में शामिल जो हो गया था। अध्यक्ष महोदया ने खुश होकर सभी को एक बड़ा सा चित्र दिखाया जिस पर 'अ' से 'अक्षय कुमार' और 'क' से 'कटरीना कैफ़' लिखा हुआ था-

  7. #17
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    चित्र देखकर हमने एक बार फिर ज़ोरदार तालियाँ और सीटियाँ बजाकर अपना फर्ज़ अदा किया तो हमें देखकर एक बार फिर तालियों की गड़गड़ाहट से समूचा हाल गूँज उठा।

  8. #18
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    'हिन्दी विकार क्लब' की अध्यक्ष महोदया ने प्रसन्नतापूर्वक चारों ओर चित्र दिखाते हुए सदस्यों को 'हिन्दी ज्ञान' बाँटते हुए बताया कि हिन्दी अँग्रेज़ी से अधिक समृद्ध भाषा है क्योंकि इसमें तमाम अक्षर होते हैं। अँग्रेज़ी में जहाँ पर सिर्फ़ पाँच स्वर होते हैं, वहीं पर हिन्दी में एक दर्जन से ऊपर स्वर होते हैं। हिन्दी की शक्ति इसी से जानी जा सकती है कि इसका पहला स्वर 'अ' होता है और 'अ' से 'अक्षय कुमार' होता है। अक्षय कुमार को भारत का बच्चा-बच्चा जानता है। इतना बताने के बाद अध्यक्ष महोदया ने अक्षय कुमार की तारीफ़ में लम्बा-चौड़ा भाषण दे डाला और फिर आगे बताते हुए कहा कि हिन्दी का पहला व्यंजन 'क' होता है और 'क' से 'कटरीना कैफ' होता है। कटरीना कैफ को भी भारत का बच्चा-बच्चा जानता है, क्योंकि कटरीना कैफ ने ही 'बैंग-बैंग' मूवी में बच्चों को कायदे से मन लगाकर किस करने की विधि सिखाई। इसके बाद अध्यक्ष महोदया ने कटरीना कैफ की तारीफ़ करते हुए लगभग एक घण्टे तक भाषण देने के बाद कार्यक्रम का समापन करते हुए सभी से आग्रह किया कि किसी को अगर कोई सन्देह हो तो वे बेहिचक पूछकर अपना सन्देह दूर कर सकते हैं।

  9. #19
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    Interesting......
    हकलाते हैं तो संस्कृत सीखें,जो व्यक्ति धाराप्रवाह बोल नहीं पाते, अटकते हैं या फिर हकलाते हैं उन्हें संस्कृत सीखना चाहिए।संस्कृत से हकलाना भी खत्म हो जाता है।

  10. #20
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    हमने अपना सन्देह दूर करने के लिए तत्काल अपना दाहिना हाथ झण्डे की तरह आसमान की ओर तानते हुए चारों ओर देखा- हमारे अलावा किसी ने भी अपना सन्देह दूर करने के लिए हाथ नहीं उठाया था। हमने सकपकाकर हाथ नीचे करना चाहा तो उसी समय अध्यक्ष महोदया की आवाज़ सुनाई दी।

    --'पुच्छो.. किया पुच्छना हय?'

    हमने प्रश्नवाचक दृष्टि से अध्यक्ष महोदया की ओर देखते हुए संदेहात्मक स्वर में भूमिका बाँधते हुए कहा- 'हमें पुच्छना हय..........'

    हमारी बात पूरी भी नहीं हो पाई थी कि अध्यक्ष महोदया ने हमारी बात काटते हुए नाराज़गी भरे स्वर में कहा- 'हिन्दी शब्दों का उच्चार्ण गलत मत बोलिए। क्या आपको पता नहीं- हिन्दी बिकास क्लब में शब्दों का गलत उच्चार्ण बोलने पर सौ रूपया जुर्माना लगता है?'

    अब हम कैसे बताते कि शहर में डेढ़ लाख आशिक़ों वाली गर्लफ्रेंड खुद शब्दों का गलत उच्चारण बोल रही है। बताते तो शहर में डेढ़ लाख आशिक़ों वाली गर्लफ्रेंड हमसे बहुत नाराज़ हो जाती और फिर उसे मनाने में दो-तीन साल का समय बर्बाद होता। अतः हमने सफाई देते हुए कहा- 'हम शब्दों का गलत उच्चार्ण नहीं बोल रहे। पुच्छना ही होता है।'

    अध्यक्ष महोदया ने नाराज़गी भरे स्वर में कहा- 'आप फिर गलत बोल रहे हैं। आपने उच्चार्ण गलत बोला.. पुच्छना गलत बोला.. और बार-बार बोला। इसलिए क्लब के नियमों के अनूसार आप पर सौ रूपए का जुर्माना लगाया जाता है।'

    सुनकर हमारे सिर पर गाज गिर पड़ी। दो ग़र्म समोसा और एक ग़र्म इमरती के साथ एक ग़र्म कॉफ़ी के चक्कर में सौ रूपए का जुर्माना बेवजह लग गया। सौ रूपए के जुर्माने से बचने की गरज से हमने झूठा तर्क और झूठा सुबूत प्रस्तुत करने के लिए कालिदास को मामले में घसीटते हुए ज़ोरदार स्वर में सफेद झूठ बोलते हुए कहा- 'हम गलत नहीं बोल रहे। कालिदास ने मेघदूत के पृष्ठ संख्या 252 में पुच्छना ही कहा है और पृष्ठ संख्या 357 में उच्चार्ण ही लिखा है। अब कालिदास का लिखा झूठ तो हो नहीं सकता!'

    अध्यक्ष महोदया ने और अधिक नाराज़गी भरे स्वर में कहा- 'बैठ जाइए। झूठ मत बोलिए। मेघदूत में पुष्ठ संखा 252 और पुष्ठ संखा 357 हैं ही नहीं!'

    शहर में डेढ़ लाख आशिक़ों वाली गर्लफ्रेंड की बात सुनकर हम ज़मीन पर गिर पड़े। कम्बख़्त मेघदूत का पन्ना गिने जो बैठी थी! फिर भी हमने मरी हुई आवाज़ में सफ़ेद झूठ बोलते हुए कहा- 'मेरे पास जो मेघदूत है उसमें एक हज़ार पन्ने हैं।'

    अध्यक्ष महोदया ने अत्यन्त नाराजगी भरे स्वर में कहा--'झूठ मत बोलिए। अब आप चुपचाप सौ रूपया जुर्माना भर दीजिए। नहीं तो....'

    हमने पूछा--'नहीं तो?'

    अध्यक्ष महोदया ने कहा--'नहीं तो आपको दो ग़र्म समोसा और एक ग़र्म इमरती के साथ एक ग़र्म कॉफ़ी नहीं मिलेगी। वैसे आप चाहें तो मेरे हिस्से की दो ग़र्म समोसा और एक ग़र्म इमरती के साथ एक ग़र्म कॉफ़ी खा-पी सकते हैं।'

    अध्यक्ष महोदया की 'दरियादिली' देखकर एक बार फिर तालियों की गड़गड़ाहट से समूचा हाल गूँज उठा। हाल में दरियादिली-जिन्दाबाद के नारे लगने लगे और कई लोग अध्यक्ष महोदया की तारीफ़ के पुल बाँधने लगे। अपनी तारीफ़ होते देखकर अध्यक्ष महोदया ने गर्वपूर्वक चारों ओर देखते हुए कहा--'चलिए, अब आप फटाफट सौ रूपया जुर्माना भर दीजिए।'

    हमें यह बात अच्छे से पता थी कि शहर में डेढ़ लाख आशिक़ों वाली गर्लफ्रेंड मौके पर चौका मारकर तारीफ़ बटोरने और अवार्ड झटकने में माहिर थी। साल में दो-चार अवार्ड झटकना तो आम बात थी। जिस साल अवार्ड नहीं मिलता था, उस साल उसका खाना नहीं हजम होता था और रात की नींद उड़ जाती थी!

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