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Thread: बेहद कड़की

  1. #1
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    Cool बेहद कड़की

    एक अदद सिगरेट फ़िल्टर तक चूसकर उसका दम निकालने के बाद हमने दूकानदार को पैसे देने के लिए जेब में हाथ डाला तो एक रुपए के सिक्के ने हमारा मुँह चिढ़ाया। हमने बेहद शराफ़त से अनजान बनते हुए एक रुपए का सिक्का काउण्टर पर रख दिया तो दूकानदार ने प्रश्नवाचक दृष्टि से हमें देखते हुए पूछा- 'बाकी?'

    हमने अनजान बनते हुए कहा- 'बाकी? कैसा बाकी? सिगरेट का दाम एक ही रुपया तो है!'

  2. #2
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    दूकानदार ने भड़कते हुए कहा- 'बीस साल पहले इसका दाम एक रुपया था!'

    हमने पूर्ववत् अनजान बनते हुए आश्चर्य व्यक्त किया- 'अच्छा? ठीक है.. बाकी पैसे बाद में लेना।'

    दूकानदार परिचित था, मान गया और मुस्कुराते हुए बोला- 'बेहद कड़की चल रही है क्या?'

    हमने कहा- 'और नहीं तो क्या? कड़की का नाम लेकर अच्छा याद दिलाया। अभी कड़की दूर करता हूँ।'

  3. #3
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    हमने मोबाइल पर एक मित्र को फ़ोन मिलाया जो शहर में 'एयरटेल ऑथराइज़्ड पार्टनर' चलाते थे। हमारी आवाज़ सुनकर वे बड़े प्रसन्न हुए, बोले- 'बहुत दिनों बाद याद आई? मैं समझता हूँ सालों बाद। कहो, क्या हालचाल है?'

    हमने कहा- 'बेहाल हैं!'

    मित्र ने पूछा- 'सब खैरियत तो? हुआ क्या?'

    हमने बेशर्मी से बताया- 'लक्ष्मी जी बहुत नाराज़ चल रही हैं। जिसके कारण बेहद कड़की है!'

    मित्र - 'तो?'

    हमने कहा- 'मुझे काम चाहिए।'

    मित्र- 'अभी तो कोई जगह खाली नहीं है। अभी नया मैनेजर रखा है।'

  4. #4
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    हमने भड़कते हुए कहा- 'मैनेजर की पोस्ट मैंने माँगी क्या? बेहद कड़की में काउंटर सेल्समैन का पोस्ट भी चलेगा।'

    मित्र- 'वहाँ भी जगह खाली नहीं है।'

    हमने सलाह देते हुए कहा- 'तो किसी को निकाल दो।'

    मित्र- ठीक है। निकाल दिया। कब ज्वाइन कर रहे हो?'

    हमने कहा- 'एक हफ्ते बाद।'

    मित्र- ठीक है। कितनी सेलरी लोगे?

    हमने कहा- 'अरे, इस तरह कोई बिना समझे-बूझे किसी को सेलरी देता है क्या? हफ्ता दस दिन मैं काम करके देखूँगा। मुझे लगा कि मैं काम करने लायक हूँ तो जो दोगे ले लूँगा। नहीं तो खुद काम छोड़कर टाटा करके चल दूँगा।'

    मित्र हमारी बातों से बड़े प्रभावित हुए। दूकानदार भी बड़ा प्रभावित हुआ, बोला- 'अरे वाह! एक फ़ोन पर आपकी नौकरी लग गई!'

  5. #5
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    हमने कहा- 'और नहीं तो क्या। अभी तो एक जगह नौकरी और लगवानी है।'

    हमने दूसरे मित्र को फ़ोन लगाया जो शहर में वोडाफ़ोन मिनी स्टोर चलाते थे। हमारी आवाज़ सुनकर वे भी बड़े प्रसन्न हुए, बोले- 'बहुत दिनों बाद याद आई? क्या हालचाल है?'

    हमने कहा- 'बेहाल हैं!'

    मित्र ने पूछा- 'सब खैरियत तो? हुआ क्या?'

    हमने बेशर्मी से बताया- 'लक्ष्मी जी बहुत नाराज़ चल रही हैं। जिसके कारण बेहद कड़की है!'

    मित्र - 'तो?'

    हमने कहा- 'मुझे काम चाहिए।'

    मित्र- 'अभी तो कोई जगह खाली नहीं है। अभी नया मैनेजर रखा है।'

  6. #6
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    हमने भड़कते हुए कहा- 'मैनेजर की पोस्ट मैंने माँगी क्या? बेहद कड़की में काउंटर सेल्समैन का पोस्ट भी चलेगा।'

    मित्र- 'वहाँ भी जगह खाली नहीं है।'

    हमने सलाह देते हुए कहा- 'तो किसी को निकाल दो।'

    मित्र- ठीक है। निकाल दिया। कब ज्वाइन कर रहे हो?'

    हमने कहा- 'दो हफ्ते बाद।'

    मित्र- ठीक है। कितनी सेलरी लोगे?

    हमने कहा- 'अरे, इस तरह कोई बिना समझे-बूझे किसी को सेलरी देता है क्या? हफ्ता दस दिन मैं काम करके देखूँगा। मुझे लगा कि मैं काम करने लायक हूँ तो जो दोगे ले लूँगा। नहीं तो खुद काम छोड़कर टाटा करके चल दूँगा।'

    मित्र हमारी बातों से बड़े प्रभावित हुए। दूकानदार भी बड़ा प्रभावित हुआ, बोला- 'अरे वाह! दूसरे फ़ोन पर आपकी दूसरी नौकरी लग गई!'

  7. #7
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    हमने गर्व से कहा- 'और नहीं तो क्या?'

    दूकानदार ने आश्चर्य से पूछा- 'मगर आप दो-दो नौकरी एक साथ कैसे करेंगे?'

    हमने कहा- 'एक साथ कहाँ कर रहा हूँ? पहले हफ्ते एयरटेल में करूँगा। दूसरे हफ्ते वोडाफ़ोन में करूँगा। दो हफ्ते में बेहद कड़की दूर न होगी क्या?'

    उसी समय दो दशक पुरानी हमारी बनाई हुई पार्टी के अध्यक्ष महोदय का फ़ोन आ गया। पिछले डेढ़ दशक से पार्टी में बिना कोई पद लिए हम पार्टी के हाईकमान बने बैठे थे, क्योंकि उस ज़माने में हमने पार्टी में रू० १५०१/- का नगद रोकड़ा लगाया था!

    अध्यक्ष- 'नमस्कार।'

    हम- 'नमस्कार। पार्टी का काम कुछ आगे बढ़ा?'

    अध्यक्ष- 'आगे नहीं, पीछे बढ़ रहा है! लगता है- पार्टी के बुरे दिन आ गए।'

    हम- 'वो तो सभी पार्टियों के साथ हो रहा है। निराश होने की कोई ज़रूरत नहीं।'

    अध्यक्ष- 'अरे, मेरा मतलब था- दिल्ली से इलेक्शन कमीशन की नोटिस आई हुई है।'

    हमने चौंकते हुए पूछा- 'अच्छा.. क्या लिखा है नोटिस में?'

    अध्यक्ष- 'इलेक्शन कमीशन ने चेतावनी देते हुए कहा है- आपकी पार्टी चुनाव नहीं लड़ रही है। इसलिए आपकी पार्टी का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा।'

    हमने भुनभुनाते हुए कहा- 'यह भी कोई बात हुई? शराफ़त का तो ज़माना ही नहीं रहा। हमारी पार्टी देश की सबसे शरीफ़ पार्टी है। हम न किसी से चंदा लेते हैं, न देते हैं। और तो और, हम किसी पार्टी से पंगा भी नहीं लेते और न ही किसी पार्टी के खिलाफ़ कोई बयान जारी करते हैं। इसीलिए चुनाव नहीं लड़ते। इसमें गलत क्या है?'

  8. #8
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    अध्यक्ष- 'आपकी बात ठीक है। मगर यह तीसरी नोटिस है। इस बार रजिस्ट्रेशन रद्द होना तय है!'

    हमने क्रोधपूर्वक कहा- 'तीसरी नोटिस? अभी तक आप क्या सो रहे थे?'

    अध्यक्ष- 'मैं नहीं सो रहा था। आप सो रहे थे। मैंने आपको कई बार इस बारे में फ़ोन पर सूचना दी। मगर आप कान में तेल डाले बैठे रहे और आपके कान में जूँ तक नहीं रेंगी।'

    हमने घबड़ाकर कहा- 'आपको बार-बार याद दिलाना चाहिए था। आप क्या हमारे कान में साँप रेंगने का इन्तेजार रहे थे? ख़बरदार जो पार्टी का रजिस्ट्रेशन रद्द हुआ।'

    अध्यक्ष- 'नहीं रद्द होगा। पहले इलेक्शन कमीशन को लिखकर पता करना होगा- रजिस्ट्रेशन रद्द हुआ या नहीं? नोटिस आए बहुत दिन हो गए।'

    हमने भड़कते हुए कहा- 'लेटरबाजी में आप टाइम बर्बाद करेंगे? खर्चे-पानी की आप चिन्ता न कीजिए। सीधे दिल्ली चले जाइए और ई०सी०आई० के ऑफ़िस में पता करिए। रजिस्ट्रेशन रद्द हो गया हो तो फिर से करवाइए, चाहे जितना पैसा लगे। नहीं तो आपके सिर पर हाईकमान की गाज कभी भी गिर सकती है!'

    अध्यक्ष- 'तो गिरा दीजिए। हम तो कई सालों से कह रहे हैं।'

    हमने घबड़ाते हुए कहा- 'हम मज़ाक़ कर रहे थे। आप तो हमारे पुराने भरोसेमंद मित्र हैं। आपके सिर पर गाज कैसे गिर सकती है?'

    अध्यक्ष- 'तो मैं कब जाऊँ दिल्ली?

    हम- 'अब दिल्ली जाने का मुहूर्त निकालेंगे आप? जो भी करिए, तत्काल करिए। कबीरदास ने भी कहा है- काल करे सो आज कर, आज करे सो अब। पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगा कब।'

    अध्यक्ष- 'पार्टी के मुद्दे पर इतना एक्टिव तो आप कभी नहीं रहे।'

    हमने डपटते हुए कहा- 'हाईकमान से जुबान लड़ाकर समय बर्बाद करने की जगह आप सीधे बनारस आ जाइए और हमसे खर्चा-पानी लेकर तत्काल दिल्ली रवाना होइए।'

    अध्यक्ष- 'आप खुद क्यों नहीं चले जाते दिल्ली?'

    हमने गर्व से नेपाल का नाम गोलमाल करते हुए बताया- 'हम विदेश जा रहे हैं कलम खरीदने। और फिर दिल्ली जाना तो आपको ही पड़ेगा। पार्टी के अध्यक्ष आप हैं, हम नहीं!'

    अध्यक्ष- 'ठीक है। आता हूँ बनारस.. मगर रजिस्ट्रेशन में इतना पैसा फूँकने से फ़ायदा? पार्टी चुनाव नहीं लड़ेगी तो फिर रजिस्ट्रेशन खटाई में पड़ जाएगा।'

    हमने क्रोधपूर्वक कहा- 'कौन कहता है- पार्टी चुनाव नहीं लड़ेगी? पार्टी इस बार इलेक्शन कमीशन की नाक के नीचे दिल्ली विधानसभा का चुनाव लड़ेगी जिससे इलेक्शन कमीशन को पूरा यकीन हो जाए और शक की कोई गुंजाइश न रहे।'

  9. #9
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    अध्यक्ष महोदय ने खुश होकर पूछा- 'सच?'

    हमने कहा- 'और नहीं तो क्या झूठ?'

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