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Thread: कोरोना वायरस

  1. #231
    हीरक सदस्य bndu jain's Avatar
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  2. #232
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    कोरोना वायरस से आपके मरने की कितनी आशंका है?

    कोरोना वायरस, लंदन ब्रितानी सरकार के वैज्ञानिक सलाहकारों का मानना ​​है कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण मरने की आशंका केवल 0.5 फीसदी से 1 फीसदी के ही बीच है.

    कोरोना संक्रमण के मामलों में ये मृत्यु दर कम है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया भर में इस वायरस के कारण मरने वालों की दर 4 फीसदी है. मार्च की 23 तारीख तक ब्रिटेन में ये दर 5 फीसदी तक थी क्योंकि यहां संक्रमण के सभी मामलों की पुष्टि नहीं हुई थी.

    कोरोना वायरस संक्रमण की सूरत में किसका टेस्ट होना है और किसका नहीं, इसे लेकर सभी देशों के अपने अलग-अलग मानदंड है. इस कारण अलग-अलग देशों में कोरोना संक्रमण के मामले और इससे होने वाली मौतों के आंकड़े भ्रामक हो सकते हैं.

    साथ ही मृत्यु की दर व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सेवाओं तक उसकी पहुंच पर भी निर्भर करती है.

  3. #233
    हीरक सदस्य bndu jain's Avatar
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  4. #234
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  5. #235
    हीरक सदस्य bndu jain's Avatar
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    आज देश भर में कोरोना वायरस के 88 पॉजिटिव मामले सामने आए, 16 की मौत
    March 26, 2020, 21:52 [IST]
    नई दिल्ली। कोरोना वायरस का प्रकोप देशभर में तेजी से फैल रहा है। भारत में गुरुवार को कोरोना वायरस के 88 नए मामले सामने आए है, यह एक दिन में संक्रमितों की सबसे ज्यादा संख्या है। परिवार एवं स्वास्थ्य कल्याण मंत्रालय के डाटा के अनुसार, भारत में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़कर 694 हो गई है। वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, कोरोना की वजह से देशभर में अबतक कुल 16 मौतें हो चुकी हैं। इनमें से सबसे ज्यादा तीन-तीन मौतें महाराष्ट्र और गुजरात में हुई हैं।

    वहीं उत्तर प्रदेश में गुरुवार को कोरोना वायरस पांच नए मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही यूपी में कोरोना संक्रमण के कुल मामले 43 हो गए हैं। आगरा में 9 मामले, गाजियाबाद में 3, नोएडा में 14, लखनऊ में 8 , पीलीभीत में 2 और बागपत , लखीमपुर खीरी, मुरादाबाद, वाराणसी, कानपुर , जौनपुर और शामली में एक एक मामले सामने आए हैं। उधर पंजाब में कोरोना के दो नए पॉजिटिव मामले सामने आए। राज्य में कोरोना के कुल मामलों की संख्या 33 हो गई।

    वहीं तमिलनाडु में कोरोना संक्रमण के दो ताजा मामले सामने आने वाले हैं। इसके साथ ही राज्य में कोरोना के कुल मामले 29 हो गए हैं। दोनों संक्रमित मरीज हाल ही में लंदन से लौटे थे। प्रशासनने केएमसीएच में दोनों मरीजों को आइसोलेशन में रखा है।

  6. #236
    कांस्य सदस्य superidiotonline's Avatar
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    अगर कोरोना वायरस संक्रमण हो गया, तो क्वारंटीन में आपके साथ क्या-क्या किया जाएगा?

    इधर प्रधानमंत्री ने 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की, उधर पूरे मोहल्ले में हल्ला हो गया. तो लोग एक-दूसरे से अपना पैनिक बांटने लगे. जुनेजा आंटी अपनी पड़ोसन से कहने लगीं, ‘ऐसी बीमारी है कि अगर आपको हो गई. और सरकार को पता चल गया. तो कम से कम 15 दिन के लिए जेल भेज देगी.’

    जिस शब्द को आंटी खोज रही थीं, वो असल में ‘क्वारंटीन’ है. मगर उन्होंने कहा ‘जेल’. क्या क्वारंटीन का अर्थ सचमुच जेल होता है? समझेंगे. लेकिन पहले एक कहानी सुनिए.

    कहानी 700 साल पहले की. योरप में ‘प्लेग’ महामारी फैली थी. चूहों के शरीर पर बसने वाले पिस्सुओं से इंसानों में आई थी. फैलने का ज़रिया थूक और छींक यानी शरीर से निकले द्रव्यों के कॉन्टैक्ट में आना. इटली में ये बीमारी विदेश से आ रही थी. उस समय व्यापार सारा पानी के जहाज़ों से होता था. तो जो लोग जहाजों से लौटते थे, उनके संक्रमित होने के सबसे ज्यादा चांस थे.

    तो इटली ने अपने सभी पोर्ट, यानी जहां जहाज आते थे, वहां के लिए एक नियम निकाला. कि जहाज के किनारे पर लगने के बाद उसे 40 दिनों तक खोला नहीं जाएगा. जिससे अगर कोई संक्रमित है तो उसका पता वहीं चल जाए. 40 दिन को इटैलियन भाषा में कहते हैं क्वारंता जिओर्नी. क्वारंता का मतलब चालीस. जिओर्नी का मतलब दिन. इसी क्वारंता से शब्द बना क्वारंटीन. जिसका अर्थ हुआ अलग रखना.

    अलग रखने का मकसद ये नहीं था कि व्यापारियों की किसी बात की सजा दी जा रही थी. या भेदभाव किया जा रहा था. इसका मकसद सिर्फ इतना था कि बीमारी देश में न आए.

    एक दूसरे के कॉन्टैक्ट से फैलने वाली बीमारी को रोकने का सबसे कारगर तरीका क्वारंटीन हुआ. क्योंकि कोई भी देश अचानक आई किसी महामारी के लिए कभी तैयार नहीं होता. चाहे 600 साल पहले की बात हो, चाहे आज की.

    प्लेग और कॉलरा जैसी बीमारियां इतिहास में कई बार महामारी बन चुकी हैं. इंडिया समेत कई देशों में. मगर उसकी बात फिर कभी.

    ‘क्वारंटीन’ शब्द सुनते ही दिमाग में कई सवाल आते हैं. कुछ सवालों के जवाब आप यहां जान सकते हैं.

    1. क्या क्वारंटीन में केवल बीमार लोग रहते हैं?

    नहीं, क्वारंटीन का मतलब केवल ऑब्जरवेशन में रखना होता है. आप विदेश से लौटे. खासकर किसी ऐसे देश से जहां बीमारी पहले से थी. तो सरकार की ये जिम्मेदारी हो जाती है कि वो चेक करे कि कहीं आप संक्रमित तो नहीं हैं. सेफ्टी के लिए वो आपको सबसे अलग कर देगी. ताकि जबतक सरकार आपको ऑब्जर्व कर रही है. तबतक ये आपसे किसी और में न जाए. अगर तय दिनों में आपमें कोई संक्रमण नहीं निकला तो आपके जाने दिया जाता है.

    2. क्या बीमारी के लक्षण दिखने पर क्वारंटीन करते हैं?

    ऐसा कतई नहीं है. क्योंकि कई बीमारियों के लक्षण डेवलप होने में 4 दिन से एक हफ्ता लग सकता है. अगर ढिलाई की तो बहुत बुरा नतीजा हो सकता है. उदाहरण के लिए:

    सिंगर कनिका कपूर लंदन से 9 मार्च को लौटीं. सबकी तरह उन्हें भी सेल्फ़-क्वारंटीन की हिदायत दी गई. मगर उनको कोई लक्षण नहीं दिख रहे थे. तो वो पार्टीज में गईं. जिनमें बड़े-बड़े नेता आए थे. अगर कोई बड़ा नेता संक्रमित हो जाता तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ और प्रधानमंत्री मोदी तक खतरे में आ जाते.

    3. बीमार निकले तो?

    ऐसा हुआ तो आपके इलाज की व्यवस्था की जाती है. आपको अस्पताल या किसी ऐसी सर्विस में मूव किया जाता है जहां आपका इलाज आइसोलेशन में हो सके. आइसोलेशन यानी सबसे अलग-थलग.

    4. क्या क्वारंटीन का मतलब कमरों में बंद कर देना ही होता है?

    क्वारंटीन किस लेवल पर लागू करना है, ये सरकार के फैसले और सुविधाओं पर निर्भर करता है. कोरोना वायरस के चलते इंडिया में बाहर से लौटे इंडियन्स को सेल्फ़-क्वारंटीन करने के लिए कहा गया था. यानी वे अपने घर पर अकेले ही रहें. किसी से मिले जुलें न. और अगर लक्षण दिखें तो सूचित करें. जो लोग परिवार के साथ रहते हैं उनसे कहा गया कि खुद को एक कमरे में बंद कर लें और किसी से कुछ भी शेयर न करें. घर वालों के संपर्क में न आएं.

    अगर आपको किसी सरकारी फैसिलिटी के तहत क्वारंटीन किया गया है तो सरकार से अपेक्षित है कि वो आपको अलग कमरे में बंद रखे. ऐसा न हो तो कम से कम दूसरों से इतनी दूरी पर रखे कि आपस में रोग न फैले. आपकी सेहत, हाइजीन और सुविधाओं का खयाल रखे. हालांकि ऐसी कुछ रिपोर्ट्स आईं जिनमें कहा गया कि सरकार की तरफ से क्वारंटीन फसीलिटीज में पुख्ता इंतज़ाम नहीं हैं.

    5. क्वारंटीन से खुद को बचा लिया तो क्या होगा?

    क्वारंटीन कोई जेल नहीं कि खुद को बचाया जाए. ये सबकी सेफ्टी के लिए लागू किया गया नियम है. मगर इंडिया में ऐसे कई केस आए जब लोगों ने क्वारंटीन से खुद को बचाए रखा. और नतीजा बहुत बुरा हुआ. इसका सबसे बड़े उदाहरण है:

    केरल का एक परिवार जो इटली से 29 फरवरी को लौटा. मगर सरकार के बार-बार कहने के बावजूद अपनी ट्रेवल हिस्ट्री शेयर नहीं की. न ही सेल्फ़-क्वारंटीन किया. अपने रिश्तेदारों से मिलते रहे. और ट्रेवल करते रहे. नतीजा ये हुआ कि वो तीनों और उनके 4 और रिश्तेदार संक्रमित पाए गए. उनकी गैर-जिम्मेदाराना हरकतों की वजह से लगभग 12 हजार लोगों को ऑब्जरवेशन में डालना पड़ा. जो कि प्राइमरी या सेकेंडरी तौर पर उनके कॉन्टैक्ट में आए थे. इसमें सरकार की जाने कितनी रिसोर्सेज लग गईं जिन्होंने परिवार के पूरे मूवमेंट को ट्रैक किया. सीसीटीवी फुटेज निकाली. और फिर मेडिकल टीम्स भेजी गईं. ये सब अवॉइड किया जा सकता था.

    6. क्या क्वारंटीन का उल्लंघन करने पर सज़ा होगी?

    जी बिलकुल. क्वारंटीन कोई नया नियम नहीं है. एपिडेमिक डिजीजेस एक्ट, 1897 के मुताबिक़: भारत या उसके अधीन किसी भाग में महामारी फ़ैल चुकी है या फैलने का ख़तरा है, तो रेल या बंदरगाह या अन्य तरीके से यात्रा करने वालों को, जिनके बारे में ये शंका हो कि वो महामारी से ग्रस्त हैं, उन्हें किसी अस्पताल या अस्थायी आवास में रखने का अधिकार होगा. इसके अलावा ये भी लिखा है कि महामारी के संबंध में कोई भी सरकारी आदेश न मानना अपराध होगा. इस अपराध के लिए भारतीय दंड संहिता यानी इंडियन पीनल कोड की धारा 188 के तहत सज़ा मिल सकती है.

    7. क्या प्रधानमंत्री ने सेल्फ़-क्वारंटीन करवाने के लिए ‘लॉकडाउन’ की घोषणा की?

    घर पर रहना सेल्फ़-क्वारंटीन नहीं कहलाता. घर पर रहना, दूरी बनाना, लोगों से मिलना जुलना बंद कर देना, ये सोशल डिस्टेंसिंग कहलाते हैं. कोई जरूरी दवा लानी हो या गैस सिलिंडर लेना हो. तो सोशल डिस्टेंसिंग के पीरियड में भी ये काम कर सकते हैं. पर सेल्फ़-क्वारंटीन के पीरियड में नहीं कर सकते. अगर सख्ती के लिहाज से देखा जाए तो सोशल डिस्टेंसिंग पहला कदम है. सोशल डिस्टेंसिंग में सबसे कम, क्वारंटीन में उससे ज्यादा और आइसोलेशन (यानी इलाज का समय) सबसे ज्यादा सख्त होता है.

    तो जुनेजा आंटी के लिए एक सच्चाई. कि कोरोना संक्रमण हुआ तो जेल नहीं भेजते. बल्कि लोगों से अलग करते हैं. ताकि बाकी सभी लोग सुरक्षित हो सकें. बीमार हुए तो इलाज करते हैं. क्वारंटीन को जेल समझकर जिन लोगों ने उससे खुद को बचा लिया था. उन्होंने बाद में पाया कि उन्होंने सरकार नहीं, बल्कि अपने और अपनों के साथ धोखा किया था.

    --------------------
    साभार: लल्लनटॉप

  7. #237
    कांस्य सदस्य superidiotonline's Avatar
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    धीरे-धीरे हारने लगा कोरोना, सावधानियों के कारण कई जगहों से आ रही राहत भरी खबरें

    उत्तर प्रदेश में एक तरफ जहां लगातार कोरोना के बढ़ते मामले सामने आ रहे हैं, वहीं कई जगहों से राहत भरी खबरें भी आ रही हैं। धीरे-धीरे ही सही, लेकिन हमारी जागरूकता कोरोना महामारी को मात देती नजर आने लगी है। ऐसे उदाहरणों से लोगों को समझ आने लगा है कि जहां थोड़ी सी लापरवाही उन्हें संक्रमण के चक्र में डाल सकती है, वहीं थोड़ी सी अतिरिक्त सतर्कता बरतने और कोरोना के सामने हार न मानने से वो इस बीमारी से बच भी सकते हैं।

    आइये कुछ ऐसे ही लोगों पर नजर डालते हैं जो कोरोना को हराने के इस युद्ध में डट कर लड़ने में अपनी भूमिका सुनिश्चित कर रहे हैं। ऐसे लोग जो केवल यह मान कर दृढ़ खड़े हैं कि 'लड़ेंगे कोरोना से'।

    आगरा में ठीक हो चुके हैं सात मरीज, आखिरी संक्रमित की हालत में भी दिख रहा सुधार

    आगरा में कोरोना वायरस से संक्रमित आठवें मरीज की हालत में भी सुधार है। यह रेलवे अधिकारी की बेटी है, जो बंगलूरू से मायके आई थी। उसकी रिपोर्ट जल्द आ सकती है। कोरोना के सात मरीज पहले ही ठीक हो चुके हैं।

    कोरोना वायरस से जागरूकता और सावधानी का ही असर है कि मंगलवार को लिए गए 17 नमूनों की रिपोर्ट भी निगेटिव आई है। दो विदेशी समेत पांचों को छुट्टी दे दी है। इनको 14 दिन तक क्वारंटीन में रहने को कहा गया है। बुधवार को नौ और लोगों के नमूने लेकर जांच के लिए लखनऊ भेज दिए हैं।

    महज आठ दिन में संक्रमण से मुक्त हुआ ग्रेटर नोएडा का युवक

    राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में भर्ती हुए 10 में से एक मरीज को पूरी तरह संक्रमण मुक्त घोषित कर दिया गया है। बुधवार देर शाम मरीज की रिपोर्ट दिल्ली की प्रयोगशाला से आधिकारिक तौर पर प्राप्त हुई। इस मरीज को अस्पताल में 16 मार्च को भर्ती किया गया था। जांच में उसके कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई थी। 23 मार्च को उनकी दोबारा जांच कराई गई, जो निगेटिव आई। बुधवार को फिर जांच हुई। इस बार फिर रिपोर्ट निगेटिव रही।

    कोरोना से जंग में आगे आए समाजसेवी, गरीबों में बांटे आठ टन गेहूं और चावल

    कोरोना वायरस की आपदा से निपटने के लिए समाजसेवी भी मदद को हाथ बढ़ा रहे हैं। कानपुर के जाजमऊ क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश सचिव व समाजसेवी महफूज अख्तर ने गुरुवार सुबह गरीबों में आठ टन गेहूं और चावल वितरित किया।

    हेल्पलाइन पर फोन आते ही गरीबों के बीच राशन बांटने पहुंची पुलिस

    कानपुर के पनकी थाने में हेल्पलाइन पर कॉल आया, जिसमें दूसरी तरफ से एक परिवार ने कहा कि उनके घर में राशन खत्म हो गया है। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनका पूरा परिवार दो दिनों से भूखा है। यह सूचना मिलते ही पीआरवी नंबर 0409 के पुलिसकर्मी पनकी के गंभीरपुर गांव पहुंचे। परिवार वालों से मिले। सब्जी, राशन और दूध उपलब्ध कराया। उसके बाद कुछ नकद पैसे देकर मदद भी की। साथ ही आश्वासन दिया कि अगर दोबारा जरूरत पड़े तो बेफिक्र होकर कॉल कर लेना। पुलिस प्रशासन आपके साथ है। यह सुनकर पूरा परिवार आश्वस्त हुआ।

    एचबीटीयू के छात्रों ने बनाया 25 रुपये का सैनिटाइजर
    कानपुर में हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों और छात्रों ने मिलकर सस्ता सैनिटाइजर बनाया है। इसे घर पर आसानी से बना सकते हैं। एल्कोहोलिक सैनिटाइजर के लिए स्प्रिट, एलोवेरा जेल, टी ट्री ऑयल का मिश्रण तैयार किया है। वहीं नॉन एल्कोहोलिक के लिए विच हैजल (एक विशेष पेड़ से निकला ऑयल), उबला पानी, एलोवेरा जेल, टी ट्री ऑयल का प्रयोग किया है। एल्कोहोलिक सैनिटाइजर 25 रुपये (100 एमएल) और नॉन एल्कोहॉलिक 35 रुपये (100 एमएल) है। इसकी टेस्टिंग बायो केमिकल विभाग के डॉ. ललित कुमार ने की है।

    मदद के लिए आगे आए शिक्षक, मुख्यमंत्री कोष में देंगे योगदान

    उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष ने बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) को पत्र लिखा है। शिक्षकों के वेतन से एक दिन के वेतन कटौती करके मुख्यमंत्री सहायता कोष में जमा कराने की मांग की गई है। जिससे आपदा से निपटने में सहायता मिल सके। संघ के अध्यक्ष राकेश चाहर का कहना है कि संगठन के सभी सदस्य शिक्षक कोरोना वायरस से जंग लड़ने के लिए सहयोग देने के लिए तैयार हैं। संक्रमण से पीड़ितों की सुरक्षा के लिए उठाए रहे कदम के लिए शिक्षकों ने एक-एक दिन का वेतन देने की सहमति प्रदान की है।

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    साभार: अमर उजाला, 26 Mar. 2020 14:50

  8. #238
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    अगर नहीं बरती ये सावधानियां तो घर के भीतर घुस जाएगा कोरोना, ऐसे करें खुद को 'होम क्वारंटीन'

    कोरोना वायरस से जुड़े सच

    कोरोनावायरस से बचने के लिए इस वक्त एक चौथाई दुनिया अपने घरों में कैद है। 250 करोड़ से ज्यादा लोग लॉकडाउन हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर हिंदुस्तानियों ने भी खुद को आइसोलेशन में रखा है। लोग 21 दिन तक घर से बाहर नहीं निकल सकते। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि घर में रहते हुए भी आप खुद को कोरोना वायरस से कैसे बचा सकते हैं।

    घर पर कैसे करें खुद को क्वारंटीन

    इसके लिए घर का कोई ऐसा कमरा चुने जो हवादार हो। कमरे में ही शौचालय की सुविधा भी हो। पानी पीने का ग्लास, तौलिया जैसे वस्तुएं अपने नजदीक ही रखें। घर की सार्वजनिक उपयोग में लाने वाली वस्तुओं को न छुएं। हर वक्त मास्क लगाएं, जिसे छह से आठ घंटे बाद बदलना न भूलें। साबुन से हाथ धोएं और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं व बच्चों से दूरी बनाकर रखें।

    दूध की थैली को धोना न भूलें

    सब्जी, दवाईयां और दूध जैसी रोजमर्रा की चीजें अभी भी बाजार में उपलब्ध है। तय समय पर इसे बाहर जाकर खरीदा जा सकता है। ऐसे में जब भी बाहर से दूध की थैली घर लेकर आए, उसे किचन में रखने से पहले साफ पानी से अच्छी तरह धो लें और अपने हाथों को भी सैनिटाइजर से साफ करें क्योंकि वह पैकेट आप तक पहुंचने से पहले अनगिनत हाथों से होकर गुजरता है। ऐसे में संक्रमण का खतरा हमेशा बना रहता है।

    सब्जियों को तुरंत नमक पानी से साफ करें

    सब्जी मंडी का हाल

    लॉकडाउन की घोषणा के बाद अधिकतर लोगों ने वैसे तो अपने घरों में सब्जियां भी खरीदकर रख ली थी, लेकिन दूध के अलावा सब्जियां भी बाजार में मिल रहीं हैं। हॉकर ठेले या गुमटी लगाकर उसका विक्रय कर रहे हैं। ऐसे में आप जब भी बाहर से सब्जियां खरीदकर लाए, उसे नमक पानी से अच्छी तरह साफ करने के बाद भी इस्तेमाल में लाए।

    ATM मे हाथ दस्ताना पहन के जाएं

    लॉकडाउन के दौरान जारी प्राथमिकी सेवाओं में बैंक भी शामिल है और शायद ही ऐसा कोई हो, जो बैंक एटीएम का इस्तेमाल न करता हो। ऐसे में आप भी जब कैश निकालने एटीएम जाए तो दस्तानें पहनकर ही मशीन का उपयोग करें, क्योंकि बटन्स पर मौजूद असंख्य विषाणु आपको बीमार और आपके घर तक कोरोना वायरस लाने में काफी होंगे।

    कंप्यूटर, लैपटॉप का कम-से-कम इस्तेमाल

    क्वारंटीन के दौरान अगर आप वर्क फ्रॉम कर रहे हैं तो फिर कंप्यूटर और लैपटॉप पर काम करना आपकी मजबूरी हो जाती है, लेकिन अगर आपके सामने ऐसी कोई मजबूरी नहीं तो खुद को इस तरह के गैजेट्स से पूरी तरह दूर रखें। लैपटॉप पर काम करते समय आपके हाथ बार-बार इधर-उधर लगते हैं और आप काम के बीच में उठकर खाने-पीने के लिए चले जाते हैं। ब्रेक लेने के बाद एक बार अच्छी तरह से हाथ थोएं, जिससे कि आप स्वस्थ रहें।

    घरेलू नौकर/नौकरानी की मदद न लें

    अगर आप अपने घरेलू कामों के लिए नौकर या नौकरानी की मदद लेते हैं तो उसे आज ही काम पर आने से मना कर दें क्योंकि आप अपने साथ-साथ उनकी जान से भी खिलवाड़ कर रहे हैं। अनगिनत घरों में काम करने वाले ये कर्मचारी बाहर निकलने पर कईयों के संपर्क में आते हैं, ऐसे में घर के भीतर रहने के बावजूद आप कोरोना से संक्रमति हो सकते हैं। अगर नौकर/नौकरानी की मदद लेना आपकी मजबूरी है तो ध्यान रखें कि वे हाथ पैर धोने के बाद ही घर में घुस रहे हैं।

    छात्र भूलकर भी न करें ये काम

    कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते सभी स्कूल, कॉलेज भी बंद कर दिए गए हैं। ऐसे में छात्र घरों पर रहकर ही अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। इस स्थिति में छात्रों को ग्रुप स्टडी करने से बचना चाहिए। यहां तक कि दोस्तों से किसी भी तरह की पाठ्यक्रम सामग्री लेने से भी बचना चाहिए, क्योंकि आपको नहीं पता कि आपके दोस्त या उसके घर के सदस्य स्वस्थ हैं या नहीं हैं।

    किसी पड़ोसी के घर भी न जाए

    कई लोग सोचते हैं कि केवल बहुत भीड़ वाली जगह नहीं जाना है। यहीं आप सबसे बड़ी भूल कर जाते हैं। आप न तो किसी से मिलने जाएं और न हीं किसी को घर बुलाएं क्योंकि आप अपने जानकार को नहीं बल्कि जाने-अनजाने में बीमारी को ही आमंत्रित कर रहे हैं।

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    साभार: अमर उजाला

  9. #239
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    कोरोनावायरस: ऑस्ट्रेलिया में छह माह तक के लिए लॉकडाउन, पी०एम० बोले- 'जनता खतरे को नहीं समझ रही'

    सिडनी। ऑस्ट्रेलिया ने कोरोना वायरस को रोकने के मकसद से सोमवार से लॉकडाउन शुरू कर दिया है। यह फैसला तब लिया गया जब केसेज की संख्या में एकदम से इजाफा हुआ। देश मे पब्स, क्लब्स और जिम के अलावा चर्च भी पूरी तरह से बंद हो चुके हैं। सरकार का मकसद देश के लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग को बढ़ावा देना था। सरकार ने कई बार लोगो को ऐसा न करने की सलाह भी दी थी मगर लोग बीच, बार और रेस्टोरेंट्स में जमकर इकट्ठा हो रहे थे। इस वजह से सरकार ने लॉकडाउन का फैसला किया।

    पीएम बोले छह माह तक के लिए रहिए तैयार

    माना जा रहा है कि ऑस्ट्रेलिया में लॉकडाउन छह माह तक जारी रह सकता है। देश में इस समय कोरोना वायरस के 110 केसेज आ चुके हैं जिनमें सर्दन-पूर्वी राज्यों जैसे विक्टोरिया और न्यू साउथ वेल्स में संख्या सबसे ज्यादा है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमत्री स्कॉट मॉरिसन ने सोमवार को संसद में कहा था कि काम के बाद अब कोई पब नहीं जाएगा और न ही सुबह किसी को जिम जाने की जरूरत है। लोगो को कैफे में भी बैठने की मंजूरी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि देश के सामने इस समय स्वास्थ्य और आर्थिक चुनौतियां बहुत बड़ी हैं। मॉरिसन ने इस समय को ऑस्ट्रेलियाई लोगों के लिए एक मुश्किल वक्त करार दिया है। इसके साथ ही उन्होंने देशवासियों को संसद से चेतावनी दी कि उन्हें अगले छह माह तक के लिए शटडाउन के लिए तैयार रहना होगा।

    जनता का लापरवाही भरा रवैया

    ऑस्ट्रेलिया की सरकार की तरफ से जनता को लगातार चेतावनी दी जा रही थी। मगर कुछ नागरिक सोशल डिस्टेंसिंग के अनुरोध और चेतावनी को नजरअंदाज कर बोंडी बीच और रेस्टोरेंट्स में पहुंच रहे थे और हाल के दिनों में देश के पब्स और बार में भीड़ काफी बढ़ गई थी। मॉरिसन ने कहा कि सोशल डिस्टेंसिंग के लिए कड़े कदमों की जरूरत है। इसके साथ ही उन्होंने गैर-जरूरी सेवाओं जिसमें इंडोर स्पोर्टिंग कार्यक्रम, पब्स, सिनेमा हॉल, बार और चर्च शामिल थे, को बंद करने के आदेश दे दिए थे। सोमवार से ही इन्हें बंद कर दिया गया है। लोकल अथॉरिटीज की तरफ से भी बीच को बंद किया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया के कई हिस्सों में गर्मियां शुरू हो गई हैं और इस वजह से भारी तादाद में लोग इकट्ठा होने लगे थे। हालांकि कैफे और रेस्टोरेंट्स में टेक अवे ऑर्डर लिए जाएंगे और साथ ही डिलीवरी भी चालू रहेगी।

    ----------------
    साभार: वनइंडिया

  10. #240
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    महीने भर से भी कम में 3 से 724 हो गए कोरोना के मरीज, पूरी टाइमलाइन

    नई दिल्ली। भारत में कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के हिसाब से अब तक इसका संक्रमण 724 लोगों तक फैल चुका है। इनमें से 17 लोगों की मौत हो चुकी है और 66 लोग सही होकर घर जा चुके हैं। गुरुवार के दिन करीब 88 नए मामले सामने आए और शाम ये आंकड़ा 694 तक जा पहुंचा था। दुनिया भर में अब तक 5.26 लाख से अधिक लोग कोरोना वायरस संक्रमित हो चुके हैं और करीब 24 हजार लोगों की मौत हो चुकी है।

    1 मार्च तक देश में सिर्फ 3 कोरोना के मामले सामने आए थे, जो केरल के थे। वो तीनों ही अब सही हो चुके हैं। भारत में कोरोना वायरस ने तेजी से फैलना शुरू किया 2 मार्च से, जब तीन नए मामले सामने आए। इनमें एक इटली से भारत लौटा दिल्ली का शख्स था, दूसरा दुबई से घर लौटा तेलंगाना का शख्स था और तीसरा एक इटली का टूरिस्ट था जो राजस्थान के जयपुर घूमने आया था। 2 मार्च से कोरोना वायरस भारत में ऐसा फैलना शुरू हुआ, जो अब तक नहीं रुका है। हर गुजरते दिन के साथ मरीज बढ़ते ही जा रहे हैं।


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    साभार: नभाटा, 27 Mar. 2020 11:24

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