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Thread: कोरोना वायरस

  1. #41
    स्वर्ण सदस्य bndu jain's Avatar
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    बीजिंग, एएफपी। दक्षिण-पश्चिम चीन में एक व्यक्ति ने खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया और अपने शरीर पर पटाखे बांध लिए। यह महज इसलिए क्योंकि स्थानिय अधिकारियों ने शख्स को जन्मदिन मनाने से मना कर दिया था। अधिकारियों ने कोरोना वायरस को लेकर एहतियात बरतते हुए जन्मदिन स्थान पर जाने नहीं दिया था।

    समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने बुधवार को बताया कि चूंगचींग निवासी 59 वर्षीय वैंग ने पिछले महीने के अंत में 10 टेबल के साथ पार्टा हॉल बुक किया था। मगर चीन भर में अधिकारियों द्वारा सार्वजनिक समारोहों को नहीं होने दिया जा रहा है, जिससे कोरोना वायरस ना फैल सके। तो इस कारण पार्टी को रद्द करने के लिए कहा गया था।

    बीजिंग के नगरपालिका अधिकारियों ने पिछले हफ्ते घोषणा की कि रेस्तरां में पार्टियों और समूह रात्रिभोज को वायरस के प्रसार को रोकने के लिए चीनी राजधानी में अस्थायी रूप से बैन कर दिया जाएगा। शिन्हुआ ने बताया कि पार्टी रद्द होने के बाद, पटाखों से लैस शख्स गांव समिति के कार्यालय में पहुंच गया। जहां उसने पटाखों को अपनी शरीर पर बांध लिया।
    उन्होंने अपनी शरीर पर पेट्रोल भी डाला और जन्मदिन की पार्टी की अनुमति देने के लिए ग्राम समिति को डराने और धमकाने के प्रयास में एक लाइटर निकाल कर दिखाने लगा। वहीं, समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने बताया कि स्थानीय वकीलों द्वारा मंगलवार को वांग के खिलाफ अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया।

    बता दें कि कोरोना वायरस के प्रकोप को रोकने के प्रयासों के कारण, चीन भर में लाखों लोग अपने जीवन में प्रतिबंधों और रुकावटों का सामना कर रहे हैं। 44,600 से अधिक लोग इस वायरस की चपेट में हैं और 1,100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।


  2. #42
    स्वर्ण सदस्य bndu jain's Avatar
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    कोरोना वायरसः पढ़ें अभी तक के सब अपडेट्स

  3. #43
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    विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चीन में फैले ख़तरनाक कोरोना वायरस का अधिकारिक नाम कोविड-19 रखा है.

    डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि ये नई बीमारी दुनिया के सामने बड़ा ख़तरा बन गई है लेकिन इससे निबटने की वास्तविक संभावना भी है.

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख डॉ टेडरोज़ अधान्योम गिबरेयेसोस ने बताया कि ये नाम इसलिए रखा गया है ताकि वायरस को किसी एक ख़ास क्षेत्र, जानवर या समूह से न जोड़ा जाए.

    डब्ल्यूएचओ ने साल 2015 में दिशानिर्देश जारी किए थे जिनके तहत नए वायरस के नामों को जगहों से न जोड़ने की सलाह दी गई थी. इससे पहले इबोला और ज़ीका जैसे वायरसों का नाम उन जगहों के नाम पर रख दिया गया था जहां वो पहली बार मिले थे. अब इबोला और ज़ीका को वायरस का पर्यायवाची बन गए हैं.

  4. #44
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    एक नदी पर जमी बर्फ़ पर कोरोना वायरस के बारे में सबसे पहले बताने वाले डॉ. ली वेनलियांग को श्रद्धांजलि देता संदेश

  5. #45
    स्वर्ण सदस्य bndu jain's Avatar
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    इससे पहले मध्यपूर्व में मिले कोरोना वायरस का नाम मर्स यानी मिडिल इस्टर्सन रेसपिरेटरी सिंड्रोम रख दिया गया था. वहीं 1918-20 में फैली महामारी को स्पेनिश फ्लू का नाम दिया गया था.

    डब्ल्यूएचओ को लगता है कि क्षेत्रों से वायरस को जोड़ना पूरे क्षेत्र के बारे में नकारात्मक राय बना सकती है. वहीं एच1एन1 संक्रमण को आम भाषा में स्वाइन फ्लू कहा गया था और इस नामांकरण की वजह से सुअरों के प्रति नकारात्मक नज़रिया बना था.

    यही वजह है कि इस नए वायरस का नाम कोविड-19 रखा गया है जिसका अर्थ है कोरोना वायरस डिसीज़ और इसमें 19 साल 2019 के लिए हैं क्योंकि ये वायरस सबसे पहले 31 दिसंबर 2019 को पहचाना गया था.


  6. #46
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    किसी बड़े आतंकी हमले से ख़तरनाक है ये वायरस

  7. #47
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    इस वायरस की वजह से चीन में मरने वालों की तादाद एक हज़ार के आंकड़ें को पार कर गई है. बयालीस हज़ार से अधिक लोग संक्रमण का शिकार हैं. अब तक दुनिया के 25 देशों में इसके मरीज़ मिल चुके हैं.

    जिनेवा में दुनियाभर से आए चार सौ वैज्ञानिक और डॉक्टर इस नए वायरस के बारे में जानकारियां साझा करने और टीका विकसित करने के लिए जुट रहे हैं.

    इस वायरस का स्रोत पता करने की भी कोशिश की जाएगी. अबी तक माना जा रहा है कि ये वायरस चमगादड़ों से किसी और जानवर के ज़रिए होता हुआ इंसानों तक पहुंचा है.

    अभी तक इस वायरस का कोई इलाज या टीका नहीं है और डब्ल्यूएचओ बार-बार दुनियाभर के देशों से इससे जुड़ी जानकारियां साझा करने का आह्वान करता रहा है.

    ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस और जर्मनी में विशेषज्ञों के कई दल इस वायरस का टीका खोजने की कोशिश कर रहे हैं. आमतौर पर इस प्रक्रिया में सालों लगते हैं.

    वहीं डॉ. टेडरोज़ का कहना है कि हम इस वायरस के सामने बिलकुल बेबस नहीं है. अगर अभी निवेश किया गया तो इससे निबटा जा सकता है.



  8. #48
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    अर्थव्यवस्था पर भारी चोट

  9. #49
    स्वर्ण सदस्य bndu jain's Avatar
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    अमरीका के फ़ेडरल रिज़र्व के चेयरमैन येरोमी पॉवेल ने कहा है कि चीन की अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस से हो रहा असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्था तक भी पहुंच सकता है.

    उन्होंने कहा कि अमरीका हालात पर नज़दीकी नज़र रख रहा है. इस वायरस की वजह से चीन की सैकड़ों कंपनियों पर असर हुआ है. इन कंपनियों का कहना है कि उन्हें अपने कारोबार चालू रखने के लिए क़र्ज़ की ज़रूरत होगी.

    सबसे ज़्यादा असर यात्रा से जुड़ी कंपनियों पर हुआ है. वायरस की वजह से दुनियाभर के लोगों ने अपनी यात्राओं को या तो टाल दिया है या उनमें फेरबदल किया है.

    वहीं उत्तर कोरिया ने भी अपने देश की सीमा की रक्षा के लिए सैकड़ों कर्मचारी तैनात किए गए हैं. अंतरराष्ट्रीय रेड क्रास के मुताबिक ये लोग निगरानी रखने के लिए तैनात किए गए हैं. उत्तर कोरिया ने चीन के साथ सड़क, रेल और हवाई संपर्क को पहले ही काट लिया है.

    वहीं दक्षिण कोरिया की मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक़ ये वायरस उत्तर कोरिया पहुंच चुका है.

  10. #50
    कांस्य सदस्य superidiotonline's Avatar
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    May 2017
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    सावधान भारत! बंद हुई दवाईयों की सप्लाई, कोरोना वायरस का पड़ा असर

    चीन में जानलेवा कोरोना वायरस का कहर अभी भी जारी है। जिसका असर अब भारत में भी पड़ सकता है। दरअसल, चीन से आने वाले सामान पर रोक के चलते भारत में दवाओं की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है।

    सावधान भारत! बंद हुई दवाईयों की सप्लाई, कोरोना वायरस का पड़ा असर

    वुहान: चीन में जानलेवा कोरोना वायरस का कहर अभी भी जारी है। जिसका असर अब भारत में भी पड़ सकता है। दरअसल, चीन से आने वाले सामान पर रोक के चलते भारत में दवाओं की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के पास अब केवल अप्रैल तक की ही दवा का स्टॉक बचा है।

    पैदा हो सकती हैं गंभीर समस्याएं

    भारत में दवाओं की कीमतों में किसी तरह का इजाफा न हो इसलिए केंद्र सरकार ने एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की है। जिसमें तकनीकी विभागों के एक्सपर्ट्स को भी शामिल किया गया है। इस कमेटी ने केंद्र की मोदी सरकार को जो रिपोर्ट सौंपी है, उसके अनुसार अगर चीन से अगले एक महीने तक दवाओं की सप्लाई नहीं होती है तो देश में गंभीर समस्या पैदा हो सकती है।

    भारत में 80% एपीआई चीन से होता है सप्लाई

    बता दें कि दवाओं से जुड़ी सबसे ज्यादा कंपनियां चीन के वुहान जैसे शहरों में हैं। इन कंपनियों से दवाओं का कच्चा माल दुनियाभर के देशों में सप्लाई किया जाता है। वहीं भारत में 80 प्रतिशत दवाओं का कच्चा माल यानि कि एपीआई चीन से ही आता है। न केवल एपीआई बल्कि ऑपरेशन थियेटर के 90 प्रतिशत पार्ट्स भी चीन से ही भारत आते हैं। आपको बता दें कि भारत चीन से लगभग 57 तरह के मॉलिक्यूल्स मंगाता है। लेकिन अभी चीन में कोरोना की वजह से फैक्ट्रियों में ताला लगा हुआ है। जिसके चलते भारत समेत अन्य देशों को भी भारी नुकसान हो सकता है।

    कोरोना की वजह से उत्पादन पर है रोक

    हालांकि केवल कोरोना वायरस के वजह से ही दिक्कते नहीं हो रही। बल्कि चीन में जनवरी में छुट्टियां रहती हैं। ऐसे में चीन से कच्चा माल बहुत कम आता है। जनवरी के बाद से कोरोना वायरस फैल गया और तब से ही चीन में उत्पादन को पूरी तरह से रोक दिया गया है। कोरोना वायरस के चलते चीन की ज्यादातर कंपनियों पर पिछले एक महीने से ताले लगे हुए हैं।

    कब तक खोली जाएंगी कंपनियां

    सूत्रों के मुताबिक, जब तक कोरोना वायरस के संक्रमण पर काबू नहीं पा लिया जाता, तब तक इन कंपनियों को नहीं खोला जाएगा। इसके बाद जब भी चीनी कंपनियां फिर से उत्पादन शुरू करेंगी, तब भी समुद्री रास्ते के जरिए भारत तक दवा पहुंचाने में तकरीबन 20 दिन का वक्त लगेगा।

    कोराना की वजह से भारत की दवाओं पर पड़ रहा असर

    चीन में फैले कोरोना वायरस की वजह से भारत की दवाओं पर असर पड़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार की ओर से दवाओं के निर्यात पर रोक लगाई जा सकती है। हर साल भारत से अलग-अलग देशों में 1.3 लाख करोड़ रुपये की दवाओं का निर्यात किया जाता है। बता दें कि अगर चीन में इसी तरह के हालात बने रहे तो भारत में एंटीबॉयोटिक्स, एंटी डायबिटिक, स्टेरॉयड, हॉर्मोन्स और विटामिन की दवाओं की कमी आ सकती है।

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    साभार: न्यूज़ट्रैक

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