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Thread: आज का हिन्दु पंचांग

  1. #21
    आश्रमाचार्य amol05's Avatar
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    ???? ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ ????
    ⛅ *दिनांक 21 जून 2020*
    ⛅ *दिन - रविवार*
    ⛅ *विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)*
    ⛅ *शक संवत - 1942*
    ⛅ *अयन - दक्षिणायन*
    ⛅ *ऋतु - वर्षा*
    ⛅ *मास - आषाढ़ (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार ज्येष्ठ)*
    ⛅ *पक्ष - कृष्ण*
    ⛅ *तिथि - अमावस्या दोपहर 12:10 तक तत्पश्चात प्रतिपदा*
    ⛅ *नक्षत्र - मृगशिरा दोपहर 01:02 तक तत्पश्चात आर्द्रा*
    ⛅ *योग - गण्ड दोपहर 01:46 तक तत्पश्चात वृद्धि*
    ⛅ *राहुकाल - शाम 05:31 से शाम 07:12 तक*
    ⛅ *सूर्योदय - 05:58*
    ⛅ *सूर्यास्त - 19:21*
    ⛅ *दिशाशूल - पश्चिम दिशा में*
    ⛅ *व्रत पर्व विवरण - कंकणाकृति सूर्यग्रहण (सुरत में ग्रहण-समय सुबह 10:01 से दोपहर 01:33 तक) (भारत में दिखेगा, नियम पालनीय*
    ???? *विशेष - अमावस्या के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????

    ???? *ग्रहण के समय निर्देश* ????
    ✔ *करने योग्य*
    ???? *1. ग्रहण के समय भगवान का चिंतन, जप, ध्यान करने पर उसका लाख गुना फल मिलता है , ग्रहण के समय हज़ार काम छोड़ कर मौन और जप करिए l*
    ???? *2. ग्रहण लगने के पहले खान - पान ऐसा करिए कि आपको बाथरूम में ना जाना पड़े l*
    ❌ *ना करने योग्य*
    ???? *1. ग्रहण के समय सोने से रोग बढ़ते हैं l*
    ???? *2. ग्रहण के समय सम्भोग करने से सुअर की योनि मिलती है l*
    ???? *3. ग्रहण के समय मूत्र त्याग नहीं करना चाहिए, दरिद्रता आती है l*
    ???? *4. ग्रहण के समय धोखाधड़ी और ठगाई करने से सर्पयोनि मिलती है l*
    ???? *5. ग्रहण के समय शौच नहीं जाना चाहिए, वर्ना पेट में कृमि होने लगते हैं l*
    ???? *6. ग्रहण के समय जीव-जंतु या किसी की हत्या हो जाय तो नारकीय योनि में जाना पड़ता है l*
    ???? *7. ग्रहण के समय भोजन व मालिश करने वाले को कुष्ट रोग हो जाता है l*
    ???? *8. ग्रहण के समय पत्ते, तिनके, लकड़ी, फूल आदि नहीं तोड़ने चाहिए l*
    ???? *9. स्कन्द पुराण के अनुसार ग्रहण के समय दूसरे का अन्न खाने से १२ साल का किया हुआ जप, तप, दान स्वाहा हो जाता है l*
    ???? *10. ग्रहण के समय अपने घर की चीज़ों में कुश, तुलसी के पत्ते अथवा तिल डाल देने चाहिए l*
    ???? *11. ग्रहण के समय रुद्राक्ष की माला धारण करने से पाप नाश हो जाते हैं l*
    ???? *12. ग्रहण के समय दीक्षा अथवा दीक्षा लिए हुए मंत्र का जप करने से सिद्धि हो जाती है l*

    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????

    ???? *भारत के कुछ प्रमुख स्थानों के ग्रहण-समय* ????
    ➡ *अहमदाबाद सुबह 10:03 से दोपहर 01:33 तक*
    ➡ *दिल्ली सुबह 10:20 से दोपहर 01:49 तक*
    ➡ *सुरत व नाशिक सुबह 10:01 से दोपहर 01:33 तक*
    ➡ *गुवाहाटी सुबह 10:57 से दोपहर 02:25 तक*
    ➡ *जोधपुर सुबह 10:08 से दोपहर 01:37 तक*
    ➡ *लखनऊ सुबह 10:26 से दोपहर 01:59 तक*
    ➡ *भोपाल सुबह 10:14 से दोपहर 01:48 तक*
    ➡ *रायपुर (छत्तीसगढ़) सुबह 10:25 से दोपहर 02:00 तक*
    ➡ *जम्मू सुबह 10:14 से दोपहर 01:42 तक*
    ➡ *चंडीगढ़ सुबह 10:22 से दोपहर 01:48 तक*
    ➡ *राँची व पटना सुबह 10:36 से दोपहर 02:10 तक*
    ➡ *कोलकता सुबह 10:46 से दोपहर 02:18 तक*
    ➡ *भुवनेश्वर सुबह 10:37 से दोपहर 02:10 तक*
    ➡ *चेन्नई सुबह 10:22 से दोपहर 01:42 तक*
    ➡ *बेंगलुरु सुबह 10:12 से दोपहर 01:33 तक*
    ➡ *हैदराबाद सुबह 10:14 से दोपहर 01:45 तक*
    ➡ *नागपुर सुबह 10:17 से दोपहर 01:51 तक*
    ➡ *मुंबई सुबह 10:00 से दोपहर 01:28 तक*
    ???? *विदेश के कुछ प्रमुख स्थानों के ग्रहण-समय*
    ➡ *काठमांडू (नेपाल) सुबह 10:43 से दोपहर 02:25*
    ➡ *एथेंस (ग्रीस) सुबह 07:48 से सुबह 09:12*
    ➡ *बाकू (अजरबैजान) सुबह 08:46 से दोपहर 11:05*
    ➡ *हगटना (यू.एस.ए.) शाम 05:25 से शाम 06:51*
    ➡ *नैरोबी (केन्या) सुबह 06:46 से सुबह 09:04*
    ➡ *दुबई (यू.एस.ए.) सुबह 08:14 से दोपहर 11:13*
    ➡ *हाँगकाँग दोपहर 02:36 से 05:25*
    ???????? *विदेश के स्थानों के समय स्थानीय समयानुसार*

    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????

    ???? *गुप्त नवरात्रि* ????
    ???????? *हिंदू धर्म के अनुसार, एक साल में चार नवरात्रि होती है, लेकिन आम लोग केवल दो नवरात्रि (चैत्र व शारदीय नवरात्रि) के बारे में ही जानते हैं। इनके अलावा आषाढ़ तथा माघ मास में भी नवरात्रि का पर्व आता है, जिसे गुप्त नवरात्रि कहते हैं। इस बार आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा (22 जून, सोमवार) से होगा, जो आषाढ़ शुक्ल नवमी (29 जून, सोमवार) को समाप्त होगी।*
    ???? *शत्रु को मित्र बनाने के लिए* ????
    ???????? *नवरात्रि में शुभ संकल्पों को पोषित करने, रक्षित करने, मनोवांछित सिद्धियाँ प्राप्त करने के लिए और शत्रुओं को मित्र बनाने वाले मंत्र की सिद्धि का योग होता है।*
    ???????? *नवरात्रि में स्नानादि से निवृत हो तिलक लगाके एवं दीपक जलाकर यदि कोई बीज मंत्र 'हूं' (Hum) अथवा 'अं रां अं' (Am Raam Am) मंत्र की इक्कीस माला जप करे एवं 'श्री गुरुगीता' का पाठ करें तो शत्रु भी उसके मित्र बन जायेंगे l*
    ???????? *माताओं बहनों के लिए विशेष कष्ट निवारण हेतु प्रयोग 1*
    ???????? *जिन माताओं बहनों को दुःख और कष्ट ज्यादा सताते हैं, वे नवरात्रि के प्रथम दिन (देवी-स्थापना के दिन) दिया जलायें और कुम-कुम से अशोक वृक्ष की पूजा करें ,पूजा करते समय निम्न मंत्र बोलें :*
    ???? *“ अशोक शोक शमनो भव सर्वत्र नः कुले "*
    *" ASHOK SHOK SHAMNO BHAV SARVATRA NAH KULE "*
    ???????? *भविष्योत्तर पुराण के अनुसार नवरात्रि के प्रथम दिन इस तरह पूजा करने से माताओ बहनों के कष्टों का जल्दी निवारण होता है l*
    ???????? *माताओं बहनों के लिए विशेष कष्ट निवारण हेतु प्रयोग 2*
    ???????? *शुक्ल पक्ष तृतीया (24 जून, बुधवार) के दिन में सिर्फ बिना नमक मिर्च का भोजन करें l (जैसे दूध, रोटी या खीर खा सकते हैं, नमक मिर्च का भोजन अगले दिन ही करें l)*
    ???? • *" ॐ ह्रीं गौरये नमः "*
    *"Om Hreem Goryaye Namah"*
    ???????? *मंत्र का जप करते हुए उत्तर दिशा की ओर मुख करके स्वयं को कुम -कुम का तिलक करें l*
    ???? *गाय को चन्दन का तिलक करके गुड़ और रोटी खिलाएं l*
    ???? *श्रेष्ठ अर्थ (धन) की प्राप्ति हेतु* ????
    ➡ *प्रयोग : नवरात्रि में देवी के एक विशेष मंत्र का जप करने से श्रेष्ठ अर्थ कि प्राप्ति होती है मंत्र ध्यान से पढ़ें :*
    ???? *" ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमल-वासिन्ये स्वाह् "*
    *" OM SHREEM HREEM KLEEM AIM KAMALVAASINYE SWAHA "*

    ???????? *विद्यार्थियों के लिए* ????????
    ???????? *प्रथम नवरात्रि के दिन विद्यार्थी अपनी पुस्तकों को ईशान कोण में रख कर पूजन करें और नवरात्रि के तीसरे तीन दिन विद्यार्थी सारस्वत्य मंत्र का जप करें।*
    ???? *इससे उन्हें विद्या प्राप्ति में अपार सफलता मिलती है l*
    *बुद्धि व ज्ञान का विकास करना हो तो सूर्यदेवता का भ्रूमध्य में ध्यान करें ।*
    ???????? *जिनको गुरुमंत्र मिला है वे गुरुमंत्र का, गुरुदेव का, सूर्यनारायण का ध्यान करें। अतः इस सरल मंत्र की एक-दो माला नवरात्रि में अवश्य करें और लाभ लें l*
    ???????? *–(वेद-व्यास जी , देवी भागवत)*

    *???????????????? आर्यावर्त भरतखंड ????????????????*

    ???? *~हिन्दू पंचांग ~*????
    ????????????????????????????????????????????????
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  2. #22
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    ???? ~ *हिन्दू पंचांग* ~ ????
    ⛅ *दिनांक 22 जून 2020*
    ⛅ *दिन - सोमवार*
    ⛅ *विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)*
    ⛅ *शक संवत - 1942*
    ⛅ *अयन - दक्षिणायन*
    ⛅ *ऋतु - वर्षा*
    ⛅ *मास - आषाढ़*
    ⛅ *पक्ष - शुक्ल*
    ⛅ *तिथि - प्रतिपदा दोपहर 11:59 तक तत्पश्चात द्वितीया*
    ⛅ *नक्षत्र - आर्द्रा दोपहर 01:31 तक तत्पश्चात पुनर्वसु*
    ⛅ *योग - वृद्धि दोपहर 12:35 तक तत्पश्चात ध्रुव*
    ⛅ *राहुकाल - सुबह 07:27 से सुबह 09:08 तक*
    ⛅ *सूर्योदय - 05:59*
    ⛅ *सूर्यास्त - 19:22*
    ⛅ *दिशाशूल - पूर्व दिशा में*
    ⛅ *व्रत पर्व विवरण - चन्द्र-दर्शन*
    ???? *विशेष - प्रतिपदा को कूष्माण्ड(कुम्हड़? ??, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????

    ???? *गुप्त नवरात्रि* ????
    ???????? *आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 22 जून 2020 सोमवार से शुरू हो रही हैं, जो 29 जून सोमवार तक रहेंगी । नवरात्रि के इन 9 दिनों में देवी के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। इन नौ दिनों में देवी को विभिन्न प्रकार के भोग भी लगाए जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, इस उपाय से साधक (उपाय करने वाला) की सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। जानिए किस तिथि पर देवी को किस चीज का भोग लगाना चाहिए-*
    ➡ *ये हैं गुप्त नवरात्रि के अचूक उपाय*
    1⃣ *प्रतिपदा तिथि को माता को घी का भोग लगाएं। इससे रोगी को कष्टों से मुक्ति मिलती हैं एवं शरीर निरोगी होता है।*
    2⃣ *द्वितीया तिथि को माता को शक्कर का भोग लगाएं। इससे उम्र लंबी होती है।*
    3⃣ *तृतीया तिथि को माता को दूध का भोग लगाएं। इससे सभी प्रकार के दुःखों से मुक्ति मिलती है।*
    4⃣ *चतुर्थी तिथि को माता को मालपुआ का भोग लगाएं। इससे समस्याओं का अंत होता है।*
    5⃣ *पंचमी तिथि को माता को केले का भोग लगाएं। इससे परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।*
    6⃣ *षष्ठी तिथि को माता को शहद का भोग लगाएं। इससे धन लाभ होने के योग बनते हैं ।*
    7⃣ *सप्तमी तिथि को माता को गुड़ का भोग लगाएं। इससे हर मनोकामना पूरी हो सकती है।*
    8⃣ *अष्टमी तिथि को माता को नारियल का भोग लगाएं। इससे घर में सुख-समुद्वि आती है*
    9⃣ *नवमी तिथि को माता को विभिन्न प्रकार के अनाज का भोग लगाएं। इससे वैभव व यश मिलता है।*
    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????

    ???? *गुप्त नवरात्रि* ????
    ➡ *आषाढ़ मास की शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तिथि तक गुप्त नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। बहुत कम लोग इस नवरात्रि के बारे में जानते हैं, इसलिए इसे गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। गुप्त नवरात्रि में किए गए उपाय जल्दी ही शुभ फल प्रदान कर सकते हैं। धन, नौकरी, स्वास्थ्य, संतान, विवाह, प्रमोशन आदि कई मनोकामनाएं इन 9 दिनों में किए गए उपायों से प्राप्त हो सकते हैं । अगर आपके मन में कोई मनोकामना है तो आगे बताए गए उपायों से वह पूरी हो सकती है। ये उपाय इस प्रकार हैं-*
    ???? *1. धन लाभ के लिए उपाय*
    *गुप्त नवरात्रि के दौरान किसी भी दिन स्नान आदि करने के बाद उत्तर दिशा की ओर मुख करके पीले आसन पर बैठ जाएं। अपने सामने तेल के ९ दीपक जला लें। ये दीपक साधनाकाल तक जलते रहना चाहिए। दीपक के सामने लाल चावल (चावल को रंग लें) की एक ढेरी बनाएं फिर उस पर एक श्रीयंत्र रखकर उसका कुम कुम, फूल, धूप, तथा दीप से पूजन करें।*
    ➡ *उसके बाद एक प्लेट पर स्वस्तिक बनाकर उसे अपने सामने रखकर उसका पूजन करें। श्रीयंत्र को अपने पूजा स्थल पर स्थापित कर लें और शेष सामग्री को नदी में प्रवाहित कर दें। इस प्रयोग से आपको अचानक धन लाभ होने के योग बन सकते हैं।*
    ???????????????? *2. शीघ्र विवाह के लिए उपाय*
    *गुप्त नवरात्रि में शिव-पार्वती का एक चित्र अपने पूजास्थल में रखें और उनकी पूजा करने के बाद नीचे लिखे मंत्र का 3, 5 अथवा 10 माला जप करें। जप के बाद भगवान शिव से विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें-*
    ???? *मंत्र- ऊं शं शंकराय सकल-जन्मार्जित-पाप-विध्वंसनाय,*
    *पुरुषार्थ-चतुष्टय-लाभाय च पतिं मे देहि कुरु कुरु स्वाहा।।*
    ???????? *3. मनपसंद वर के लिए उपाय*
    *गुप्त नवरात्रि के दौरान किसी भी दिन अपने पास स्थित शिव मंदिर में जाएं। वहां भगवान शिव एवं मां पार्वती पर जल एवं दूध चढ़ाएं और पंचोपचार (चंदन, पुष्प, धूप, दीप एवं नैवेद्य) से उनका पूजन करें। अब मौली (पूजा में उपयोग किया जाने वाला लाल धागा) से उन दोनों के मध्य गठबंधन करें। अब वहां बैठकर लाल चंदन की माला से इस मंत्र का जप 108 बार करें-*
    ???? *हे गौरी शंकरार्धांगी। यथा त्वं शंकर प्रिया।*
    *तथा मां कुरु कल्याणी, कान्त कान्तां सुदुर्लभाम्।।*
    ➡ *इसके बाद तीन महीने तक रोज इसी मंत्र का जप शिव मंदिर में अथवा अपने घर के पूजाकक्ष में मां पार्वती के सामने 108 बार करें। घर पर भी आपको पंचोपचार पूजा करनी है।*
    ???? *4. बरकत बढ़ाने का उपाय*
    *गुप्त नवरात्रि में किसी भी दिन सुबह स्नान कर साफ कपड़े में अपने सामने मोती शंख को रखें और उस पर केसर से स्वस्तिक का चिह्न बना दें। इसके बाद नीचे लिखे मंत्र का जप करें-*
    ???? *श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:*
    ➡ *मंत्र का जप स्फटिक माला से ही करें। मंत्रोच्चार के साथ एक-एक चावल इस शंख में डालें। इस बात का ध्यान रखें की चावल टूटे हुए ना हो। यह प्रयोग लगातार नौ दिनों तक करें। इस प्रकार रोज एक माला जप करें। उन चावलों को एक सफेद रंग के कपड़े की थैली में रखें और 9 दिन के बाद चावल के साथ शंख को भी उस थैली में रखकर तिजोरी में रखें। इस उपाय से घर की बरकत बढ़ सकती है।*
    ???????? *5. मनचाही दुल्हन के लिए उपाय*
    *गुप्त नवरात्रि के दौरान जो भी सोमवार आए। उस दिन सुबह किसी शिव मंदिर में जाएं। वहां शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर चढ़ाते हुए उसे अच्छी तरह से साफ करें। फिर शुद्ध जल चढ़ाएं और पूरे मंदिर में झाड़ू लगाकर उसे साफ करें। अब भगवान शिव की चंदन, पुष्प एवं धूप, दीप आदि से पूजा करें।*
    ➡ *रात 10 बजे के बाद अग्नि प्रज्वलित कर ऊं नम: शिवाय मंत्र का उच्चारण करते हुए घी से 108 आहुति दें। अब 40 दिनों तक नित्य इसी मंत्र का पांच माला जप भगवान शिव के सामने करें। इससे शीघ्र ही आपकी मनोकामना पूर्ण होने के योग बनेंगे।*
    ????????*♂ *6. इंटरव्यु में सफलता का उपाय*
    *गुप्त नवरात्रि में किसी भी दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद सफेद रंग का सूती आसन बिछाकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके उस पर बैठ जाएं। अब अपने सामने पीला कपड़ा बिछाकर उस पर 108 दानों वाली स्फटिक की माला रख दें और इस पर केसर व इत्र छिड़क कर इसकी पूजा करें।*
    ➡ *इसके बाद धूप, दीप और अगरबत्ती दिखाकर नीचे लिखा मंत्र 31 बार बोलें। इस प्रकार 11 दिन तक करने से वह माला सिद्ध हो जाएगी। जब भी किसी इंटरव्यु में जाएं तो इस माला को पहन कर जाएं। ये उपाय करने से इंटरव्यु में सफलता की संभावना बढ़ सकती है।*
    ???? *मंत्र- ऊं ह्लीं वाग्वादिनी भगवती मम कार्य सिद्धि कुरु कुरु फट् स्वाहा।*
    ???????????????? *7. दांपत्य सुख के लिए उपाय*
    *यदि जीवनसाथी से अनबन होती रहती है तो गुप्त नवरात्रि में रोज नीचे लिखी चौपाई को पढ़ते हुए 108 बार अग्नि में घी से आहुतियां दें। इससे यह चौपाई सिद्ध हो जाएगी। अब नित्य सुबह उठकर पूजा के समय इस चौपाई को 21 बार पढ़ें। यदि संभव हो तो अपने जीवनसाथी से भी इस चौपाई का जप करने के लिए कहें-*
    ???? *​चौपाई*
    *सब नर करहिं परस्पर प्रीति।*
    *चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीति।।*

    *???????????????? आर्यावर्त भरतखंड ????????????????*
    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????
    ????????????????☘????????????????????????????
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  3. #23
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    ???? ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ ????
    ⛅ *दिनांक 23 जून 2020*
    ⛅ *दिन - मंगलवार*
    ⛅ *विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)*
    ⛅ *शक संवत - 1942*
    ⛅ *अयन - दक्षिणायन*
    ⛅ *ऋतु - वर्षा*
    ⛅ *मास - आषाढ़*
    ⛅ *पक्ष - शुक्ल*
    ⛅ *तिथि - द्वितीया दोपहर 11:19 तक तत्पश्चात तृतीया*
    ⛅ *नक्षत्र - पुनर्वसु दोपहर 01:33 तक तत्पश्चात पुष्य*
    ⛅ *योग - ध्रुव दोपहर 11:02 तक तत्पश्चात व्याघात*
    ⛅ *राहुकाल - शाम 03:51 से शाम 05:31 तक*
    ⛅ *सूर्योदय - 05:59*
    ⛅ *सूर्यास्त - 19:22*
    ⛅ *दिशाशूल - उत्तर दिशा में*
    ⛅ *व्रत पर्व विवरण - भगवान जगन्नाथ रथयात्रा*
    ???? *विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????

    ???? *लक्ष्मी प्राप्ति में सावधानी* ????
    ???? *फूलों को पैरो तले नहीं आने देना चाहिए, अन्यथा लक्ष्मीजी नाराज़ हो जाती हैं l*

    ???? ~ *हिन्दू पंचांग* ~ ????

    ???? *वास्तु शास्त्र* ????
    ???? *22 जून से 29 जून तक गुप्त नवरात्रि पर्व है। इस दौरान देवी की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व माना जाता है। वास्तु में ऐसी कई वस्तुएं बताई गई हैं, जिनका खास संबंध किसी विशेष देवी-देवता या दिन से माना जाता है। वास्तु के अनुसार, देवी से संबंधित ये 5 चीजें नवरात्रि के दौरान घर में लाई जाएं तो देवी प्रसन्न होती हैं और घर-परिवार पर देवी की विशेष कृपा बनी रहती है।*
    ➡ *पाना चाहते हैं देवी की विशेष कृपा तो नवरात्रि के दौरान घर में रखें ये 5 चीजें*
    1⃣ *कमल का फूल या तस्वीर*
    *कमल का फूल देवी लक्ष्मी को विशेष रुप से प्रिय है।नवरात्रि के दौरान यदि घर में कमल का फूल या उससे संबंधी कोई तस्वीर लगाई जाए तो देवी लक्ष्मी की कृपा घर-परिवार पर हमेशा बनी रहती है।*
    2⃣ *चाँदी या सोने का सिक्का*
    *नवरात्रि के दौरान घर में चाँदी या सोने का सिक्का लाना अच्छा माना जाता है। सिक्के पर यदि देवी लक्ष्मी या भगवान गणेशजी का श्रीचित्र अंकित हो तो और शुभ होगा।*
    3⃣ *देवी लक्ष्मी की ऐसी तस्वीर*
    *घर में हमेशा धन-धान्य बनाए रखना चाहते हैं तो नवरात्रि के दौरान देवी लक्ष्मी की ऐसी तस्वीर घर में लाएँ जिसमें कमल के फूल पर माता लक्ष्मी बैठी दिखाई दे रही हो, साथ ही उनके हाथों से धन की वर्षा हो रही हो।*
    4⃣ *मोर पंख*
    *देवी के सरस्वती स्वरूप में देवी का वाहन मोर माना जाता है, इसलिए नवरात्रि के दौरान घर में मोर पंख ला कर उसे मंदिर में स्थापित करने से कई फायदे होते हैं।*
    5⃣ *सोलह श्रृंगार का सामान*
    *नवरात्रि के दौरान सोलह- श्रृंगार का सामान घर लाना चाहिए और उसे घर के मंदिर में स्थापित कर देना चाहिए। ऐसा करने से देवी माँ की कृपा हमेशा घर पर बनी रहती है।*
    ???? ~ *हिन्दू पंचांग* ~ ????

    ???? *दुर्गति से रक्षा हेतु* ????
    ???? *मरणासन्न व्यक्ति के सिरहाने गीताजी रखें | दाह – संस्कार के समय ग्रन्थ को गंगाजी में बहा दें, जलायें नहीं |*
    ???? *मृतक के अग्नि – संस्कार की शुरुआत तुलसी की लकड़ियों से करें अथवा उसके शरीर पर थोड़ी – सी तुलसी की लकडियाँ बिछा दें, इससे दुर्गति से रक्षा होती है |*


    *???????????????? आर्यावर्त भरतखंड ????????????????*
    ???? ~ *हिन्दू पंचांग* ~ ????
    ????????????????????????????????????????????????
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  4. #24
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    ???? ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ ????
    ⛅ *दिनांक 24 जून 2020*
    ⛅ *दिन - बुधवार*
    ⛅ *विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)*
    ⛅ *शक संवत - 1942*
    ⛅ *अयन - दक्षिणायन*
    ⛅ *ऋतु - वर्षा*
    ⛅ *मास - आषाढ़*
    ⛅ *पक्ष - शुक्ल*
    ⛅ *तिथि - तृतीया सुबह 10:14 तक तत्पश्चात चतुर्थी*
    ⛅ *नक्षत्र - पुष्य दोपहर 01:10 तक तत्पश्चात अश्लेशा*
    ⛅ *योग - व्याघात सुबह 09:09 तक तत्पश्चात हर्षण*
    ⛅ *राहुकाल - दोपहर 12:29 से दोपहर 02:10 तक*
    ⛅ *सूर्योदय - 05:59*
    ⛅ *सूर्यास्त - 19:22*
    ⛅ *दिशाशूल - उत्तर दिशा में*
    ⛅ *व्रत पर्व विवरण - विनायक चतुर्थी*
    ???? *विशेष - तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????

    ???? *अनिद्रा से छुटकारा* ????
    ???????? *१० मिनट विधिवत श्वासन करने से या जीभ के अग्रभाग को दाँतो से थोडा दबाकर १० मिनट तक ज्ञान मुद्रा लगा के बैठने से शारीरिक – मानसिक तनाव व अनिद्रा आदि की बीमारी दूर होती है |*

    ???? ~ *हिन्दू पंचांग* ~ ????

    ???? *वर्षा ऋतु विशेष* ????
    ☔ *अभी वर्षा ऋतु चल रही है | इसे शास्*त्रीय भाषा में आदानकाल बोलते है | जठराग्नि दुर्बल होती है | वायु, गैस की तकलीफें उभरती हैं | पित्त संचित होता है | अगर सावधान नहीं रहें तो पित्त व वात मिलकर हार्ट अटैक बना सकता है | इस आदानकाल में कब्जियत न रहे इसका ध्*यान रखना चाहिए |*
    ☔ *करने योग्य* ☔
    ✅ *१) पेट साफ़ रहे इसके लिए हरड़ रसायन २ -२ गोली खाना | हरड रसायन , रसायन से बना हुआ टोनिक है । दिनभर खाया हुआ टोनिक बन जायेगा |*
    ✅ *२) शुद्ध वातावरण व शुद्ध जल का सेवन करना |*
    ✅ *३) मधुर भोजन, चिकनाईवाला, शरीर को बल देनेवाला भोजन करना चाहिये और दोपहर के भोजन में नींबू, अदरक, सैंधा नमक, लौकी, मैथी, खीरा, तुरई आदि खाने चाहिए |*
    ✅ *४) वर्षाऋतु में पानी गरम करके पियें अथवा तो पानी की शुद्धता का ध्यान रखें |*
    ✅ *५) वायुप्रकोप से जोडों में दर्द बनने की संभावना है और बुढ़ापे में लकवा मारने की संभावना बढ़ जाती है | भोजन में लहसुन की छौंक लकवे से फाईट करता है |*
    ✅ *६) चर्मरोग, रक्तविकार आदि बिमारियों की इस ऋतु में संभावना बढ़ जाती है | नींबू, अदरक, गाजर, खीरा स्वास्थ्*यप्रद रहेगा |*
    ✅ *७) सूर्यकिरण स्नान सभी ऋतुओं में स्वास्थ्*य के लिए हितकारक है |*
    ✅ *८) अश्विनी मुद्रा- श्वांस रोककर योनि संकोच लेना और मन में भगवान का जप करना इस सीज़न की बी*मारि*यों को भगाने की एक सुंदर युक्ति है |*
    ☔ *न करने योग्य* ☔
    ❌ *१) गरम, तले हुए, रूखे, बासी, डबल रोटी, आटा लगा हुआ बिस्किट आदि स्वास्थय के लिए इस सीज़न में हितकर नहीं है । फास्ट फ़ूड से बचना चाहिए |*
    ❌ *२) देर रात बारिश के सीज़न में न जागें |*
    ❌ *३) अधिक श्रम, अधिक व्यायाम न करें |*
    ❌ *४) खुले आकाश में सोना खतरे से खाली नहीं है ।*
    ❌ *५) ज्यादा देर तक शरीर भीगा हुआ न रखें | सिर गिला हो तो तुरंत पोछ लें।*
    ❌ *६) भीगे शरीर न सोयें और रात्रि को स्नान न करें | मासिक धर्म आये तो तुरंत स्नान करके सूखे कपडे से अपने को पींछ लें |*

    *???????????????? आर्यावर्त भरतखंड ????????????????*

    ???? ~ *हिन्दू पंचांग* ~ ????
    ????????????????????????????????????????????????
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  5. #25
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    ???? ~ *हिन्दू पंचांग* ~ ????
    ⛅ *दिनांक 25 जून 2020*
    ⛅ *दिन - गुरुवार*
    ⛅ *विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)*
    ⛅ *शक संवत - 1942*
    ⛅ *अयन - दक्षिणायन*
    ⛅ *ऋतु - वर्षा*
    ⛅ *मास - आषाढ़*
    ⛅ *पक्ष - शुक्ल*
    ⛅ *तिथि - चतुर्थी सुबह 08:47 तक तत्पश्चात पंचमी*
    ⛅ *नक्षत्र - अश्लेशा दोपहर 12:27 तक तत्पश्चात मघा*
    ⛅ *योग - हर्षण सुबह 06:59 तक तत्पश्चात वज्र*
    ⛅ *राहुकाल - दोपहर 02:10 से शाम 03:51 तक*
    ⛅ *सूर्योदय - 06:00*
    ⛅ *सूर्यास्त - 19:22*
    ⛅ *दिशाशूल - दक्षिण दिशा में*
    ⛅ *व्रत पर्व विवरण -
    ???? *विशेष - चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????

    ???? *सास -बहू के बीच अनबन होती हो तो* ????
    ???????? *घर में सास -बहू के बीच अनबन होती हो तो सास -बहू दोनों मिलकर एक बढ़िया फोटो खिंचवा लें ....एक दूसरे को फूल देते हुए .... मुस्कुराते हुए। वो फोटो घर में दक्षिण और पश्चिम के बीच के कोने पर लगा दें ..... भगवान का नाम लेकर । फिर देखो सास -बहू के बीच कैसा प्रेम होगा ।*
    ???????? *- श्री सुरेशानंदजी Vadodara 9/11/2011*
    ???? ~ *हिन्दू पंचांग* ~ ????

    ???? *वास्तु शास्त्र* ????
    ???? *घर में न रखें सूखे फूल*
    *ताजा फूल घर में सजाए जा सकते हैं, लेकिन अगर ये मुरझाने लगें तो इन्हे फौरन हटा देना चाहिए। सूखे फूल घर में नेगेटिविटी और बीमारी फैलाते हैं ।*
    ???? ~ *हिन्दू पंचांग* ~ ????

    ???? *वर्षा स्नान* ????
    ☔ *बारिश के पानी में स्नान करने से बुढ़ापे में लकवा, संधिपात (जोडों का दर्द) आदि की तकलीफें आती हैं l लेकिन धूप निकलती हो, उस समय वर्षा में स्नान करना अमृत स्नान माना गया है l*
    ???????? *पूज्य बापूजी*

    *???????????? आर्यावर्त भरतखंड ????????????*
    ???? ~ *हिन्दू पंचांग* ~ ????
    ????????????????????????????????????????????????
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  6. #26
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    ???? ~ *हिन्दू पंचांग* ~ ????
    ⛅ *दिनांक 26 जून 2020*
    ⛅ *दिन - शुक्रवार*
    ⛅ *विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)*
    ⛅ *शक संवत - 1942*
    ⛅ *अयन - दक्षिणायन*
    ⛅ *ऋतु - वर्षा*
    ⛅ *मास - आषाढ़*
    ⛅ *पक्ष - शुक्ल*
    ⛅ *तिथि - पंचमी सुबह 07:02 तक तत्पश्चात षष्ठी*
    ⛅ *नक्षत्र - मघा दोपहर 11:26 तक तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी*
    ⛅ *योग - सिद्धि 27 जून रात्रि 01:55 तक तत्पश्चात व्यतिपात*
    ⛅ *राहुकाल - सुबह 10:49 से दोपहर 12:30 तक*
    ⛅ *सूर्योदय - 06:00*
    ⛅ *सूर्यास्त - 19:22*
    ⛅ *दिशाशूल - पश्चिम दिशा में*
    ⛅ *व्रत पर्व विवरण - षष्ठी क्षय तिथि*
    ???? *विशेष - पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????

    ???? *वर्षा ऋतु विशेष* ????
    ☔ *अभी सीजन में बारिश आयेगी.... भूख कम हो जायेगी ...वायु की तकलीफ होगी, पाचन की तकलीफ होगी.... वो तकलीफ आये उसके पहले तकलीफ मिटाने की ताकत तुम्हारे अपने अंदर पैदा कर लो | हरद रसायन औषधि है रसायन माना टोनिक, १-२ गोली सुबह अथवा शाम चूस लिया करो .....जो खाया है वो पाचन टोनिक में बदल जायेगा पुष्टि देने वाला |*
    ???????? *- Pujya Bapuji Chandigarh 17th June' 2012*
    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????

    ???? *व्यतिपात योग* ????
    ???????? *व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है।*
    ???????? *वाराह पुराण में ये बात आती है व्यतिपात योग की।*
    ???????? *व्यतिपात योग माने क्या कि देवताओं के गुरु बृहस्पति की धर्मपत्नी तारा पर चन्द्र देव की गलत नजर थी जिसके कारण सूर्य देव अप्रसन्न हुए नाराज हुए , उन्होनें चन्द्रदेव को समझाया पर चन्द्रदेव ने उनकी बात को अनसुना कर दिया तो सूर्य देव को दुःख हुआ कि मैने इनको सही बात बताई फिर भी ध्यान नहीं दिया और सूर्यदेव को अपने गुरुदेव की याद आई कि कैसा गुरुदेव के लिये आदर प्रेम श्रद्धा होना चाहिये पर इसको इतना नहीं थोडा भूल रहा है ये, सूर्यदेव को गुरुदेव की याद आई और आँखों से आँसू बहे वो समय व्यतिपात योग कहलाता है। और उस समय किया हुआ जप, सुमिरन, पाठ, प्रायाणाम, गुरुदर्शन की खूब महिमा बताई है वाराह पुराण में।*
    ???? *विशेष ~ व्यतिपात योग - 27 जून रात्रि 01:56 से रात्रि 11:08 तक (यानी 27 जून पूरा दिन) व्यतिपात योग है।*
    ???????? *कथा स्रोत - बडोदा २००८ में १२ नवम्बर को सुबह के दीक्षा सत्र में (स्वामी सुरेशानन्द जी के सत्संग से)

    *???????????????? आर्यावर्त भरतखंड ????????????????*
    ???? ~ *हिन्दू पंचांग* ~ ????
    ????????????????????????????????????????????????
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  7. #27
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    ???? ~ *हिन्दू पंचांग* ~ ????
    ⛅ *दिनांक 27 जून 2020*
    ⛅ *दिन - शनिवार*
    ⛅ *विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)*
    ⛅ *शक संवत - 1942*
    ⛅ *अयन - दक्षिणायन*
    ⛅ *ऋतु - वर्षा*
    ⛅ *मास - आषाढ़*
    ⛅ *पक्ष - शुक्ल*
    ⛅ *तिथि - सप्तमी 28 जून रात्रि 02:53 तक तत्पश्चात अष्टमी*
    ⛅ *नक्षत्र - पूर्वाफाल्गुनी सुबह 10:11 तक तत्पश्चात उत्तराफाल्गुनी*
    ⛅ *योग - व्यतिपात रात्रि 11:08 तक तत्पश्चात वरीयान्*
    ⛅ *राहुकाल - सुबह 09:09 से सुबह 10:49 तक*
    ⛅ *सूर्योदय - 06:00*
    ⛅ *सूर्यास्त - 19:22*
    ⛅ *दिशाशूल - पूर्व दिशा में*
    ⛅ *व्रत पर्व विवरण -
    ???? *विशेष - सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है था शरीर का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????

    ???? *जिनको डर खूब लगता हो* ????
    ???? *जिनको डर खूब लगता हो उनको सुबह धूप करके... गहरा श्वास लेकर हरि ॐ...ॐ...ॐ...ॐ...ॐ....ॐ....ॐ....ओ?? ?कार का गुंजन करना चाहिए... बोलकर। निर्भय नाद पुस्तक पढ़नी चाहिए। डर निकल जाएगा भयभीत आदमी किसी काम में सफल नहीं होता ...हरि ॐ...ॐ ॐ... ॐ... ॐ..*
    ???????? *Shri Sureshnandji Delhi Patpadganj 10/12/11*
    ???? ~ *हिन्दू पंचांग* ~ ????

    ???? *जुकाम* ????
    ???? *बार-बार सर्दी, जुकाम, खाँसी होती हो तो मूँग व मूली का सूप बना के काली मिर्च, सेंधा नमक एवं अजवाईन मिलाकर पियें |*
    ???????? *- Rishi Prasad June' 2012*
    ???? ~ *हिन्दू पंचांग* ~ ????

    ???? *स्वास्थ्य व सत्त्व वर्धक – बिल्वपत्र* ????
    ➡ *बिल्वपत्र ( बेल के पत्ते ) उत्तम वायुशामक, कफ – निस्सारक व जठराग्निवर्धक हैं | ये कृमि व शरीर की दुर्गध का नाश करते हैं | बिल्वपत्र ज्वरनाशक, वेदनाहर, संग्राही ( मल को बाँधकर लानेवाले ) व सूजन उतारनेवाले हैं | ये मूत्रगत शर्करा को कम करते हैं, अत: मधुमेह में लाभदायी हैं | बिल्वपत्र ह्रदय व मस्तिष्क को बल प्रदान करते हैं | शरीर को पुष्ट व सुडौल बनाते हैं | इनके सेवन से मन में सात्त्विकता आती है |*
    ➡ *कोई रोग न भी हो तो भी नित्य बिल्वपत्र या इनके रस का सेवन करें तो बहुत लाभ होगा | बेल के पत्ते काली मिर्च के साथ घोट के लेना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हितकर है | इनके रस में शहद मिलाकर लेना भी लाभकारी है |*
    ???? *औषधीय प्रयोग* ????
    ➡ *मधुमेह ( डायबीटीज ) : बिल्वपत्र के १० – १५ मि. ली. रस में १ चुटकी गिलोय का सत्त्व एवं १ चम्मच आँवले का चूर्ण मिला के लें |*
    ➡ *स्वप्नदोष : बेलपत्र, धनिया व सौंफ समभाग लेकर कूट लें | यह १० ग्राम मिश्रण शाम को १२५ मि. ली. पानी में भिगो दें | सुबह खाली पेट लें | इसी प्रकार सुबह भिगोये चूर्ण को शाम को लें | स्वप्नदोष में शीघ्र लाभ होता है | प्रमेह एवं श्वेतप्रदर रोग में भी यह लाभकारी है |*
    ➡ *धातुक्षीणता : बेलपत्र के ३ ग्राम चूर्ण में थोडा शहद मिला के सुबह – शाम लेने से धातु पुष्ट होती है |*
    ???? *मस्तिष्क की गर्मी : बेल की पत्तियों को पानी के साथ मोटा पीस लें | इसका माथे पर लेप करने से मस्तिष्क की गर्मी शांत होगी और नींद अच्छी आयेगी |*
    ???????? *- स्त्रोत – ऋषि प्रसाद – जून २०१६ से*

    *???????????????? आर्यवर्त भरतखंड ????????????????*
    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????
    ????????????????????????????????????????????????
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  8. #28
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    ???? ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ ????⛅ *दिनांक 28 जून 2020*⛅ *दिन - रविवार* ⛅ *विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)*⛅ *शक संवत - 1942*⛅ *अयन - दक्षिणायन*⛅ *ऋतु - वर्षा*⛅ *मास - आषाढ़*⛅ *पक्ष - शुक्ल* ⛅ *तिथि - अष्टमी रात्रि 12:35 तक तत्पश्चात नवमी*⛅ *नक्षत्र - उत्तराफाल्गुनी सुबह 08:46 तक तत्पश्चात हस्त*⛅ *योग - वरीयान् रात्रि 08:14 तक तत्पश्चात परिघ*⛅ *राहुकाल - शाम 05:32 से शाम 07:13 तक* ⛅ *सूर्योदय - 06:01*⛅ *सूर्यास्त - 19:23* ⛅ *दिशाशूल - पश्चिम दिशा में*⛅ *व्रत पर्व विवरण -* ???? *विशेष - अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*???? *अष्टमी तिथि और रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*???? *रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए।(ब्रह्मवैवर? ??त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)*???? *रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए।(ब्रह्मवैवर? ??त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)*???? *स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए। इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं।* ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ???????? *दूध के साथ फल नहीं* ???????????? *दूध और फल एक साथ नहीं खाना चाहिए .... mango juice में banana juice में जो लोग दूध डालते है बड़ी भारी भूल करते है ।*???????? *दूध और केले anti (विरोध आहार ) होते हैं ...साथ में न लें दूध के साथ केले खाने से पथरी होती है ।* ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ???????? *कर्ज से संबंधित समस्या के लिए*???????????? *कई बार पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाने के लिए लोगों को कर्ज लेना पड़ता है। गलत दिन या नक्षत्र में लिया गया पैसा आसानी से नहीं चुकता। ऐसी स्थिति में कर्ज पर ब्याज बढ़ता रहता है। कई बार स्थिति काफी परेशानी वाली हो जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ऐसी स्थिति में हर बुधवार को ऋणहर्ता गणपति स्त्रोत का पाठ करने से आपकी इस समस्या का निदान हो सकता है।*➡ *भगवान गणेशजी का ध्यान करें**ॐ सिन्दूर-वर्णं द्वि-भुजं गणेशं लम्बोदरं पद्म-दले निविष्टम्।**ब्रह्म ादि-देवैः परि-सेव्यमानं सिद्धैर्युतं तं प्रणामि देवम्।।*???? *।।मूल-पाठ।।**सृष्ट्यादौ ब्रह्मणा सम्यक् पूजित: फल-सिद्धए।**सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे।।1**त्रिपुरस्य वधात् पूर्वं शम्भुना सम्यगर्चित:।**सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे।।2**हिरण्य-कश्यप्वादीनां वधार्थे विष्णुनार्चित:।**स?? ?ैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे।।3**महिषस्य वधे देव्या गण-नाथ: प्रपुजित:।**सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे।।4**तारकस्य वधात् पूर्वं कुमारेण प्रपूजित:।**सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे।।5**भास्करेण गणेशो हि पूजितश्छवि-सिद्धए।**सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे।।6**शशिना कान्ति-वृद्धयर्थं पूजितो गण-नायक:।**सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे।।7**पालनाय च तपसां विश्वामित्रेण पूजित:।**सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे।।8**इदं त्वृण-हर-स्तोत्रं तीव्र-दारिद्र्य-नाशनं,**एक-वारं पठेन्नित्यं वर्षमेकं सामहित:।**दारिद्र्?? ?ं दारुणं त्यक्त्वा कुबेर-समतां व्रजेत्।।*???????? *कैसे करें ऋणहर्ता गणपति स्त्रोत का पाठ*➡ *- हर बुधवार सुबह उठकर स्नान आदि करने के बाद भगवान श्रीगणेश की पूजा करें।*➡ *- भगवान श्रीगणेश को दूर्वा चढ़ाएं और लड्डुओं का भोग लगाएं।*➡ *- इसके बाद शुद्ध घी का दीपक जलाकर ऋणहर्ता गणपति स्त्रोत का मन ही मन पाठ करें।*➡ *- इस तरह ऋणहर्ता गणपति स्त्रोत का पाठ करने से आपकी कर्ज से संबंधित समस्याएं दूर हो सकती हैं।* *???????????? आर्यावर्त भरतखंड ????????????* ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????????????????????☘??????????????????????????? ?
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  9. #29
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    ???? ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ ????
    ⛅ *दिनांक 29 जून 2020*
    ⛅ *दिन - सोमवार*
    ⛅ *विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)*
    ⛅ *शक संवत - 1942*
    ⛅ *अयन - दक्षिणायन*
    ⛅ *ऋतु - वर्षा*
    ⛅ *मास - आषाढ़*
    ⛅ *पक्ष - शुक्ल*
    ⛅ *तिथि - नवमी रात्रि 10:12 तक तत्पश्चात दशमी*
    ⛅ *नक्षत्र - हस्त सुबह 07:14 तक तत्पश्चात चित्रा*
    ⛅ *योग - परिघ शाम 05:15 तक तत्पश्चात शिव*
    ⛅ *राहुकाल - सुबह 07:29 से सुबह 09:09 तक*
    ⛅ *सूर्योदय - 06:01*
    ⛅ *सूर्यास्त - 19:23*
    ⛅ *दिशाशूल - पूर्व दिशा में*
    ⛅ *व्रत पर्व विवरण - भडली नवमी*
    ???? *विशेष - नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????

    ???? *चातुर्मास्य व्रत की महिमा* ????

    ➡ *01 जुलाई 2020 बुधवार से 26 नवम्बर 2020 गुरुवार तक चातुर्मास है।*
    ???????? *आषाढ़ के शुक्ल पक्ष में एकादशी के दिन उपवास करके मनुष्य भक्तिपूर्वक चातुर्मास्य व्रत प्रारंभ करे। एक हजार अश्वमेघ यज्ञ करके मनुष्य जिस फल को पाता है, वही चातुर्मास्य व्रत के अनुष्ठान से प्राप्त कर लेता है।*
    ???????? *इन चार महीनों में ब्रह्मचर्य का पालन, त्याग, पत्तल पर भोजन, उपवास, मौन, जप, ध्यान, स्नान, दान, पुण्य आदि विशेष लाभप्रद होते हैं।*
    ???????? *व्रतों में सबसे उत्तम व्रत है – ब्रह्मचर्य का पालन। ब्रह्मचर्य तपस्या का सार है और महान फल देने वाला है। ब्रह्मचर्य से बढ़कर धर्म का उत्तम साधन दूसरा नहीं है। विशेषतः चतुर्मास में यह व्रत संसार में अधिक गुणकारक है।*
    ???????? *मनुष्य सदा प्रिय वस्तु की इच्छा करता है। जो चतुर्मास में अपने प्रिय भोगों का श्रद्धा एवं प्रयत्नपूर्वक त्याग करता है, उसकी त्यागी हुई वे वस्तुएँ उसे अक्षय रूप में प्राप्त होती हैं। चतुर्मास में गुड़ का त्याग करने से मनुष्य को मधुरता की प्राप्ति होती है। ताम्बूल का त्याग करने से मनुष्य भोग-सामग्री से सम्पन्न होता है और उसका कंठ सुरीला होता है। दही छोड़ने वाले मनुष्य को गोलोक मिलता है। नमक छोड़ने वाले के सभी पूर्तकर्म (परोपकार एवं धर्म सम्बन्धी कार्य) सफल होते हैं। जो मौनव्रत धारण करता है उसकी आज्ञा का कोई उल्लंघन नहीं करता।*
    ???????? *चतुर्मास में काले एवं नीले रंग के वस्त्र त्याग देने चाहिए। नीले वस्त्र को देखने से जो दोष लगता है उसकी शुद्धि भगवान सूर्यनारायण के दर्शन से होती है। कुसुम्भ (लाल) रंग व केसर का भी त्याग कर देना चाहिए।*
    ???????? *आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को श्रीहरि के योगनिद्रा में प्रवृत्त हो जाने पर मनुष्य चार मास अर्थात् कार्तिक की पूर्णिमा तक भूमि पर शयन करें । ऐसा करने वाला मनुष्य बहुत से धन से युक्त होता और विमान प्राप्त करता है, बिना माँगे स्वतः प्राप्त हुए अन्न का भोजन करने से बावली और कुआँ बनवाने का फल प्राप्त होता है। जो भगवान जनार्दन के शयन करने पर शहद का सेवन करता है, उसे महान पाप लगता है। चतुर्मास में अनार, नींबू, नारियल तथा मिर्च, उड़द और चने का भी त्याग करें । जो प्राणियों की हिंसा त्याग कर द्रोह छोड़ देता है, वह भी पूर्वोक्त पुण्य का भागी होता है।*
    ???????? *चातुर्मास्य में परनिंदा का विशेष रूप से त्याग करें । परनिंदा को सुनने वाला भी पापी होता है।*
    *परनिंदा महापापं परनिंदा महाभयं।*
    *परनिंदा महद् दुःखं न तस्याः पातकं परम्।।*
    ???????? *‘परनिंदा महान पाप है, परनिंदा महान भय है, परनिंदा महान दुःख है और पर निंदा से बढ़कर दूसरा कोई पातक नहीं है।’*
    ???? *(स्कं. पु. ब्रा. चा. मा. 4.25)*
    ???????? *चतुर्मास में ताँबे के पात्र में भोजन विशेष रूप से त्याज्य है। काँसे के बर्तनों का त्याग करके मनुष्य अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करे। अगर कोई धातुपात्रों का भी त्याग करके पलाशपत्र, मदारपत्र या वटपत्र की पत्तल में भोजन करे तो इसका अनुपम फल बताया गया है। अन्य किसी प्रकार का पात्र न मिलने पर मिट्टी का पात्र ही उत्तम है अथवा स्वयं ही पलाश के पत्ते लाकर उनकी पत्तल बनाये और उससे भोजन-पात्र का कार्य ले। पलाश के पत्तों से बनी पत्तल में किया गया भोजन चन्द्रायण व्रत एवं एकादशी व्रत के समान पुण्य प्रदान करने वाला माना गया है।*
    ???????? *प्रतिदिन एक समय भोजन करने वाला पुरुष अग्निष्टोम यज्ञ के फल का भागी होता है। पंचगव्य सेवन करने वाले मनुष्य को चन्द्रायण व्रत का फल मिलता है। यदि धीर पुरुष चतुर्मास में नित्य परिमित अन्न का भोजन करता है तो उसके सब पातकों का नाश हो जाता है और वह वैकुण्ठ धाम को पाता है। चतुर्मास में केवल एक ही अन्न का भोजन करने वाला मनुष्य रोगी नहीं होता।*
    ???????? *जो मनुष्य चतुर्मास में केवल दूध पीकर अथवा फल खाकर रहता है, उसके सहस्रों पाप तत्काल विलीन हो जाते हैं।*
    ???????? *पंद्रह दिन में एक दिन संपूर्ण उपवास करने से शरीर के दोष जल जाते हैं और चौदह दिनों में तैयार हुए भोजन का रस ओज में बदल जाता है। इसलिए एकादशी के उपवास की महिमा है। वैसे तो गृहस्थ को महीने में केवल शुक्लपक्ष की एकादशी रखनी चाहिए, किंतु चतुर्मास की तो दोनों पक्षों की एकादशियाँ रखनी चाहिए।*
    ???????? *जो बात करते हुए भोजन करता है, उसके वार्तालाप से अन्न अशुद्ध हो जाता है। वह केवल पाप का भोजन करता है। जो मौन होकर भोजन करता है, वह कभी दुःख में नहीं पड़ता। मौन होकर भोजन करने वाले राक्षस भी स्वर्गलोक में चले गये हैं। यदि पके हुए अन्न में कीड़े-मकोड़े पड़ जायें तो वह अशुद्ध हो जाता है। यदि मानव उस अपवित्र अन्न को खा ले तो वह दोष का भागी होता है। जो नरश्रेष्ठ प्रतिदिन ‘ॐ प्राणाय स्वाहा, ॐ अपानाय स्वाहा, ॐ व्यानाय स्वाहा, ॐ उदानाय स्वाहा, ॐ समानाय स्वाहा’ – इस प्रकार प्राणवायु को पाँच आहुतियाँ देकर मौन हो भोजन करता है, उसके पाँच पातक निश्चय ही नष्ट हो जाते हैं।*
    ???????? *चतुर्मास में जैसे भगवान विष्णु आराधनीय हैं, वैसे ही ब्राह्मण भी। भाद्रपद मास आने पर उनकी महापूजा होती है। जो चतुर्मास में भगवान विष्णु के आगे खड़ा होकर ‘पुरुष सूक्त’ का पाठ करता है, उसकी बुद्धि बढ़ती है।*
    ???????? *चतुर्मास सब गुणों से युक्त समय है। इसमें धर्मयुक्त श्रद्धा से शुभ कर्मों का अनुष्ठान करना चाहिए।*
    ???? *सत्संगे द्विजभक्तिश्च गुरुदेवाग्नितर्प?? ?म्।*
    *गोप्रदानं वेदपाठः सत्क्रिया सत्यभाषणम्।।*
    *गोभक्तिर्दानभक्त? ??श्च सदा धर्मस्य साधनम्।*
    ???????? *‘सत्संग, भक्ति, गुरु, देवता और अग्नि का तर्पण, गोदान, वेदपाठ, सत्कर्म, सत्यभाषण, गोभक्ति और दान में प्रीति – ये सब सदा धर्म के साधन हैं।’*
    ???????? *देवशयनी एकादशी से देवउठी एकादशी तक उक्त धर्मों का साधन एवं नियम महान फल देने वाला है। चतुर्मास में भगवान नारायण योगनिद्रा में शयन करते हैं, इसलिए चार मास शादी-विवाह और सकाम यज्ञ नहीं होते। ये मास तपस्या करने के हैं।*
    ???????? *चतुर्मास में योगाभ्यास करने वाला मनुष्य ब्रह्मपद को प्राप्त होता है। ‘नमो नारायणाय’ का जप करने से सौ गुने फल की प्राप्ति होती है। यदि मनुष्य चतुर्मास में भक्तिपूर्वक योग के अभ्यास में तत्पर न हुआ तो निःसंदेह उसके हाथ से अमृत का कलश गिर गया। जो मनुष्य नियम, व्रत अथवा जप के बिना चौमासा बिताता है वह मूर्ख है।*
    ???????? *बुद्धिमान मनुष्य को सदैव मन को संयम में रखने का प्रयत्न करना चाहिए। मन के भलीभाँति वश में होने से ही पूर्णतः ज्ञान की प्राप्ति होती है।*
    ???? *सत्यमेकं परो धर्मः सत्यमेकं परं तपः।*
    *सत्यमेकं परं ज्ञानं सत्ये धर्मः प्रतिष्ठितः।।*
    *धर्ममूलमहिंसा च मनसा तां च चिन्तयन्।*
    *कर्मणा च तथा वाचा तत एतां समाचरेत्।।*
    ???????? *‘एकमात्र सत्य ही परम धर्म है। एक सत्य ही परम तप है। केवल सत्य ही परम ज्ञान है और सत्य में ही धर्म की प्रतिष्ठा है। अहिंसा धर्म का मूल है। इसलिए उस अहिंसा को मन, वाणी और क्रिया के द्वारा आचरण में लाना चाहिए।’*
    ???? *(स्कं. पु. ब्रा. 2.18-19)* ????
    ➡ *शेष कल........*
    ???? *(पद्म पुराण के उत्तर खंड, स्कंद पुराण के ब्राह्म खंड एवं नागर खंड उत्तरार्ध से संकलित)*

    *???????????????? आर्यावर्त भरतखंड ????????????????*

    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????
    ????????????????????????????????????????????????
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  10. #30
    आश्रमाचार्य amol05's Avatar
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    ???? ~ *हिन्दू पंचांग* ~ ????
    ⛅ *दिनांक 30 जून 2020*
    ⛅ *दिन - मंगलवार*
    ⛅ *विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)*
    ⛅ *शक संवत - 1942*
    ⛅ *अयन - दक्षिणायन*
    ⛅ *ऋतु - वर्षा*
    ⛅ *मास - आषाढ़*
    ⛅ *पक्ष - शुक्ल*
    ⛅ *तिथि - दशमी रात्रि 07:49 तक तत्पश्चात एकादशी*
    ⛅ *नक्षत्र - स्वाती 01 जुलाई प्रातः 04:04 तक तत्पश्चात विशाखा*
    ⛅ *योग - शिव दोपहर 02:16 तक तत्पश्चात सिद्ध*
    ⛅ *राहुकाल - शाम 03:52 से शाम 05:32 तक*
    ⛅ *सूर्योदय - 06:01*
    ⛅ *सूर्यास्त - 19:23*
    ⛅ *दिशाशूल - उत्तर दिशा में*
    ⛅ *व्रत पर्व विवरण -
    ???? *विशेष -
    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????

    ???? *चतुर्मास विशेष* ????
    ➡ *आषाढ़ शुक्ल एकादशी (01 जुलाई, बुधवार) से कार्तिक शुक्ल एकादशी (26 नवम्बर, गुरुवार) तक भगवान विष्णु गुरुतत्व में गुरु जहाँ विश्रांति पाते हैं, ऐसे आत्मदेव में भगवान विष्णु ४ महीने समाधिस्त रहेंगे | इन दिनों में शादी विवाह वर्जित है, सकाम कर्म वर्जित है|*
    ✅ *ये करना*
    ???????? *जलाशयों में स्नान करना तिल और जौं को पीसकर मिक्सी में रख दिया थोड़ा तिल जौं मिलाकर बाल्टी में बेलपत्र डाल सको तो डालो उसका स्नान करने से पापनाशक स्नान होगा प्रसन्नतादायक स्नान होगा तन के दोष मन के दोष मिटने लगेंगे | अगर “ॐ नमःशिवाय” ५ बार मन में जप करके फिर लोटा सिर पे डाला पानी का, तो पित्त की बीमारी,कंठ का सूखना ये तो कम हो जायेगा, चिडचिडा स्वभाव भी कम हो जायेगा और स्वभाव में जलीय अंश रस आने लगेगा | भगवान नारायण शेष शैय्या पर शयन करते हैं इसलिए ४ महीने सभी जलाशयों में तीर्थत्व का प्रभाव आ जाता है |*
    ???????? *गद्दे हटा कर सादे बिस्तर पर शयन करें संत दर्शन और संत के जो वचन वाले जो सत्शास्त्र हैं, सत्संग सुने संतों की सेवा करें ये ४ महीने दुर्लभ हैं |*
    ???????? *स्टील के बर्तन में भोजन करने की अपेक्षा पलाश के पत्तों पर भोजन करें तो वो भोजनपापनाशक पुण्यदायी होता है, ब्रह्मभाव को प्राप्त कराने वाला होता है |*
    ???????? *चतुर्मास में ये ४ महीनों में दोनों पक्षों की एकादशी का व्रत करना चाहिये |१५ दिन में १दिन उपवास १४ दिन का खाया हुआ जो तुम्हारा अन्न है वो ओज में बदल जायेगा ओज,तेज और बुद्धि को बलवान बनायेगा १ दिन उपवास एकादशी का |*
    ???????? *चतुर्मास में भगवान विष्णु के आगे पुरुष सूक्त का पाठ करने वाले की बुद्धि का विकास होता है और सुबह या जब समय मिले भूमध्य में ओंकार का ध्यान करने से बुद्धि का विकास होता है |*
    ???????? *दान, दया और इन्द्रिय संयम ये उत्तम धर्म करने वाले को उत्तम लोकों की प्राप्ति होती है|*
    ???? *आंवला-मिश्री जल से स्नान महान पुण्य प्रदान करता है |*
    ❌ *ये न करना*
    ???? *इन ४ महीनो में पराया धन हड़प करना, परस्त्री से समागम करना, निंदा करना, ब्रह्मचर्य तोड़ना तो मानो हाथ में आया हुआ अमृत कलश ढोल दिया निंदा न करें , ब्रह्मचर्य का पालन करें , परधन परस्त्री पर बुरी नज़र न करें |*
    ???? *ताम्बे के बर्तन में भोजन नहीं करना चाहिये पानी नहीं पीना चाहिये |*
    ????????*♀ *चतुर्मास में काला और नीला वस्त्र पहनने से स्वास्थ्य हानि और पुण्य नाश होता है |*
    ???????? *परनिंदा महा पापं शास्त्र वचन :- “परनिंदा महा पापं परनिंदा महा भयं परनिंदा महा दुखंतस्या पातकम न परम”*
    ???????? *ये स्कन्द पुराण का श्लोक है परनिंदा महा पाप है, परनिंदा महा भय है, परनिंदा महा दुःख है तस्यापातकम न परम उससे बड़ा कोई पाप नही | इस चतुर्मास में पक्का व्रत ले लो कि हम किसी की निंदा न करेंगे |*
    ???? *असत्य भाषण का त्याग कर दें, क्रोध का त्याग कर दें,*
    ???? *बाजारू चीजें जो आइस्क्रीम है, पेप्सी, कोका- कोला है अथवा शहद आदि है उन चीजों का त्याग कर दें चतुर्मास में, स्त्री-पुरुष के मैथुन संग का त्याग कर दें|*
    ???????? *– स्त्रोत – ऋषिप्रसाद – अगस्त २००३*
    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????

    ???? *देवशयनी एकादशी* ????
    ➡ *30 जून 2020 मंगलवार को रात्रि 07:50 से 01 जुलाई बुधवार को 05:29 तक एकादशी है ।*
    ???? *विशेष - 01 जुलाई बुधवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।*
    ???????? *देवशयनी एकादशी का व्रत महान पुण्यमय, स्वर्ग एवं मोक्ष प्रदान करनेवाले, सब पापों को हरनेवाला है ।*
    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????

    ???? *चातुर्मास्य व्रत की महिमा* ????
    ➡ *गतांक से आगे........*
    ???????? *चतुर्मास में विशेष रूप से जल की शुद्धि होती है। उस समय तीर्थ और नदी आदि में स्नान करने का विशेष महत्त्व है। नदियों के संगम में स्नान के पश्चात् पितरों एवं देवताओं का तर्पण करके जप, होम आदि करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है। ग्रहण के समय को छोड़कर रात को और संध्याकाल में स्नान न करें । गर्म जल से भी स्नान नहीं करना चाहिए। गर्म जल का त्याग कर देने से पुष्कर तीर्थ में स्नान करने का फल मिलता है।*
    ???????? *जो मनुष्य जल में तिल और आँवले का मिश्रण अथवा बिल्वपत्र डालकर ॐ नमः शिवाय का चार-पाँच बार जप करके उस जल से स्नान करता है, उसे नित्य महान पुण्य प्राप्त होता है। बिल्वपत्र से वायु प्रकोप दूर होता है और स्वास्थ्य की रक्षा होती है।*
    ???????? *चतुर्मास में जीव-दया विशेष धर्म है। प्राणियों से द्रोह करना कभी भी धर्म नहीं माना गया है। इसलिए मनुष्यों को सर्वथा प्रयत्न करके प्राणियों के प्रति दया करनी चाहिए। जिस धर्म में दया नहीं है वह दूषित माना गया है। सब प्राणियों के प्रति आत्मभाव रखकर सबके ऊपर दया करना सनातन धर्म है, जो सब पुरुषों के द्वारा सदा सेवन करने योग्य है।*
    ???????? *सब धर्मों में दान-धर्म की विद्वान लोग सदा प्रशंसा करते हैं। चतुर्मास में अन्न, जल, गौ का दान, प्रतिदिन वेदपाठ और हवन – ये सब महान फल देने वाले हैं।*
    ???????? *सतकर्म , सत्कथा, सत्पुरुषों की सेवा, संतों के दर्शन, भगवान विष्णु का पूजन आदि सत्कर्मों में संलग्न रहना और दान में अनुराग होना – ये सब बातें चतुर्मास में दुर्लभ बतायी गयी है। चतुर्मास में दूध, दही, घी एवं मट्ठे का दान महाफल देने वाला होता है। जो चतुर्मास में भगवान की प्रीति के लिए विद्या, गौ व भूमि का दान करता है, वह अपने पूर्वजों का उद्धार कर देता है। विशेषतः चतुर्मास में अग्नि में आहूति, भगवद् भक्त एवं पवित्र ब्राह्मणों को दान और गौओं की भलीभाँति सेवा, पूजा करनी चाहिए।*
    ???????? *पितृकर्म (श्राद्ध) में सिला हुआ वस्त्र नहीं पहनना चाहिए। जिसने असत्य भाषण, क्रोध तथा पर्व के अवसर पर मैथुन का त्याग कर दिया है, वह अश्वमेघ यज्ञ का फल पाता है। असत्य भाषण के त्याग से मोक्ष का दरवाजा खुल जाता है। किसी पदार्थ को उपयोग में लाने से पहले उसमें से कुछ भाग सत्पात्र ब्राह्मण को दान करना चाहिए। जो धन सत्पात्र ब्राह्मण को दिया जाता है, वह अक्षय होता है। इसी प्रकार जिसने कुछ उपयोगी वस्तुओं को चतुर्मास में त्यागने का नियम लिया हो, उसे भी वे वस्तुएँ सत्पात्र ब्राह्मण को दान करनी चाहिए। ऐसा करने से वह त्याग सफल होता है।*
    ???????? *चतुर्मास में जो स्नान, दान, जप, होम, स्वाध्याय और देवपूजन किया जाता है, वह सब अक्षय हो जाता है। जो एक अथवा दोनों समय पुराण सुनता है, वह पापों से मुक्त होकर भगवान विष्णु के धाम को जाता है। जो भगवान के शयन करने पर विशेषतः उनके नाम का कीर्तन और जप करता है, उसे कोटि गुना फल मिलता है।*
    ???????? *देवशयनी एकादशी के बाद प्रतिज्ञा करना कि ”हे भगवान ! मैं आपकी प्रसन्नता के लिए अमुक सत्कर्म करूँगा।” और उसका पालन करना इसी को व्रत कहते हैं। यह व्रत अधिक गुणों वाला होता है। अग्निहोत्र, भक्ति, धर्मविषयक श्रद्धा, उत्तम बुद्धि, सत्संग, सत्यभाषण, हृदय में दया, सरलता एवं कोमलता, मधुर वाणी, उत्तम चरित्र में अनुराग, वेदपाठ, चोरी का त्याग, अहिंसा, लज्जा, क्षमा, मन एवं इन्द्रियों का संयम, लोभ, क्रोध और मोह का अभाव, वैदिक कर्मों का उत्तम ज्ञान तथा भगवान को अपने चित्त का समर्पण – इन नियमों को मनुष्य अंगीकार करे और व्रत का यत्नपूर्वक पालन करे।*
    ➡ *समाप्त........*
    ???? *(पद्म पुराण के उत्तर खंड, स्कंद पुराण के ब्राह्म खंड एवं नागर खंड उत्तरार्ध से संकलित)*
    ???????? *स्रोतः ऋषि प्रसाद, जुलाई 2004, अंक 139, पृष्ठ संख्या 14, 15, 16*

    *???????????????? आर्यावर्त भरतखंड ????????????????*
    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????
    ????????????????????????????????????????????????
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