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Thread: आज का हिन्दु पंचांग

  1. #31
    आश्रमाचार्य amol05's Avatar
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    ???? ~ *हिन्दू पंचांग* ~ ????
    ⛅ *दिनांक 01 जुलाई 2020*
    ⛅ *दिन - बुधवार*
    ⛅ *विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)*
    ⛅ *शक संवत - 1942*
    ⛅ *अयन - दक्षिणायन*
    ⛅ *ऋतु - वर्षा*
    ⛅ *मास - आषाढ़*
    ⛅ *पक्ष - शुक्ल*
    ⛅ *तिथि - एकादशी शाम 05:29 तक तत्पश्चात द्वादशी*
    ⛅ *नक्षत्र - विशाखा 02 जुलाई रात्रि 02:34 तक तत्पश्चात अनुराधा*
    ⛅ *योग - सिद्ध दोपहर 11:18 तक तत्पश्चात साध्य*
    ⛅ *राहुकाल - दोपहर 12:31 से दोपहर 02:11 तक*
    ⛅ *सूर्योदय - 06:01*
    ⛅ *सूर्यास्त - 19:23*
    ⛅ *दिशाशूल - उत्तर दिशा में*
    ⛅ *व्रत पर्व विवरण - देवशयनी एकादशी, चतुर्मास व्रतारभ्म*
    ???? *विशेष - हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है lराम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।*
    ???? *आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l*
    ???? *एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।*
    ???? *एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है | एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है।*
    ???? *जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।*
    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????

    ???? *चतुर्मास एवं पुरुष सूक्त* ????
    ➡ *आषाढ़ शुक्ल एकादशी (01 जुलाई, बुधवार) से कार्तिक शुक्ल एकादशी (26 नवम्बर, गुरुवार) तक चातुर्मास है ।*
    ???????? *चतुर्मास में भगवान श्रीविष्णु के योगनिद्रा में शयन करने पर जिस किसी नियम का पालन किया जाता है, वह अनंत फल देनेवाला होता है – ऐसा ब्रह्माजी का कथन है |*
    ???????? *जो मानव भगवान वासुदेव के उद्देश्य से केवल शाकाहार करके चतुर्मास व्यतीत करता है वह धनी होता है | जो प्रतिदिन नक्षत्रों का दर्शन करके केवल एक बार ही भोजन करता हैं वह धनवान, रूपवान और माननीय होता है | जो मानव ब्रह्मचर्य – पालनपूर्वक चौमासा व्यतीत करता हैं वह श्रेष्ठ विमान पर बैठकर स्वेच्छा से स्वर्गलोक जाता है |जो चौमासेभर नमक को छोड़ देता है उसके सभी पुर्तकर्म ( परोपकार एवं धर्मसम्बन्धी कार्य ) सफल होते है | जिसने कुछ उपयोगी वस्तुओं को चौमासेभर त्यागने का नियम लिया हो, उसे वे वस्तुएँ ब्राह्मण को दान करनी चाहिए | ऐसा करने से वह त्याग सफल होता है | जो मनुष्य नियम, व्रत अथवा जप के बिना चौमासा बिताता है वह मुर्ख है |*
    ???????? *जो चतुर्मास में भगवान विष्णु के आगे खड़ा होकर ‘पुरुष सूक्त’ का जप करता है, उसकी बुद्धि बढती है | -(स्कंदपुराण, नागर खंड, उत्तरार्ध )*
    ???????? *बुद्धि बढाने के इच्छुक पाठक और ‘बाल संस्कार केंद्र’ के बच्चे ‘पुरुष सूक्त’ से फायदा उठायें | आनेवाले दिनों में ‘बाल संस्कार केंद्र’ के बुद्धिमान बच्चे ही देश के कर्णधार होंगे |*
    ???? *पुरुष सूक्त* ????
    ???????? *(ऋग्वेद : १०-९०, यजुर्वेद : अध्याय – ३१ )*
    ???? *ॐ सहस्रशीर्षा पुरुष: सहस्त्राक्ष: सहस्त्रपात् |*
    *स भूमिं विश्वतो वृत्वात्यतिष्ठद्?? ?शांगुलम् || १||*
    ???????? *‘आदिपुरुष असंख्य सिर, असंख्य नेत्र और असंख्य पाद से युक्त था | वह पृथ्वी को सब ओर से घेरकर भी दस अंगुल अधिक ही था |’*
    ???? *पुरुष एवेदं सर्वं यदभूतं यच्च भाव्यम् |*
    *उतामृतत्वस्येशान? ?? यदन्नेनातिरोहति || २ ||*
    ???????? *‘यह जो वर्तमान जगत है, वह सब पुरुष ही है | जो पहले था और आगे होगा, वह भी पुरुष ही है, क्योंकि वह अमृतत्व का, देवत्व का स्वामी है | वह प्राणियों के कर्मानुसार भोग देने के लिए अपनी कारणावस्था का अतिक्रम करके दृश्यमान जगतअवस्था को स्वीकार करता है, इसलिए यह जगत उसका वास्तविक स्वरूप नहीं है |’*
    ???? *एतावानस्य महिमातो ज्यायाँश्च पुरुष : |*
    *पादोऽस्य विश्वा भूतानि त्रिपाद्स्यामृतं दिवि || ३ ||*
    ???????? *‘अतीत, अनागत एवं वर्तमान रूप जितना जगत है उतना सब इस पुरुष की महिमा अर्थात एक प्रकार का विशेष सामर्थ्य है, वैभव है, वास्तवस्वरूप नहीं | वास्तव पुरुष तो इस महिमा से भी बहुत बड़ा है | सम्पूर्ण त्रिकालवर्ती भूत इसके चतुर्थ पाद में हैं | इसके अवशिष्ट सच्चिदानन्दस्वरु?? ? तीन पाद अमृतस्वरूप हैं और अपने स्वयंप्रकाश द्योतनात्मक रूप में निवास करते हैं |’*
    ???? *त्रिपादूर्ध्व उदैत्पुरुष: पादोऽस्येहाभवत् पुन: |*
    *ततो विष्वं व्यक्रामत्साशनान?? ?ने अभि ||४ ||*
    *‘त्रिपाद पुरुष संसाररहित ब्रह्मस्वरूप है | वह अज्ञानकार्य संसार से विलक्षण और इसके गुण-दोषों से अस्पृष्ट है | इसका जो किंचित मात्र अंश माया में हैं वही पुन: -पुन: सृष्टि – संहार के रूप में आता – जाता रहता है | यह मायिक अंश ही देवता, मनुष्य, पशु, पक्षी आदि विविध रूपों में व्याप्त है | वही सभोजन प्राणी है और निर्भोजन जड़ है | सारी विविधता इस चतुर्थाश की ही है |’*
    ???? *तस्माद्विराळजायत विराजो अधि पुरुष: |*
    *स जातो अत्यरिच्यत पश्चादभूमिमथो पुर: ||५ ||*
    ???????? *‘उस आदिपुरुष से विराट ब्रह्माण्ड देह की उत्पत्ति हुई | विराट देह को ही अधिकरण बनाकर उसका अभिमानी एक और पुरुष प्रकट हुआ | वह पुरुष प्रकट होकर विराट से पृथक देवता, मनुष्य, पशु, पक्षी आदि के रूप में हो गया | उसके बाद पृथ्वी की सृष्टि हुई और जीवों के निवास योग्य सप्त धातुओं के शरीर बने |’*
    ???? *ॐ यत्पुरुषेण हविषा देवा यज्ञमतन्वत |*
    *वसन्तो अस्यासीदाज्यं ग्रीष्म इध्म: शरद्धवि: ||६ ||*
    ???????? *‘देवताओं ने उसी उत्पन्न द्वितीय पुरुष को हविष्य मानकर उसी के द्वारा मानस यज्ञ का अनुष्ठान किया | इस यज्ञ में वसंत ऋतू आज्य (घृत) के रूप में, ग्रीष्म ऋतू ईंधन के रूप में और शरद ऋतू हविष्य के रूप में संकल्पित की गयी |’*
    *तं यज्ञं बर्हिषि प्रौक्षण पुरुषं जातमग्रत: |*
    *तेन देवा अजयन्त साध्या ऋषयश्च ये || ७ ||*
    ???????? *‘वही द्वितीय पुरुष यज्ञ का साधन हुआ | मानस यज्ञ में उसीको पशु-भावना से युप (यज्ञ का खंभा) में बाँधकर प्रोक्षण किया गया, क्योंकि सारी सृष्टि के पूर्व वही पुरुषरूप से उत्पन्न हुआ था | इसी पुरुष के द्वारा देवताओं ने मानस याग किया | वे देवता कौन थे ? वे थे सृष्टि – साधन योग्य प्रजापति आदि साध्य देवता एवं तदनुकूल मंत्रद्रष्टा ऋषि | अभिप्राय यह है कि उसी पुरुष से सभीने यज्ञ किया |’*
    ???? *तस्माद्यज्ञात सर्वंहुत: संभृतं पृषदाज्यम् |*
    *पशून ताँश्चक्रे वायव्यानारण्यान् ग्राम्याश्च ये || ८ ||*
    ???????? *‘इस यज्ञ में सर्वात्मक पुरुष का हवन किया जाता है | इसी मानस यज्ञ से दधिमिश्रित आज्य-सम्पादन किया गया अर्थात सभी भोग्य पदार्थों का निर्माण हुआ | इसी यज्ञ से वायुदेवताक आरण्य (जंगली) पशुओं का निर्माण हुआ | जो ग्राम्य पशु हैं, उनका भी |’*
    ???? *तस्माद्यज्ञात सर्वहुत ऋच: सामानि जज्ञिरे |*
    *छन्दांसि जज्ञिरे तस्माद्यजुस्तस्म?? ?दजायत || ९ ||*
    ???????? *‘पूर्वोक्त सर्वहवनात्मक यज्ञ से ऋचाएँ और साम उत्पन्न हुए | उस यज्ञ से ही गायत्री आदि छन्दों का जन्म हुआ | उसी यज्ञ से यजुष (यजुर्वेद) की भी उत्पत्ति हुई |’*
    ???????? *तस्मादश्वा अजायन्त ये के चोभयादत: |*
    *गावो ह जज्ञिरे तस्मात तस्माज्जाता अजावय: ||१० ||*
    ???????? *‘उस पूर्वोक्त यज्ञ से यज्ञोपयोगी अश्वों का जन्म हुआ | जीके दोनों ओर दाँत होते हैं, उनका भी जन्म हुआ | उसीसे गायों का भी जन्म हुआ और उसीसे बकरी – भेड़ें भी पैदा हुई |’*
    ???? *ॐ यत्पुरुषं व्यदधु: कतिधा व्यकल्पयन् |*
    *मुखं किमस्य कौ बाहू का ऊरू पादा उच्येते ||११ ||*
    ???????? *‘जब द्वितीय पुरुष ब्रह्मा की ही यज्ञ – पशु के रूप में कल्पना की गयी, तब उसमें किस – किस रूप से, किस – किस स्थान से, किस – किस प्रकार विशेष से उसके अंग- उपांगों की भावना की गयी ? उसका मुख क्या बना ? उसके बाहू क्या बने ? तथा उसके ऊरू (जंघा) और पाद क्या कहे गये ?’*
    ???? *ब्राह्मणोंऽस्य मुखमासीद् बाहू राजन्य: कृत: |*
    *ऊरू तदस्य यद्वैश्य: पदभ्यां शूद्रों अजायत || १२ ||*
    ???????? *‘इस पुरुष का मुख ही ब्राह्मण के रूप में कल्पित हैं | बाहू राजन्य माना गया हैं | ऊरू वैश्य है और चरण शुद्र हैं |’*
    *चन्द्रमा मनसो जातश्चक्षो: सूर्यो अजायत |*
    *मुखादिन्द्रश्चाग? ??निश्च प्राणादवायुरजायत || १३ ||*
    ???????? *‘मन से चन्द्रमा, चक्षु से सूर्य, मुख से इंद्र तथा अग्नि और प्राण से वायु की कल्पना की गयी |’*
    ???? *नाभ्या आसीदन्तरिक्षं शीष्णॉ द्यौ: समवर्तत |*
    *पदभ्यां भूमिर्दिश: श्रोत्रात्तथा लोकों अकल्पयन || १४ ||*
    ???????? *‘नाभि से अंतरिक्ष लोक, सिर से द्युलोक, चरणों से भूमि और श्रोत्र से दिशाएँ – इस प्रकार लोकों की कल्पना की गयी |’*
    ???? *सप्तास्यासन् परिधयस्त्रि: सप्त समिध: कृता: |*
    *देवा यद्यज्ञं तन्वाना अबध्नन् पुरुषं पशुम् || १५ ||*
    ???????? *‘जब देवताओं ने अपने मानस यज्ञ का विस्तार करते हुए वैराज पुरुष (परमात्मा) को पशु के रूप में कल्पित किया, तब इस यज्ञ की सात परिधियाँ हुई और इक्कीस समिधाएँ |’*
    ???? *यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तानि धर्माणि प्रथमान्यासन् |*
    *ते ह नाकं महिमान: सचन्त यत्र पूर्व साध्या: सन्ति देवा: ||१६||*
    ???????? *‘प्रजापति के प्राणरूप विद्वान देवताओं ने अपने मानस संकल्परूप यज्ञ के द्वारा यज्ञस्वरूप पुरुषोत्तम का यजन (आराधन, याग) किया | वही धर्म है सर्वश्रेष्ठ एवं सनातन, क्योंकि सम्पूर्ण विकारों को धारण करता हैं | वे धर्मात्मा भगवान के माहात्म्य, वैभव आदि से सम्पन्न होकर परमानंद-लोक में समा गये | वहीँ प्राचीन उपासक देवता विराजमान रहते हैं |’*
    ???????? *– स्त्रोत – ऋषिप्रसाद – अगस्त २००३ अंक -१२८ से*


    *???????????????? आर्यावर्त भरतखंड ????????????????*
    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????
    ????????????????☘????????????????????????????
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  2. #32
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    ???? ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ ????
    ⛅ *दिनांक 02 जुलाई 2020*
    ⛅ *दिन - गुरुवार*
    ⛅ *विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)*
    ⛅ *शक संवत - 1942*
    ⛅ *अयन - दक्षिणायन*
    ⛅ *ऋतु - वर्षा*
    ⛅ *मास - आषाढ़*
    ⛅ *पक्ष - शुक्ल*
    ⛅ *तिथि - द्वादशी शाम 03:16 तक तत्पश्चात त्रयोदशी*
    ⛅ *नक्षत्र - अनुराधा 03 जुलाई रात्रि 01:14 तक तत्पश्चात ज्येष्ठा*
    ⛅ *योग - साध्य सुबह 08:25 तक तत्पश्चात शुभ*
    ⛅ *राहुकाल - दोपहर 02:11 से शाम 03:52 तक*
    ⛅ *सूर्योदय - 06:02*
    ⛅ *सूर्यास्त - 19:23*
    ⛅ *दिशाशूल - दक्षिण दिशा में*
    ⛅ *व्रत पर्व विवरण - प्रदोष व्रत, वामन पूजा*
    ???? *विशेष - द्वादशी को पूतिका(पोई) अथवा त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????

    ???? *प्रदोष व्रत* ????
    ???????? *हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महिने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। ये व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। इस बार 02 जुलाई, गुरुवार को प्रदोष व्रत है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। प्रदोष पर व्रत व पूजा कैसे करें और इस दिन क्या उपाय करने से आपका भाग्योदय हो सकता है, जानिए…*
    ???????? *ऐसे करें व्रत व पूजा*
    ???????? *- प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं।*
    ???????? *- इसके बाद बेल पत्र, गंध, चावल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान को चढ़ाएं।*
    ???????? *- पूरे दिन निराहार (संभव न हो तो एक समय फलाहार) कर सकते हैं) रहें और शाम को दुबारा इसी तरह से शिव परिवार की पूजा करें।*
    ???????? *- भगवान शिवजी को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं।*
    ???????? *- भगवान शिवजी की आरती करें। भगवान को प्रसाद चढ़ाएं और उसीसे अपना व्रत भी तोड़ें।उस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।*
    ???????? *ये उपाय करें*
    *गुरुवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद तांबे के लोटे से सूर्यदेव को अर्ध्य देें। पानी में आकड़े के फूल जरूर मिलाएं। आंकड़े के फूल भगवान शिवजी को विशेष प्रिय हैं । ये उपाय करने से सूर्यदेव सहित भगवान शिवजी की कृपा भी बनी रहती है और भाग्योदय भी हो सकता है।*
    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????

    ???? *कैसे करें सुबह की शुरुआत गुरुपूनम के दिन* ????
    ➡ *05 जुलाई 2020 रविवार को गुरुपूनम है ।*
    ???????? *इस दिन सुबह बिस्तर पर तुम प्रार्थना करना : ‘‘हे महान पूर्णिमा ! हे गुरुपूर्णिमा ! अब हम अपनी आवश्यकता की ओर चलेंगे । इस देह की सम्पूर्ण आवश्यकताएँ कभी किसी की पूरी नहीं हुर्इं । हुर्इं भी तो संतुष्टि नहीं मिली । अपनी असली आवश्यकता की तरफ हम आज से कदम रख रहे हैं ।''*
    ???????? *उसी समय ध्यान करना । शरीर बिस्तर छोड़े उसके पहले अपने प्रियतम को मिलना । गुरुदेव का मानसिक पूजन करना । वे तुम्हारे मन की दशा देखकर भीतर-ही-भीतर संतुष्ट होकर अपनी अनुभूति की झलक से तुम्हें आलोकित कर देंगे। उनके पास उधार नहीं है, वे तो नगदधर्मा हैं ।*

    *???????????????? आर्यावर्त भरतखंड ????????????????*

    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????
    ????????????????☘????????????????????????????
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  3. #33
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    ???? ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ ????
    ⛅ *दिनांक 04 जुलाई 2020*
    ⛅ *दिन - शनिवार*
    ⛅ *विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)*
    ⛅ *शक संवत - 1942*
    ⛅ *अयन - दक्षिणायन*
    ⛅ *ऋतु - वर्षा*
    ⛅ *मास - आषाढ़*
    ⛅ *पक्ष - शुक्ल*
    ⛅ *तिथि - चतुर्दशी दोपहर 11:33 तक तत्पश्चात पूर्णिमा*
    ⛅ *नक्षत्र - मूल रात्रि 11:22 तक तत्पश्चात पूर्वाषाढा*
    ⛅ *योग - ब्रह्म रात्रि 12:56 तक तत्पश्चात इन्द्र*
    ⛅ *राहुकाल - सुबह 09:11 से सुबह 10:51 तक*
    ⛅ *सूर्योदय - 06:02*
    ⛅ *सूर्यास्त - 19:23*
    ⛅ *दिशाशूल - पूर्व दिशा में*
    ⛅ *व्रत पर्व विवरण - व्रत पूर्णिमा*
    ???? *विशेष - चतुर्दशी और पूर्णिमा के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????

    ???? *विद्यालाभ के लिए मंत्र* ????
    ???????? *‘ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं वाग्वादिनि सरस्वति मम जिव्हाग्रे वद वद ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं नम: स्वाहा |’*
    ➡ *यह मंत्र केवल गुजरात महाराष्ट्र के लोग 5 जुलाई को रात्रि 11:02 से 11:45 बजे तक या 6 जुलाई को प्रात : 03:00 बजे से रात्रि 11:12 तक 108 बार जप लें और फिर मंत्रजप के बाद उसी दिन रात्रि 11 से 12 के बीच जीभ पर लाल चंदन से ‘ह्रीं’ मंत्र लिख दें |*
    ???? *जिसकी जीभ पर यह मंत्र इस विधि से लिखा जायेगा उसे विद्यालाभ व अदभुत विद्वत्ता की प्राप्ति होगी |*
    ???? *~ हिन्दू पंचांग ~* ????

    ???? *इसलिए जरूरी है जीवन में गुरु का होना* ????
    ???????? *हिंदू धर्म में आषाढ़ पूर्णिमा गुरु भक्ति को समर्पित गुरु पूर्णिमा का पवित्र दिन भी है। भारतीय सनातन संस्कृति में गुरु को सर्वोपरि माना है। वास्तव में यह दिन गुरु के रूप में ज्ञान की पूजा का है। गुरु का जीवन में उतना ही महत्व है, जितना माता-पिता का।*
    ???????? *माता-पिता के कारण इस संसार में हमारा अस्तित्व होता है। किंतु जन्म के बाद एक सद्गुरु ही व्यक्ति को ज्ञान और अनुशासन का ऐसा महत्व सिखाता है, जिससे व्यक्ति अपने सतकर्मों और सद्विचारों से जीवन के साथ-साथ मृत्यु के बाद भी अमर हो जाता है। यह अमरत्व गुरु ही दे सकता है। सद्गुरु ने ही भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम बना दिया, इसलिए गुरु पूर्णिमा को अनुशासन पर्व के रूप में भी मनाया जाता है।*
    ???????? *इस प्रकार व्यक्ति के चरित्र और व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास गुरु ही करता है। जिससे जीवन की कठिन राह को आसान हो जाती है। सार यह है कि गुरु शिष्य के बुरे गुणों को नष्ट कर उसके चरित्र, व्यवहार और जीवन को ऐसे सद्गुणों से भर देता है। जिससे शिष्य का जीवन संसार के लिए एक आदर्श बन जाता है। ऐसे गुरु को ही साक्षात ईश्वर कहा गया है इसलिए जीवन में गुरु का होना जरूरी है।*
    ???? ~ *हिन्दू पंचांग* ~ ????

    ???? *गुरु पूजन* ????
    ???? *गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः |*
    *गुरुर्साक्षात परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ||*
    *ध्यानमूलं गुरुर्मूर्ति पूजामूलं गुरोः पदम् |*
    *मंत्रमूलं गुरोर्वाक्यं मोक्षमूलं गुरोः कृपा ||*
    *अखंडमंडलाकारं व्याप्तं येन चराचरम् |*
    *तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः ||*
    *त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव |*
    *त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव ||*
    *ब्रह्मानंदं परम सुखदं केवलं ज्ञानमूर्तिं |*
    *द्वन्द्वातीतं गगनसदृशं तत्त्वमस्यादिलक्?? ?यम् ||*
    *एकं नित्यं विमलं अचलं सर्वधीसाक्षीभूतम?? ? |*
    *भावातीतं त्रिगुणरहितं सदगुरुं तं नमामि ||*
    ???????? *ऐसे महिमावान श्री सदगुरुदेव के पावन चरणकमलों का षोड़शोपचार से पूजन करने से साधक-शिष्य का हृदय शीघ्र शुद्ध और उन्नत बन जाता है | मानसपूजा इस प्रकार कर सकते हैं |*
    ???????? *मन ही मन भावना करो कि हम गुरुदेव के श्री चरण धो रहे हैं … सर्वतीर्थों के जल से उनके पादारविन्द को स्नान करा रहे हैं | खूब आदर एवं कृतज्ञतापूर्वक उनके श्रीचरणों में दृष्टि रखकर … श्रीचरणों को प्यार करते हुए उनको नहला रहे हैं … उनके तेजोमय ललाट में शुद्ध चन्दन से तिलक कर रहे हैं … अक्षत चढ़ा रहे हैं … अपने हाथों से बनाई हुई गुलाब के सुन्दर फूलों की सुहावनी माला अर्पित करके अपने हाथ पवित्र कर रहे हैं … पाँच कर्मेन्द्रियों की, पाँच ज्ञानेन्द्रियों की एवं ग्यारहवें मन की चेष्टाएँ गुरुदेव के श्री चरणों में अर्पित कर रहे हैं …*
    ???? *कायेन वाचा मनसेन्द्रियैवा बुध्यात्मना वा प्रकृतेः स्वभावात् |*
    *करोमि यद् यद् सकलं परस्मै नारायणायेति समर्पयामि ||*
    ???????? *शरीर से, वाणी से, मन से, इन्द्रियों से, बुद्धि से अथवा प्रकृति के स्वभाव से जो जो करते हैं वह सब समर्पित करते हैं | हमारे जो कुछ कर्म हैं, हे गुरुदेव, वे सब आपके श्री चरणों में समर्पित हैं … हमारा कर्त्तापन का भाव, हमारा भोक्तापन का भाव आपके श्रीचरणों में समर्पित है |*
    ???????? *इस प्रकार ब्रह्मवेत्ता सदगुरु की कृपा को, ज्ञान को, आत्मशान्ति को, हृदय में भरते हुए, उनके अमृत वचनों पर अडिग बनते हुए अन्तर्मुख हो जाओ … आनन्दमय बनते जाओ …*
    *ॐ आनंद ! ॐ आनंद ! ॐ आनंद !*

    *???????????????? आर्यावर्त भरतखंड ????????????????*

    ???? ~ *हिन्दू पंचांग* ~ ????
    ????????????????????????????????????????????????
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