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Thread: आग के बेटे (वेद प्रकाश शर्मा द्वारा रचित) - विजय विकास श्रृंखला

  1. #91
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    यह जानते ही कि सामने बैठी लड़की प्रोफेसर हेमन्त की लड़की हैं, ब्रिगेंजा का दृष्टिकोण उसके प्रति एकदम बदल गया । अभी तक विचार था कि संग्राम की भावनाओ को ध्यान में रखकर वह इस लड़की को सकुशल अपने पर पहुँचा देगा लेकिन यह जानने के बाद कि सविता हेमन्त की लड़की है-उसके दिमाग में एकदम कई बाते घूम गई। क्षणमात्र में उसने निश्चय किया कि सविता आग के बेटों की प्रगति को चार चांद लगा सकती है ।

    ब्रिगेंजा को पता था कि उनके दल ने हेमन्त का अपहरण इसलिए किया है क्योंकि वह एक प्रगतिशील वैज्ञानिक हैं। उसके वैज्ञानिक मस्तिष्क को प्राप्त करने के लिए ही उसका अपहरण किया गया है ताकि वह आग के बेटों के लिए काम करने लगे ।

    एक क्षण में ही ब्रिगेंजा के दिमाग में सब कुछ घूम गया । ब्रिगेंजा यह जानता था कि हेमन्त एक भारतीय वैज्ञानिक है जो स्वभाव से बडे दृढ जिददी होते हैं और किसी भी कीमत पर अपने दिमाग को शत्रुओं को अथवा अपराधियों को नहीं बेचतें हैं । यानी कि ब्रिगेंजा को संदेह था कि प्रोफेसर हेमन्त उनके लिए काम करने के लिए तैयार हो जाएगा और अगर ऐसी स्थिति आती है तो सविता उनके लिए वरदान सिद्भ हो सकती है ।

    अपनी बेटी की यातनाए शायद हेमन्त न देख सके और वह उऩके लिए कार्य करने के लिए बाध्य हो जाए । मतलब ये कि इस समय ब्रिगेंजा के हाथ में सविता के रूप में एक हीरा था जिसे वह किसी भी मूल्य पर खो नहीं सकता था । यही कारण था कि उसके चेहरे भाव परिवर्तित हो गये । आँखों में दृढता उभर आई ।

    वह बोला "मैं तुमसे अकेले में कुछ बाते करना चाहता हूं ।” उसका संकेत संग्राम की ओऱ था ।

    "क्या मतलब? “ इस बार संग्राम उछल गया ।

    सविता के मुखडे पर फिर परेशानी के लक्षण उभर आए । उसके बाद अपने आदमियो को बुलाकर ब्रिगेंजा ने सविता को बाहर भेजा और फिर अंदर से दरवाजा बंद करके वह संग्राम की ओर घूम गया और अत्यंत गंभीर स्वर में बोला “क्या तुम वास्तव में इंटरनेशनल अपराधी हो ?”

    “क्या मतलब? इसमे संदेह क्या है ?” संग्राम बुरी तरह चौंककर बोला ।

    “तुम फर्ज को अधिक महत्व देते हो अथवा भावनाओं को ?” ब्रिगेंजा का अगला रहस्यपूर्ण प्रश्न ।

    "तुम कहना क्या चाहतें हो। मैं तुम्हारा मतलब नहीं समझ पा रहा हूँ ।"

    "मैं सिर्फ अपने प्रश्नों का संक्षिप्त उत्तर चाहता हूं। I सीधा उत्तर दो कि तुम फर्ज और भावनाओं में से किसे सर्वोपरि मानते हो ?” ब्रिगेंजा इस समय अत्यधिक गंभीर स्वर में बाते कर रहा था ।

    "कोई भी व्यक्ति जो फर्ज को भूलकर भावनाओ में बहता होगा, इंटरनेशनल अपराधी नहीं बन सकता और संक्षिप्त उत्तर यह है कि मेरे सिद्धातों की सूची में सर्वोपरि फर्ज है, उसके बाद भावनाएं ।” संग्राम का गंभीर उत्तर ।

    "वेरी गुड !” ब्रिगेंजा प्रशंसनीय स्वर में बोला "मुझे तुमसे यही आशा थी । अब मेरी बात ध्यान से सुनो ।"

    ब्रिगेंजा ने अपनी बात कुछ इस प्रकार सुनाई "ये लड़की जिसे तुमने बहन बनाया है यानी सविता, हमारे गिरोह की प्रगति के लिए एक अत्यंत ही आवश्यक मोहरा है । जैसा कि तुमने सुना उसके पिता हेमन्त भारत के एक बडे वैज्ञानिक हैं । तुम जानते हो कि आग के बेटों का समस्त खेल विज्ञान पर आधारित है । सविता के ज़रिए हमे एक बड़ा वैज्ञानिक हेमन्त प्राप्त हो सकता है।"

    "हर छोटी से छोटी चीज प्रकृति में मायने रखती है"



  2. #92
    कर्मठ सदस्य asr335704's Avatar
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    संग्राम ब्रिगेंजा के कुछ ही शब्दों से उसका अभिप्राय समझ गया । किंतु उसके चेहरे के भावों में किसी प्रकार का परिवर्तन न आया ।

    वह ब्रिगेंजा की आंखो में घूरता हूआ बोला "वास्तव में मुझें तुमने काफी दुविधापूर्ण स्थिति में फंसा दिया है । तुम्हारे किसी काम के बीच में न तो मुझे आना चाहिए और न ही मैं आ सकता हूँ । किन्तु तुमसे मैं व्यक्तिगत रूप से इतना जरूर कहूंगा कि सविता पर कोई बुरी नजर न डाले । वैसे तुम और तुम्हा दल जैसे कार्य करना चाहे, उसमें मैं बाधा डालने की न तो शक्ति रखता हूँ और न ही डालूँगा ।"

    "वेरी गुड I” ब्रिगेंजा खुश होकर बोला "मानता हूँ कि तुम वास्तव में इंटरनेशनल अपराधी हो। प्रारम्भ में तुम्हें चीफ के पास आँखों पर पट्टी बाँधकर चलना होगा ये हमारा कानून है I"

    इसके उत्तर में संग्राम मुस्कराकर बोला "मैं जानता हूँ । अक्सर ऐसे दलों का यह प्रथम कानून होता है ।"

    ********

    लगभग एक ही साथ संग्राम और सविता की आंखो से पट्टियां हटाई गई I उन्होंने स्वयं को एक विशाल गोल हॉल में पाया। उनके चारों तरफ़ लगभग तीस शक्तिशाली इंसान ग्रीन कपडे पहने हुए खड़े थे । कुछ देर तक तो वे दोनों अपने चारों ओर का निरीक्षण करते रहे । फिर उन दोनों की निगाह सामने ब्रिगेंजा पर स्थिर हो गई जो मुस्करा रहा था ।

    कुछ देर तक वे उसे देखते रहे, फिर वे आपस में एक-दूसरे को देखने लगे I

    सविता तो बेचारी सहमी-सी थी । उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि उसे घर पहुचाने का प्रोगाम स्वयं अधेड़ ने क्यों त्याग दिया और उसके साथ ये उपन्यासों जैसी घटनाएं क्यों हो रही हें ।

    उसके लिए इस समय एकमात्र सहारा उसका वह भाई ही था, जो इस समय भी उसी अधेड़ के रूप में था । अंत: उसने अपने भाई से हमेशा अपने साथ रहने की प्रार्थना की थी, जिसे अधेड़ के मेकअप के पीछे छुपे संग्राम ने सहर्ष स्वीकार कर लिया । सविता अपनी प्रत्येक परेशानी उसे इस प्रकार बताती मानो वे एक ही कोख के बचपन से साथ ही खेले हों I बताती भी क्यों नही ! जमाने की इस भीड़ मे जहां आज प्रत्येक मर्द प्रत्येक औरत पर बाज की भांति झपटता है, ऐसे समाज में उसे सिर्फ यह अधेड़ ही पवित्र लगा था | उसे लग रहा था जैसे यह अधेड़ ही सब कुछ है ।

    संग्राम भी वास्तव में प्रत्येक पल उसके साथ था | न जाने क्यों उसे भी राक्षसों के बीच फंसी लड़की से सहानुभूति हो गई थी ।

    "कुछ समय पश्चात आप लोगों की भेंट मेरे चीफ से होगी ।” ब्रिगेंजा ने कहा ।

    "हर छोटी से छोटी चीज प्रकृति में मायने रखती है"



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