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Thread: आग के बेटे (वेद प्रकाश शर्मा द्वारा रचित) - विजय विकास श्रृंखला

  1. #11
    हीरक सदस्य bndu jain's Avatar
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    "देखो प्यारे काले लड़के ।” विजय अकड़कर सीना फूलाता बोला "देखो विजय दो ग्रेट की शोहरत, स्वयं गृहमन्त्री ने हमें इस केस पर लगाया है ।"

    ब्लैक ब्वाय के अधरों पर मुस्कान उभर आई ।

    विजय ने लाल कागज खोलकर पढना प्रारम्भ किया । लिखे हुए शब्द कुछ इस प्रकार थे I


    “'प्यारे राजनगर वासियो और पुलिस अधिकारियों।

    हमे कुछ इस तरह के समाचार मिलै हैं कि आजकल रिजर्व बैंक आँफ़ इंडिंया की मुद्रा की सख्या कई करोङ तक पहुच गई है I अधिकारीगण जरा हमारी बात को गहराई से सोचे I वास्तविकता यह है कि हम लोग हमेशा जनकल्याण के लिए तत्पर रहे हैं । हमारा अभी तक का जीवन जनकल्याण में ही व्यतीत हुआ हैं और उम्मीद करते हैं कि अगर आप लोगों का सहयोग मिला तो जीवनपर्यत हम लोग इसी प्रकार परहिताय के लिए प्रयत्नशील रहेगे| अभी तक हम लोग जनकल्याण के छोटे-छोटे कार्य करते रहते थे। किन्तु हमने देखा कि भारत कुछ इतनी परेशानियो में घिरा है कि अगर हमारी यह जनकल्याण की भावना इतनी धीमी रही तो हम कुछ नहीं कर पाएँगे और हमारा जीवन एक तरह से निरर्थक सा ही ही हो जाऐगा । अतः हम लोग खुलकर सामने आ रहे है ।

    हाँ तो मैं उस विषय पर लिख रहा था जो जनकल्याण का कार्य हम अभी कुछ ही समय बाद करने जा रहे हैं । हम एक बार फिर कहते हैं कि हमें समझने का प्रयास करे । बात ये है कि रिजर्व बैंक मे मुद्रा आवश्यकता से अधिक हो गई है ।

    अब जरा आप लोग दिमाग से सोचे कि इतनी बडी रकम चुराने का लालच किस के दिमाग में नहीं आऐगा? आजकल भारत में भ्रष्टाचार, धोखा, चोरी, लूट इत्याद्वि जोरों पर है । अब आप सोचिए कि क्या किसी भी वक्त वे लुटेरे रिजर्व बैंक की दस करोड़ की रकम, जो भारतीय प्रजा की है, लूट नही सकते? आपको विश्वास हो या न हो हम लोग तो क्योंकि जनक्लाण के लिए जीतै हैं अत: प्रजा की सुरक्षा का ध्यान लगा रहता है । प्रजा के धन को अत्यंत सुरक्षित रखने के लिए हम लोग यह धन ले जाऐगे । ताकि इसे अत्यंत सुरक्षा के साथ रखा जा सके । शायद आप लोग हमारे इस काम की निन्दा करे लेकिन हम फिर भी कहेगे कि हमे समझने का प्रयास किया जाया । अगर यह धन यहां रहा तो हमेशा चोरी होने का भय लगा रहेगा । संभव है कि इस प्रयास मे किसी की ह्नत्या हो जाए ओर हमारे होते हुए यह सब हो जाए तो हम किस बात के जनकल्याणी है ?

    इस बात की संभावना ही स्माप्त हो जाए, इसलिए हम ठीक दो बजे आऐगे ।

    हमने अब बहुत कुछ लिख दिया हैं।


    आशा करते है हमारे कार्यो मे बाधा डालने के स्थान पर हमें सहयोग देंगे।

    अंत मे ये लिखना अपना कर्त्तव्य समझते हैं कि अगर हमारे इस कल्याण कार्य में कोई हमारे विरूध आया तो दोस्तो ये याद रखना कि जो कार्य जनकल्याण के लिए किए जाते हैं, कार्यकर्ता उन सभी रोडों को ठिकाने लगाता हुआ अपनी मंजिल तक पहुचता है जो मार्गो में आतै हैं ।

    यू तो हमारे द्वारा सुरक्षित रखनै पर भी चोरी होने का भय तो लगा ही रहेगा। स्वयं हमारी जान भी जा सकती है किन्तु हमें अपनी चिंता नहीं नही है, चिंता हैं तो आप लोगों की है| कहीं आप लोगों को किसी तरह का कष्ट न हो । अब हम इस मुसीबत को अपने साथ ले जाने के लिए ठीक दो बजे आ रहे है

    इस धन की सुरक्षा में अगर हम लोगों की जान भी चली जाए तो हम अपना परहिताय जीवन सफल समझेगे । अच्छा, अब दो बजे मिलेंगे ।।

    जनकल्याणकारी आप ही के दोस्त

    आग के बेटे
    उपन्यास को ज़रा फास्ट कीजिये विजय सीरीज को किस्तों में पढने में मजा नहीं आता है

  2. #12
    कर्मठ सदस्य asr335704's Avatar
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    जी हाँ, जल्दी नावेल अपलोड करूँगा |
    अभी मिस्टेक्स है नावेल में, उन्हें ठीक कर रहा हूँ l
    ठीक करते ही पूरा नावेल अपलोड कर दूंगा l
    कृपया थोड़ा इंतज़ार कीजिये l

    "हर छोटी से छोटी चीज प्रकृति में मायने रखती है"



  3. #13
    कर्मठ सदस्य asr335704's Avatar
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    Quote Originally Posted by anita View Post
    बेह्तरीनं

    आपका बहुत बहुत धन्यवाद
    प्रोत्साहन के लिए आभार

    "हर छोटी से छोटी चीज प्रकृति में मायने रखती है"



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