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Thread: कोरोनाकाल की धाँधली

  1. #21
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    यहाँ पर यह बताना बहुत ज़रूरी है कि ओज़ोन तकनीकि पर आधारित इन उपकरणों का उपयोग बन्द स्थानों पर नहीं, बल्कि खुले स्थानों पर किया जाना चाहिए, क्योंकि इन उपकरणों से निकलने वाली गैस ओज़ोन की अल्प मात्रा भी मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए अत्यन्त हानिकारक होती है। अतः यदि आप अपने बन्द रसोईघर में इस उपकरण का उपयोग करना चाहते हैं तो इस विचार को अपने मन से त्याग दें।


  2. #22
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    अब यक्ष-प्रश्न यह है कि इन उपकरणों का उपयोग क्यों किया जाए? कुछ लोगों का तर्क होता है कि हम पानी में नमक और विनिगर मिलाकर सब्ज़ी और फल धोते हैं। दक्षिण भारत से पानी में नमक के साथ हल्दी भी मिलाने की ख़बरें मिली हैं। कुछ लोग पूछते हैं कि सब्ज़ी और फल में कोरोना वायरस कैसे आता है? तो इसका उत्तर यह है कि कुछ सब्ज़ी और फल के ठेले वाले आज भी बिना मास्क लगाए ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाकर सब्ज़ी बेचते हैं। यदि ठेले वाला संक्रमित हुआ तो चिल्लाने के कारण उसके मुँह से निकले एयरोसोल और ड्रॉपलेट द्वारा ठेले पर रखे सामान पर कोरोना के विषाणु चिपक सकते हैं। नमक, हल्दी और विनिगर से कोरोना वायरस के निष्क्रिय होने के कोई वैज्ञानिक प्रमाण आज तक नहीं मिले हैं। पानी से अच्छी तरह धोने से कोरोना वायरस के बहने की शत प्रतिशत उम्मीद तो बिल्कुल नहीं रहती। फिर भी आधे घंटे तक किसी भी वस्तु को पकाने पर सभी प्रकार के बैक्टीरिया और विषाणु ठिकाने लग जाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार ६०-७० डिग्री तापमान में सभी प्रकार के बैक्टीरिया और विषाणु निष्क्रिय हो जाते हैं। अतः सब्ज़ी काटते समय अपने चेहरे और आँखों पर हाथ न लगाया जाए तो कोई खतरा नहीं है। अतः यदि आप आम, धनिया और पुदीने की चटनी, मूली-टमाटर का सलाद और फल इत्यादि खाने के शौकीन हैं तो आपको इन उपकरणों की आवश्यकता है। बता दें कि कुछ लोग सैनिटाइज़र और साबुन इत्यादि से सब्ज़ी और फल धोने की सलाह देते हैं जो मूर्खता के सिवा और कुछ नहीं है, क्योंकि सैनिटाइज़र और साबुन के हानिकारक केमिकल सब्ज़ी और फल द्वारा सोख लिए जाते हैं।

  3. #23
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    ३. नोट सैनिटाइज़र मशीन


  4. #24
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    मार्च में केंद्रीय सरकार ने एक अधिसूचना जारी की थी जिसमें यह कहा गया था कि नोटों से कोरोना का संक्रमण फैल सकता है। पढ़िए पूरा समाचार-

    नोट से भी हो सकता है कोरोना संक्रमण, डिजिटल पेमेंट का करें इस्तेमाल : सरकार

    By Gaurav NoronhaET Bureau | Updated: Mar 19, 2020, 01.51 PM IST

    सरकार ने कैश की जगह यूपीआई, एनईएफटी, मोबाइल बैंकिंग और डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करने की सलाह दी है. उसने बैंकों को कहा है कि वे अपने ग्राहकों से डिजिटल पेमेंट के तरीकों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करें. कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के उपायों के तहत सरकार ने ऐसा किया है.

  5. #25
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    वित्त मंत्रालय ने बुधवार को इस बारे में अधिसूचना जारी की है. उसने कहा है कि नोटों से कोरोना का संक्रमण फैल सकता है. वायरस के फैलने में यह एक माध्यम बन सकता है.

    नोटिफिकेशन में बैंकों को मीडिया, सोशल मीडिया और एसएमएस और ईमेल के जरिये कैंपेन चलाने की सलाह दी गई है. उनसे कहा गया है कि वे मौजूदा स्थितियों से बचाव के लिए डिजिटल पेमेंट के फायदों के बारे में ज्यादा से ज्यादा बताएं.

  6. #26
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    सरकार ने कहा है कि बैंक इस बारे में अपनी शाखाओं और एटीएम पर बैनर और पोस्टर लगाकर भी ग्राहकों को अधिक से अधिक जागरूक कर सकते हैं.

    इसके अलावा सरकार ने बिजनेस करेस्पॉन्डेंट, सेवा प्रदाताओं और बैंकिंग एजेंटों को भी ग्राहकों को सैनिटेशन की सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा है. उसने इनसे आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम और एटीएम मशीन जैसे उपकरणों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है.

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    साभार: ईटी

  7. #27
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    जैसे ही सरकार ने कहा- 'नोटों से कोरोना का संक्रमण फैल सकता है', वैसे ही फटाफट आ गई बाज़ार में नोटों से कोरोना को ठिकाने लगाने वाली मशीन! देखिए वीडियो-

  8. #28
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  9. #29
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    नोट सैनिटाइज़र मशीन में अल्ट्रावायलेट किरणों का प्रयोग वायरस को नष्ट करने के लिए किया जाता है। अल्ट्रावायलेट किरणें सूर्य के प्रकाश में भी होती हैं। अल्ट्रावायलेट किरणें तरंग दैर्ध्य (Wavelength) के आधार पर तीन प्रकार की होती हैं जिन्हें UV-A, UV-B और UV-C कहते हैं। वायरस को निष्क्रिय करने के लिए UV-C की आवश्यकता पड़ती है। सूर्य का प्रकाश धरती पर पहुँचने से पहले ही धरती के वायुमंडल में मौजूद ओज़ोन की पर्त (Layer) के कारण UV-B और UV-C का अधिकांश भाग अवशोषित (Absorbed) हो जाता है जिसके कारण धरती पर UV-A ही पहुँच पाता है। यह मनुष्य के भले के लिए ही है। यदि धरती पर UV-B और UV-C भी पहुँच जाए तो मनुष्य का जीवित रहना मुश्किल हो जाए। इसीलिए जब ओज़ोन की पर्त में छेद हो जाता है तो वैज्ञानिकों के होश उड़ जाते हैं। अल्ट्रावायलेट किरणों से त्वचा को बचाने के लिए ही सनस्क्रीन लोशन इत्यादि का उपयोग किया जाता है। बता दें कि अल्ट्रावायलेट किरणों के सम्पर्क में आने से त्वचा का कैंसर हो सकता है। UV-A, UV-B और UV-C में से UV-C किरणें मनुष्य के लिए सबसे अधिक खतरनाक होती हैं, तथा मात्र कुछ पलों के लिए भी इन किरणों के सम्पर्क में आना स्वास्थ्य के लिए घातक सिद्ध होता है।



    संदर्भवश यहाँ पर बताते चलें कि कम्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल, टेबलेट इत्यादि से भी घातक किरणें निकलती हैं जो आँखों के लिए हानिकारक होती हैं। इन किरणों को ब्लू लाइट या ब्लू रे कहते हैं।

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