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Thread: कबसुर कुड़िनीर (கபசுர குடிநீர்): एक दक्षिण भारतीय इम्युनिटी बूस्टर सिद्धा औषधि

  1. #121
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    शेख कहती हैं, ‘वैकल्पिक चिकित्सा संवीक्षा, जांच और सहकर्मियों द्वारा समीक्षा के लिए पूरी तरह खुली होनी चाहिए और इसे अनुसंधान के उन सभी सिद्धांतों का पालन करना चाहिए जैसे कि साक्ष्य आधारित चिकित्सा में होता है. अपने आप को मुख्यधारा से विलग करके और कठिन चुनौतियों को स्वीकार करने में असमर्थता दिखा कर वैकल्पिक चिकित्सा उस हाल मे स्वयं पहुंची है जहां वह अभी है. उस यंत्रणा और जैव रासायनिक मार्ग को पता करना काफ़ी महत्वपूर्ण हो सकता है जिसके तहत जड़ी-बूटियों को सूजन रोधी बनाया जाता है.

    लेकिन अनुसंधान अक्सर शोध के पूरी तरह से संपन्न होने से पहले ही त्वरित परिणामों और विपणन पर केंद्रित हो जाता है, क्योंकि विश्वास प्रमाणों से ऊपर स्थान बना लेता है.

    हिमानी चांदना से मिले इनपुट्स के साथ

    सुनंदा रंजन द्वारा संपादित

    *प्लेसबो एक तरह का निष्क्रिय पदार्थ या उपचार है जिसका कोई चिकित्सीय महत्व नहीं होता है.


    (इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

    ----------------------------
    साभार: दिप्रिंट

  2. #122
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    तो इस प्रकार 'दिप्रिंट' में प्रकाशित लेख 'दिल को खुश करने को होम्योपैथी अच्छी है, कोरोनावायरस तो छोड़िए, ये किसी मर्ज की दवा नहीं' में होम्योपैथी की धज्जियाँ उड़ाई गई हैं तथा 'आल्टन्यूज़' में प्रकाशित लेख 'फ़ैक्ट-चेक: आयुष क्वाथ या काढ़ा COVID-19 से लड़ने के लिए इम्यूनिटी ‘बूस्ट’ नहीं करता' में आयुर्वेद की धज्जियाँ उड़ाई गई हैं। यहाँ पर ध्यान देने योग्य बात यह है कि दोनों ही लेखों में एक बात उभयनिष्ठ (Common) है। वह यह कि 'आल्टन्यूज़' में प्रकाशित लेख 'डॉ० सुमैया शेख' द्वारा लिखा गया है जो 'आल्टन्यूज़' की संस्थापिका होने के साथ-साथ उसकी सम्पादिका भी हैं।

  3. #123
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  4. #124
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    'दिप्रिंट' में प्रकाशित लेख 'दिल को खुश करने को होम्योपैथी अच्छी है, कोरोनावायरस तो छोड़िए, ये किसी मर्ज की दवा नहीं' में 'डॉ० सुमैया शेख' के शोध का भी हवाला दिया गया है। संक्षेप में- दोनों ही लेखों में 'डॉ० सुमैया शेख' का नाम उभयनिष्ठ है। जैसा कि हमने बताया कि आधुनिक विज्ञान भूत-प्रेत, तंत्र-मंत्र, ज्योतिष तो क्या, ईश्वर को भी नहीं मानता। अतः होमियोपैथी और आयुर्वेद को मानने का सवाल ही नहीं उठता। तंत्र शास्त्र के अनुसार इसमें वस्तुओं में निहित अदृश्य शक्ति कार्य करती है। ठीक इसी प्रकार यदि होमियोपैथी में भी वस्तुओं की अदृश्य शक्ति निहित है तो इसमें आश्चर्य करने की क्या बात? बहुत कम लोग जानते होंगे कि कुछ लोगों ने होमियोपैथी द्वारा रोगी को दवा दिए बिना दूरस्थ चिकित्सा प्रदान करने की नई पद्धति ईजाद करने का दावा भी किया है। यह बिल्कुल तंत्र विद्या सरीखा है। यही नहीं, होमियोपैथी की एक अंग्रेज़ी की किताब में होमियोपैथी दवाओं का सम्बन्ध विभिन्न ग्रहों से स्थापित किया गया है। कुछ लोगों का यह भी दावा है कि प्रतिकूल ग्रहों को अनुकूल बनाने के लिए होमियोपैथी की दवाएँ ग्रहण की जा सकती हैं।

  5. #125
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    होमियोपैथी की कार्यक्षमता के बारे में सवाल उठाते हुए 'दिप्रिंट' में प्रकाशित लेख 'दिल को खुश करने को होम्योपैथी अच्छी है, कोरोनावायरस तो छोड़िए, ये किसी मर्ज की दवा नहीं' में लिखा गया है कि 'लोगों को लगता है कि होम्योपैथी काम करती है और इसका कारण रिग्रेशन टू द मीन (माध्य के लिए प्रतिगमन) बताया गया है।' इसके अनुक्रम में यह तर्क दिया गया है कि 'लगभग हर बीमारी का एक प्राकृतिक विकास वक्र होता है जिसमें वह समय के साथ या तो रोगी को मार देती है या खुद ही धीरे-धीरे ख़त्म हो जाती है। होमियोपैथिक उपचार के लम्बे कोर्स के कारण रोग की प्राकृतिक अवधि के बाद उसकी बीमारी अपने आप कम होने लगती है और आखिरकार मरीज ठीक होकर यह समझता है कि होमियोपैथिक उपचार के कारण रोग ठीक हो गया।' यहाँ पर यह बता दें कि विकीपीडिया के अनुसार 'विसूचिका या आम बोलचाल मे हैजा (Cholera), जिसे एशियाई महामारी के रूप में भी जाना जाता है, उन ज्ञात रोगों मे से एक है जो बहुत तेजी से घातक असर करते हैं। इसके सबसे गंभीर रूप में रोग के लक्षणों की शुरुआत के एक घंटे के भीतर ही, एक स्वस्थ व्यक्ति का रक्तचाप घटकर निम्न रक्तचाप के स्तर तक पहुँच सकता है और संक्रमित मरीज को अगर चिकित्सा प्रदान नहीं की जाये तो वो तीन घंटे के अन्दर मर सकता है।' इसका अर्थ यह हुआ कि हैजा का प्राकृतिक विकास वक्र बहुत छोटा होता है, क्योंकि यह तीन घंटे के अन्दर ही रोगी को मार देता है। अतः यह स्पष्ट है कि किसी भी चिकित्सा पद्धति से हैजा का इलाज तीन घंटे के अन्दर ही हो जाना चाहिए और चिकित्सा का परिणाम जानने के लिए बहुत लम्बी अवधि तक प्रतीक्षा करने की भी कोई आवश्यकता नहीं है। होमियोपैथी के एक वरिष्ठ चिकित्सक के अनुसार हैजा के इलाज में जो दवा कारगर है वह है 'आर्सेनिक एल्बम'
    Last edited by superidiotonline; 28-08-2020 at 08:22 AM.

  6. #126
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  7. #127
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    यह वही दवा है जिसका सुझाव आयुष मंत्रालय ने कोरोना वायरस के लिए दिया है। होमियोपैथी के चिकित्सकों के अनुसार हैजा के मामलों में 'आर्सेनिक एल्बम' की खुराक़ और पोटेन्सी चिकित्सक तय करता है। यह दवा बच्चों पर भी कारगर होती है। 'लोगों को लगता है कि होम्योपैथी काम करती है' -जैसा सिद्धान्त बच्चों पर लागू नहीं होता। अतः यह स्पष्ट है कि होमियोपैथी कारगर है। बच्चों को क्या पता कि किस चिकित्सा पद्धति की दवा दी जा रही है। रही बात आयुर्वेद की, तो हैजा के मामलों में एक चिरपरिचित आयुर्वेदिक दवा है- 'अमृतधारा'

  8. #128
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