Page 16 of 16 FirstFirst ... 6141516
Results 151 to 153 of 153

Thread: चीते का दुश्मन (वेद प्रकाश शर्मा द्वारा रचित)

  1. #151
    कांस्य सदस्य asr335704's Avatar
    Join Date
    Jul 2019
    Location
    भारत
    Posts
    5,147
    "टुम्बकटू नामक व्यक्ति.” विजय अपने एक-एक शब्द पर जोर देता हुआ आगे बोलायह अदालत जानती है कि वह चंद्रमा का निवासी था। चंद्रमा पर से ही वह इतना बड़ा खजाना लाया था इस घटना के बाद वह मुझसे मिल चुका है। उसने मुझे ये पत्र दिया” एक पत्र अपनी जेब से निकालता हुआ विजय चीखाइस पत्र में उसने लिखा है कि पहले चंद्रमा पर भी हीरों और पन्नों को ही मुद्रा का महत्व दिया जाता था लेकिन एक बार वहां खुदाई में हीरों और पन्नों के पर्वत निकल आए। अत: वहां हीरों-पन्नों की भरमार हो गई वहां मुद्रा स्फीति हुई और परिणामस्वरूप चंद्रमा पर हीरों और पन्नों के महत्त्व को कम कर दिया गया। अब वहां हीरे और पन्ने धरती की मिट्टी से अधिक महत्व नहीं रखते। उन्हीं पर्वतों से वह हीरे-पन्ने भरकर यहां लाया था अगर ये खजाना विश्व तक पहुंच जाता तो धरती पर भी इनकी वैल्यू समाप्त हो जाती और विश्व खतरे में घिर जाता। मैं अदालत को ये समझाना चाहता हूं कि ये खजाना विश्व के लिए वरदान नहीं, अभिशाप था। उसका नष्ट होना ही विश्व के हित में था।”

    इस प्रकार विजय के इस ठोस तर्क को विरोधी वकील नहीं काट सका। विरोधी वकील ही क्या, खुद पांचों जज उसके तर्कों से प्रभावित हुए और विकास को बाइज्जत बरी किया गया। अदालत को यह मानना ही पड़ा कि विकास का ये काम विश्व के हित में था।

    जब विजय और विकास अकेले में मिले तो विकास ने कहा “क्यों गुरु! टुम्बकटु के लेटर का खूब गच्चा दिया?"

    "गच्चा-वच्चा कुछ नहीं दिया प्यारे दिलजले! गच्चा हमें टुम्बकटू दे गया
    "

    "क्या मतलब?"

    "मतलब ये प्यारे कि वो कार्टून अभी जिंदा है और वास्तव में मुझे ये लेटर उसी ने दिया है


    "लेकिन गुरु! वो जिंदा बच कैसे गया?"

    "ये तो वही जाने
    ” विजय ने कहा "और प्यारे! वो चंद्रवटी भी अपने हाथ से निकल गई"

    “कैसे?” एक बार विकास और भी बुरी तरह चौंका ।

    जवाब में विजय ने उसे सब कुछ बता दिया और नम्र स्वर में बोला "इसके बाद हमने साले लूमड़ मियां का कचूमर निकाल दिया यानी बेहोश कर दिया। अब वह भारत की एक जेल में है।"

    "इसका मतलब ये हुआ गुरु कि कुछ हाथ नहीं लगा
    "

    "हाथ क्यों नहीं लगा प्यारे दिलजले ।” विजय बोला “ये क्या कम है कि तुम अंतरराष्ट्रीय सीक्रेट सर्विस के चीफ बन गए हो
    Last edited by asr335704; Yesterday at 02:23 PM.
    || प्रयास करने से ही सफलता मिलती है ||

  2. #152
    कांस्य सदस्य asr335704's Avatar
    Join Date
    Jul 2019
    Location
    भारत
    Posts
    5,147
    *** समाप्त ***

    || प्रयास करने से ही सफलता मिलती है ||

  3. #153
    सदस्य anita's Avatar
    Join Date
    Jun 2009
    Posts
    34,071
    बेहतरीन

    अच्छा उपन्यास हैं

    धन्यवाद
    सभी उपस्थित मित्रो से निवेदन है फोरम पे कुछ न कुछ योगदान करे,अपनी रूचि के अनुसार किसी भी सूत्र में अपना योगदान दे सकते है,या फिर आप भी कोई नया सूत्र बना सकते है

Page 16 of 16 FirstFirst ... 6141516

Posting Permissions

  • You may not post new threads
  • You may not post replies
  • You may not post attachments
  • You may not edit your posts
  •