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Thread: चीते का दुश्मन (वेद प्रकाश शर्मा द्वारा रचित)

  1. #11
    कांस्य सदस्य asr335704's Avatar
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    इन्ही सब प्रश्नों के उत्तर में उलझता हुआ वह अपने विचारों की दुनिया में बहुत आगे निकल गया था कि उसके मस्तिष्क को एक झटका-सा लगा । टूटी हुई माला के मोतियों की तरह उसके विचारों की लड़ियां एकदम बिखर गईं ।

    उसने देखा, टैक्सी उसकी मंजिल पर खड़ी है । वह तेजी के साथ टैक्सी से उतरा और बिल अदा करके उसे विदा किया ।

    वहां द्वार पर खड़े दरबान ने रोकने का कोई प्रयास नहीं किया । वह तेजी से चलता हुआ अंदर प्रविष्ट हो गया । पांच मिनट पश्चात वह चौथी मंजिल की गैलरी में बढ रहा था ।

    एक कमरे के सामने वह रुक गया । हाथ बढाकर कमरे के दरवाजे पर दस्तक दी ।

    "कम इन ।” अंदर से आवाज आई ।

    उसने दरवाजा अंदर को धकेल दिया I सामने एक सोफे पर जेम्स बांड बैठा हुआ था । उसके सामने मेज़ पर एक दारू की बोतल, गिलास और भुना हुआ मुर्गा रखा था। बांड ने दरवाजा खुलने के साथ ही उस तरफ देखा - सामने दरवाजे पर खड़े इंसान को देखते ही बांड उछल पड़ा ।

    पलक झपकते ही वह खड़ा हो गया और उसके हाथ में रिवॉल्वर चमकने लगा ।

    “हैंड्स अप मि. त्वांग ली ।”

    दरवाजे पर खड़ा इंसान बुरी तरह चौंका ! बौखलाहट के भाव उसके चेहरे पर आए । एकदम बोला "क्या मतलब?”

    "पहले आप हाथ ऊपर उठा लो मि. त्वांग ली ।” अपने रिवॉल्वर को हिलाता हुआ पूरी तरह सतर्क होकर बांड बोला इस बार अगर कोई भी हरकत की तो मेरी गोली तुम्हारा भेजा उड़ा देगी I"

    “मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि तुम कह क्या रहे हो?” असमंजस में फंसा त्वांग ली हाथ ऊपर उठाता हुआ बोला ।

    "मतलब भी सब समझ जाओगे बेटे, जरा मेरी बाईं कलाई में बंधी हुईं पट्टी देखो ! ये चाक़ू माईक ने मारा है । एक पट्टी कपडों के नीचे पेट पर बंधी हुई है जहां चंगेज खां ने चोट मारी थी । लेकिन तुम सबसे सूरमे निकले । हम तो आपस में लड़ते-मरते ही रह गए और तुम फिल्म लेकर पार हो लिए I”
    || प्रयास करने से ही सफलता मिलती है ||

  2. #12
    कांस्य सदस्य asr335704's Avatar
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    "मैं !त्वांग ली की खोपड़ी घूम गई "ये तुम क्या बक रहे हो?”

    "मैं जानता हूं चीनी औलाद कि तुम पैदाइशी दोगले होते हो ।” जेम्स बांड उसकी ओर बढता हुआ बोला “लेकिन बांड के सामने अब ज्यादा होशियारी नही चलेगी । अगर तुमने नहीं बताया कि फिल्म कहां है तो इसी समय मैं तुम्हें गोली मार दूंगा ।”

    "फिल्म ?” गहन आश्चर्य के साथ बोला त्वांग लीकौन-सी फिल्म?"

    'फिल्म कहां है?” बेहद कठोर स्वर में बांड गुर्राया, '"जवाब दो वर्ना ?"

    "जवाब वो नहीं, मैं दूंगा, बांड बेटे!उसी समय कमरे में एक तीसरी आवाज गूंजी ।

    अभी बांड और त्वांग ली चौंककर पूरी तरह खुद को सम्भाल भी नहीं पाए थे कि त्वांगली के पीछे से गर्दन पर एक कैरेट पड़ी । वह लहराया और उसी पल उसके पीछे से किसी ने जोरदार ठोकर मारी ।

    ठोकर इतनी शक्तिशाली थी कि त्वांग ली बाकायदा हवा में लहराया और मुंह के बल फर्श पर बांड के कदमों में जा गिरा ।

    त्वांग ली बेहोश हो चुका था ।

    "गोली चलाई तो घाटे में रहोगे बांड I” दरवाजे से आवाज़ आईतुम्हारा फायदा करने तुम्हारे पास आया हूं | अगर गोली चली तो इस कोठी में जितने भी जासूस हैं, सब यहां आ जाएंगे और तुम घाटे में रहोगे ।”

    बांड ने देखा, दरवाजे पर त्वांग ली खड़ा था । एक पल को तो बांड चकराया परंतु अगले ही पल मुस्कराता हुआ बोला "ओह! तो मतलब ये है कि फिल्म ले जाने वाले त्वांग ली तुम हो I"

    "जी!अदब से झुककर त्वांगली बोला "खाकसार ही वह हस्ती है I”

    "बको मत !कठोर स्वर में गुर्राया बांडतुम कौन हो?"

    "पहले दरवाजा बंद कर दूं ?” बांड ने एक पल सोचा और बोलाठीक है, कर दो।” त्वांग ली ने दरवाजा बंद कर दिया ।
    || प्रयास करने से ही सफलता मिलती है ||

  3. #13
    कांस्य सदस्य asr335704's Avatar
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    "अब बोलो, कौन हो तुम?” जेम्स बांड ने सख्त स्वर में पूछा ।

    “नाम में क्या रखा है प्यारे, काम की बात करो I” त्वांग ली जो वास्तव में अलफांसे था, बोलाऔर जब दो दोस्तो के बीच काम की बात होती है तो बीच में ये खिलौना नहीं होना चाहिए ।”

    "ज्यादा स्मार्ट बनने की कोशिश मत करो I” बांड उसे घूरता हुआ बोलाइतनी आसानी से तुमसे दरवाजा इसलिए बंद करवाया है क्योंकि अब इस कमरे की आवाज़ बाहर नहीं जाएगी । इस रिवॉल्वर में हमेशा के लिए सुला देने वाली नींद की गोलियां हैं, किसी को पता भी नहीं लगेगा और तुम.. I”

    "मैँ जानता हूं बांड कि हर जासूस का कमरा साउंड़ प्रूफ़ है और ये कमरा बंद भी इसीलिए किया है ताकि यहां हम जो इश्क फरमाएंगे उसकी जानकारी बाहर वालों को न हो सके I” अलफांसे ने उसकी बात बीच में ही काटकर कहा ।

    और बांड ने..

    "धायं! "

    एकदम फायर कर दिया ।

    मगर दूसरी तरफ अलफांसे था - संग आर्ट का माहिर । हल्की-सी झुकाई देकर उसने गोली को धोखा दिया और उससे पूर्व की बांड अगला फायर कर सके, हवा में लहराता हुआ अलफांसे का जिस्म बांड पर जा गिरा ।

    बांड एकदम बौखला गया । इसी बौखलाहट में उस समय चार चांद लग गए जब अलफांसे के बाएं हाथ की कैरेट ने उसकी रिवॉल्वर को फ़र्श पर फेंक दिया और दाएं हाथ के मजबूत घूंसे ने उसे हवा में उछालकर फर्श पर ला पटका ।

    एक साथ इन लगातार हमलो ने बांड की हालत बैरंग कर दी परंतु फिर भी वह गजब की फुर्ती का प्रदर्शन करके एकदम खड़ा हो गया ।

    उसके सामने खड़ा हुआ त्वांग ली मुस्करा रहा था ।
    || प्रयास करने से ही सफलता मिलती है ||

  4. #14
    कांस्य सदस्य asr335704's Avatar
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    बांड जानता था कि रिवॉल्वर की गोली से बचने की कला जासूसों में केवल विजय ही जानता है । इन दो-चार हाथो में ही बांड ये भी समझ गया कि सामने खड़ा इंसान जबर्दस्त लड़ाका है । उसे लगा, हो न हो सामने खड़ा इंसान विजय है ।

    दोनों एक-दूसरे के आमने-सामने थे । जेम्स बांड के चेहरे पर जहां हल्की सी बौखलाहट के भाव थे, वहां अलफांसे के होंठों पर गहरी मुस्कान थी ।

    वह अपने दोनों कूल्हों पर हाथ रखे उससे दो कदम दूर खड़ा था । बांड ने खुद को सम्भाला और बोलामैं तुम्हें पहचान चुका हूं, विजय I"

    “तुमने कुछ नही पहचाना है, बेटे।” कहते हुए उसने अपने चेहरे से फेस मास्क नोच लिया।

    "तुम ?” अलफांसे को सामने देखते ही बांड चौंककर दो कदम पीछे हट गया ।

    "हां बेटे, ये हम हैं I” अलफांसे ने मुस्कराते हुए आगे कहामैंने कहा था कि हमारे बीच में ये रिवॉल्वर नहीं होना चाहिए I”

    कहता हुआ अलफांसे फर्श पर पड़े रिवॉल्वर की ओर बढ़ा ।

    इधर सामने अलफांसे को देखकर बांड का पूरा जिस्म तन गया था । अलफांसे की खूबियों से वह अच्छी तरह परिचित था । जैसे ही अलफांसे फ़र्श पर पड़ा रिवॉल्वर उठाने के लिए झुका, चीते की तरह झपटा बांड ।

    हालकि बांड की किसी भी हरकत का जवाब देने के लिए अलफांसे तैयार था किंतु इसके बावजूद भी वह धोखा खा गया ।

    बांड ने इतनी अधिक फुर्ती का प्रदर्शन किया था कि अलफांसे जैसा व्यक्ति भी पूरी तरह सतर्क रहने के बाद भी धोखा खा गया ।

    जेम्स बांड के जूते की भरपूर ठोकर उसके चेहरे पर पड़ी । लाख चेष्टाओं के बाद भी अलफांसे एक तरफ फर्श पर जा गिरा ।

    और जेम्स बांड! वह जानता था कि अगर अलफांसे को क्षण-भर का भी अवसर मिल गया तो उसके लिए खतरा बन जाएगा |
    || प्रयास करने से ही सफलता मिलती है ||

  5. #15
    कांस्य सदस्य asr335704's Avatar
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    डबल ओ सेवन अपने देश और विभाग का सबसे बड़ा जासूस था । उसने कोई भी रिस्क लिए बिना अलफांसे पर जम्प लगा दी । उस समय अलफांसे ने फुर्ती से करवट बदलकर अपना स्थान छोड़ देने की कोशिश की थी मगर बांड ने उसकी इस कोशिश को विफल कर दिया । उसके दोनों हाथ अलफांसे की गर्दन में कस गए थे । दोनों कूल्हे वह अलफांसे के पेट पर रखे हुए था । अलफांसे को लगा जैसे फौलाद के बने दो हाथों में उसकी गर्दन फंस गई है । जेम्स बांड की पकड़ इस प्रकार सख्त होती चली गई कि अलफांसे को अपनी सांस रूकती हुई-सी महसूस हुई I

    बांड उसका गला दबाने को पूरी चेष्टा कर रहा था और अलफांसे खुद को उसके पंजे से छुड़ाने की चेष्टा उससे कहीं बढ़कर कर रहा था ।

    हालांकि शक्ति लगाने के कारण बांड के घावों में भयानक पीड़ा हो रही थी मगर वह जानता था कि अगर वह जरा भी शिथिल हुआ तो अलफांसे उसके लिए काल बन जाएगा ।

    इधर अलफांसे की स्थिति क्षण-प्रतिक्षण खराब होती जा रही थी । उसे और कुछ नहीं सूझा तो उसने अपने दाएं हाथ की उंगली पूरी शक्ति से बांड के पेट वाले घाव में दे मारी |

    बांड बिलबिला उठा ।

    एक क्षण के लिए उसके हाथो में शिथिलता आई और उसी क्षण अलफांसे के दोनों पैर बांड की गर्दन से लिपट गए । अलफांसे के एक ही झटके में बांड उलट गया । बांड के हाथ से अलफांसे की गर्दन निकल गई परंतु अलफांसे भी पूरी तरह अपने प्रयास में सफ़ल नही हो सका । उसका प्रयास था कि बांड की गर्दन उसके पैरों की कैंची में कैद होकर रह जाए मगर बांड फर्श पर कलाबाजियां खाता हुआ लुढ़कता चला गया ।

    एक ही पल में दोनों उछलकर फर्श पर खड़े हुए I

    अगले पल एक ही साथ दोनों के जिस्म हवा में उछले । दोनों एक-दूसरे को फ्लाइंग किक मारना चाहते थे कि हवा में दोनों के पैर उछलकर रह गए ।

    दोनों एक साथ फर्श पर गिरे, मगर कम कौन था ।

    एक का नाम अलफांसे था तो दूसरे का जेम्स बांड ।

    एक साथ दोनों एक-दूसरे पर झपटे । दोनों के सिर आपस में टकराए । कमरे में एक ऐसी आवाज गूँजी मानो दो पत्थर एक-दूसरे से टकराए हो ।

    सिर भिन्ना गए लेकिन चिंता किसी ने नही की ।

    पुन: झपटे ।

    ऐसा लगता था जैसे दो शक्तिशाली सांड भिड़ गए हो ।
    || प्रयास करने से ही सफलता मिलती है ||

  6. #16
    कांस्य सदस्य asr335704's Avatar
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    इस बार दोनों के हाथों की उंगलियां आपस में फंस गई | दोनों एक-दूसरे का हाथ मोड़ने के लिए शक्ति लगा रहे थे । बांड ने अपनी सम्पूर्ण शक्ति समेटकर एक तेज झटका दिया। इस झटके का प्रभाव यह होना था कि अलफ़ांसे के हाथ मुड़ जाते परंतु अलफांसे एक अनोखे और चमत्कृत कर देने वाले दांव का प्रयोग कर गया था । जैसे ही बांड ने झटका दिया, अलफांसे किसी पुतले की भांति फर्श पर से फिसलकर बांड की टांग के बीच आधा पार हो गया । इससे पूर्व कि बांड उसके इस अनोखे दांव के बारे में कुछ समझ पाए, अलफांसे ने एक जोरदार ठोकर उसकी पीठ पर जड़ दी । बांड के कंठ से एक चीख निकल गई और वह लहराकर फ़र्श पर गिरा ।

    उसने फर्श पर से उठने के लिए बेहद फुर्ती का प्रदर्शन किया, लेकिन अलफांसे ने उसकी पसलियों में एक ठोकर रसीद कर दी । बांड पीड़ा से तड़प उठा । तभी दूसरी ठोकर, तीसरी, चौथी, पांचवीं.. इसके बाद अलफांसे ने उसे सम्भलने का अवसर नहीं दिया ।

    एक अवस्था ऐसी थी कि बांड कराहकर शिथिल-सा पड़ा रह गया ।

    तब कहीं जाकर अलफांसे ने अपनी ठोकरों का क्रम रोका । सतर्कतावश अलफांसे चुपचाप खड़ा उसे देखता रहा ।

    जेम्स बांड बेहोश नहीं हुआ था बल्कि कराह रहा था । अलफांसे ने फर्श पर पड़े बांड का रिवॉल्वर जेब के अंदर कर लिया और बोला "कहो बांड बेटे ! मेरे बातें समझने की शक्ति आई या और तबीयत दुरुस्त करूं ।"

    अपनी पूरी शक्ति लगाकर बांड झूमता हुआ-सा उठकर फ़र्श पर ही बैठ गया ।

    अलफांसे उसके सामने रखे हुए सोफे पर आराम से बैठता हुआ बोलावैसे हमारी इस मुलाकात में लड़ाई-झगड़े की कोई बात थी नही, मगर तुम तो डबल ओ सेवन हो ना ! खुद को दुनिया का सबसे बहादुर इंसान समझते हो । मेरी बात सुने बिना ही तुमने अपने करतब दिखाने शुरू कर दिए । खैर कोई बात नहीं, अब यह नहीं पूछोगे कि मैं आपकी सेवा में हाजिर क्यों हुआ हूं?"
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  7. #17
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    “क्या कहना चाहते हो?” खुद पर संयम पाने को चेष्टा करता हुआ बांड बोला ।

    "लातों के भूत लातों से ही लाइन पर आते हैं I” अलफांसे बोलामुझे त्यांग ली के मेकअप में देखकर तुम ये समझ गए होंगे कि मीटिंग में आज तक चंगेज खां, माईक और तुम्हारे साथ मैं ही था । तुम्हारी जानकारी के लिए बता दूं कि मैंने त्वांगली को मीटिंग से एक दिन पहले ही एक हसीना के जाल में उलझाया और आज तक वह मेरी कैद में था । आज यह मेरी उस कैद से फरार होने में कामयाब हो गया । लेकिन मुझे इस बात का कोई अफ़सोस नहीं है । मेरा उद्देश्य पूरा हो चुका है ।”

    "तुम्हारा उद्देश्य ?"

    "जी हां, बांड भाई ।” अलफांसे बोला "मेरा उद्देश्य भी यही था कि मैं किसी तरह टुम्बकटू से फिल्म हासिल कर सकूं सो फिल्म इस समय मेरे कब्जे में है । आप लोग यानी विश्व के चुने हुए सबसे बड़े जासूस इस फिल्म के चक्कर में हैं । आप लोग इसे इसलिए प्राप्त करना चाहते हैं ताकि आप इसके रहस्यों तक पहुंच सकें और दुनिया के सबसे बड़े जासूस बन सकें मगर न तो मुझे इस फिल्म के रहस्यों में कोई दिलचस्पी है और न ही कोई मुझे सबसे बड़ा जासूस बनाएगा ।”

    "फिर तुम इस फिल्म के चक्कर में क्यों पड़े हुए हो?”

    बांड भाई क्योंकि इस फिल्म की तुम्हें बहुत जरूरत हैं !अलंफासे बोलाअगर इंगलैंड का ड़बल ओ सेवन अंतराष्ट्रीय सीक्रेट सर्विस का चीफ़ नहीं बना तो जिस जेम्स बांड को दुनिया का बच्चा-बच्चा जानता है उसके जीवन की ये सबसे बड़ी हार होगी I”

    "तुम कहना क्या चाहते हो?"

    "लानत है मिस्टर बांड कि तुम अभी तक मेरा मतलब नहीं समझ सके ।” अलफांसे ने कहामैं तुमसे सौदा करना चाहता हूं | वैसे मैं तुम पर इस सौदे के बारे में दबाव नहीं डालूंगा, क्योंकि और भी ऐसे जासूस हैं जो अंतरराष्ट्रीय सीक्रेट सर्विस के जासूस बनना चाहते हैं । तुम अगर चाहो तो वह फिल्म मैं एक करोड़ में तुम्हें दे सकता हूं । अगर सौदा मंजूर है तो हां कहो, नहीं तो ना I”
    || प्रयास करने से ही सफलता मिलती है ||

  8. #18
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    एक पल के लिए बांड सोच में पड़ गया । बोलालेकिन यहां विदेश में मैं एक करोड़ लाऊंगा कहां से?”

    "मेरे ख्याल से तुम्हारी इस समस्या को मास्को में स्थित इंग्लैंड का दूतावास हल कर सकता है ।"

    एक बार पुन: जेम्स बांड सोच में पड़ गया । फिर अलफांसे की आंखों में झांकता हुआ बोलालेकिन तुम यह सौदा मुझसे क्यों करना चाहते हो?”

    ये तो अपने-अपने प्यार की बात है I"

    मुझे तुम्हारा ये सौदा मंजूर है I” जेम्स बांड की गर्ज थी इसलिए बोला "बोलो, सौदा किस प्रकार होगा?"

    कल रात को ग्यारह बजे प्रेत खंड़हर में पहुंच जाना I” अलफांसे ने कहा "डालर देना, फिल्म लेना I”


    *****

    विकास के हाथ में दबे हुए चाकू का फ़ल एक पल के लिए हवा में चमका और "खचाकसे उस इंसान की गर्दन में धंस गया । एक क्षण पूर्व भी उस इंसान को पता नहीं लग सका था कि उस पर हमला होने वाला है ।
    यह हमला उसके पीछे से हुआ था और इससे पूर्व कि उसके कंठ से कोई चीख निकलती, विकास का शिकंजे जैसा हाथ ढक्कन बनकर उस इंसान के मुंह पर चिपक गया | चीख उसके मुंह और कंठ में इस प्रकार घुटकर रह गई मानो उसका मुंह साउंड़ प्रूफ़ हो | विकास ने गर्दन में धंसा चाकू बाहर खींचा और पुन: कमर में ठूंस दिया । इस प्रकार विकास ने लगातार तीन वार किए ।

    विकास के फौलादी बंधनों में छटपटाकर वह इंसान ढीला पड़ गया ।

    कदाचित वह ईश्वरपुरी के लिए रवाना हो चुका था ।

    एक क्षण भी विकास ने व्यर्थ नहीं गंवाया । उसे रेत पर खदेड़ता हुआ वह एक तरफ़ को बढ़ गया ।
    || प्रयास करने से ही सफलता मिलती है ||

  9. #19
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    इस समय उसके दूर दूर तक ब्लेड की धार जैसा पैना सन्नाटा और काजल की भांति अंधेरा था । इस समय वह समुद्र तट पर था । समुद्र की लहरे भी मानो चंद्रमा के अभाव में मातम मना रही थीं । दूर-दूर तक रेत का धुला मैदान था । इस अंधेरे में इंसान अपने से तीन कदम की दूरी पर खड़े इंसान को साये के रूप में देखने से बड़ा काम नही कर सकता था ।

    चारों ओर गहरा सन्नाटा और अंधेरा था । विकास उस इंसान की लाश को घसीटता हुआ एक तरफ उगी हल्की सी झाड़ियों में ले जा रहा था ।
    जैसे ही वह झाड़ियों के करीब पहुंचा, उसी समय..

    “कमाल कर दिया मियां दिलजले I” झाड़ियों में से विजय की धीमी सी आवाज उसके कानों में पहुंची ।"

    “आगे आगे देखो गुरु कि चेला क्या करता है?” विकास तेजी के साथ उस मृत इंसान के जिस्म से कपड़े उताऱता हुआ बोला ।

    उसी पल सागर की ओर एक टॉर्च चमकी। विजय का ध्यान उस ओर केंद्रित हो गया । टॉर्च लगातार तीन बार चमककर बुझी । ये किया विजय के पास ही बैठे धनुषटंकार ने भी देखीं ।

    यह देखते ही वह तेजी के साथ रेत पर भागता हुआ सागर की ओर बढा और जेब से टॉर्च निकालकर सांकेतिक रूप में उसे तीन बार जलाया-बुझाया ।

    उधर विकास तेजी से अपने जिस्म पर मृत व्यक्ति के कपड़े फिट करने का प्रयास कर रहा था ।

    "ये साला बंदर भी अपना काम बखूबी करता है ।"

    "उसके सामने बंदर मत कह देना गुरु वर्ना आपका बंदर बना देगा ।” विकास पूरी तरह तैयार होकर बोला ।

    "मोटर बोट करीब आती जा रही है प्यारे दिलजले ! हम चलते हैं ।” विजय ने कहा और फिर उसने विकास के किसी जवाब की चिंता नहीं की बल्कि तेजी के साथ वह सागर की ओर बढा । अब वहां के शांत वातावरण में बोट की हल्की-सी गड़गड़ाहट हस्तक्षेप कर रही थी । विजय रूका नहीं बल्कि तेजी के साथ सागर के पानी में उतरता चला गया | अगले ही पल वह पानी में तैरता हुआ अनुमान के आधार पर उस तरफ बढ रहा था जिधर से मोटर बोट की आवाज आ रही थी ।
    || प्रयास करने से ही सफलता मिलती है ||

  10. #20
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    इधर धनुषटंकार दोनों पैरों पर दौड़ता हुआ पुन: झाड़ियों में आ गया ।

    "धनुषटंकार ।” विकास ने धीरे-से कहा I

    धनुषटंकार ने दांत किटकिटाकर अपनी उपस्थिति की सूचना दी ।

    "टॉर्च लाओ ।” विकास ने कहा और धनुषटंकार ने उसे टॉर्च थमा दी ।

    विकास तेजी से उस तरफ़ बढ़ गया जिधर वो इंसान खड़ा था जिसे विकास ने चाकू से परलोक का टिकट थमाया था I इधर धनुषटंकार आराम से उस नग्न लाश की छाती पर बैठ गया और अपनी जेब से पव्वा निकालकर होंठों से सटा लिया ।

    टुम्बकटू की असली फिल्म विकास ने प्राप्त कर ही ली थी । इधर उसने फिलहाल अन्य जासूसों को भी कुछ देर के लिए अपने मार्ग से हटा दिया था । अब तो उसे फिल्म के आधार पर आगे बढ़ना था । फिल्म की पांच रीलों में से एक रील टुम्बकटू के रहस्यों तक पहुंचने के लिए नक्शे की रील थी ।

    उस नक्शे का विजय, विकास और धनुषटंकार ने भली-भांति अध्ययन किया था । अभी तक विजय, विकास के मध्य कोई विशेष बात नही हो पाई थी ।

    अलफांसे से सौदा होने के बाद से ही वे फिल्म के आधार पर आगे बढने के बारे में सोचने लगे थे । फिल्म के अनुसार उन्हें समुद्री मार्ग से बढना था । इसके लिए उनके पास कोई साधन नहीं था । तब विजय ने आइडिया दिया कि आज की रात वे समुद्र के किनारे चले, सम्भव है किसी समुद्री वाहन पर वे कब्जा करने में सफल हो जाएं ।

    इसी विचार को लेकर रात के आठ बजे से ही उन्होंने ड़ेरा जमा दिया था । उस समय रात के ग्यारह बजे थे ज़ब एक इंसान खुद को छुपाने का-सा प्रयास करता हुआ सागर के किनारे पर आया |

    विजय, विकास और धनुषटंकार उसकी एक-एक हरकत को बड़े ध्यान से नोट कर रहे थे । कुछ देऱ पश्चात उस इंसान ने ट्रांसमिटर पर किसी से बात की | इन बातों को सुनकर तीनों समझ गए कि निश्चित रूप से ये इंसान स्मगलर है और किसी बड़े गैंग से ताल्लुक रखता है । मोटर बोट से उनका माल आ रहा है और इसी माल को लेने वह यहां आया है ।

    बस फिर क्या था?
    || प्रयास करने से ही सफलता मिलती है ||

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