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Thread: चीते का दुश्मन (वेद प्रकाश शर्मा द्वारा रचित)

  1. #1
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    Post चीते का दुश्मन (वेद प्रकाश शर्मा द्वारा रचित)

    इस सूत्र में प्रस्तुत है, दिवंगत प्रसिद्ध लेखक वेद प्रकाश शर्मा का थ्रिलर उपन्यास (विजय विकास श्रृंखला)

    "
    चीते का दुश्मन"

    इसका श्रेय इंटरनेट पर ये उपन्यास अपलोड करने वाले वास्तविक महोदय को जाता है |
    || प्रयास करने से ही सफलता मिलती है ||

  2. #2
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    Post उपन्यास कवर (पुराना)

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    || प्रयास करने से ही सफलता मिलती है ||

  3. #3
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    उपन्यास कवर (नया)

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    || प्रयास करने से ही सफलता मिलती है ||

  4. #4
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    "बेटा लूमड़ मियां !विजय अलफांसे को एक क्षण घूरने के बाद बाईं आंख दबाकर बोलाइसका मतलब ये हुआ कि उस फिल्म के ज़रिए तुम हर जासूस से एक-एक करोड़ रुपया ऐठोगे I”

    “बिल्कुल ठीक समझे जासूस प्यारे I” अलफांसे बड़े आराम से कुर्सी पर पसरता हुआ बोलामेरा ख्याल है कि आजकल मूंग की दाल में भीमसेनी काजल कुछ अधिक मिलाकर खाने लगे हो I"

    "मगर असली फिल्म किसे दोगे लूमड़ भाई?"

    "इसका निर्णय भला मैं कैसे कर सकता हूं?” बड़े विचित्र ढंग से मुस्कराया अलफांसे ।

    “तो प्यारे लूमड़ खान, तुम्हारे इस सम्पूर्ण व्याख्यान का रस ये है कि हम यानी विजय दी ग्रेट तुम्हारे हलक में एक करोड़ रुपया ठूंसें और इस पर भी यह गारंटी नहीं कि फिल्म असली ही मिलेगी ।"

    "जब तक तुम मुझे एक करोड़ रुपया नही दे देते, तब तक भला मैं तुम्हें कैसे बता सकता हूं कि मेरा इरादा तुम्हें असली फिल्म देने का है अथवा नकली I"

    "बेटे तूमड़मल पकोड़ी वाले?” एकाएक विजय का लहजा सख्त हो गयालोग हमें विजय दी ग्रेट कहते हैं ।” कहते हुए विजय ने बड़े अंदाज के साथ अपनी बांहें ऊपर चढाई और उसकी ओर बढ़ता हुआ गुर्राते हुए लहजे में बोला "कसम छज्जन ताई की, तुम्हें फूटी कौड़ी भी नहीं देंगे और फिल्म हमारे पास होगी ! ऐसा भी हो सकता है कि तुम्हारे मुंह में फंसा ये जबड़ा भी हमारे पास हो I”

    "तुमसे पहले भी कह चुका हूं जासूस प्यारे कि मुझे मालूम है तुम इतने मूर्ख नहीं हो I” बिना विचलित हुए अलफांसे मुस्कराते हुए बोलातुम खुद यहां चंगेज खां के मेकअप में आए हो I"

    "ये रहस्य केवल तुम जानते हो लूमड़ भाई I” विजय मूर्खों की भांति बोलाऔर तुम्हें इतना मौका नहीं देगे कि तुम किसी और को यह बता सको I”

    “अलफांसे रास्ते में आए रोड़ों को ठोकर मारकर हटा देता है I”
    || प्रयास करने से ही सफलता मिलती है ||

  5. #5
    कांस्य सदस्य asr335704's Avatar
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    लेकिन हम रोड़े नही, भारी पत्थर हैं लूमड़ भाई I” कहते हुए विजय ने बड़ी तेजी के साथ अलफांसे पर जम्प लगा दी । लेकिन अलफांसे विजय के तेवर देखकर ही समझ गया था कि वह किस मूड़ में है? विजय से अधिक शक्ति का प्रदर्शन करके उसने कुर्सी सहित खुद को गिरा लिया था । उसके बाद अलफांसे ने बड़ी तेजी से उठने की कोशिश की । किंतु उसका पैर कुर्सी में उलझ गया, इस कारण उसे उठने में कुछ विलम्ब हुआ और इसका लाभ उठाते हुए विजय ने ठोकर उसके चेहरे पर रसीद कर दी ।

    अलफांसे उछलकर दूर जा गिरा ।

    लेकिन बिजली की-सी गति से वह पलटा और इस बार उसके हाथ में रिवॉल्वर था ।

    अलफांसे के हाथ में रिवॉल्वर देखते ही विजय सकपका गया । एक पल तक मूखों की भांति पलकें झपकाता हुआ विजय उसे घूरता रहा, फिर भटियारिन की भांति हाथ नचाकर बोलाहाय लूमड़ मियां, क्या दम ही निकालोगे?"

    अलफांसे मुस्कराकर बोलाये मत समझना बेटे कि तुम संग आर्ट के जरिए इस रिवॉल्वर की गोली से बच जाओगे ! ये साधारण रिवॉल्वर नहीं है । संग आर्ट द्धारा केवल रिवॉल्वर की नाल देखकर ये अनुमान लगाया जाता है कि गोली जिस्म के कौन-से भाग से टकराएगी | लेकिन परेशानी ये है कि इस रिवॉल्वर की नाल दिखावटी है । गोली नाल में से नहीं, कहीं और से निकलेगी । तुम अनुमान नहीं लगा सकते कि गोली तुम्हारे कौन से अंग में लगेगी । अत: संग आर्ट फेल ।"

    विजय ने बड़ी अदा के साथ आंख मारते हुए कहायानी कि लूमड़ खान, ये साला स्पेशल रिवॉल्वर तुम्हारे घर में बनने लगा है I”

    "विजय बेटे!” अलफांसे उसी प्रकार मुस्कराता हुआ बोलातुमने मुझसे टकराकर अपना ही नुकसान किया है । अगर यू.एन.ओ. को मालूम हो गया कि चंगेज खां तुम्हारी कैद में है और शुरू से तुम ही चंगेज खां बने हुए हो तो विश्व में भारत की कितनी बदनामी होगी और दुम्बकटू वाली फिल्म तो अब तुम्हें मिलने का सवाल ही पैदा नहीं होता । अब देखते जाओ मैं क्या-क्या गुल खिलाता हूं ।"

    "अमां यार लूमड़ प्यारे!
    || प्रयास करने से ही सफलता मिलती है ||

  6. #6
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    विजय अभी कुछ कहने ही जा रहा था कि..

    अचानक हवा में सनसनाता एक तीर अलफांसे की कलाई में धंस गया । रिवॉल्वर अलफांसे के हाथ से छूटकर फर्श पर गिर गया । वक्त की नजाकत को पहचानकर अलफांसे ने अपने हाथ के दर्द को भुलाकर फर्श पर पड़े रिवॉल्वर पर जम्प लगाई परंतु एक जबर्दस्त ठोकर उसके चेहरे से टकराई ।

    हल्की-सी एक चीख के साथ अलफांसे दूसरी ओर उलट गया ।

    "प्रणाम गुरू !कमरे में विकास की आवाज गूंजी ।

    पलटकर अलफांसे ने देखा, सामने विकास खड़ा था। उसका पैर फर्श पर पड़े रिवॉल्वर पर था । दोनों हाथ कूल्हों पर और गुलाबी होंठों पर मधुर मुस्कान ।

    "वो मारा पापड़ वाले को I” अपने स्थान से विजय चीखाप्यारे दिलजले, आज तुमने सिद्ध कर दिया कि तुम अलादीन के वंशज हो I”

    "बोलो मत गुरु!” विकास ने अलफांसे पर नजर जमाते हुए कहा “इस समय जरा क्राइमर गुरु से बातें हो रही हैं | क्यों अलफांसे गुरु, क्या ख्याल है?”

    "खयाल तो बड़े नेक हैं I” अलफांसे अपने स्थान से उठता हुआ बोला “जमाना ये है कि जिस गुरु ने चेले के हाथ पैर कुरते-पजामे से बाहर निकाले, वे हाथ गुरु पर ही उठते हैं I"

    “सवाल हाथ उठाने का नहीं है गुरु! सवाल है सिद्धांत का ।अपने पैर के नीचे दबा हुआ रिवॉल्वर उठाता हुआ विकास बोला “ये मुकाबला चल रहा है जासूसों का । इसमें आप क्यों दाल-भात में मूसलचंद की भांति टपक रहे हैं । टुम्बकटू को गिरफ्तार करके खिचड़ी हमने पकाई है और सारी की सारी आप सूत जाना चाहते हैं I”

    "तो उन जासूसों में विजय का भी नाम है?” अलफांसे व्यंग्यात्मक स्वर में बोलाअगर अंतरराष्ट्रीय सीक्रेट सर्विस के जासूसों को पता लग जाए कि चंगेज खां विजय है तो भारत की शान में चार चांद लग जाएं ।"

    "आप विजय गुरु को ब्लैकमेल कर सकते हैं गुरु, लेकिन याद रखिए मेरा नाम विकास है ।” रिवॉल्वर का रुख वह अलफांसे की ओर करके बोलाआप जानते है कि मेरा सिद्धांत विजय गुरु से एकदम अलग है । व्यर्थ की बातें मैं नहीं सोचा करता । अपनी किस हरकत से भारत की शान पर क्या फ़र्क पड़ेगा, यह सोचने का काम विजय गुरु का है । आपका चेला हूं गुरु! आपको मालूम है कि विकास सोचता नहीं है । जो काम करना होता है, करता है । ये भी आप जानते हो गुरु कि जो भी आंख भारत की ओर तिरछी नजर से देखती है, उस आंख को विकास फोड़ देता है । अगर आपने कोई भी ऐसा काम किया गुरु जो हिंदुस्तान के लिए हानिकारक हुआ तो कान खोलकर सुन लें - आपने मुझे सिखाया है कि दुश्मन दुश्मन होता है, उसे हमेशा के लिए खत्म कर देना ही अच्छा होता है ।”
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  7. #7
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    "मतलब ये हुआ प्यारे विकास कि तुम मुझे धमकी दे रहे हो?"

    "धमकी नही गुरु, चेतावनी दे रहा हूं I” विकास रिवॉल्वर उंगलियों में घुमाता हुआ बोलाअगर आपने कोई भी गलत कदम उठाया तो समझ लीजिएगा विकास का सबसे बड़ा दुश्मन अलफांसे होगा ।”

    "और तुम ये समझते हो कि अलफांसे तुम्हारी दुश्मनी से ड़रता है I”

    "इसका तो सवाल ही नहीं उठता गुरु, लेकिन ये जरूर कहूंगा कि ये दुश्मनी आपको महंगी पड़ सकती है । अच्छा है, व्यर्थ ही आप हमारे रास्ते में आकर दुश्मनी न करें ।"

    "मैं कब रास्ते में आ रहा हूं I”

    "अगर वास्तव में रास्ते में नहीं आ रहे हो गुरु तो वह फिल्म हमें सौंप दो ।” विकास ने कहा ।

    “मैंने उस फिल्म की कीमत केवल एक करोड़ घोषित की है, बेटे!” अलफांसे चिरपरिचित मुस्कान के साथ बोलाएक करोड़ कैश मेरे हाथ पर रखो और फिल्म ले लो । रास्ता साफ़ है, सबसे बड़े जासूस तुम्ही कहलाओगे I”

    "वैसे तो सोचने की बात ये भी है गुरु कि यहां मास्को में मैं तुम्हें रुपए दे कहां से सकता हूं, लेकिन अगर किसी तरह दे भी दूं तो इसकी क्या गारंटी है कि तुम मुझे असली फिल्म ही दोगे? विकास अलफांसे की आंखों में झांकता हुआ बोला ।

    "ये तो तभी पता चलेगा जब माल मेरे हाथ पर रखोगे I” अलफांसे ने बिना विचलित हुए कहा ।

    "प्यारे धनुषटंकार !” विकास ने कमरे के रोशनदान की और देखते हुए कहा ।

    रोशनदान पर बैठे धनुषटंकार ने विकास का संकेत पाते ही सीधी जम्प अलफांसे के कदमों में लगाई, उसके बाद विजय के चरण स्पर्श किए और उसी के कंधे पर बैठकर जेब से सिगार निकालकर सुलगाने लगा । उसकी हरकतें देखकर तीनों अलग-अलग ढंग से मुस्कराए पर बोला कोई कुछ नहीं ।

    सिगार सुलगाकर धनुषटंकार ने लापरवाही का प्रदर्शन करके एक कश लिया और धुएं का एक छल्ला हवा में उछाल दिया । उसके बाद उसने जेब से एक छोटी सी ड़िबिया निकाल कर विकास की ओर उछाल दी ।
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  8. #8
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    विकास ने ड़िबिया को लपक लिया और उंगलियों में घुमाता हुआ बोला "इसे देख रहे हो गुरु ! ये वो चीज है जिसकी कीमत आप एक करोड़ मांग रहे हैं I"

    मन-ही-मन अलफांसे चौंक पड़ा । किन्तु प्रत्यक्ष में उसने चेहरे के भावों से कुछ प्रकट नहीं किया, बोलाहम तुम्हारे गुरु हैं, बेटे! गच्चा मत देना ।"

    "गच्चा नहीं दे रहा हूं गुरु, बल्कि तुम्हें समझा रहा हूं ! मैं आपका पक्का चेला हूं I” विकास ने कहाआप इस फिल्म को अपनी पानी वाली टंकी में डालकर सुरक्षित समझ रहे थे | किंतु इसका क्या किया जाए कि आपका शिष्य यह जानता है कि होटल के कमरे में किसी महत्त्वपूर्ण वस्तु को छुपाने का कौन-सा स्थान अधिक उचित होता है?” विकास बोलता ही चला गया "आपका ये नाचीज चेला इसे ले आया है I”

    "इसका मतलब ये हुआ बेटे कि तुम ये फिल्म मुफ्त में ही मार लाए?” अलफांसे ने मुस्कराते हुए कहा ।

    “और अब मैं आपसे एक सौदा करना चाहता हूं गुरु?”

    "गुरु से सौदा?"

    “दुनिया ने ऐसी कोई पाबंदी नहीं बनाई है कि गुरु से सौदा न हो सके I” विकास ने कहावेसे आपसे सौदा करने में विकास इतना खयाल जरूर रखेगा कि गुरु को भी लाभ हो । इजाजत हो तो फरमाऊं?"

    बको!

    "आप ये जानते हैं कि चांग ली के रूप में विजय गुरू है ?” विकास ने बोलना शुरू कियाये तो निश्चित रूप से मानना होगा कि अगर ये रहस्य अन्य जासूसों के सामने खोल दिया जाए तो अंतरराष्ट्रीय जगत में अर्थात् विश्व राजनीति में भारत के सम्मान को धक्का लगेगा, मगर इससे लाभ तुम्हें भी कुछ नहीं होगा, अलबत्ता इस रहस्य को गुप्त रखने में आपको काफी लाभ हो सकता है ।"

    “वो लाभ भी बता दो I”
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  9. #9
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    “अगर आपने यह रहस्य खोला तो मैं भी यह रहस्य स्पष्ट कर दूगा कि टुम्बकटू की जांघ से निकली वास्तविक फिल्म मेरे पास है । इस प्रकार तुम्हारे हाथ कुछ नहीं लगेगा, बल्कि इसका उल्टा हुआ तो आप अन्य देशों के जासूसों से दौलत ऐंठ सकते हैं । तुम्हारा उद्देश्य भी दौलत कमाना है ! आप भरपूर दौलत कमा सकते हैं । इधर मैं अपने काम में लग सकता हूं । न तो मैं आपके बीच में टांग अड़ाऊंगा और न ही आप हमारे बीच में आएं?"

    सुनते ही बड़ी गहरी मुस्कान अलफांसे के होंठों पर उभरी । वह बोलाबेटे, विकास मान गए कि तुम असली चेले हो ! ये तो ठीक है कि इस सौदे में तुमने मेरा भी लाभ सोचा है ! मगर अपने दो मतलब एक साथ हल कर गए - पहला ये कि विजय का रहस्य गुप्त रखकर हिंदुस्तान को विश्व राजनीति में बदनाम होने से बचा लिया । दूसरा ये कि अपना रास्ता साफ़ कर लिया I”

    "क्या मतलब?

    "माना विकास कि आज तुम दुनिया में काफी नाम कमा चुके हो परंतु ये मत भूलो कि हम तुम्हारे गुरु हैं । तुमने ये सोचा है कि इधर सौदे में मैं अपना लाभ देखकर जासूसों को फिल्म के चक्कर में उलझाए रखूंगा । उधर तुम आराम से इस फिल्म के रहस्यों तक पहुंच जाओगे । ये जासूस तुम्हारे मार्ग में बाधा उत्पन्न कर सकते थे, लेकिन तुम उन्हें मेरे चक्कर में उलझाकर अपना रास्ता एकदम साफ कर लेना चाहते हो, लेकिन कोई बात नहीं ! गुरु तो हमेशा चेले का भला चाहता है । विजय की तरह मेरी भी दिली ख्वाहिश यही है कि दुनियाभर के जासूसों में सबसे बड़ा जासूस तुम कहलाओ । अंतरराष्ट्रीय सीक्रेट सर्विस के चीफ तुम बनो । जब मैं तुम्हें तुम्हारी दसवीं वर्षगांठ पर उठाकर ले गया था और तुम्हें ट्रेन्ड किया था, उसी दिन से मैंने यह चाहा था कि तुम दुनिया में सबसे बड़े जासूस बनो । विश्व का कोई भी इंसान जब सबसे बड़े जासूस का नाम लेगा तो यह जरूर कहेगा कि इस जासूस को अंतरराष्ट्रीय अपराधी अलफांसे ने बनाया था । धीरे-धीरे मेरे वह सारे सपने साकार होते जा रहे हैं विकास, जो तुम्हारे बचपन में तुम्हें लेकर मैंने बुने थे । तुम्हें मैं सबसे बड़ा जासूस देखना चाहता हूं । मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है । मैं तुम्हारा ये सौदा तुम्हारी तरक्की के लिए मंजूर करता हूं I"

    “वो मारा पापड़ वाले को ।” सुनते ही विजय उछल पड़ालूमड़ मियां ! अब कही है तुमने पते की बात ! कसम दोनों के चेले विकास की । इस मौके पर एक खौफ़नाक झकझकी याद आ रही है । हम दोनों का बनाया हुआ ये सात फुट लम्बा पुतला विश्व में चर्चा का विषय बने, यही तो हमारे सपने हैं । इसलिए तो भारत की तरफ़ से हमने इसे अंतरराष्ट्रीय सीक्रेट सर्विस में भेजा था I”
    || प्रयास करने से ही सफलता मिलती है ||

  10. #10
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    "झकझकी सुनाकर तुम अपने चेले को ही बोर करो ।” अलफांसे बोलामैं चला ।" कहता हुआ अलफांसे दरवाजे की ओर बढ गया । उसे रोकने की कोशिश किसी ने भी नहीं की । अलबत्ता विजय विकास की बुद्धि की मन-ही-मन दाद जरूर दे रहा था ।

    विकास अपने हाथ में उस फिल्म को घुमा रहा था ।

    **********

    "बस, मुझे यही उतार दो ।” मास्को की चुंगी आते ही उस व्यक्ति ने ट्रक ड्राइवर से कहा । ट्रक ड्राइवर ने चुंगी पर ही ट्रक रोक दिया। उस इंसान ने ट्रक ड्राइवर को धन्यवाद दिया । धन्यवाद को संभालकर ड्राइवर ने अपनी जेब में रख लिया और ट्रक आगे बढा दिया ।

    कुछ देर तक वह इंसान सड़क पर जाते हुए उस ट्रक को देखता रहा और फिर उसने उधर से इस प्रकार दृष्टि हटाई जैसे उसे अब ट्रक में कोई दिलचस्पी न हो । उसके चेहरे पर अभी तक चिंता की रेखाएं अपना प्रभुत्व जमाए हुए थीं । कदाचित वह यह सोच रहा था कि अब उसे क्या करना है |

    उसने इधर-उधर दृष्टि घुमाई और पाया कि चुंगी के इर्द-गिर्द सन्नाटा ही था । रात के दस बज चुके थे । कुछ देर वह अपने स्थान पर खड़ा यूं ही सोचता रहा । और तभी शहर की ओर से आती हुई एक खाली टैक्सी चमकी । टैक्सी चुंगी पर रुकी और उससे भी एक सवारी उतरी ।

    वस इंसान आगे बढकर टैक्सी वाले से वोलाशहर चलोगे?”

    "जी हां!टैक्सी वाले ने उत्तर दिया ।

    पता बताकर कैद से भागा हुआ वह इंसान टैक्सी में बैठा और टैक्सी फर्राटे भरती हुई मास्को शहर की तरफ बढ गई । टैक्सी तेजी से दौड़ रही थी किन्तु उससे भी अधिक तेज उसका मस्तिष्क सोच रहा था ।

    उसे कैद में पड़े हुए दस दिन गुजर गए । वह किसकी कैद में था? उसे कैद करके किसी ने क्या लाभ उठाया होगा? अंतरराष्ट्रीय सीक्रेट सर्विस की मीटिंग भी हो गयी होगी । उसे मीटिंग में न पाकर सबने क्या सोचा होगा? मीटिंग में उसकी अनुपस्थिति का उसके देश पर क्या प्रभाव पड़ा होगा? उसे तो यह भी पता नहीं लगा कि वह किसकी कैद में था ।
    || प्रयास करने से ही सफलता मिलती है ||

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