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Thread: शिरडी साई बाबा और ख्वाजा ग़रीब नवाज़-अजमेर के चमत्कारों का राज़

  1. #1
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    Cool शिरडी साई बाबा और ख्वाजा ग़रीब नवाज़-अजमेर के चमत्कारों का राज़

    शिरडी साई बाबा और ख्वाजा ग़रीब नवाज़-अजमेर के चमत्कारों के बारे में आपने बहुत सुना होगा। इनके बारे में कहा जाता है कि इनके दरबार से कोई खाली हाथ वापस नहीं आता।

  2. #2
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    शिरडी साई बाबा

  3. #3
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    दरगाह अजमेर शरीफ़

  4. #4
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  5. #5
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    Cool

    शिरडी साई बाबा और ख्वाजा ग़रीब नवाज़-अजमेर के बारे में विशेष बात यह है कि इनके ऊपर लगभग सभी धर्मों के लोग अपनी आस्था रखते हैं। इनके चमत्कारों का राज़ जानने से पहले आइए जानते हैं इनके बारे में विस्तार से। सबसे पहले ख्वाजा ग़रीब नवाज़-अजमेर के बारे में जानते हैं-

    दरगाह अजमेर शरीफ़ : हिन्दुस्तानी दिलों पर राज करतीं ख्वाजा ग़रीब नवाज़ की दरगाह

    -मुजफ्फर अली

    आज से कोई 800 साल पहले एक दरवेश सैकड़ों मील का कठिन सफर तय करता हुआ अल्लाह का पैगाम लिए जब ईरान से हिन्दुस्तान के अजमेर पहुंचा तो जो भी उसके पास आया उसी का होकर रह गया। उसके दर पर दीन-ओ-धर्म, अमीर-गरीब, बड़े-छोटे किसी भी तरह का भेदभाव नहीं था। सब पर उसके रहम-ओ-करम का नूर बराबरी से बरसा। तब से लेकर आज तक 8 सदी से ज्यादा वक्त बीत गया लेकिन राजा हो रंक, हिन्दू हो या मुसलमान, जिसने भी उसकी चौखट चूमी वह खाली नहीं गया।

  6. #6
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    ख्वाजा साहब या फिर गरीब नवाज के नाम से लोगों के दिलों में बसने वाले महान सूफी संत मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह का बुलंद दरवाजा इस बात का गवाह है कि मुहम्मद-बिन-तुगलक, अल्लाउद्दीन खिलजी और मुगल अकबर से लेकर बड़े से बड़ा हुक्मरान यहां पर पूरे अदब के साथ सिर झुकाए ही आया। यह दरवाजा इस बात का भी गवाह है कि ख्वाजा साहब सर्वधर्म सद्भाव की दुनिया में एक ऐसी मिसाल हैं जिसका कोई सानी नहीं है।

  7. #7
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    महान सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की अजमेर स्थित दरगाह सिर्फ इस्लामी प्रचार का केंद्र नहीं बनी, बल्कि यहां से हर मजहब के लोगों को आपसी प्रेम का संदेश मिला है। इसकी मिसाल ख्वाजा के पवित्र आस्ताने में राजा मानसिंह का लगाया चांदी का कटहरा है, वहीं ब्रिटिश महारानी मेरी क्वीन का अकीदत के रूप में बनवाया गया वजू का हौज है। तभी तो प्रख्यात अंग्रेज लेखक कर्नल टाड अपनी पुस्तक में लिखते हैं कि 'मैंने हिन्दुस्तान में एक कब्र को राज करते देखा है।'

  8. #8
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    देश की स्वतंत्रता के बाद पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने भी ख्वाजा के दरबार में मत्था टेका है। पं. नेहरू ने ही ख्वाजा साहब के एक खादिम परिवार को अकीदत से 'महाराज' नाम दिया था। इसी परिवार के महाराज यूनुस बताते हैं कि पं. नेहरू ने ख्वाजा की दरगाह परिसर में महफिलखाने की सीढ़ियों पर चढ़कर दरगाह में उपस्थित जायरीनों को संबोधित किया था, जो कि ऐतिहासिक था। महान कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर, सरोजिनी नायडू, पंडित मदनमोहन मालवीय से लेकर जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी और इंदिरा गांधी जैसी विख्यात हस्तियों ने ख्वाजा के संदेश को समझा, जाना और अपनी अकीदत के फूल अजमेर आकर पेश किए।

  9. #9
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    आज भी इन तमाम हस्तियों के हस्तलिखित नजराने खादिमों की संस्था अंजुमन सैयद जादगान के रिकॉर्ड में सुरक्षित हैं। दरगाह में अब पहले से ज्यादा हिन्दू परिवार बिना किसी खौफ के रोजाना आ रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन 20 से 22 हजार जायरीन अजमेर आते हैं जिसमें से गैर मुस्लिमों की संख्या 60 प्रतिशत से ज्यादा होती है यानी ख्वाजा के दर पर माथा टेकने वालों में मुसलमानों से ज्यादा हिन्दू होते हैं। यह इंसानियत का गहवारा है। यह एक दिन में नहीं बना। इसके पीछे ख्वाज गरीब नवाज की इबादत, मेहनत और कर्म का लंबा अनुभव है।

  10. #10
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    सूफीवाद चलाकर ख्वाजा गरीब नवाज उर्फ ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती ने अपने सभी उत्तराधिकारियों को अपना दर सभी मजहबों के लिए खोलने और सभी के लिए दुआ करने की हिदायत दी। यही कारण है कि आज ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के उत्तराधिकारी महरौली दिल्ली स्थित ख्वाजा कुतुबुद्दीन चिश्ती की दरगाह हो या हजरत निजामुद्दीन चिश्ती की दरगाह, सभी सूफियों की दरगाह में सभी धर्मों के मानने वालों का तांता लगा रहता है।

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