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Thread: महान शायरों के चंद शेर

  1. #5851
    नवागत
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    महफ़िल में तेरी पड़े है पैमानें कई।
    लगता है मुझसे पहले भी आये है दीवाने कई।।
    लडखडा के गिरा होगा कोई सरूर में।
    जुल्फ से उतरे हैं ख़म तेरे बिस्तर के सिरहाने कई।।
    तेरी आँखो में झिलमिलाते हैं गम के चिराग ।
    मेरे भी दर्द से रिश्ते हैं पुराने कई।।
    खाके कसम,वाह ये इकरार करने की अदा।
    सुबूत है के तीर एक था और रहे है निशाने कई।।
    दिल में उगें गर वफ़ा के चाँद और सूरज।
    आतिशे जिस्म बुझाने के हैं और भी बहाने कई।।दवा से और भी बढ़ता है मर्ज-ए-हवस-ए-इश्क।
    खानाबदोश होते हैं वो,होते हैं जिनके आशियाने कई।।

  2. #5852
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    चेहरा बता रहा था 'मारा है भूख ने'
    लोग कह रहे थे 'कुछ खा के मरा है'

  3. #5853
    नवागत
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    waah kya baat hai

  4. #5854
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    *बड़ी अजीब सी बादशाही है,*
    *दोस्तों के प्यार में...
    .
    .
    .
    *ना उन्होंने कभी कैद में रखा,*
    *न हम कभी फरार हो पाए!!!*

  5. #5855
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    *तेरी मुस्कान से सुधर जाती है तबियत मेरी,*
    *बताओ ना तुम इश्क़ करते हो या इलाज़*

  6. #5856
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    मिले जब चार कंधे तो इस दिल ने कहाँ मुझसे. . .
    जीते जी मिला होता तो एक ही काफी था. . .

  7. #5857
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    रुक-रुक कर मुझसे पुछा मेरे पाँव के छालो ने,

    बस्ती कितनी दूर बसा ली दिल में बसने वालो ने

  8. #5858
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    मिलावट है तेरे इश्क में इत्र और शराब की !
    कभी हम महक जाते हैं कभी हम बहक जाते हैं ...

  9. #5859
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    *इस दौर के लोगो में वफ़ा ढूंढ रहे हो,,,!!*

    *बडे नदान हो ""साहिब""*

    *ज़हर की शीशी मे दवा ढूंढ रहे हो,,,,!!!*

  10. #5860
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    *ख़ुशी तक़दीर में होनी चाहिए*

    *तस्वीरों में तो हर कोई खुश नजर आता है ।*

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