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Thread: महान शायरों के चंद शेर

  1. #5851
    नवागत
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    Feb 2016
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    महफ़िल में तेरी पड़े है पैमानें कई।
    लगता है मुझसे पहले भी आये है दीवाने कई।।
    लडखडा के गिरा होगा कोई सरूर में।
    जुल्फ से उतरे हैं ख़म तेरे बिस्तर के सिरहाने कई।।
    तेरी आँखो में झिलमिलाते हैं गम के चिराग ।
    मेरे भी दर्द से रिश्ते हैं पुराने कई।।
    खाके कसम,वाह ये इकरार करने की अदा।
    सुबूत है के तीर एक था और रहे है निशाने कई।।
    दिल में उगें गर वफ़ा के चाँद और सूरज।
    आतिशे जिस्म बुझाने के हैं और भी बहाने कई।।दवा से और भी बढ़ता है मर्ज-ए-हवस-ए-इश्क।
    खानाबदोश होते हैं वो,होते हैं जिनके आशियाने कई।।

  2. #5852
    नवागत VinodRebdiya's Avatar
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    Nov 2016
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    Kishangarh Renwal
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    चेहरा बता रहा था 'मारा है भूख ने'
    लोग कह रहे थे 'कुछ खा के मरा है'

  3. #5853
    नवागत
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    Feb 2017
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    waah kya baat hai

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