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Thread: यन्त्र-मन्त्र-तन्त्र

  1. #21
    कर्मठ सदस्य jaileo's Avatar
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    Re: यन्त्र-मन्त्र-तन्त्र

    सचमुच अच्छी जानकारी किन्तु आज के समाज इसे दकियानूसी और ढकोसला कहा जाता है फिर भी लोगों की आस्था में कोई कमी नहीं आयी है /
    सूत्र रचयिता से अपेक्षा है कि इस सूत्र की पहली प्रविष्टि में यदि इस बात का उल्लेख अवश्य कर दें कि " कोई भी सदस्य किसी भी प्रकार की तांत्रिक अथवा मान्त्रिक साधना से पूर्व उसकी समुचित जानकारी प्राप्त करले और किसी कुशल साधक की देख रेख में साधना करे अन्यथा विपरीत प्रभाव भी पड़ सकते हैं " तो उचित होगा /
    धन्यवाद /
    जय /

  2. #22
    हास्य साम्राज्ञी Neelima's Avatar
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    Re: यन्त्र-मन्त्र-तन्त्र

    Quote Originally Posted by jaileo View Post
    सचमुच अच्छी जानकारी किन्तु आज के समाज इसे दकियानूसी और ढकोसला कहा जाता है फिर भी लोगों की आस्था में कोई कमी नहीं आयी है /
    सूत्र रचयिता से अपेक्षा है कि इस सूत्र की पहली प्रविष्टि में यदि इस बात का उल्लेख अवश्य कर दें कि " कोई भी सदस्य किसी भी प्रकार की तांत्रिक अथवा मान्त्रिक साधना से पूर्व उसकी समुचित जानकारी प्राप्त करले और किसी कुशल साधक की देख रेख में साधना करे अन्यथा विपरीत प्रभाव भी पड़ सकते हैं " तो उचित होगा /
    धन्यवाद /
    जय /
    jaileo नियामक जी,
    निश्चय ही आपकी हिदायत / सुझाव लोकोपकारी है । प्रथम प्रविष्टी अब मेरे द्वारा परिवर्तनीय नहीं रह गई है । अतः कृपया आप ही इसको सुधारने का कष्ट करें ।

  3. #23
    हास्य साम्राज्ञी Neelima's Avatar
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    Re: यन्त्र-मन्त्र-तन्त्र

    श्री भैरव मन्त्र
    "ॐ नमो भैंरुनाथ, काली का पुत्र! हाजिर होके, तुम मेरा कारज करो तुरत। कमर बिराज मस्तङ्गा लँगोट, घूँघर-माल। हाथ बिराज डमरु खप्पर त्रिशूल। मस्तक बिराज तिलक सिन्दूर। शीश बिराज जटा-जूट, गल बिराज नोद जनेऊ। ॐ नमो भैंरुनाथ, काली का पुत्र ! हाजिर होके तुम मेरा कारज करो तुरत। नित उठ करो आदेश-आदेश।"
    विधिः पञ्चोपचार से पूजन। रविवार से शुरु करके २१ दिन तक मृत्तिका की मणियों की माला से नित्य अट्ठाइस (२८) जप करे। भोग में गुड़ व तेल का शीरा तथा उड़द का दही-बड़ा चढ़ाए और पूजा-जप के बाद उसे काले श्वान को खिलाए। यह प्रयोग किसी अटके हुए कार्य में सफलता प्राप्ति हेतु है।

  4. #24
    हास्य साम्राज्ञी Neelima's Avatar
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    Re: यन्त्र-मन्त्र-तन्त्र

    ग्रह, आर्थिक, विवाह-बाधा-निवारण प्रयोग
    १॰ सिन्दूर लगे अनुमान जी की मूर्ति का सिन्दूर लेकर सीता जी के चरणों में लगाएँ। फिर माता सीता से एक श्वास में अपनी कामना निवेदित कर भक्ति-पूर्वक प्रणाम कर वापस आ जाएँ। इस प्रकार कुछ दिन करने पर सभी प्रकार की बाधाओं का निवारण होता है एवं कामना-पुर्ति होती है।

    २॰ किसी शनिवार को, यदि उस दिन 'सर्वार्थ-सिद्धि योग' हो, तो और भी उत्तम, सांय-काल अपनी लम्बाई के बराबर लाल रेशमी सूत नाप ले। फिर एक पत्ता बरगद का तोड़े। उसे स्वच्छ जल से धो-कर पोंछ ले। तब पत्ते को बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। इस प्रयोग से सभी प्रकार की बाधाएँ दूर होती है और कामनाओं की पुर्ति होती है।

    ३॰ रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र में, एक काला कौआ या काला कुत्ता पकड़े। उसके दाएँ पैर का नाखून काटें। इस नाखून को ताबीज में भर कर, धूप-दीपादि से पूजनकर, धारण करें। इससे आर्थिक बाधा दूर होती है। नौकरी, साक्षात्कार आदि में सफलता की प्राप्ति होती है। कौए या काले कुत्ते में से किसी एक का नाखून लें। दोनों का एक साथ प्रयोग न करें।

    ४॰ प्रत्येक प्रकार के संकट निवारण के लिए भगवान् गणेश की मूर्ति पर कम-से-कम २१ दिन तक थोड़ी-थोड़ी 'जावित्री, चढ़ावे और रात को सोते समय थोड़ी जावित्री खाकर सोवे। यह प्रयोग २१ दिनों तक अवश्य करे अथवा ४२, ६३ या ८४ दिनों तक करे।

  5. #25
    सदस्य SHASWAT_BHARDWAJ's Avatar
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    Re: यन्त्र-मन्त्र-तन्त्र

    दीपक तले अँधेरा
    तेरी इस कायनात मै ऐ खुदा , मेरा दिल कही लगता नही !
    जो तसल्लिया मेरे दिल को दे, ऐसा कोइ मुझको मिला नही !!

  6. #26
    हास्य साम्राज्ञी Neelima's Avatar
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    Re: यन्त्र-मन्त्र-तन्त्र

    १॰ सिद्ध मोहन मन्त्र
    क॰ "ॐ अं आं इं ईं उं ऊं हूँ फट्।"
    विधिः- ताम्बूल को उक्त मन्त्र से अभिमन्त्रित कर साध्या को खिलाने से उसे खिलानेवाले के ऊपर मोह उत्पन्न होता है।

    ख॰ "ॐ नमो भगवती पाद-पङ्कज परागेभ्यः।"
    ग॰ "ॐ भीं क्षां भीं मोहय मोहय।"
    विधिः- किसी पर्व काल में १२५ माला अथवा १२,५०० बार मन्त्र का जप कर सिद्ध कर लेना चाहिए। बाद में प्रयोग के समय किसी भी एक मन्त्र को तीन बार जप करने से आस-पास के व्यक्ति मोहित होते हैं

    २॰ श्री कामदेव का मन्त्र
    (मोहन करने का अमोघ शस्त्र)

    "ॐ नमो भगवते काम-देवाय श्रीं सर्व-जन-प्रियाय सर्व-जन-सम्मोहनाय ज्वल-ज्वल, प्रज्वल-प्रज्वल, हन-हन, वद-वद, तप-तप, सम्मोहय-सम्मोहय, सर्व-जनं मे वशं कुरु-कुरु स्वाहा।"
    विधिः- उक्त मन्त्र का २१,००० जप करने से मन्त्र सिद्ध होता है। तद्दशांश हवन-तर्पण-मार्जन-ब्रह्मभोज करे। बाद में नित्य कम-से-कम एक माला जप करे। इससे मन्त्र में चैतन्यता होगी और शुभ परिणाम मिलेंगे।
    प्रयोग हेतु फल, फूल, पान कोई भी खाने-पीने की चीज उक्त मन्त्र से अभिमन्त्रित कर साध्य को दे।
    उक्त मन्त्र द्वारा साधक का बैरी भी मोहित होता है। यदि साधक शत्रु को लक्ष्य में रखकर नित्य ७ दिनों तक ३००० बार जप करे, तो उसका मोहन अवश्य होता है।

    ३॰ दृष्टि द्वारा मोहन करने का मन्त्र
    "ॐ नमो भगवति, पुर-पुर वेशनि, सर्व-जगत-भयंकरि ह्रीं ह्रैं, ॐ रां रां रां क्लीं वालौ सः चव काम-बाण, सर्व-श्री समस्त नर-नारीणां मम वश्यं आनय आनय स्वाहा।"
    विधिः- किसी भी सिद्ध योग में उक्त मन्त्र का १०००० जप करे। बाद में साधक अपने मुहँ पर हाथ फेरते हुए उक्त मन्त्र को १५ बार जपे। इससे साधक को सभी लोग मान-सम्मान से देखेंगे।

  7. #27
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    Re: यन्त्र-मन्त्र-तन्त्र

    sir koi aisa manter baty jis se hum kisi ko ankho se samohit kar le

  8. #28
    हास्य साम्राज्ञी Neelima's Avatar
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    Re: यन्त्र-मन्त्र-तन्त्र

    प्रार्थना
    "ॐ वाङ्मे मनसि प्रतिष्ठिता, मनो मे वाचि प्रतिष्ठितमाविरा ीर्म एधि वेदस्य म आणीस्थः श्रुतं मे मा प्रहासीः। अनेनाधीतेनाहोरात रान् संदधाम्यृतं वदिष्यामि सत्यं वदिष्यामि। तन्मामवतु। तद् वक्तारमवतु। अवतु माम्। अवतु वक्तारमवतु वक्तारम्। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्ति।।"
    (ऋग्वेदीय शान्तिपाठ)
    'हे सच्चिदानन्द-स्वरुप परमात्मन्, मेरी वाणी मन में स्थित हो जाये और मन वाणी में स्थित हो जाये। हे प्रकाशस्वरुप परमेश्वर, आप मेरे लिये प्रकट हो जाइये। हे मन और वाणी, तुम दोनों मेरे लिये वेदविषयक ज्ञान की प्राप्ति कराने वाले बनो। मेरा गुरुमुख से सुना हुआ और अनुभव में आया हुआ ज्ञान मेरा त्याग न करे- मैं उसे कभी न भूलूँ। मेरी इच्छा है कि अपने अध्ययन द्वारा मैं दिन और रात एक कर दूँ। मैं वाणी से श्रेष्ठ शब्दों का उच्चारण करुँगा, सर्वथा सत्य बोलूँगा। वे परब्रह्म परमात्मा मेरी रक्षा करें। वे मुझे ब्रह्मविद्या सिखाने वाले आचार्य की रक्षा करें, आचार्य की रक्षा करें। आध्यात्मिक, आधिदैविक और आदिभौतिक- तीनों तापों की शान्ति हो ।'
    "ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यत ।।
    ॐ शान्तिः शान्तिः शान्ति ।।"
    (शुक्लयजुर्वेदीय शान्तिपाठ)
    'वह सच्चिदानन्द परब्रह्म पुरुषोत्तम सब प्रकार से सदा-सर्वदा परिपूर्ण है । यह जगत् भी उस परब्रह्म से पूर्ण ही है; क्योंकि यह पूर्ण उस पूर्ण पुरुषोत्तम से ही उत्पन्न हुआ है। इस प्रकार परब्रह्म की पूर्णता से जगत् पूर्ण होने पर भी वह परब्रह्म परिपूर्ण है। उस पूर्ण में से पूर्ण को निकाल लेने पर भी वह पूर्ण ही बच रहता है। आध्यात्मिक, आधिदैविक और आदिभौतिक- तीनों तापों की शान्ति हो।'
    संलग्न चित्र संलग्न चित्र  
    Last edited by Neelima; 27-05-2011 at 10:47 PM.

  9. #29
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    सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा
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    Re: यन्त्र-मन्त्र-तन्त्र

    प्रिय बहन नीलीमा जी बहुजन हिताय,बहुजन सुखाय उपनिषद के ईस वाक्य को आप ने सार्थक कर दिया, अन्तर्वासना ( अंतरमन में छुपी हुई अदम्य इच्छाऐ ) ने भी इतने बेहतरीन सूत्रों को शामिल कर अपने नाम को सार्थक किया, मैने ईस सूत्र के सभी प्रष्टों को पढ़ा, यह अति गुढ़ विषय हें अत: सभी विद्वान मित्रों कि टिकाएँ भी पढ़ी, कीन्ही मित्रों को कोई बात तुरंत समज में आती हें, कीन्ही मित्रों को जरा देरसे, फोरम का अर्थ होता हें एक बड़ा परिवार और परिवार के सभी सदस्य सन्मानित और आदरणीय हें अत: मेरा सभी सदस्यों से एक नम्र अनुरोध हें ही कि किसी सदस्य कि बात पसंद ना आने पर ओछे (मुर्ख,गधे) विशेषणों द्वारा सन्मानित कर अपने आप को ओछा सबित न करे, स्वस्थ तर्क अवश्य करें परंतु कुतर्क वितर्क से बचे, परिवार के एक भी सदस्य का अपमान पुरे परिवार का अपमान होता हें,अत: ऐसे कार्यों से बचे,सभी नियामकों को प्रिय बहन नीलीमा जी एवं सभी सदस्यों को साधुवाद अगर मेरी बातों से किसीको ठेस पहुचीं होतो क्षमा चाहता हु ..... +++++ *****

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    सभी मित्रों से नम्र निवेदन हें की इस सूत्र पर अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया अवश्य दे.....

  10. #30
    हास्य साम्राज्ञी Neelima's Avatar
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    Re: यन्त्र-मन्त्र-तन्त्र

    लक्ष्मी-पूजन मन्त्र
    "आवो लक्ष्मी बैठो आँगन, रोरी तिलक चढ़ाऊँ। गले में हार पहनाऊँ।। बचनों की बाँधी, आवो हमारे पास। पहला वचन श्रीराम का, दूजा वचन ब्रह्मा का, तीजा वचन महादेव का। वचन चूके, तो नर्क पड़े। सकल पञ्च में पाठ करुँ। वरदान नहीं देवे, तो महादेव शक्ति की आन।।"
    विधिः- दीपावली की रात्रि को सर्व-प्रथम षोडशोवचार से लक्ष्मी जी का पूजन करें। स्वयं न कर सके, तो किसी कर्म-काण्डी ब्राह्मण से करवा लें। इसके बाद रात्रि में ही उक्त मन्त्र की ५ माला जप करें। इससे वर्ष-समाप्ति तक धन की कमी नहीं होगी और सारा वर्ष सुख तथा उल्लास में बीतेगा।

    महा-लक्ष्मी मन्त्र
    "राम-राम क्ता करे, चीनी मेरा नाम। सर्व-नगरी बस में करुँ, मोहूँ सारा गाँव।
    राजा की बकरी करुँ, नगरी करुँ बिलाई। नीचा में ऊँचा करुँ, सिद्ध गोरखनाथ की दुहाई।।"
    विधिः- जिस दिन गुरु-पुष्य योग हो, उस दिन से प्रतिदिन एकान्त में बैठ कर कमल-गट्टे की माला से उक्त मन्त्र को १०८ बार जपें। ४० दिनों में यह मन्त्र सिद्ध हो जाता है, फिर नित्य ११ बार जप करते रहें।

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