Page 1 of 20 12311 ... LastLast
Results 1 to 10 of 194

Thread: श्रावण मैं शिव पूजा

  1. #1
    सदस्य
    Join Date
    Feb 2011
    Location
    हिमालय पे
    Age
    34
    Posts
    18,476

    श्रावण मैं शिव पूजा

    शिव अथार्त क्ल्यानकारी जो शुभ है,क्लानकारी है , वही शिव है, वही शिवता है , वही शिवत्व है।
    इसका शिक्षण देने आता है सावन का महीना ओर कांवर का ये मेला ॥
    कांवर कोई समान्य मेला नहीं है, यह कोई धार्मिक रीति रिवाज ओर कर्मकांड नहीं है, कांवर यात्रा देशवासियों मैं शिवत्व का जागरण कराने आती है ॥

  2. #2
    सदस्य
    Join Date
    Feb 2011
    Location
    हिमालय पे
    Age
    34
    Posts
    18,476

    Re: श्रावण मैं शिव पूजा

    ॐ नम: शिवाय..............
    Attached Images/संलग्न चित्र Attached Images/संलग्न चित्र  

  3. #3
    सदस्य
    Join Date
    Feb 2011
    Location
    हिमालय पे
    Age
    34
    Posts
    18,476

    Re: श्रावण मैं शिव पूजा

    चेत्र मास से प्रारम्भ होने वाला श्रावण पाचवा महिना है, जो जुलाई - अगस्त माह मैं आता है ॥
    इसे बर्षा ऋतु या पावस ऋतु भी कहते है ॥
    श्रावण मास भगवान शिव को अति पसंद है, इसलिये इस मास मैं आशुतोष भगवान शंकर की पूजा का विसेस महत्व है

  4. #4
    सदस्य
    Join Date
    Feb 2011
    Location
    हिमालय पे
    Age
    34
    Posts
    18,476

    Re: श्रावण मैं शिव पूजा

    ॐ नम: शिवाय..........
    Attached Images/संलग्न चित्र Attached Images/संलग्न चित्र  

  5. #5
    कर्मठ सदस्य aawara's Avatar
    Join Date
    Jun 2011
    Posts
    1,449

    Re: श्रावण मैं शिव पूजा

    श्रीरुद्राष्टकम्
    नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपं
    निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं। चिदाकाशमाकाशवासं भजे हं॥1॥
    निराकारमोंकारमूल तुरीयं। गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशं।
    करालं महाकाल कालं कृपालं। गुणागार संसारपारं नतो हं॥2॥
    तुषाराद्रि संकाश गौरं गम्भीरं। मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरं।
    स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गंगा। लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजंगा॥3॥
    चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं। प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालं।
    मृगाधीशचर्माम्बर मुण्डमालं। प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि॥4॥
    प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं। अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम्
    त्रय: शूल निर्मूलनं शूलपाणिं। भजे हं भवानीपतिं भावगम्यं॥5॥
    कलातीत कल्याण कल्पांतकारी। सदासज्जनानन्ददात पुरारी।
    चिदानन्द संदोह मोहापहारी। प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी॥6॥
    न यावद् उमानाथपादारविंदं भजंतीह लोके परे वा नराणां।
    न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं। प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं॥7॥
    न जानामि योगं जपं नैव पूजां।नतो हं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यं।
    जराजन्म दु:खौघतातप्यमानं। प्रभो पाहि आपन्न्मामीश शंभो॥8॥
    रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये।
    ये पठन्ति नरा भक्तया तेषां शम्भु: प्रसीदति॥


    सत्यम शिवम सुन्दरम . . . . .

    जिस कश्ती के मुक़द्दर में हो डूब जाना"फ़राज़"
    तूफानों से बच भी निकले...तो किनारे रूठ जाते हैं.....



  6. #6
    सदस्य
    Join Date
    Feb 2011
    Location
    हिमालय पे
    Age
    34
    Posts
    18,476

    Re: श्रावण मैं शिव पूजा

    Quote Originally Posted by aawara View Post
    श्रीरुद्राष्टकम्
    नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपं
    निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं। चिदाकाशमाकाशवासं भजे हं॥1॥
    निराकारमोंकारमूल तुरीयं। गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशं।
    करालं महाकाल कालं कृपालं। गुणागार संसारपारं नतो हं॥2॥
    तुषाराद्रि संकाश गौरं गम्भीरं। मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरं।
    स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गंगा। लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजंगा॥3॥
    चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं। प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालं।
    मृगाधीशचर्माम्बर मुण्डमालं। प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि॥4॥
    प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं। अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम्
    त्रय: शूल निर्मूलनं शूलपाणिं। भजे हं भवानीपतिं भावगम्यं॥5॥
    कलातीत कल्याण कल्पांतकारी। सदासज्जनानन्ददात पुरारी।
    चिदानन्द संदोह मोहापहारी। प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी॥6॥
    न यावद् उमानाथपादारविंदं भजंतीह लोके परे वा नराणां।
    न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं। प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं॥7॥
    न जानामि योगं जपं नैव पूजां।नतो हं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यं।
    जराजन्म दु:खौघतातप्यमानं। प्रभो पाहि आपन्न्मामीश शंभो॥8॥
    रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये।
    ये पठन्ति नरा भक्तया तेषां शम्भु: प्रसीदति॥


    सत्यम शिवम सुन्दरम . . . . .
    ॐ नमः शिवाय.............

  7. #7
    सदस्य
    Join Date
    Feb 2011
    Location
    हिमालय पे
    Age
    34
    Posts
    18,476

    Re: श्रावण मैं शिव पूजा

    इस संबंध मैं पोराणिक कथा है की जब सनत कुमारों ने महादेव से उन्हे सावन का महीना अति पसंद आने का कारण पूछा तो महादेव ने बताया की जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर योग सक्ति से शरीर त्याग किया था, उससे पहले देवी सती ने महादेव को हर जन्म मैं पति के रूप मैं पाने का प्रण लिया था ॥
    अपने दूसरे जन्म मैं देवी सती पार्वती के रूप मैं हिमालय की कन्या के रूप मैं जन्मी ,,॥
    उन्होने युवावस्था मैं सावन के महीने मैं निराहार रहके कठोर व्रत करके शिव जी को प्रसन्न किया , जिसके बाद शिव जी को सावन मास अधिक प्यारा हो गया

  8. #8
    कर्मठ सदस्य aawara's Avatar
    Join Date
    Jun 2011
    Posts
    1,449

    Re: श्रावण मैं शिव पूजा

    भाई कथा कि श्रृँखला मे व्यवधान के लिए छमाप्रार्थी हूँ




    श्रीरुद्राष्टकम्
    नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपं
    निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं। चिदाकाशमाकाशवासं भजे हं॥1॥
    निराकारमोंकारमूल तुरीयं। गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशं।
    करालं महाकाल कालं कृपालं। गुणागार संसारपारं नतो हं॥2॥
    तुषाराद्रि संकाश गौरं गम्भीरं। मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरं।
    स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गंगा। लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजंगा॥3॥
    चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं। प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालं।
    मृगाधीशचर्माम्बर मुण्डमालं। प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि॥4॥
    प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं। अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम्
    त्रय: शूल निर्मूलनं शूलपाणिं। भजे हं भवानीपतिं भावगम्यं॥5॥
    कलातीत कल्याण कल्पांतकारी। सदासज्जनानन्ददात पुरारी।
    चिदानन्द संदोह मोहापहारी। प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी॥6॥
    न यावद् उमानाथपादारविंदं भजंतीह लोके परे वा नराणां।
    न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं। प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं॥7॥
    न जानामि योगं जपं नैव पूजां।नतो हं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यं।
    जराजन्म दु:खौघतातप्यमानं। प्रभो पाहि आपन्न्मामीश शंभो॥8॥
    रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये।
    ये पठन्ति नरा भक्तया तेषां शम्भु: प्रसीदति॥

    जिस कश्ती के मुक़द्दर में हो डूब जाना"फ़राज़"
    तूफानों से बच भी निकले...तो किनारे रूठ जाते हैं.....



  9. #9
    सदस्य
    Join Date
    Feb 2011
    Location
    हिमालय पे
    Age
    34
    Posts
    18,476

    Re: श्रावण मैं शिव पूजा

    Quote Originally Posted by aawara View Post
    भाई कथा कि श्रृँखला मे व्यवधान के लिए छमाप्रार्थी हूँ





    श्रीरुद्राष्टकम्
    नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपं
    निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं। चिदाकाशमाकाशवासं भजे हं॥1॥
    निराकारमोंकारमूल तुरीयं। गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशं।
    करालं महाकाल कालं कृपालं। गुणागार संसारपारं नतो हं॥2॥
    तुषाराद्रि संकाश गौरं गम्भीरं। मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरं।
    स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गंगा। लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजंगा॥3॥
    चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं। प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालं।
    मृगाधीशचर्माम्बर मुण्डमालं। प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि॥4॥
    प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं। अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम्
    त्रय: शूल निर्मूलनं शूलपाणिं। भजे हं भवानीपतिं भावगम्यं॥5॥
    कलातीत कल्याण कल्पांतकारी। सदासज्जनानन्ददात पुरारी।
    चिदानन्द संदोह मोहापहारी। प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी॥6॥
    न यावद् उमानाथपादारविंदं भजंतीह लोके परे वा नराणां।
    न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं। प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं॥7॥
    न जानामि योगं जपं नैव पूजां।नतो हं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यं।
    जराजन्म दु:खौघतातप्यमानं। प्रभो पाहि आपन्न्मामीश शंभो॥8॥
    रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये।
    ये पठन्ति नरा भक्तया तेषां शम्भु: प्रसीदति॥
    भाई सहयोग के लिये आपको आभार .........

  10. #10
    सदस्य
    Join Date
    Feb 2011
    Location
    हिमालय पे
    Age
    34
    Posts
    18,476

    Re: श्रावण मैं शिव पूजा

    शिव सती के पार्थिव शरीर को अपने तिरशूल पे ले जाते हुवे
    Attached Images/संलग्न चित्र Attached Images/संलग्न चित्र  

Page 1 of 20 12311 ... LastLast

Posting Permissions

  • You may not post new threads
  • You may not post replies
  • You may not post attachments
  • You may not edit your posts
  •