Poll: क्या संस्कृत भाषा का भी हिंदी की तरह प्रचार प्रसार करना चाहिए ...?

Page 3 of 8 प्रथमप्रथम 12345 ... LastLast
Results 21 to 30 of 80

Thread: संस्कृत जाने - भारतीय विज्ञान को जाने

  1. #21
    कर्मठ सदस्य Badtameez's Avatar
    Join Date
    Sep 2011
    Location
    कस्बा निर्लज्जनगर, जिला-बदतमीज़पुर
    प्रविष्टियाँ
    4,744
    Rep Power
    50

    Re: संस्कृत भाषा - एक बुझता दिया !

    वर्तमान में संस्कृत को वो स्थान नहीं मिल पा रहा है, जोकि मिलना चाहिए।

    मैंने जानबूझकर अपना पासवर्ड भूला दिया हैं।

  2. #22
    सदस्य Manavji's Avatar
    Join Date
    May 2012
    Location
    देव भूमि
    आयु
    29
    प्रविष्टियाँ
    462
    Rep Power
    5

    Re: संस्कृत भाषा - एक बुझता दिया !

    हाँ कविवर आपने सही कहा !
    इसका एक कारन ये है के आज हम सोचते हैं की "यार क्यों पड़े इस झंझट में" हिंदी और अंग्रेजी का ज्ञान तो मुस्किल से होता है अब इसको कोण सीखेगा ! चलो पड़ी रहने दो !
    पर क्या हम ये जानते हैं के यही एकमात्र भाषा है जो सम्पूर्ण है !
    मित्र आपका सूत्र भ्रमण के लिए आभार ! अगर इस सूत्र लायक आपके ज्ञान कोष में कुछ हो तो यहाँ जरुर बताइए धन्यवाद !

    Quote Originally Posted by Badtameez View Post
    वर्तमान में संस्कृत को वो स्थान नहीं मिल पा रहा है, जोकि मिलना चाहिए।
    [Only Registered and Activated Users Can See Links. Click Here To Register...]
    :right: [Only Registered and Activated Users Can See Links. Click Here To Register...]

  3. #23
    कर्मठ सदस्य Badtameez's Avatar
    Join Date
    Sep 2011
    Location
    कस्बा निर्लज्जनगर, जिला-बदतमीज़पुर
    प्रविष्टियाँ
    4,744
    Rep Power
    50

    Re: संस्कृत भाषा - एक बुझता दिया !

    Quote Originally Posted by Manavji View Post
    हाँ कविवर आपने सही कहा !
    इसका एक कारन ये है के आज हम सोचते हैं की "यार क्यों पड़े इस झंझट में" हिंदी और अंग्रेजी का ज्ञान तो मुस्किल से होता है अब इसको कोण सीखेगा ! चलो पड़ी रहने दो !
    पर क्या हम ये जानते हैं के यही एकमात्र भाषा है जो सम्पूर्ण है !
    मित्र आपका सूत्र भ्रमण के लिए आभार ! अगर इस सूत्र लायक आपके ज्ञान कोष में कुछ हो तो यहाँ जरुर बताइए धन्यवाद !
    मैं देख रहा हूँ कि स्कूलों/कालेजों में भी संस्कृत को लेकर उत्साह नहीं है। पता नहीं क्यों लोग अंग्रेजी का दिखावा करके अपनी ही भाषा का गला घोट रहे हैं।

    मैंने जानबूझकर अपना पासवर्ड भूला दिया हैं।

  4. #24
    सदस्य Manavji's Avatar
    Join Date
    May 2012
    Location
    देव भूमि
    आयु
    29
    प्रविष्टियाँ
    462
    Rep Power
    5

    Re: संस्कृत भाषा - एक बुझता दिया !

    दोस्तों अब ये भाषा और ये सूत्र आप सबकी प्रतिक्रिया के इन्तजार में है !
    अगर आप सोचते हैं के हम इस भाषा को जान और समझ सकते हैं !
    तो यहाँ प्रतिक्रिया अवस्य दे ताकि में इस सूत्र को आगे बढा सकू और ज्यादा से ज्यादा संस्कृत का ज्ञान दे सकू !
    [Only Registered and Activated Users Can See Links. Click Here To Register...]
    :right: [Only Registered and Activated Users Can See Links. Click Here To Register...]

  5. #25
    सदस्य Manavji's Avatar
    Join Date
    May 2012
    Location
    देव भूमि
    आयु
    29
    प्रविष्टियाँ
    462
    Rep Power
    5

    Re: संस्कृत भाषा - एक बुझता दिया !

    Quote Originally Posted by Badtameez View Post
    मैं देख रहा हूँ कि स्कूलों/कालेजों में भी संस्कृत को लेकर उत्साह नहीं है। पता नहीं क्यों लोग अंग्रेजी का दिखावा करके अपनी ही भाषा का गला घोट रहे हैं।

    मित्र में आपको एक व्रतांत सुनाता हूँ जो मेने कही पढ़ा था ये याद नहीं के किस पुस्तक में था !
    एक बार एक मुनिवर थे ( सायद स्वामी विवेकानंद, मुझे पक्का याद नहीं है ) तो उनके पास एक आदमी गया और बोला हे प्रभो योग में तो बड़ी सक्ति है !
    आप मुझे भी योग सिखाइए ना उस व्यक्ति के चेहरे पर अजीब सा उत्साह था !
    तो स्वामी जी बोले क्या कोई विदेशी योग का प्रचार कर रहा है ! तो उस आदमी ने कहा हाँ स्वामी जी पर आपको कैसे पता आज एक विदेशी ने फलां मैदान में भासन देके कहा के भारतीय योग बहुत ही समर्ध है !
    हाँ ये तो हमे पता ही है ! पर जब हम कहते हैं तो आपपे कोई असर नहीं पड़ता पर जब उसी बात को कोई विदेशी कहता है तो वो बात जैसे साक्षात् भगवान् के मुख से निकली है !
    तो यही हाल संस्कृत के विषय में है ! अब में यहाँ पे या कोई और शास्त्री गाओ गाओ सहर सहर घूम कर भी इसका प्रचार प्रसार करे तो कुछ नहीं होगा !
    पर जब अमेरिका या इंग्लेंड वाले ये बात बोलेंगे तो ये हमारे लिए भगवान् की वाणी हो जाएगी !

    तो इस पुरे वर्तन्त का आशय ये है के अब हमे प्राथमिकता देनी है हिंदी को और दूसरी भाषा के तौर पे जहा तक हो सके कोसिस करनी है संस्कृत की (अंग्रेजी की जगह ) ...........!
    धन्यवाद !
    [Only Registered and Activated Users Can See Links. Click Here To Register...]
    :right: [Only Registered and Activated Users Can See Links. Click Here To Register...]

  6. #26
    कांस्य सदस्य umabua's Avatar
    Join Date
    Mar 2012
    Location
    लखनऊ
    प्रविष्टियाँ
    9,780
    Rep Power
    50

    Re: संस्कृत भाषा - एक बुझता दिया !

    मित्र नमस्कार.
    गंभीर विषय पर सूत्र स्थापित करने का जो साहस आपने किया है उसके लिए आपको कोटि कोटि धन्यवाद.

    मित्र, मनुष्य को अपने विचारों को एक दूसरे से आदान प्रदान करने के लिए जिस माध्यम की आवश्यकता होती है वह है भाषा (लिपि)और बोली (उच्चारण). लिपिऔर उच्चारण जितने
    सरल और सहज होंगे वैचारिक आदान प्रदान भी उतना ही सहज और सुगम होगा. जिस समय हमारे यहाँ संस्कृत भाषा में ग्रन्थ लिखे गए उस समय सामान्य तौर पर इसी भाषा के उच्चारण भी किये जाते थे. आज हमें जो क्लिष्ट और दुरूह प्रतीत होती है वही उस समय सहज और सरलता से ग्राह्य थी. मित्र, आज हम जिस परिवेश में जी रहे हैं वहाँ शुद्ध हिन्दी भाषा भी लिख पाना कठिन हो रहा है. आज हमारी दिनचर्या में जिस भाषा और जिस बोली का समावेश हो चुका है वह कई भाषाओं से मिली हुयी एक अनोखी भाषा व् बोली है. यही भाषा और बोली हमें आज अत्यंत सहज और सुगम प्रतीत हो रही है. जिस तरह हम हिन्दी भाषी लोगों को किसी अंग्रेज बच्चे को अंगरेजी बोलते देख कर आश्चर्य नहीं होता उसी प्रकार यदि हमारे बच्चे ऐसी ही बोली भाषा को अपना रहे हैं तो हमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए.
    संस्कृत भाषा आज मात्र ज्ञानार्जन का विषय बन चुकी है क्योंकि हमें यह ज्ञात हो चुका है कि आज के परिवेश में इस भाषा को अपनाने से प्रचुर धनार्जन नहीं किया जा सकता .. और यही तो मानवमात्र की आधुनिक विचारधारा है. निष्कर्ष यह कि संस्कृत भाषा आधुनिक विचारधारा के विपरीत है अतः यह कुंठित, तिरस्कृत और त्यक्त है.
    धन्यवाद.
    मनुष्य मृत्यु पूर्व तक कुछ न कुछ नवीन सीख सकता है यदि उसमे सीखने की ललक बनी रहे
    अपने लिए जिए तो क्या जिए..जिएँ तो जिएँ, किसी के लिए
    चित्रों के पुनर्प्रविष्ट होने पर कृपया शिकायत बटन दबाकर मूल चित्र की कड़ी अवश्य भेजें. सभी चित्र इन्टरनेट से लिए गए हैं और इनपर मेरा कोई अधिकार नहीं है.

  7. #27
    सदस्य Manavji's Avatar
    Join Date
    May 2012
    Location
    देव भूमि
    आयु
    29
    प्रविष्टियाँ
    462
    Rep Power
    5

    Re: संस्कृत भाषा - एक बुझता दिया !

    नियामक जी आपका इस सूत्र पर आने और संस्कृत भाषा पर विचार रखने के लिए तहेदिल से धन्यवाद !
    Quote Originally Posted by umabua View Post
    मित्र नमस्कार.
    गंभीर विषय पर सूत्र स्थापित करने का जो साहस आपने किया है उसके लिए आपको कोटि कोटि धन्यवाद.

    मित्र, मनुष्य को अपने विचारों को एक दूसरे से आदान प्रदान करने के लिए जिस माध्यम की आवश्यकता होती है वह है भाषा (लिपि)और बोली (उच्चारण). लिपिऔर उच्चारण जितने
    सरल और सहज होंगे वैचारिक आदान प्रदान भी उतना ही सहज और सुगम होगा. जिस समय हमारे यहाँ संस्कृत भाषा में ग्रन्थ लिखे गए उस समय सामान्य तौर पर इसी भाषा के उच्चारण भी किये जाते थे. आज हमें जो क्लिष्ट और दुरूह प्रतीत होती है वही उस समय सहज और सरलता से ग्राह्य थी. मित्र, आज हम जिस परिवेश में जी रहे हैं वहाँ शुद्ध हिन्दी भाषा भी लिख पाना कठिन हो रहा है. आज हमारी दिनचर्या में जिस भाषा और जिस बोली का समावेश हो चुका है वह कई भाषाओं से मिली हुयी एक अनोखी भाषा व् बोली है. यही भाषा और बोली हमें आज अत्यंत सहज और सुगम प्रतीत हो रही है. जिस तरह हम हिन्दी भाषी लोगों को किसी अंग्रेज बच्चे को अंगरेजी बोलते देख कर आश्चर्य नहीं होता उसी प्रकार यदि हमारे बच्चे ऐसी ही बोली भाषा को अपना रहे हैं तो हमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए.
    संस्कृत भाषा आज मात्र ज्ञानार्जन का विषय बन चुकी है क्योंकि हमें यह ज्ञात हो चुका है कि आज के परिवेश में इस भाषा को अपनाने से प्रचुर धनार्जन नहीं किया जा सकता .. और यही तो मानवमात्र की आधुनिक विचारधारा है. निष्कर्ष यह कि संस्कृत भाषा आधुनिक विचारधारा के विपरीत है अतः यह कुंठित, तिरस्कृत और त्यक्त है.
    धन्यवाद.
    [Only Registered and Activated Users Can See Links. Click Here To Register...]
    :right: [Only Registered and Activated Users Can See Links. Click Here To Register...]

  8. #28
    सदस्य Manavji's Avatar
    Join Date
    May 2012
    Location
    देव भूमि
    आयु
    29
    प्रविष्टियाँ
    462
    Rep Power
    5

    Re: संस्कृत भाषा - एक बुझता दिया !

    दुनिया की पहली पुस्तक की भाषा होने के कारण संस्कृत भाषा को विश्व की प्रथम भाषा मानने में कहीं कोई संशय की गुंजाइश नहीं हैं।इसके सुस्पष्ट व्याकरण और वर्णमाला की वैज्ञानिकता के कारण सर्वश्रेष्ठता भी स्वयं सिध्द है।
    सर्वाधिक महत्वपूर्ण साहित्य की धनी हाने से इसकी महत्ता भी निर्विवाद है। इतना सब होने के बाद भी बहुत कम लोग ही जानते है कि संस्कृत भाषा अन्य भाषाओ की तरह केवल अभिव्यक्ति का साधन मात्र ही नहीं है; अपितु वह मनुष्य के सर्वाधिक संपूर्ण विकास की कुंजी भी है। इस रहस्य को जानने वाले मनीषियों ने प्राचीन काल से ही संस्कृत को देव भाषा और अम्रतवाणी के नाम से परिभाषित किया है। संस्कृत केवल स्वविकसित भाषा नहीं वल्कि संस्कारित भाषा है इसीलिए इसका नाम संस्कृत है। संस्कृत को संस्कारित करने वाले भी कोई साधारण भाषाविद् नहीं वल्कि महर्षि पाणिनि; महर्षि कात्यायिनि और योग शास्त्र के प्रणेता महर्षि पतंजलि हैं। इन तीनों महर्षियों ने बड़ी ही कुशलता से योग की क्रियाओं को भाषा में समाविष्ट किया है। यही इस भाषा का रहस्य है । जिस प्रकार साधारण पकी हुई दाल को शुध्द घी में जीरा; मैथी; लहसुन; और हींग का तड़का लगाया जाता है;तो उसे संस्कारित दाल कहते हैं। घी ; जीरा; लहसुन, मैथी ; हींग आदि सभी महत्वपूर्ण औषधियाँ हैं। ये शरीर के तमाम विकारों को दूर करके पाचन संस्थान को दुरुस्त करती है।दाल खाने वाले व्यक्ति को यह पता ही नहीं चलता कि वह कोई कटु औषधि भी खा रहा है; और अनायास ही आनन्द के साथ दाल खाते-खाते इन औषधियों का लाभ ले लेता है।
    [Only Registered and Activated Users Can See Links. Click Here To Register...]
    :right: [Only Registered and Activated Users Can See Links. Click Here To Register...]

  9. #29
    सदस्य Manavji's Avatar
    Join Date
    May 2012
    Location
    देव भूमि
    आयु
    29
    प्रविष्टियाँ
    462
    Rep Power
    5

    Re: संस्कृत भाषा - एक बुझता दिया !

    ठीक यही बात संस्कारित भाषा संस्कृत के साथ सटीक बैठती है।जो भेद साधारण दाल और संस्कारित दाल में होता है ;वैसा ही भेद अन्य भाषाओं और संस्कृत भाषा के बीच है।संस्कृत भाषा में वे औषधीय तत्व क्या है ? यह जानने के लिए विश्व की तमाम भाषाओं से संस्कृत भाषा का तुलनात्मक अध्ययन करने से स्पष्ट हो जाता है।
    संस्कृत में निम्नलिखित चार विशेषताएँ हैं जो उसे अन्य सभी भाषाओं से उत्कृष्ट और विशिष्ट बनाती हैं।
    १ अनुस्वार (अं ) और विसर्ग(अ:)
    सेस्कृत भाषा की सबसे महत्वपूर्ण और लाभ दायक व्यवस्था है, अनुस्वार और विसर्ग। पुल्लिंग के अधिकांश शब्द विसर्गान्त होते हैं —
    यथा- राम: बालक: हरि: भानु: आदि।
    और
    नपुंसक लिंग के अधिकांश शब्द अनुस्वारान्त होते हैं—
    यथा- जलं वनं फलं पुष्पं आदि।
    [Only Registered and Activated Users Can See Links. Click Here To Register...]
    :right: [Only Registered and Activated Users Can See Links. Click Here To Register...]

  10. #30
    सदस्य Manavji's Avatar
    Join Date
    May 2012
    Location
    देव भूमि
    आयु
    29
    प्रविष्टियाँ
    462
    Rep Power
    5

    Re: संस्कृत भाषा - एक बुझता दिया !

    अब जरा ध्यान से देखें तो पता चलेगा कि विसर्ग का उच्चारण और कपालभाति प्राणायाम दोनों में श्वास को बाहर फेंका जाता है। अर्थात् जितनी बार विसर्ग का उच्चारण करेंगे उतनी बार कपालभाति प्रणायाम अनायास ही हो जाता है। जो लाभ कपालभाति प्रणायाम से होते हैं, वे केवल संस्कृत के विसर्ग उच्चारण से प्राप्त हो जाते हैं।
    उसी प्रकार अनुस्वार का उच्चारण और भ्रामरी प्राणायाम एक ही क्रिया है । भ्रामरी प्राणायाम में श्वास को नासिका के द्वारा छोड़ते हुए भौंरे की तरह गुंजन करना होता है, और अनुस्वार के उच्चारण में भी यही क्रिया होती है। अत: जितनी बार अनुस्वार का उच्चारण होगा , उतनी बार भ्रामरी प्राणायाम स्वत: हो जावेगा।

    कपालभाति और भ्रामरी प्राणायामों से क्या लाभ है? यह बताने की आवश्यकता नहीं है; क्योंकि स्वामी रामदेव जी जैसे संतों ने सिद्ध करके सभी को बता दिया है। मैं तो
    केवल यह बताना चाहता हूँ कि संस्कृत बोलने मात्र से उक्त प्राणायाम अपने आप होते रहते हैं।
    जैसे हिन्दी का एक वाक्य लें- '' राम फल खाता है``

    इसको संस्कृत में बोला जायेगा- '' राम: फलं खादति"
    राम फल खाता है ,यह कहने से काम तो चल जायेगा ,किन्तु राम: फलं खादति कहने से अनुस्वार और विसर्ग रूपी दो प्राणायाम हो रहे हैं। यही संस्कृत भाषा का रहस्य है।
    संस्कृत भाषा में एक भी वाक्य ऐसा नहीं होता जिसमें अनुस्वार और विसर्ग न हों। अत: कहा जा सकता है कि संस्कृत बोलना अर्थात् चलते फिरते योग साधना करना।
    [Only Registered and Activated Users Can See Links. Click Here To Register...]
    :right: [Only Registered and Activated Users Can See Links. Click Here To Register...]

Page 3 of 8 प्रथमप्रथम 12345 ... LastLast

Thread Information

Users Browsing this Thread

There are currently 1 users browsing this thread. (0 members and 1 guests)

Similar Threads

  1. बूझो तो जाने (पहेलियाँ)
    By Black Pearl in forum आओ समय बिताएँ
    Replies: 413
    अन्तिम प्रविष्टि: 20-10-2012, 11:43 PM
  2. Replies: 150
    अन्तिम प्रविष्टि: 31-12-2011, 06:47 PM
  3. चित्र की views केसे जाने
    By Chandrshekhar in forum मुझे कुछ कहना है
    Replies: 124
    अन्तिम प्रविष्टि: 29-12-2011, 04:40 PM
  4. आइये हिप्नोटिजम के बारे में जाने !!!
    By "Hamsafar+" in forum साहित्य एवम् ज्ञान की बातें
    Replies: 23
    अन्तिम प्रविष्टि: 08-12-2011, 04:02 PM
  5. कंप्यूटर के कांफिग्रेसन जाने
    By Nisha.Patel in forum टिप्स तथा ट्रिक्स
    Replies: 9
    अन्तिम प्रविष्टि: 18-06-2011, 04:06 AM

Tags for this Thread

Bookmarks

Posting Permissions

  • You may not post new threads
  • You may not post replies
  • You may not post attachments
  • You may not edit your posts
  •