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Thread: दो जिस्म एक जान

  1. #51
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    जुड़वाँ आत्मा सम्बन्ध (Twin Flame Relationship) का विषय बहुत बड़ा है। जैसे- जुड़वाँ आत्मा सम्बन्ध में पुरूष को दिव्य पुरूष (DM: Divine Masculine) और स्त्री को दिव्य स्त्री (DF: Divine Feminine) कहते हैं। जुड़वाँ आत्मा सम्बन्ध में एक बहुत बड़ा पेंच यह भी है कि डी०एम० और डी०एफ० एक ही आत्मा का अंश होने के कारण बड़ी तेज़ी से एक-दूसरे की ओर आकृष्ट होने के बावजूद एक समय ऐसा आता है जब कोई एक, जिसकी आत्मा जाग्रत नहीं है; दूसरे से दूर भागने लगता है। इस प्रकार भागने वाले को धावक (Runner) कहते हैं। इन परिस्थितियों में दूसरा, जिसकी आत्मा जाग्रत है; उसका पीछा करने लगता है। इस प्रकार पीछा करने वाले को अनुधावक (Chaser) कहते हैं। इसमें मज़ेदार बात यह भी है कि जुड़वाँ आत्मा सम्बन्ध में युगल एक-दूसरे से लड़ते भी बहुत हैं। इसके अतिरिक्त जुड़वाँ आत्मा सम्बन्ध में और भी कई बातें हैं। जैसे- अपनी जुड़वाँ आत्मा को कैसे पहचाने? क्या होता है जब आप अपनी जुड़वाँ आत्मा से मिलते हैं? इत्यादि। यह तो केवल जुड़वाँ आत्मा सम्बन्ध से जुड़ी की बातें हैं। आत्मा के दिखाई न देने वाले पाँच शरीर और होने के कारण आत्मा का विषय अत्यन्त व्यापक बन जाता है। मृत्योपरान्त आत्मा अपने सूक्ष्म और कारण शरीर के साथ ही विचरण करती है। आत्मा का सूक्ष्म शरीर बिल्कुल स्थूल शरीर की तरह ही दिखता है। मज़ेदार बात यह है कि आत्मालोक के नियमानुसार किसी आत्मा को मनुष्यों को डराना या उनके सामने प्रकट होना प्रतिबन्धित है। यदि कोई आत्मा इस नियम को तोड़ती है तो उसे दण्डित भी किया जाता है।

  2. #52
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    सन्दर्भवश यहाँ पर एक मज़ेदार बात भी बताते चलें। जब हम सो जाते हैं तो आत्मा अपने सूक्ष्म शरीर के साथ स्थूल शरीर से बाहर निकलकर विचरण करने लगती है। इस विचरण के दौरान आत्मा जो कुछ देखती या करती है, वही कभी-कभी हमें सपने के रूप में दिखाई पड़ता है। आत्मा के इस प्रकार विचरण करने को सूक्ष्म शरीर विचरण (Astral Travel) कहते हैं। सूक्ष्म शरीर विचरण एक साधना भी है, जिसे सीखने के बाद हम जब चाहें अपने शरीर से बाहर निकलकर सूक्ष्म शरीर के साथ विचरण कर सकते हैं। संक्षेप में आत्मा एक ऊर्जा है और विज्ञान के नियमानुसार ऊर्जा कभी नष्ट नहीं होती, केवल उसका स्वरूप बदल जाता है। इसीलिए श्रीमद्भगवद्गीता में श्रीकृष्ण अर्जुन को उपदेश देते हुए कहते हैं कि- 'नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः। न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः'।।2.23।। अर्थात् 'इस आत्मा को शस्त्र काट नहीं सकते और न अग्नि इसे जला सकती है। जल इसे गीला नहीं कर सकता और वायु इसे सुखा नहीं सकती।', किन्तु कल रात हमने एक विचित्र सपना देखा, जिसे देखने के बाद हमें बड़ा दुःख हुआ कि आत्मा के सम्बन्ध में एक महत्वपूर्ण बात कैसे छूट गई? वह यह कि- 'आत्मा न तो मोटी होती है, न दुबली होती है। आत्मा न तो नाटी होती है, न लम्बी होती है। आत्मा न तो गोरी होती है, न काली होती है।' हुआ यह कि कल रात सपने में हम यानि हमारी आत्मा दो हज़ार किलोमीटर का सफ़र तय करके शहर में ढ़ाई लाख आशिकों वाली गर्लफ्रेंड से यानि उसकी आत्मा से मुलाकात करने उसके घर पहुँच गई। शहर में ढ़ाई लाख आशिकों वाली गर्लफ्रेंड जो मोटी है, उसकी आत्मा एकदम दुबली-पतली दिखाई दे रही थी और कुर्ता-पायजामा पहने हुए थी। हमारी आत्मा ने शहर में ढ़ाई लाख आशिकों वाली गर्लफ्रेंड की आत्मा के सामने बैठते हुए अपना पर्स, कुछ काग़ज़ और उसके साथ कुछ नोट निकालकर मेज़ पर रख दिया। उसने खिड़की की ओर इशारा करते हुए हम से कहा कि 'देखो, यहाँ से सड़क दिखाई दे रही है।' उसी समय धोबी यानि धोबी की आत्मा आ गई। उसको देने के लिए शहर में ढ़ाई लाख आशिकों वाली गर्लफ्रेंड के पास नगद नहीं था। उसने बिना हमसे पूछे मेज पर पड़े हमारे रूपयों से एक दो सौ का नया नोट उठाकर धोबी को दे दिया और हमारे हाथ में अपना बैंक का डेबिट कार्ड थमा दिया। वैसे तो उस समय हमारे बीच कोई बातचीत नहीं हुई, किन्तु ऐसा लगा जैसे वह कह रही हो कि डेबिट कार्ड से अपने पैसे निकाल लेना। उसके बाद वह किसी काम से चली गई और हम डेबिट कार्ड लेकर एटीएम० पहुँच गए। एटीएम० में डेबिट कार्ड डालते ही हमें याद आया कि शहर में ढ़ाई लाख आशिकों वाली गर्लफ्रेंड ने डेबिट कार्ड का पिन तो बताया ही नहीं था। बस घबराहट में हमारा सपना टूट गया और हम उठकर बैठ गए। इस प्रकार सपने में हमारा दो सौ रूपया शहर में ढ़ाई लाख आशिकों वाली गर्लफ्रेंड के पास फँस गया। इसलिए हमने प्लान बनाया है कि आज रात सपने में शहर में ढ़ाई लाख आशिकों वाली गर्लफ्रेंड से मुलाकात करके उसका डेबिट कार्ड वापस करके अपना दो सौ रूपया वापस ले लेंगे। शहर में ढ़ाई लाख आशिकों वाली गर्लफ्रेंड से अनुरोध है कि वापस करने के लिए सपने में दो सौ रूपया नगद तैयार रखें। पहली बार सपने में आई और आते ही दो सौ रूपया झटक लिया- यह बहुत बुरी बात है। इस सपने का सारांश यह है कि मोटी दिखने वाली शहर में ढ़ाई लाख आशिकों वाली गर्लफ्रेंड सपने में दुबली-पतली दिखाई दे रही थी।

  3. #53
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    अमेरिकन लेखक डॉ० ब्राइन वीस की परिकल्पना में आत्मा के विभाजन की बात कही गई है और हमने भी इसे माना है। मज़ेदार बात यह है कि उस समय डॉ० ब्राइन वीस की परिकल्पना हमारे संज्ञान में थी ही नहीं। हमारी अवधारणा डॉ० ब्राइन वीस की परिकल्पना का विस्तृत स्वरूप है जिसमें हमने एल०जी०बी०टी० के रहस्यों से भी पर्दा उठाया है जिसके उपरान्त पाठकों को यह बात भी बड़ी अच्छी तरह से समझ में आ गई होगी कि वस्तुतः गे और लेस्बियन विषमलिंगी (Straight) ही होते हैं। हमने जुड़वाँ आत्मा सम्बन्ध के उन बातों का उल्लेख नहीं किया है जिनका उल्लेख डॉ० ब्राइन वीस ने पहले से कर दिया है। अब पाठकगण इस बात को भली-भाँति समझ गए होंगे कि हिन्दी व्याकरण के अनुसार 'दो जिस्म एक जान' एक मुहावरा हो ही नहीं सकता, क्योंकि 'दो जिस्म एक जान' होने की बात एकदम सत्य है! (समाप्त)

  4. #54
    कांस्य सदस्य superidiotonline's Avatar
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    वैसे तो यह लेख समाप्त हो चुका है, किन्तु पाठकों के मन में यह उत्सुकता ज़रूर बनी होगी कि सपने में दो सौ रूपयों की वसूली हुई या नहीं? मज़ेदार बात यह है कि पाठकों के साथ-साथ शहर में ढ़ाई लाख आशिक़ों वाली गर्लफ्रेंड भी यह जानने के लिए बहुत उत्सुक है कि सपने में हम उससे दो सौ रूपयों की वसूली कर पाए या नहीं? अतः शीघ्र ही इस विषय में इस सूत्र को अपटेड किया जाएगा।

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